महाराष्ट्र: बुधवार रात आठ बजे से पूरे राज्य में लागू होगी धारा 144 –आज की बड़ी ख़बरें

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि बुधवार रात आठ बजे से राज्य में कड़ी पाबंदियां लागू की जाएंगी.

लाइव कवरेज

  1. म्यांमार में सीरिया जैसी स्थिति बन सकती हैः संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था

    म्यांमार

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    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था की प्रमुख मिचेल बैचेलेटन ने कहा कि म्यांमार में जो हालात हैं, वहां सीरिया जैसी स्थिति बन सकती है.

    उन्होंने कहा कि पहले की भयानक गलतियों की वजह से सीरिया और दूसरी जगहों पर जिस तरह के हालात बने हैं, उसे दोहराया नहीं जाना चाहिए.

    म्यांमार में सैनिक शासन के विरोध में बहुत सारे लोगों ने पारंपरिक नये साल की छुट्टी से मना कर दिया. इसे वहां थिंगयान के नाम से जाना जाता है. म्यांमार में कई जगहो पर विरोध प्रदर्शन भी हुए.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, महाराष्ट्र: बुधवार रात आठ बजे से पूरे राज्य में लागू होगी धारा 144

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    महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि बुधवार रात आठ बजे से राज्य में कड़ी पाबंदियां लागू की जाएंगी.

    उन्होंने कहा कि कल से पूरे राज्य में धारा 144 लागू की जा रही है.

    हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "मैं इसे लॉकडाउन नहीं कहूंगा."

    साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा है कि अनिवार्य सेवाओं के लिए लोकल ट्रेन और बस सेवाएं जारी रखी जाएंगी. पेट्रोल पंप खुले रहेंगे और स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया से जुड़ी वित्तीय संस्थाएं खुल रहेंगी. निर्माण गतिविधियां जारी रहेंगी. होटल और रेस्तरां बंद रहेंगे लेकिन होम डिलेवरी और टेक अवे को इजाजत रहेगी.

    सभी पूजा स्थल, स्कूल और कॉलेज, प्राइवेट कोचिंग क्लास, सैलून, स्पा और ब्यूटी पार्लर एक मई, सुबह सात बजे तक बंद रहेंगे.

    सिनेमा हॉल, थिएटर, ऑडिटोरियम, एम्यूजमेंट पार्क, जिम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बंद रहेंगी. फिल्मों, विज्ञापनों और टेलीविजन की शूटिंग बंद रहेगी.

    सभी दुकानें, शॉपिंग सेंटर, गैर अनिवार्य सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठान 14 अप्रैल रात आठ बजे से एक मई, सुबह सात बजे तक बंद रहेंगे.

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  3. कोरोना के बढ़ते मामलों पर अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा?

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    दिल्ली में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 13500 मामले सामने आए हैं.

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह जानकारी दी है.

    उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं इसलिए सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

    केजरीवाल ने केंद्र सरकार से सीबीएसई परीक्षाएं रद्द करने की भी अपील की है.

    उन्होंने कहा कि इस बार की लहर में युवा और बच्चे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

  4. रूस के ख़िलाफ़ कदम उठाए नेटो: यूक्रेन

    यूक्रेन के विदेश मंत्री डिमेट्रो कुलेबा

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    इमेज कैप्शन, यूक्रेन के विदेश मंत्री डिमेट्रो कुलेबा

    यूक्रेन की सीमा के पास रूस के सेना के जमावड़े के मद्देनज़र यूक्रेन के विदेश मंत्री डिमेट्रो कुलेबा ने नेटो से कहा है कि वो रूस के खिलाफ़ तेज़ क़दम उठाए.

    नेटो के सेक्रेटरी जनरल के साथ ब्रसेल्स में हुई बातचीत के बाद कुल्लेबा ने कहा कि यूक्रेन की रक्षा को मज़बूत करने में उतना खर्च नहीं आएगा जितना कि युद्ध को रोकने में और उससे उपजे हालात से निबटने में.

    उन्होंने कहा कि रूस को समझने की ज़रूरत है कि यूक्रेन कभी उसका हिस्सा नहीं होगा.

    स्टोलटेनबर्ग में रूस के फौज के यूक्रेन सीमा पर जमा होने को अन्यायपूर्ण बताया, और कहा कि इसका कोई तर्क नहीं और ये चिंता का विषय है.

    रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावरोव ने नेटो द्वारा यूक्रेन मामले को बारूद के ढेर के इस्तेमाल का आरोप लगाया है.

    अमेरिका के रक्षा मंत्री ने इस मामले को जर्मनी के दौरे के बीच उठाया था.

  5. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आइसोलेशन में

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    कोरोना संक्रमित व्यक्ति से संपर्क में आने के कारण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सेल्फ़ आइसोलेशन में चले गए हैं.

    उन्होंने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए बताया, "मेरे कार्यालय के कुछ अधिकारी कोरोना से संक्रमित हुए हैं. यह अधिकारी मेरे संपर्क में रहे हैं, अतः मैंने एहतियातन अपने को आइसोलेट कर लिया है एवं सभी कार्य वर्चुअली प्रारम्भ कर रहा हूं."

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, अमेरिका: एफडीए ने जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन पर रोक लगाने की सिफ़ारिश की

    जॉनसन एंड जॉनसन

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    अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोरोना से बचाव के लिए इस्तेमाल हो रहे जॉनसन ऐंड जॉनसन की वैक्सीन पर रोक लगाने की सिफ़ारिश की है.

    उसकी यह मांग इस वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद ख़ून के थक्के जमने के दुर्लभ मामले सामने आने के बाद की गई है. अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) के अनुसार सावधानी को ध्यान में रखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है.

    एफडीए के अनुसार, वैक्सीन की 68 लाख से अधिक ख़ुराकों में ख़ून के थक्के जमने के छह दुर्लभ मामलों का पता चला है. संस्था ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के उपयोग से ख़ून के थक्के जमने के मामले की भी पड़ताल की और उसके उपयोग पर कुछ अंकुश लगाया है.

    ट्विटर पर किए अपने कई ट्वीट में एफडीए ने कहा कि उसने और रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने ख़ून में थक्के जमने के छह मामलों की समीक्षा में पाया कि वैक्सीन लेने के बाद हुई ये समस्या बहुत दुर्लभ हैं.

    एफडीए ने कहा, "सतर्कता को ध्यान में रखते हुए हम इस वैक्सीन के उपयोग को रोकने की सलाह दे रहे हैं. इस फ़ैसले का मक़सद स्वास्थ्य की देखभाल करने वालों को ऐसी प्रतिकूल घटनाओं के घातक असर को बताना है.''

    एफडीए और सीडीसी के एक संयुक्त बयान में बताया गया है कि ख़ून के थक्के जमने की घटना असल में सेरिब्रल वेनस साइनस थ्रोम्बोसिस (सीवीएसटी) है. इसमें यह भी बताया गया कि ऐसे मामलों को सामान्य से अलग उपचार की ज़रूरत होती है.

    बयान के अनुसार, ऐसे मामलों में सामान्यत: थक्के दूर करने वाली दवा 'हेपरिन' का सेवन करना ख़तरनाक हो सकता है. इसलिए इसके वैकल्पिक इलाज़ की ज़रूरत है.

    ख़ून के थक्के जमने के सभी छह मामले 18 से 48 साल की महिलाओं में पाए गए जो वैक्सीन लेने के छह से 13 दिनों बाद लक्षणों के साथ देखे गए. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि नेब्रास्का में इससे एक महिला की मौत हो गई. वहीं दूसरी की हालत गंभीर है.

    वैक्सीन

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    जॉनसन एंड जॉनसन का बयान

    एफडीए और सीडीसी के बयान में कहा गया, "जिन लोगों को जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन लगाई गई, उन्हें टीकाकरण के तीन सप्ताह के भीतर यदि गंभीर सिरदर्द, पेट दर्द, पैर में दर्द या सांस की तकलीफ हो तो उन्हें तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.''

    इसके बाद जॉनसन एंड जॉनसन ने एक बयान में कहा कि लोगों की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है इसलिए उसने स्वास्थ्य अधिकारियों को सभी प्रतिकूल घटनाओं के बारे में बताया है.

    कंपनी ने कहा, "हम जानते हैं कि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सहित थ्रोम्बोएम्बोलिक की घटनाएं कोविड-19 वैक्सीन लेने के बाद पाए गए हैं. अभी तक हमारी वैक्सीन और इन दुर्लभ घटनाओं के बीच कोई साफ संबंध कायम नहीं किया जा सका है."

    कंपनी ने यह भी कहा है कि रेगुलेटरों के साथ मिलकर वह काम करता रहेगा.

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    एस्ट्राजेनेका वैक्सीन

    ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लेने के बाद भी कुछ ऐसे बेहद दुर्लभ मामले पाए गए हैं.

    ऐसी रिपोर्ट मिलने के बाद कई देशों ने इसके उपयोग को रोक दिया लेकिन कुछ शर्तों के साथ अब यह फिर से शुरू हो गया है. जैसे कि जर्मनी में 60 साल और उससे बड़ों को ही इस कंपनी के वैक्सीन दिए जा रहे हैं.

    वहीं ब्रिटेन में अधिकारियों ने सलाह दी है कि 30 साल से छोटे लोगों को किसी दूसरी वैक्सीन का विकल्प भी देना चाहिए.

  7. आज का कार्टून: पाप मुक्त कोरोना

    आज का कार्टून

    कुम्भ मेले में भीड़ पर आज का कार्टून.

  8. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 13 अप्रैल 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ.

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  9. भारत में कोरोना की दूसरी लहर से जुड़े हर सवाल के जवाब, जो जानना ज़रूरी हैं

    कोरोना

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    "एक था कोरोना 2020 वाला.

    एक है कोरोना 2021 वाला.

    दोनों में कई बुनियादी फ़र्क़ है. पहले के मुक़ाबले फैल ज़्यादा रहा है, लेकिन कम घातक है. बच्चों और नौजवानों को अपनी ज़द में ज़्यादा ले रहा है. बुख़ार ज़्यादा दिन तक रह रहा है."

    बढ़ते कोरोना मामलों को लेकर पड़ोस में रहने वाले सैनी साहब ने मुझसे देर शाम नए कोरोना के बारे में ये बातें बताई. फिर तुरंत ही जोड़ दिया, "आप पत्रकार लोग तो रोज़ इस पर लिखते हो, आपको क्या बताना. हैं ना ये बातें सच?"

    मैंने तुंरत जवाब दिया, "डॉक्टरों से बात किए बिना इस पर कुछ नहीं कह सकती."

    "ठीक है. इस मुद्दे पर आपसे कल बात करते हैं." ये कहते हुए वो अपने घर के अंदर चले गए और मैं भी.

    यही कहानी है आज के इस रिपोर्ट के पीछे की वजह. सैनी साहब तो बस एक उदाहरण हैं. ये सवाल कई लोगों के ज़ेहन में है. हमनें इन सवालों को डॉक्टर केके अग्रवाल के सामने रखा.

    डॉक्टर केके अग्रवाल आईएमए के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं. देश के जाने माने कार्डियोलॉजिस्ट हैं और पद्मश्री से सम्मानित हैं.

    बीबीसी से बातचीत में उन्होंने पिछले साल के कोरोना संक्रमण और इस बार के कोरोना संक्रमण के अंतर को विस्तार से समझाया और लोगों के मन में उठ रहे दूसरी लहर से जुड़े अन्य सवालों के जवाब भी दिए. पेश हैं उनके साथ बातचीत के अंश.

  10. बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी के बाद चुनाव आयोग ने भाजपा नेता पर लगाई रोक

    भाजपा नेता राहुल सिन्हा

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    चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता राहुल सिन्हा के प्रचार करने पर 48 घंटे की रोक लगा दी है, वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को भड़काऊ टिप्पणी के आरोप में नोटिस दिया गया है.

    पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान नेताओं के बयानों के बाद चुनाव आयोग अपनी कार्रवाई कर रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब बारी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा की है.

    शीतलकुची में सुरक्षाबलों के गोली चलाने की घटना पर उनकी टिप्पणी से नाराज आयोग ने उन्हें 48 घंटों के लिए चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है.

    इसी घटना पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की टिप्पणी से भी नाराज़ चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी की है. आयोग ने कहा है कि ऐसे बयान राज्य की कानून और व्यवस्था को ख़राब कर सकते हैं.

    राहुल सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि "केंद्रीय बल को चार नहीं आठ लोगों को मारना चाहिए था."

    चुनाव आयोग ने कहा कि उनके ये बयान बहुत ज़्यादा भड़काऊ हैं. ये इंसानों के जीवन का मज़ाक उड़ाते हैं. इसका क़ानून और व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.

    आयोग के अनुसार इन नेताओं के बयान आदर्श आचार संहिता, जन प्रतिनिधित्व क़ानून और भारतीय दंड संहिता के कई प्रावधानों के उल्लंघन करने वाले हैं.

    चुनाव आयोग ने राहुल सिन्हा की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए कहा कि मामले की गंभीरता देखते हुए उन्हें कोई नोटिस दिए बिना उनके प्रचार करने पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया.

    इससे पहले सोमवार को राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी को केंद्रीय बलों के ख़िलाफ़ बयान देने के लिए 24 घंटे तक चुनाव प्रचार करने से उन्हें रोक दिया गया था.

    वहीं, ममता बनर्जी के बारे में सुभेंदु अधिकारी के एक बयान पर चुनाव आयोग ने अधिकारी को चेताते हुए कहा है कि उन्हें ऐसे बयान नहीं देना चाहिए. सोमवार की रात अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा, "आयोग सुभेन्दु अधिकारी को चेतावनी देता है कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान ऐसे बयान को रोकने की सलाह देता है."

  11. कोरोना: भारत में अचानक रेमडेसिविर और वैक्सीन की क़िल्लत कैसे हो गई?

    Corona Virus

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    "मेरा नाम माधुरी है. यहाँ मेडिकल की दुकान पर सुबह छह बजे से लाइन में लगी हुई हूँ. 10 बजे दुकान पर नोटिस लगा कर बोल दिया गया कि यहाँ रेमडेसिविर नहीं है. मेरे ससुर अस्पताल में हैं और डॉक्टर ने कहा है कि रेमडेसिविर लाओ, तभी लग पाएगा. अस्पताल वाले मरीज़ से ही मुझे फ़ोन करा कर पूछ रहे हैं कि दवा मिली या नहीं. मैं क्या करूँ?"

    पुणे की रहने वाली माधुरी के ससुर कोविड सेंटर में भर्ती हैं, जिन्हें रेमडेसिविर की ज़रूरत थी.

    माधुरी की तरह बहुत से लोग महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों में कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर ख़रीदने के लिए लंबी क़तारों में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन इनमें से ज़्यादातर लोगों को ख़ाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है.

    दुनिया भर में कोविड-19 संक्रमण के मामले में सोमवार को भारत ने ब्राज़ील को भी पीछे छोड़ दिया है. बीते 24 घंटों में देश में एक लाख 68 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए हैं और 900 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.

    ऐसे में रेमडेसिविर की बढ़ती क़िल्लत को देखते हुए रविवार को भारत ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी है.

  12. रेमडेसिविर: गुजरात में बीजेपी के इंजेक्शन बांटने पर क्या कहता है क़ानून

    रेमडेसिविर दवा के 5000 इंजेक्शन बीजेपी लोगों को बांट रही है

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    गुजरात के सूरत शहर में बीजेपी कोरोना संक्रमण के इलाज में उपयोगी रेमडेसिविर इंजेक्शन का वितरण कर रही है. पिछले हफ़्ते शुक्रवार को गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष सीआर पाटिल ने कहा था कि बीजेपी सूरत में रेमडेसिविर के पाँच हज़ार इंजेक्शंस बांटेगी.

    गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष ने ये घोषणा ऐसे समय में की जब एक तरफ़ गुजरात में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी को लेकर बवाल मचा हुआ है तो दूसरी ओर गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है.

    ऐसे में बीजेपी की तरफ़ से लोगों को मुफ़्त में कोरोना संक्रमण की दवा का वितरण करने पर कई सवाल खड़े हुए हैं. सबसे बड़ा सवाल है कि बीजेपी के पास ये इंजेक्शन कहां से आए? एक साथ पाँच हज़ार इंजेक्शन का इंतज़ाम करने पर बीजेपी पर दवा की जमाख़ोरी के भी आरोप लग रहे हैं.

    हालांकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि लोगों की सेवा के लिए ये इंजेक्शन बांटे जा रहे हैं और इसका इंतज़ाम पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने संसाधनों से किया है. पार्टी का ये भी कहना है कि अगर ज़रूरत होगी तो बीजेपी आने वाले दिनों में फिर से इस इंजेक्शन का वितरण करेगी.

    इसके अलावा ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि बीजेपी के पास दवा वितरण का परमिट न होने के बावजूद वो दवा वितरण का काम कैसे कर सकती.

  13. व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर प्रतिस्पर्धा आयोग ने दिया दिल्ली हाई कोर्ट में जवाब

    व्हॉट्सऐप  और फेसबुक

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    "व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी से बेहिसाब डेटा जुटाए जाएंगे और ग्राहकों को उनके रुझान के हिसाब से ज़्यादा से ज़्यादा विज्ञापन दिखाकर उन्हें 'तंग किया जाएगा' ताकि और नए ग्राहक बनाए जा सकें और इस तरह से ये अपनी प्रभावशाली स्थिति का कथित तौर बेजा इस्तेमाल है."

    ये बात भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट को मंगलवार को कही.

    मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी की जांच के आदेश देने के फ़ैसले का बचाव कर रहे प्रतिस्पर्धा आयोग की तरफ़ से सीनियर एडवोकेट अमन लेखी ने जस्टिस नवीन चावला की कोर्ट में ये जवाब दाखिल किया.

    अमन लेखी ने कहा, "कॉम्पिटिशन कमीशन प्रतिस्पर्धा के पहलू की जांच कर रहा था न कि किसी व्यक्ति विशेष की प्राइवेसी के कथित उल्लंघन की जिस पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रही है."

    उन्होंने कहा, "ज्यूरिसडिक्शन (क्षेत्राधिकार) की ग़लती का सवाल ही नहीं पैदा होता. प्रतिस्पर्धा आयोग के फ़ैसले को चुनौती देने वाली व्हॉट्सऐप और फ़ेसबुक की याचिका 'अयोग्य और ग़लत बुनियाद' पर आधारित है."

    दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले में व्हॉट्सऐप और फ़ेसबुक की ओर से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी पैरवी कर रही हैं. प्रतिस्पर्धा आयोग ने 24 मार्च को व्हॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी की जांच का आदेश दिया था.

    इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है.

    अमन लेखी ने हाई कोर्ट को बताया कि व्हॉट्सऐप जो डेटा कलेक्ट करती है और उस डेटा को फ़ेसबुक के साथ शेयर करना ग़ैर प्रतिस्पर्धात्मक व्यवहार है या अपनी प्रभावशाली स्थिति का बेजा इस्तेमाल है या नहीं, इसका फ़ैसला केवल जांच के बाद ही हो सकता है.

    उन्होंने दलील दी, "जो डेटा जुटाए जा रहे हैं, उसमें यूजर का लोकेशन, वो किस तरह का डिवाइस इस्तेमाल करता है, किससे इंटरनेट की सेवा लेता है और वो किससे बात कर रहा है, इन सब बातों से उस ग्राहक की पसंद नापसंद का ब्योरा और प्रोफाइल तैयार की जाएगी जिसका सुनिश्चित किस्म के विज्ञापनों के जरिये आर्थिक दोहन किया जाएगा और ये बात ग्राहकों को तंग करने के दायरे में आती है."

    उन्होंने ये भी कहा कि जांच का आदेश केवल एक प्रशासनिक कार्यवाही है और मामले की मौजूदा स्थिति ऐसी नहीं है जिसका कोई क़ानूनी दायित्व बनेगा.

    दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने ये कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट प्राइवेसी पॉलिसी के मामले पर विचार कर रहा है तो प्रतिस्पर्धा आयोग इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए.

  14. कोरोना वैक्सीन: वो बातें जो आपको जाननी चाहिए

    कोरोना वैक्सीन: वो बातें जो आपको जाननी चाहिए

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    कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए दुनिया के कई देशों में टीकाकरण अभियान चल रहा है.

    इससे जुड़ी सूचनाएं और सुझाव कई बार आपको पेचीदा लग सकते हैं, लेकिन कुछ बुनियादी तथ्य हैं जो आपकी यह समझने में मदद करेंगे कि एक वैक्सीन आख़िर काम कैसे करती हैं.

    वैक्सीन क्या है?

    एक वैक्सीन आपके शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है.

    वैक्सीन में किसी जीव के कुछ कमज़ोर या निष्क्रिय अंश होते हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं.

    ये शरीर के 'इम्यून सिस्टम' यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण (आक्रमणकारी वायरस) की पहचान करने के लिए प्रेरित करते हैं और उनके ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं जो बाहरी हमले से लड़ने में हमारे शरीर की मदद करती हैं.

  15. स्वाद और गंध महसूस न होना भी है कोरोना का लक्षण

    स्वाद और गंध महसूस न होना भी है कोरोना का लक्षण

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    कुछ खाने पर स्वाद महसूस न होना और किसी चीज़ की गंध का महसूस न होना भी कोरोना वायरस का लक्षण हो सकता है. ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कोरोना महामारी के दुनियाभर में फैलने के कुछ महीनों बाद ही ये पता लगा लिया था.

    हालांकि मरीज़ों के अनुभवों पर अध्ययन करने वाले यूपोयीन रिसर्चरों का कहना है कि कोरोना वायरस के मामले में गंध का जाना एकदम अलग होता है. सर्दी या फ्लू के मामले में भी कई बार गंध आना बंद हो जाता है, लेकिन ये उससे अलग अनुभव होता है.

    देखा गया है कि कोविड-19 के मरीज़ों में गंध महसूस होना अचानक से और बहुत गंभीर तरीक़े से बंद हो जाता है.

    उनमें आम तौर पर नाक बंद होने, भर जाने या बहती नाक की समस्या नहीं होता है, बल्कि कोरोना वायरस से संक्रमित ज़्यादातर लोग सामान्य तौर पर सांस ले पाते हैं.

    एक और चीज़ जो उन्हें अलग बनाती है, वो है स्वाद आना बिल्कुल बंद हो जाना.

    जर्नलराइनोलॉजीमें रिसर्चरों ने कहा, ऐसा नहीं है कि उनकी स्वाद की क्षमता इसलिए चली जाती है क्योंकि वो कुछ सूंध नहीं पा रहे होते. जिन कोरोना वायरस मरीज़ों को स्वाद आना बंद हो जाता है, वो कड़वे और मीठे के बीच का अंतर नहीं बता पाते.

    विशेषज्ञों को संदेह है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये वायरस उन तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करता है जो सीधे तौर पर गंध और स्वाद महसूस करने में मदद करने से जुड़ी होती हैं.

  16. कोरोना वैक्सीन का एडवर्स इफे़क्ट, क्या आप भी हिचक रहे हैं?

    वैक्सीनेशन

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    एक अप्रैल से देश में कोरोना वायरस टीकाकरण के तीसरे चरण की शुरूआत हो गई. तीसरे चरण में 45 साल से अधिक उम्र वाले वैक्सीन लगवा सकेंगे.

    अगर इस चरण में आप भी वैक्सीन लगवाने की सोच रहे हैं तो मन में कई सवाल होंगे. एक सवाल वैक्सीन लगने के बाद होने वाले रिएक्शन को लेकर डर का भी होगा.

    टीकाकरण के पहले चरणों में कई लोगों ने वैक्सीन लगने के बाद 'एडवर्स इफ़ेक्ट' (प्रतिकूल प्रभाव) की शिकायत की थी. हालांकि कम लोगों में इस तरह के प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिले थे.

    इसलिए ये जानना ज़रूरी है कि आख़िर एडवर्स इफ़ेक्ट फ़ॉलोइंग इम्यूनाइज़ेशन (AEFI) क्या है और यह कितनी सामान्य या असामान्य बात है.

    एडवर्स इफ़ेक्ट फ़ॉलोइंग इम्यूनाइज़ेशन क्या होता है?

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. मनोहर अगनानी ने पहले चरण के दौरान ही टीकाकरण के बाद होने वाले इस तरह के इफे़क्ट के बारे में विस्तार से समझाया था.

    उनके मुताबिक़, "टीका लगने के बाद उस इंसान में किसी भी तरह के अनपेक्षित मेडिकल परेशानियों को एडवर्स इफ़ेक्ट फ़ॉलोइंग इम्यूनाइज़ेशन कहा जाता है. ये दिक़्क़त वैक्सीन की वजह से भी हो सकती है, वैक्सीनेशन प्रक्रिया की वजह से भी हो सकती है या फिर किसी दूसरे कारण से भी हो सकती है. ये अमूमन तीन प्रकार के होते हैं- मामूली, गंभीर और बहुत गंभीर."

    उन्होंने बताया कि ज़्यादातर ये दिक़्क़तें मामूली होती हैं, जिन्हें माइनर एडवर्स इफ़ेक्ट कहा जाता है. ऐसे मामलों में किसी तरह का दर्द, इंजेक्शन लगने की जगह पर सूजन, हल्का बुख़ार, बदन में दर्द, घबराहट, एलर्जी और रैशेज़ जैसी दिक़्क़त देखने को मिलती है."

    लेकिन कुछ दिक़्क़तें गंभीर भी होती हैं, जिन्हें सीवियर केस माना जाता है. ऐसे मामलों में टीका लगवाने वाले को बहुत तेज़ बुखार आ सकता है या फिर ऐनफ़लैक्सिस की शिकायत हो सकती है. इस सूरत में भी जीवन भर भुगतने वाले परिणाम नहीं होते. ऐसे गंभीर मामले में भी अस्पताल में दाख़िले की ज़रूरत नहीं पड़ती है.

  17. विदेश में बनी कोविड वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दी जाएगी

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    केंद्र सरकार ने विदेश में बनी कोविड वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी देने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है. ये प्रक्रिया उन वैक्सीन्स के लिए अपनाई जा रही है जिन्हें विदेशों में इमरजेंसी पड़ने पर इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना का टीका देने के अभियान का दायरा और रफ़्तार बढ़ने के मक़सद से देश में उपलब्ध वैक्सींस की संख्या बढ़ाई जा रही है.

    मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया, "भारत ने प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन किया जो वैक्सीन उत्पादकों को रिसर्च और डेवेलपमेंट के लिए प्रोत्साहित करती है और कोविड वैक्सीन की लॉन्चिंग के लिए अगस्त, 2020 में नीति आयोग के सदस्य के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई गई थी."

    सरकार का कहना है कि भारत पहला ऐसा देश है जहां देश में बने दो वैक्सीन घरेलू टीकाकरण अभियान के लिए उपलब्ध हैं और ये इन्हीं रणनीतियों की वजह से हो पाया है.

    इस सिलसिले में 11 अप्रैल, 2021 को नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल (स्वास्थ्य) की अध्यक्षता में नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 (एनईजीवीएसी) की 23वीं मीटिंग भी हुई जिसमें घरेलू टीकाकरण कार्यक्रम का दायरा और रफ्तार तेज करने पर चर्चा हुई.

    टास्क फोर्स ने अपनी सिफारिश में कहा है कि विदेशों में जो कोरोना वैक्सीन विकसित की गईं और जिनका उत्पादन किया जा रहा है, उन्हें भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है.

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  18. पश्चिम बंगाल चुनाव: धरने पर ममता बनर्जी, चुनाव आयोग के फ़ैसले से गरमाई सियासत

    ममता बनर्जी

    इमेज स्रोत, Sanjay Das /BBC

    चुनाव आयोग की ओर से चुनाव प्रचार पर चौबीस घंटे की पाबंदी के ख़िलाफ़ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार दोपहर को कोलकाता में महात्मा गांधी की मूर्ति के पास धरना शुरू किया है.

    हालांकि उनको अब तक इसके लिए सेना की अनुमति नहीं मिल सकी है. ये इलाक़ा सेना का है.

    मंगलवार सवेरे टीएमसी ने धरने की अनुमति के लिए सेना को एक पत्र भेजा था, लेकिन यह रिपोर्ट लिखने तक सेना ने उस पत्र पर कोई फ़ैसला नहीं किया था.

    सेना के एक प्रवक्ता ने बताया, इतने कम वक्त में इस तरह की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इसके लिए कुछ तय प्रक्रिया का पालन करना होता है.

    उधर, ममता के इस धरने पर बीजेपी ने उनको आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि किसी मुख्यमंत्री का इस तरह चुनाव आयोग के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरना उन्हें शोभा नहीं देता.

    प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि "ममता पर चौबीस घंटे नहीं बल्कि चुनाव संपन्न होने तक पाबंदी लगाई जानी चाहिए थी."

    विपक्षी कांग्रेस और सीपीएम ने भी ममता के धरने की आलोचना की है. हालांकि उन्होंने चुनाव प्रचार पर पाबंदी के चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

  19. कोरोना वैक्सीन: क्या वैक्सीन लेने के बाद भी मुझे कोविड हो सकता है?

    कोरोना वैक्सीन: क्या वैक्सीन लेने के बाद भी मुझे कोविड हो सकता है?

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    भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान जारी है, इस बीच देश महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है. ऐसे में आपके मन में वैक्सीन को लेकर कई सवाल होंगे. पढ़िए उनके जवाब.

    मैंने वैक्सीन का पहला डोज़ ले लिया है, क्या दूसरे डोज़ के लिए मुझे फिर से रजिस्टर कराना होगा?

    हां, वैक्सीन की दूसरी डोज़ के लिए आपको फिर से अपॉइंटमेंट लेना होगा. ध्यान रखिए, पहली डोज़ लेने के बाद दूसरी डोज़ के लिए अपॉइंटमेंट अपने आप शिड्यूल नहीं होगा. कोविन पोर्टल की मदद से आप उसी वैक्सीन सेंटर के लिए फिर से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं, जहां आपने वैक्सीन (कोवैक्सीन या कोविशील्ड) की पहली डोज़ ली थी.

    अगर आपको ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन में कोई दिक़्क़त आए तो आप राष्ट्रीय हेल्पलाइन '1075' पर फ़ोन करके कोविड-19 टीकाकरण और कोविन सॉफ्टवेयर से जुड़ी कोई भी बात पूछ सकते हैं.

    अगर आप ऑनलाइन अपॉइंटमेंट नहीं ले सकते हैं तो भी आपके पास एक विकल्प है. वैक्सीन केंद्रों पर हर रोज़ सीमित संख्या में ऑन-स्पॉट रेजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा होती है. मतलब आप सीधे जाकर भी वहां रजिस्टर करा सकते हैं. हालांकि इंतज़ार और लाइन से बचने के लिए कोविन पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने की सलाह दी जाती है.

  20. स्पुतनिक V: भारत के कोविड-19 टीकों के बारे में हम क्या जानते हैं

    कोरोना

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    इमेज कैप्शन, द लैंसेंट में प्रकाशित आख़िरी चरण के ट्रायल नतीजों के अनुसार स्पुतनिक V कोरोना के ख़िलाफ़ 92 फ़ीसदी मामलों में सुरक्षा देता है

    कोरोना संक्रमण की दूसरी घातक लहर के दौरान भारत में कोरोना वायरस की तीसरी वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंज़ूरी दे दी गई है. इसके कुछ ही घंटे पहले एक्सपर्ट पैनल ने कोरोना के आपातकालीन मामलों में इस वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूर करने की सिफ़ारिश की थी.

    देश की ड्रग नियामक संस्था ने माना है कि रूस में विकसित कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक V सुरक्षित है. यह वैक्सीन ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन की तरह ही काम करता है. साइंस जर्नल 'द लैंसेंट' में प्रकाशित आख़िरी चरण के ट्रायल के नतीजों के अनुसार स्पुतनिक V कोविड-19 के ख़िलाफ़ क़रीब 92 फ़ीसद मामलों में सुरक्षा देता है.

    इस वैक्सीन की मंज़ूरी के साथ अब कोविड-19 से बचने की तीन वैक्सीन हो गई हैं. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया और ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका के सहयोग से बनी कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और रूस की स्पुतनिक V. देश में अब तक पहले से स्वीकृत दोनों टीकों की 10 करोड़ ख़ुराकें लोगों को दी जा चुकी हैं.

    देश में तीसरे टीके के रूप में स्पुतनिक V को उस दिन मंजूरी मिली जब कुल कोरोना संक्रमण के मामले में भारत अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुँच गया. अब तक देश में 1.35 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. अमेरिका में अब तक 3.1 करोड़ लोग इससे संक्रमित हुए हैं. तीसरे नंबर पर ब्राज़ील है जहां इसके अबतक 1.34 करोड़ मरीज़ सामने आए हैं.