'स्वास्थ्य कर्मियों के टीकाकरण का रजिस्ट्रेशन अब नहीं होगा'
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे अब स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कोविड-19 वैक्सीन टीके का रजिस्ट्रेशन बंद कर दें.
लाइव कवरेज
नाइकी ने इंसानी ख़ून वाले ‘शैतानी जूतों’ के ख़िलाफ़ मुक़दमा जीता
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जूते और स्पोर्ट्स का सामान बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रांड नाइकी ने ब्रुकलिन के आर्ट कलेक्टिव MSCHF के ख़िलाफ़ 'शैतानी जूतों' का विवादित मुक़दमा जीत लिया है.
इन जूतों के सोल (तलवे वाले हिस्से) में इंसान के ख़ून की बूंद भी इस्तेमाल की गई थी.
ललित कला के लिए काम करने वाली आर्ट कलेक्टिव MSCHF ने रैपर लिल नैस एक्स के साथ मिलकर इस जूते को डिज़ाइन किया था.
1,018 डॉलर (तक़रीबन 75 हज़ार रुपये) की क़ीमत वाला यह जूता असल में नाइकी एयर मैक्स 97s का मॉडिफ़ाइड वर्ज़न था जिसमें ईसाइयों के पवित्र चिह्न पेंटाग्राम और क्रॉस को भी इस्तेमाल किया गया था. इस तरह के 666 जूते तैयार किए गए थे, जो सब बिक चुके हैं.
निर्मल वर्मा: मशहूर लेखक, जिन्होंने इंदिरा गांधी को 'साक्षात बुराई' कहा
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मुझे याद है, 2012 की गर्मियों में जब मैं अपने शहर भोपाल से सामान समेट कर रोज़गार के लिए दिल्ली रवाना हुई थी, तब मेरे हाथों में निर्मल वर्मा का उपन्यास 'एक चिथड़ा सुख' था.
भोपाल एक्सप्रेस की स्लीपर कोच में साइड लोअर बर्थ पर सिकुड़ कर बैठी हुई मैं रास्ते भर यह किताब पढ़ती रही थी.
आज छह साल बाद पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि दिल्ली और इसके महानगरीय पागलपन को सहने का साहस मुझे इस शहर की पृष्ठभूमि पर लिखे गए 'एक चिथड़ा सुख' से ही मिला.
उपन्यास की शुरुआत में नायक मेरी ही तरह एक छोटे शहर से दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में रहने आता है. "मार्च की हल्की धुंध में सिर्फ एक गुम्बद दिखाई देता था- पेड़ों के ऊपर अटका हुआ. वह उन खंडहरों का हिस्सा था, जो मकानों की पीठ से पीठ लगाए दूर तक चले गए थे. पहले दिन जब यहाँ आया था तो उसे बहुत हैरानी हुई थी. दिल्ली भी कैसा शहर है! मुर्दा टीलों तले लोग जिंदा रहते हैं".
किताब में खींचे गए दिल्ली के ऐसे अनगिनत बिम्बों ने न सिर्फ निर्मल की नज़र से दिल्ली को समझने में मेरी मदद की बल्कि महानगरों के कठोर जीवन को भी करुणा से स्वीकार कर अपना बनाने की हिम्मत दी.
कमलादेवी चट्टोपाध्याय: गांधी जी से अपनी बात मनवाने वाली महिला
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वो साल 1930 था. उस समय कमलादेवी चट्टोपाध्याय 27 साल की थीं.
कमलादेवी को ख़बर मिली कि महात्मा गांधी डांडी यात्रा के ज़रिए 'नमक सत्याग्रह' की शुरुआत करेंगे. जिसके बाद देश भर में समुद्र किनारे नमक बनाया जाएगा. लेकिन इस आंदोलन से महिलाएं दूर रहेंगी.
महात्मा गांधी ने आंदोलन में महिलाओं की भूमिका चरखा चलाने और शराब की दुकानों की घेराबंदी करने के लिए तय की थी लेकिन कमालदेवी को ये बात खटक रही थी.
अपनी आत्मकथा 'इनर रिसेस, आउटर स्पेसेस' में कमलादेवी ने इस बात की चर्चा की है.
वो लिखती हैं "मुझे लगा कि महिलाओं की भागीदारी 'नमक सत्याग्रह' में होनी ही चाहिए और मैंने इस संबंध में सीधे महात्मा गांधी से बात करने का फ़ैसला किया."
महात्मा गांधी उस वक्त सफ़र कर रहे थे.लिहाज़ा कमलादेवी उसी ट्रेन में पहुंच गईं जिसमें गांधी थे और वो उनसे मिलीं. ट्रेन में महात्मा गांधी से उनकी मुलाक़ात छोटी थी लेकिन इतिहास बनने के लिए काफ़ी थी.
पहले तो महात्मा गांधी ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन कमलादेवी के तर्क सुनने के बाद महात्मा गांधी ने 'नमक सत्याग्रह' में महिला और पुरुषों की बराबर की भागीदारी पर हामी भर दी. महात्मा गांधी का ये फ़ैसला ऐतिहासिक था.
इस फ़ैसले के बाद महात्मा गांधी ने 'नमक सत्याग्रह' के लिए दांडी मार्च किया और बंबई में 'नमक सत्याग्रह' का नेतृत्व करने के लिए सात सदस्यों वाली टीम बनाई. इस टीम में कमलादेवी और अवंतिकाबाई गोखले शामिल थीं.
सैम मानेक शॉ ने जब पाकिस्तानी राजदूत को गले लगाया
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फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ पारसी थे. पारसियों के लिए वो हमेशा 'आपरो सैम' रहे.
गोरखा और भारतीय सेना के जवान उन्हें हमेशा प्यार से 'सैम बहादुर' कहते थे. सिख भी उन्हें अपना मानते क्योंकि उनका जन्म अमृतसर में हुआ था था. तमिल लोगों को वो इसलिए प्रिय थे क्योंकि रियाटरमेंट के बाद उन्होंने नीलगिरीज़ को अपना घर बनाया था.
4/ 12 FFR टुकड़ी के लिए जहाँ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, वो हमेशा 'जंगी लाट' रहे. वो न सिर्फ़ भारतीय सेना के जवानों के सबसे प्रिय जनरल थे बल्कि आम लोगों के दिल में उनके लिए जो प्यार है, कम लोगों के लिए ही होती है. वो उन चुनिंदा लोगों में से थे जो अपने जीवनकाल में ही लीजेंड बन गए थे.
गोरखा ने दफ़्तर के गेट पर रोका
सेनाध्यक्ष का पद सँभालने से पहले सैम मानेक शॉ पूर्वी कमान के प्रमुख हुआ करते थे. उनकी एक निजी कार थी 'सनबीम रैपियर' जिसे अक्सर उनकी पत्नी सीलू चलाया करती थीं. एक दिन रविवार को अचानक सैम ने अपनी कार निकाली और दफ़्तर के लिए चल पड़े. उन्होंने शॉर्ट्स और उसके नीचे पेशावरी चप्पल पहनी हुई थी.
फोर्ट विलियम के प्रवेश द्वार पर उन्हें एक गोरखा संतरी ने रोक कर उनसे उनका परिचय पत्र माँगा.
कौन सा न्योता ना मिलने की चर्चा से हैरान हैं इमरान ख़ान?
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एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में
पाकिस्तान को ना बुलाये जाने पर जो चर्चा हो रही है, उससे प्रधानमंत्री इमरान ख़ान
ताज्जुब में हैं.
शनिवार को कुछ ट्वीट्स के ज़रिये
उन्होंने इस बारे में अपनी राय व्यक्त की.
उन्होंने लिखा कि “पाकिस्तान को क्लाइमेट चेंज कॉन्फ़्रेंस में ना
बुलाये जाने को लेकर जो कोलाहल है, उससे मैं हैरान हूँ. मेरी सरकार जलवायु
परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार काम कर रही है. हम भावी पीढ़ियों के
प्रति प्रतिबद्ध हैं और क्लीन-ग्रीन पाकिस्तान बनाना चाहते हैं.”
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एक अन्य ट्वीट में इमरान ख़ान ने लिखा, “ग्रीन पाक, 10 बिलियन ट्री सुनामी जैसे हमारे कुछ अन्य प्रोग्राम हैं जिनके तहत पाकिस्तान को ग्रीन किया जा रहा है, साथ ही नदियों को साफ़ किया जा रहा है. सात वर्षों में हमने काफ़ी अनुभव प्राप्त किया है और हमारी नीतियों को मान्यता भी मिली है, उनकी सराहना की जाती है. कोई और देश अगर हमसे सीखना चाहे, तो हम अपने अनुभव से उनकी मदद के लिए तैयार हैं.”
इमरान ख़ान ने कहा, “हमने संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 2021 से पहले ही अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं.”
31 मार्च को यह ख़बर आयी थी कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिका में होने जा रहे क्लाइमेंट चेंज कॉन्फ़्रेंस में पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया है. यह कॉन्फ़्रेंस 22-23 अप्रैल को होनी है.
व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक़, भारत और बांग्लादेश
समेत 40 देशों के नेताओं को इस कॉन्फ़्रेंस को आमंत्रण मिला है.
ब्रेकिंग न्यूज़, बांग्लादेश में सोमवार से लग सकता है संपूर्ण लॉकडाउन
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बांग्लादेश में कोरोना संक्रमण की बढ़ती दर के कारण सरकार देश
में एक सप्ताह का लॉकडाउन लागू करने जा रही है.
बांग्लादेश सरकार में राज्यमंत्री फ़रहाद हुसैन ने बीबीसी
को बताया कि एक सप्ताह का लॉकडाउन सोमवार या मंगलवार से शुरू हो सकता है.
हुसैन ने कहा कि लॉकडाउन की औपचारिक घोषणा करते समय लोगों
को तैयारी करने का मौक़ा दिया जायेगा.
एक अन्य मंत्री के हवाले से बांग्लादेश का स्थानीय मीडिया लिख
रहा है कि लॉकडाउन सोमवार से शुरू हो रहा है.
बांग्लादेश में इस बार का लॉकडाउन कितना सख़्त होगा और इसे
किस तरह लागू किया जायेगा, इसकी अभी जानकारी नहीं दी गई है.
हालांकि, फ़रहाद हुसैन ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं को इससे
मुक़्त रखा जायेगा.
बांग्लादेश में पिछले एक सप्ताह के भीतर कोविड-19 के
मरीज़ों की संख्या काफ़ी तेज़ी से बढ़ी है.
अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश में कोरोना संक्रमण की दर
20 प्रतिशत से अधिक हो गई है.
बताया गया है कि शुक्रवार को क़रीब 30 हज़ार सेंपल लिये गये
थे, जिनमें से 6,600 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई.
बीते 24 घंटे में बांग्लादेश में कोविड-19 से 50 लोगों की
मौत हुई है.
कोविड की वजह से पिछले साल क़रीब तीन महीने तक बांग्लादेश
में लॉकडाउन रहा था, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2020 में हुई थी.
बीबीसी संवाददाता के उत्पीड़न को लेकर चीन पर बरसा यूरोपीय संघ
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बीबीसी के बीजिंग संवाददाता जॉन सडवर्थ के चीन छोड़कर चले
जाने के बाद यूरोपीय संघ ने कहा कि वहां काम कर रहे विदेशी संवाददाताओं को चीन लगातार
परेशान कर रहा है.
ईयू के अनुसार, यह देश संवाददाताओं के काम और उनकी
अभिव्यक्ति की आज़ादी में रोड़े अटका रहा है.
यूरोपीय संघ ने अपने बयान में कहा, ''लगातार हो रहे
उत्पीड़न और काम में डाली जा रही बाधाओं से परेशान होकर विदेशी संवाददाता चीन
छोड़ने को मज़बूर हो रहे हैं.''
ईयू ने चीन से अनुरोध किया है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी
दायित्वों का पालन करते हुए वह अपने देश में अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी तय
करे.
बीबीसी के बीजिंग संवाददाता जॉन सडवर्थ चीन के दबाव और
धमकियों से तंग आकर इसी हफ़्ते परिवार समेत चीन छोड़कर ताइवान चले गए थे.
देश छोड़ते वक्त भी हवाई अड्डे तक चीन की पुलिस ने सादी
वर्दी में सडवर्थ का पीछा किया था. अब जॉन सडवर्थ ताइवान से चीन की रिपोर्टिंग
करेंगे.
बीबीसी ने कहा कि है उसे जॉन सडवर्थ की रिपोर्टिंग पर गर्व है और नौ साल से चीन पर काम कर रहे सडवर्थ आगे भी चीन के संवाददाता बने रहेंगे.
चीन के शिनज़ियांग इलाके में वीगर मुसलमानों के साथ हो रहे उत्पीड़न पर बीबीसी के लिए रिपोर्टिंग करने के लिए सडवर्थ ने पुरस्कार भी जीता है.
हालांकि चीन ने शिनजियांग पर बीबीसी के कवरेज़ की निंदा करते हुए कहा कि उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि सडवर्थ को कोई ख़तरा था.
चीन ने यह भी कहा कि शिनजियांग पर उनकी रिपोर्ट से नाराज लोग ज़रूर उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.
पीएम मोदी ने कहा, सेक्युलरिज़्म के खेल से देश का बहुत नुकसान हुआ
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असम के तामुलपुर क्षेत्र की एक चुनावी जनसभा में शनिवार को
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेक्युलरिज़्म (धर्म-निरपेक्षता) और कम्युनिज़्म (साम्यवाद) के खेल से इस
देश का बहुत नुकसान हुआ है.
उन्होंने अपनी विचारधारा को सही ठहराते हुए कहा कि हम परिश्रम
करने वाले लोग हैं, समाज की सेवा के लिए दिन-रात एक करने वाले लोग हैं, विकास के
लिए ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं.
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इस चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं यहाँ की माताओं- बहनों को विश्वास दिलाता हूँ कि आपके बेटे के सपने पूरे करने के लिए हम लगे रहेंगे. आपके बच्चों को बंदूक ना उठानी पड़े, उन्हें जंगलों में ज़िन्दगी ना गुज़ारनी पड़े, उन्हें किसी की गोली का शिकार ना होना पड़े, इसके लिए एनडीए सरकार प्रतिबद्ध है.”
उन्होंने कहा, "एनडीए सरकार मानती है कि किसी भी क्षेत्र के लोगों का विकास भेदभाव से नहीं, सद्भाव से होता है. इसी सद्भावना का परिणाम है कि हम लंबे इंतज़ार के बाद ऐतिहासिक बोडो अकॉर्ड तक पहुँच पाए."
कांग्रेस पर निशाना
असम की इस चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी ने कहा, "कांग्रेस सरकार ने अपने समय में असम को हिंसा, बम-बंदूक का लंबा दौर दिया. वहीं एनडीए सरकार असम के हर साथी को साथ लेकर शांति और समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ रही है."
"असम के चाय बाग़ानों में काम करने वाले साथियों को भी कांग्रेस ने लंबे समय तक मुसीबत में, अभाव में रखा था. चाय बागान में काम करने वाले लोगों के लिए सबसे ज़्यादा काम एनडीए सरकार ने ही किया है."
उन्होंने कहा, "महाजोत (महागठबंधन) के महाझूठ को आपको सिरे से नकारते चलना है. जिस तरह पहले दो चरणों में आपने बीजेपी की, एनडीए की ज़्यादा से ज़्यादा सीटों पर विजय सुनिश्चित की है, वैसे ही आपको तीसरे चरण में भी करना है."
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "मैंने सुना, कल कुछ लोगों ने घोषणा कर दी है, उसमें उन्होंने मान लिया है कि वो चुनाव हार चुके हैं. अगली सरकार कैसी बनेगी, सरकार के लोगों ने क्या पहना होगा, वो कैसे दिखते होंगे, इसका उन्होंने वर्णन किया. मैं कहता हूँ कि असम की संस्कृति का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता."
पश्चिम बंगाल से अख़बारों पर चर्चा
नंदीग्राम में मतदान और “दीदी बनाम दादा” की लड़ाई पर क्या कहते हैं स्थानीय अख़बार? राज्य की बदलती राजनीति पर क्या सोचते हैं युवा? कोलकाता से बता रही हैं बीबीसी संवाददाता भूमिका राय.
कोरोना: पिछले 24 घंटे में लगभग 90 हज़ार नये मामले, सितंबर के बाद सबसे बड़ा उछाल
पिछले 24 घंटों
में संक्रमण के 89,129 नये मामले सामने आए हैं. पिछले साल सितंबर के बाद से यह एक दिन के भीतर अब तक का
सबसे बड़ा उछाल है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के
अनुसार, पिछले 24 घंटों में 714 लोगों की संक्रमण के कारण मौत हुई है. इसी के
साथ देश में कोरोना के कुल 1,23,92,260 मामले हो गए हैं. इनमें से 6,58,909 सक्रिय मामले हैं.
महामारी की चपेट में आकर
अब तक कुल 1,64,110 लोगों ने जान गँवाई है और 1,15,69,241 लोग इलाज के बाद ठीक हो गए हैं.
बीते दिनों में कुल 7,30,54,295 लोगों को कोरोना
की वैक्सीन लगाई जा चुकी है.
मोदी सरकार की पंजाब को चिट्ठी, मज़दूरों को बंधुआ बनाने की बात
राहुल गांधी ने कहा, पीएम बना तो विकास से ज़्यादा रोज़गार पर ध्यान दूंगा
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कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष
राहुल गांधी ने कहा कि अगर मैं देश का प्रधानमंत्री बना, तो मैं विशुद्ध रूप से
विकास केंद्रित नीतियों की तुलना में रोज़गार के अवसर पैदा करने पर ज़्यादा ध्यान
केंद्रित करूंगा.
उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ़ ‘विकास केंद्रित’ आइडिया से ‘रोज़गार केंद्रित’आइडिया की ओर बढूंगा. हमें विकास (ग्रोथ)
की ज़रूरत है, लेकिन उत्पादन और रोज़गार पैदा करने के साथ-साथ हमें वैल्यू एडिशन पर
भी ज़ोर देने होगा.”
राहुल गांधी ने अमेरिका के
जाने-माने शिक्षण संस्थान ‘हार्वर्ड कैनेडी स्कूल’ के छात्रों के साथ ऑनलाइन संवाद के दौरान एक प्रश्न
के जवाब में ये बात कही.
राहुल गांधी से पूछा गया था कि अगर
वे भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो नीतियाँ बनाते समय वे किस चीज़ को
प्राथमिकता देंगे?
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इसके जवाब में गांधी ने कहा, “वर्तमान में, अगर भारत की ग्रोथ (वृद्धि) को देखें तो हमारी ग्रोथ और रोज़गार-निर्माण के बीच जैसा संबंध होना चाहिए, वैसा नहीं है. जबकि चीन इस मामले में हमसे काफ़ी आगे है. मैं कभी ऐसे चीनी नेता से नहीं मिला, जो रोज़गार के सृजन को समस्या बताता हो. इसलिए मेरी 9 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर में दिलचस्पी नहीं है, अगर मेरे यहाँ रोज़गार ही ना हो.”
राहुल गांधी से इस ऑनलाइन संवाद की मेज़बानी अमेरिका के पूर्व राजनयिक निकोलस बर्न्स कर रहे थे. निकोलस फ़िलहाल हार्वर्ड कैनेडी स्कूल में प्रोफ़ेसर हैं.
इस बातचीत में राहुल गांधी ने देश में संस्थागत ढांचे पर सत्तापक्ष की तरफ से पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि निष्पक्ष राजनीतिक मुक़ाबला सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार संस्थाएं अपेक्षित सहयोग नहीं दे रही हैं.
कांग्रेस की चुनावी असफलता और आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा, "हम आज ऐसी अलग स्थिति में हैं जहाँ वो संस्थाएं हमारी रक्षा नहीं कर पा रहीं, जिन्हें हमारी रक्षा करनी है. जिन संस्थाओं को निष्पक्ष राजनीतिक मुक़ाबले के लिए सहयोग देना है, वो अब ऐसा नहीं कर रही हैं.’’
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि सत्तापक्ष से लोगों का मोहभंग हो रहा है और यह कांग्रेस के लिए एक अवसर भी है.
अर्थव्यवस्था को गति देने के उपाय से जुड़े सवाल पर कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अब सिर्फ़ एक ही विकल्प है कि लोगों के हाथों में पैसे दिये जायें. इसके लिए हमारे पास ‘न्याय’ का विचार है.’’
उन्होंने चीन के बढ़ते वर्चस्व की चुनौती के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत और अमेरिका जैसे देश लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ही समृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र के विकास से चीन की चुनौती से निपट सकते हैं.
नमस्कार!
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