अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोरोना से बचाव के लिए इस्तेमाल हो रहे जॉनसन ऐंड जॉनसन की वैक्सीन पर रोक लगाने की सिफ़ारिश की है.
उसकी यह मांग इस वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद ख़ून के थक्के जमने के दुर्लभ मामले सामने आने के बाद की गई है.
अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) के अनुसार सावधानी को ध्यान में रखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है.
एफडीए के अनुसार, वैक्सीन की 68 लाख से अधिक ख़ुराकों में ख़ून के थक्के जमने के छह दुर्लभ मामलों का पता चला है. संस्था ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के उपयोग से ख़ून के थक्के जमने के मामले की भी पड़ताल की और उसके उपयोग पर कुछ अंकुश लगाया है.
ट्विटर पर किए अपने कई ट्वीट में एफडीए ने कहा कि उसने और रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने ख़ून में थक्के जमने के छह मामलों की समीक्षा में पाया कि वैक्सीन लेने के बाद हुई ये समस्या बहुत दुर्लभ हैं.
एफडीए ने कहा, "सतर्कता को ध्यान में रखते हुए हम इस वैक्सीन के उपयोग को रोकने की सलाह दे रहे हैं. इस फ़ैसले का मक़सद स्वास्थ्य की देखभाल करने वालों को ऐसी प्रतिकूल घटनाओं के घातक असर को बताना है.''
एफडीए और सीडीसी के एक संयुक्त बयान में बताया गया है कि ख़ून के थक्के जमने की घटना असल में सेरिब्रल वेनस साइनस थ्रोम्बोसिस (सीवीएसटी) है. इसमें यह भी बताया गया कि ऐसे मामलों को सामान्य से अलग उपचार की ज़रूरत होती है.
बयान के अनुसार, ऐसे मामलों में सामान्यत: थक्के दूर करने वाली दवा 'हेपरिन' का सेवन करना ख़तरनाक हो सकता है. इसलिए इसके वैकल्पिक इलाज़ की ज़रूरत है.
ख़ून के थक्के जमने के सभी छह मामले 18 से 48 साल की महिलाओं में पाए गए जो वैक्सीन लेने के छह से 13 दिनों बाद लक्षणों के साथ देखे गए. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि नेब्रास्का में इससे एक महिला की मौत हो गई. वहीं दूसरी की हालत गंभीर है.
एफडीए और सीडीसी के बयान में कहा गया, "जिन लोगों को जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन लगाई गई, उन्हें टीकाकरण के तीन सप्ताह के भीतर यदि गंभीर सिरदर्द, पेट दर्द, पैर में दर्द या सांस की तकलीफ हो तो उन्हें तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.''
इसके बाद जॉनसन एंड जॉनसन ने एक बयान में कहा कि लोगों की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है इसलिए उसने स्वास्थ्य अधिकारियों को सभी प्रतिकूल घटनाओं के बारे में बताया है.
कंपनी ने कहा, "हम जानते हैं कि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सहित थ्रोम्बोएम्बोलिक की घटनाएं कोविड-19 वैक्सीन लेने के बाद पाए गए हैं. अभी तक हमारी वैक्सीन और इन दुर्लभ घटनाओं के बीच कोई साफ संबंध कायम नहीं किया जा सका है."
कंपनी ने यह भी कहा है कि रेगुलेटरों के साथ मिलकर वह काम करता रहेगा.
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लेने के बाद भी कुछ ऐसे बेहद दुर्लभ मामले पाए गए हैं.
ऐसी रिपोर्ट मिलने के बाद कई देशों ने इसके उपयोग को रोक दिया लेकिन कुछ शर्तों के साथ अब यह फिर से शुरू हो गया है. जैसे कि जर्मनी में 60 साल और उससे बड़ों को ही इस कंपनी के वैक्सीन दिए जा रहे हैं.
वहीं ब्रिटेन में अधिकारियों ने सलाह दी है कि 30 साल से छोटे लोगों को किसी दूसरी वैक्सीन का विकल्प भी देना चाहिए.