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पीपीएफ़, फिक्स्ड डिपॉज़िट की ब्याज दर घटी, आज से लागू
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से पूछा है कि उन्होंने अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई.
लाइव कवरेज
कोरोना वायरस कहां से आया था, आई डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट
हिंद महासागर में चीन का दबदबा और भारतीय नौसेना की तैयारी
बप्पी लहरी कोरोना संक्रमित पाए गए, अस्पताल में हुए भर्ती
जानेमाने बॉलीवुड संगीतकार बप्पी लहरी के प्रवक्ता ने बताया है कि कोरोना संक्रमित पाए गए हैं जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
पश्चिम बंगाल: नंदीग्राम में मतदान से पहले चुनाव आयोग ने लगाई पाबंदियां
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान से पहले चुनाव आयोग ने नंदीग्राम में नई पाबंदियां लागू की हैं. यहां मतदान से पहले धारा 144 लागू कर दी गई है.
चुनाव आयोग ने मतदान से पहले यहां बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए हैं और हेलीकॉप्टर से निगरानी करने की व्यवस्था की है. साथ ही वोट देने के लिए जो योग्य नहीं होंगे उनके वोटिंग बूथ के नज़दीक आने पर मनाही होगी.
नंदीग्राम में चुनावी मुक़ाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. यहां से मौजूदा मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और कभी उनके साथी रहे शुभेन्दु अधिकारी के बीच मुक़ाबला है.
शुभेन्दु अधिकारी ने हाल में तृणमूल कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था.
हाल में महीनों में यहां हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं और पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की मौत हुई है. चुनाव आयोग का कहना है कि लोग भयमुक्त माहौल में वोट करें यही उनका उद्देश्य है.
पश्चिम बंगाल में केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी, पश्चिम बंगाल में दस साल से शासन कर रही तृणमूल कांग्रेस को सीधे-सीधे टक्कर दे रही है.
बीजेपी ने यहां चुनाव प्रचार में अपना पूरा ज़ोर लगाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत कई केंद्रीय के कई मंत्रियों ने यहां चुनावी रैलियां की हैं.
वहीं, तीसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद से मैदान में उतरी ममता बनर्जी ने पैर टूटने के बावजूद ताबड़तोड़ रैलियां की हैं. 34 साल तक सत्ता में रहा लेफ्ट मोर्चा भी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव में उतर रहा है.
एक अप्रैल को 24 परगना, बांकुड़ा, मिदनापुर समेत पूर्वी मिदनापुर की 30 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होना है.
ब्रेकिंग न्यूज़, पीपीएफ़, फिक्स्ड डिपोज़िट की ब्याज दरों में कमी, 1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
सरकार ने बुधवार को वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती करने का ऐलान किया है.
वित्त मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर कहा है छोटी बचत योजनाओं – सेविंग डिपोज़िट और फिक्स्ड डिपोज़िट समेत पीपीएफ़ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड), सीनियर सिटिज़न सेविंग सर्टिफ़िकेट (एससीएसएस), नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (एनएससी), किसान विकास पत्र (केवीपी) और सुकन्या समृद्धि बचत योजना (एसएसवाई) के लिए ब्याज दरों में कमी करने का ऐलान किया है.
नई ब्याज दरें 1 अप्रैल 2021 से 30 जून 2021 तक लागू रहेंगी.
पिछली तीन तिमाहियों में छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने के बाद सरकार ने अब इनमें कटौती करने का फ़ैसला किया है.
ताज़ा कटौती के बाद पीपीएफ़ पर मिलने वाले ब्याज को 7.1 से घटा कर 6.4 फीसदी किया गया है.
वहीं सीनियर सिटिज़न सेविंग सर्टिफ़िकेट पर मिलने वाले ब्याज को 7.4 फीसदी से कम कर 6.5 और नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट पर मिलने वाले ब्याज को 6.8 से घटा कर 5.9 कर दिया गया है.
किसान विकास पत्र पर अब 6.9 फीसदी की बजाय 6.2 फीसदी का ब्याज मिलेगा जबकि सुकन्या समृद्धि बचत योजना के तहत 7.6 फीसदी की बजाय 6.9 फीसदी ब्याज मिलेगा.
बैंकों के सामान्य बचत खातों में ब्याज दरों को 4 फीसदी से कम कर 3.5 फीसदी कर दिया गया है. वहीं फिक्स्ड डिपोज़िट के ब्याज दरों में भीकमी की गई है.
एक साल के फिक्स्ड डिपोज़िट में ब्याज दर को 5.5 फीसदी से कम कर 4.4 फीसदी किया गया है. वहीं दो साल के फिक्स्ड डिपोज़िट में ब्याज दर को 5.5 फीसदी से 5.0 फीसदी, तीन साल के डिपोज़िट में 5.5 फीसदी से 5.1 फीसदी और पांच साल के डिपोज़िट में ब्याज दर को 6.7 फीसदी से 5.8 फीसदी कर दिया गया है.
बैंकों में रिकरिंग डिपोज़िट की ब्याज दर को भी 5.8 से कम कर 5.3 कर दिया गया है.
आपके बॉस जुर्म कर रहे हैं और आप चुप रहे: बॉम्बे हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से पूछा है कि उन्होंने अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से पूछा है कि ''जब आपको गृहमंत्री अनिल देशमुख की कथित गड़बड़ियों के बारे में पता था, तो आपने पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई.''
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ ने ये भी कहा कि बिना एफ़आईआर के हाईकोर्ट दख़ल नहीं दे सकता और सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को जाँच-पड़ताल के लिए निर्देशित नहीं कर सकता है.
परमबीर सिंह को 17 मार्च को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया था. परमबीर सिंह ने तब ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था कि उन्होंने देशमुख की 'भ्रष्ट हरकतों' के बारे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से शिकायत की थी, जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने उन्होंने अपील की थी कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री के ख़िलाफ़ सीबीआई की जाँच के आदेश दिए जाएं और महाराष्ट्र की सरकार को उनके ख़िलाफ़ कोई कड़े क़दम उठाने से रोका जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह को कोई राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि वो चाहें तो बॉम्बे हाईकोर्ट जा सकते हैं.
परमबीर सिंह बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचे जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई.
अपने तबादले के बाद परमबीर सिंह ने दावा किया था कि गृहमंत्री देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और अन्य पुलिस अधिकारियों से कहा था कि वो बार और रेस्तरां से हर महीने 100 करोड़ रूपये जुटाएं. गृहमंत्री अनिल देशमुख ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
बुधवार को सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस दत्ता ने कहा, ''आप (सिंह) एक सीनियर पुलिस ऑफ़िसर हैं, आप कोई सामान्य आदमी तो हैं नहीं. आपकी ये ड्यूटी बनती थी कि किसी भी गड़बड़ी पर शिकायत दर्ज कराएं. ये जानते हुए कि आपके बॉस एक जुर्म कर रहे हैं, आप चुप रहे.''
हाईकोर्ट ने इस मामले में फ़ैसला सुरक्षित रखा है.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिन भर'
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से.
कर्नाटक: मंत्री ने सीएम येदियुरप्पा के ख़िलाफ़ राज्यपाल को लिखा ख़त
कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने अपने ही मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के ख़िलाफ़ राज्यपाल वाजुभाई वाला को एक पत्र लिखा है.
पत्र में ग्रामीण विकास मंत्री ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री येदियुरप्पा उनके मंत्रालय के काम काज में दख़ल देते हैं और उनकी मंज़ूरी और सलाह के बग़ैर उनके मंत्रालय से जुड़े फ़ैसले करते हैं.
मंत्री ने मुख्यमंत्री पर एक तानाशाह की तरफ़ प्रशासन चलाने का भी आरोप लगाया.
बीबीसी के बीजिंग संवाददाता को धमकी के बाद चीन छोड़ना पड़ा
बीबीसी के बीजिंग संवाददाता जॉन सडवर्थ को चीनी अधिकारियों की धमकी और दबाव के कारण चीन छोड़ना पड़ा है. वो अपने परिवार के साथ ताइवान चले गए हैं.
सडवर्थ ने चीन के शिनजियांग प्रांत में रह रहे वीगर मुसलमानों से साथ सरकार के बर्ताव पर कई कहानियां की हैं जिनके लिए उन्होंने कई एवार्ड भी दिए गए हैं.
बीबीसी का कहना है कि उन्हें अपने संवाददाता की रिपोर्टिंग पर गर्व है और वो बीजिंग संवाददाता बने रहेंगे.
चीन ने शिनजियांग प्रांत में बीबीसी की कवरेज की आलोचना की है.
सडवर्थ ने क़रीब नौ साल तक चीन में रहकर काम किया है. उनका कहना है कि जब चीन में रहकर काम करना मुश्किल हो गया तो उन्होंने ताइवान जाने का फ़ैसला किया.
सडवर्थ का कहना है कि चीन में उनके और उनकी टीम के सदस्यों पर निगरानी रखी जाती थी, उन्हें क़ानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती थी और वो जब भी अपना काम करते थे उन्हें रुकावट डाली जाती थी.
चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना है, "अभी हाल ही में जब हमें सडवर्थ के प्रेस कार्ड को दोबारा जारी करना था तब हमें पता चला कि वो बिना बताए चीन छोड़ कर चले गए हैं. उन्होंने चीन के किसी अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं दी और ना ही चीन छोड़ने की वजह बताई है."
बीबीसी ने एक बयान जारी कर कहा है, "जॉन सडवर्थ की रिपोर्टिंग ने उन सच्चाइयों पर से पर्दा उठाया है जिनको चीनी अधिकारी नहीं चाहते हैं कि दुनिया को पता चले."
पिछले साल चीन ने न्यूयॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और वॉल स्ट्रीट जर्नल के संवाददाताओं को चीन छोड़ने के लिए कह दिया था. सितंबर 2020 में चीन में रहकर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के लिए काम करने वाले दो आख़िरी रिपोर्टर भी पाँच दिनों के राजनयिक गतिरोध के बाद ऑस्ट्रेलिया लौट गए थे.
ममता बनर्जी ने पत्र लिखकर की ग़ैर-बीजेपी नेताओं से एकजुट होकर लड़ने की अपील
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने ग़ैर-बीजेपी पार्टियों के प्रमुख नेताओं को पत्र लिखकर उन्हें बीजेपी सरकार के लोकतंत्र पर कथित हमले के विरुद्ध एकजुट होने और उनसे संयुक्त रूप से लड़ने की अपील की है.
उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार, डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक, आरजेडी के तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं को पत्र लिखा है.
पत्र में लिखा है, “मैं बीजेपी और उसकी केंद्र में सरकार के भारत में लोकतंत्र और संवैधानिक संघवाद पर लगातार हमले को लेकर अपनी चिंता ज़ाहिर करने के लिए कई ग़ैर-बीजेपी नेताओं को ये पत्र लिख रही हूं.”
उन्होंने पत्र में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2021 को संघीय व्यवस्था के ख़िलाफ़ क़रार दिया है.
ममता बनर्जी ने लिखा है, “इस क़ानून के ज़रिए बीजेपी सरकार ने वास्तविक रूप में दिल्ली की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की सभी शक्तियां छीन ली हैं और उन्हें केंद्र के मनोनीत उपराज्यपाल को सौंप दिया है. उपराज्यपालक को दिल्ली का अघोषित वायसराय बना दिया गया है जो गृह मंत्री और प्रधान मंत्री के लिए काम करेगा.”
साथ ही उन्होंने बीजेपी पर सीबीआई, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग करने और गैर-बीजेपी राज्य सरकारों के लिए मुश्किलें खड़ी करने का आरोप भी लगाया.
ममता बनर्जी ने लिखा, “बीजेपी सरकार ग़ैर-बीजेपी पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ सीबीआई, ईडी और अन्य संस्थाओं का बदले की भावना से दुरुपयोग कर रही है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव हो रहे हैं और बीजेपी ने टीएमसी और डीएमके के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ छापे के लिए ईडी का इस्तेमाल किया.”
उन्होंने मोदी सरकार पर जनाबूझकर राज्य सरकारों का फ़ंड रोकने का आरोप भी लगाया. पत्र में लिखा, “मोदी सरकार ग़ैर-बीजेपी सरकारों का फ़ंड जानबूझकर रोक रही है ताकि हमें आम लोगों के लिए लाभकारी कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में समस्याएं आएं.”
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर वो सभी मंच ख़त्म करने का आरोप लगाया जहां पर राज्य सरकारें अपनी मांगें और शिकायत रख सकती हैं.
पत्र में राष्ट्रीय संपत्तियों के बड़े स्तर पर निजीकरण को भी लोकतंत्र पर हमला बताया गया है क्योंकि ये परिसंपत्तियां भारत के लोगों की है.
उन्होंने लिखा है कि इन सभी बातों के पीछे एक साफ़ उद्देश्य दिखाई पड़ता है. बीजेपी, ग़ैर-बीजेपी पार्टियों के लिए अपने संवैधानिक अधिकार और स्वतंत्रता का इस्तेमाल करना असंभव बनाना चाहती है. वो भारत में एक-पार्टी का शासन लाना चाहती है.
इसलिए, मेरा दृढ़तापूर्वक विश्वास है कि बीजेपी के लोकतंत्र और संविधान पर हमलों के ख़िलाफ़ एकजुट और प्रभावी लड़ाई लड़ने का वक़्त आ गया है. हम दिल और दिमाग़ के सामंजस्य से और लोगों को एक विश्वसनीय विकल्प उपलब्ध कराकर ये लड़ाई जीत सकते हैं. विधानसभा चुनावों के बाद हमें इन मुद्दों पर विचार करना चाहिए और एक कार्ययोजना बनानी चाहिए.
ममता बनर्जी का ये पत्र उस समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव हैं. वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ रही हैं जहां एक अप्रैल को मतदान होना है. ममता बनर्जी की यहां पर अपने प्रतिद्वंद्वी और बीजेपी प्रत्याशी शुवेंदु अधिकारी से कड़ी टक्कर है.
क्या ममता बनर्जी को नंदीग्राम में घेरने में कामयाब रही बीजेपी?
इशरत जहां एनकाउंटर मामले में बरी हुए तीन पुलिस अधिकारी
गुजरात के इशरत जहां एनकाउंटर मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने तीन पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है.
क्राइम ब्रांच के ये तीन अधिकारी आईपीएस जीएल सिंघल, तरुण बरोत (सेवानिवृत्त) और अंजू चौधरी हैं.
साथ ही कोर्ट ने इशरत जहां को चरमपंथी ना मानने से इनकार कर दिया.
पुलिस अधिकारियों पर फ़र्ज़ी मुठभेड़ में इशरत जहां की हत्या का आरोप था.
अगर सीबीआई इस मामले में उच्च अदालत में अपील नहीं करती है तो तीनों अधिकारियों के बरी होने से ये मुक़दमा यहीं ख़त्म हो जाएगा.
सीबीआई की कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने क़ानूनी दायरे में काम किया है. ख़ुफ़िया जानकारी के मुताबिक़ अधिकारी ईशरत जहां की गिरफ़्तारी में जुट गए थे और ये स्वीकार नहीं किया जा सकता कि इशरत जहां चरमपंथी नहीं थीं.
कोर्ट ने कहा कि क्राइम ब्रांच ने घटना के दौरान अपने कर्तव्य का पालन किया और मामले में तीनों अधिकारियों को बरी कर दिया गया है.
मुंबई की रहने वाली 19 साल की इशरत जहां की 15 जून 2004 को गुजरात पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी. इसमें मुठभेड़ में जावेद शेख़ उर्फ़ प्रनेश पिल्लई, अमजदअली अकबरली राणा और ज़ीशान जौहर भी मारे गए थे.
गुजरात पुलिस का दावा था कि मारे गए चारों लोग चरमपंथी गतिविधियों में शामिल थे और गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश रच रहे थे.
हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल ने इसे फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताया था जिसके बाद सीबीआई ने कई पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.
असम के मुस्लिम बहुल इलाक़े में क्या कह रहें हैं बीजेपी के मुसलमान उम्मीदवार
ममता ने ख़ुद को बताया शांडिल्य, ओवैसी का जवाब
एक रैली में ममता बनर्जी के ख़ुद को शांडिल्य बताने की ख़बर पर ओवैसी ने ट्विटर पर यह प्रतिक्रिया दी है.
इशरत जहाँ एनकाउंटर केस: सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन पुलिस अधिकारियों को बरी किया
इशरत जहाँ एनकाउंटर केस में सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को क्राइम ब्रांच के तीन अधिकारियों गिरिश सिंघल, तरुण बारोट और अंजु चौधरी को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
सीबीआई की विशेष अदालत ने तीनों अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई को जायज़ ठहराया है.
अदालत ने कहा कि इशरत जहाँ लश्करे तैय्यबा की आंतकी थीं. इस ख़ुफ़िया रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए तीनों अधिकारियों को निर्दोष बताते हुए बरी किया जाता है.
तीनों अधिकारियों पर इशरत जहाँ समेत तीन लोगों का जून 2004 में 'फ़र्ज़ी एनकाउंटर' करने का आरोप था.
इससे पहले तत्कालीन महानिदेशक पीपी पांडे, तत्कालीन डीआईजी डी जी वंजारा और तत्कालीन पुलिस उपायुक्त एन के अमीन को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था.
खेल के किस्से, रेहान फ़ज़ल के साथ
आज चर्चा उस शख्सियत की जिन्हें हॉकी का डॉन ब्रैडमैन कहा जाता था. आज़ादी के फौरन बाद कैसे 'बाबू' की टीम ने गोरों को उन्हीं की ज़मीं पर मात दी.
केडी सिंह बाबू से जुड़े और भी कई दिलचस्प किस्से लेकर हाज़िर हैं रेहान फ़ज़ल और राखी शर्मा.
ब्रेकिंग न्यूज़, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा कोरोना पॉज़िटिव
पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा कोरोना से संक्रमित पाये गए हैं. उन्होंने ख़ुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.
अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से देवगौड़ा ने लिखा है, "मैं और मेरी पत्नी चेन्नाम्मा कोविड-19 पॉज़िटिव पाये गए हैं. हम दोनों ने परिवार के बाकी सदस्यों के साथ ख़ुद को आइसोलेट कर लिया है. बीते दिनों मुझसे मिले सभी लोगों से मैं गुज़ारिश करूंगा कि वे अपना कोविड टेस्ट करवायें. साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों को मेरा संदेश है कि वे ज़्यादा परेशान ना हों."
सीरिया में हार के बाद फिर सिर उठा रहा है इस्लामिक स्टेट
दुनिया के कई देशों के विदेश मंत्रियों के एक समूह ने चेतावनी दी है कि सीरिया में हार के दो साल बाद एक बार फिर इस्लामी चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट अपना सिर उठा रहा है.
यह चेतावनी ऐसे वक्त में आई है जब मोज़ाम्बिक के एक शहर पल्मा में हुए चरमपंथी हमले में कई लोग मारे गए हैं.
मंगलवार को बेल्जियम के उप-प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और अमेरिकी विदेश मंत्री की अपील पर इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबंधन की एक वर्चुअल बैठक हुई थी जिसमें इन नेताओं ने कहा कि हाल के दिनों में चरमपंथी समूहों के हमले बढ़े हैं.
‘इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबंधन’ नाम के इस समूह ने कहा है कि अफ़्रीका में इस्लामिक स्टेट से जुड़े चरमपंथी संगठन पूर्वी और पश्चिमी अफ़्रीका में बड़ा ख़तरा बन गए हैं.
साल 2019-2020 के बीच यहाँ चरमपंथी हमलों में एक तिहाई बढ़ोतरी हुई है.
गठबंधन के अनुसार, ये समूह इराक़ और सीरिया में भी अपना नेटवर्क दोबारा खड़ा करने में क़ामयाब हो रहे हैं.
इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबंधन में कुल 83 देश शामिल हैं. इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ कई यूरोपीय और अफ़्रीकी देश शामिल हैं.
बीबीसी रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर कहते हैं, “दो साल पहले इस्लामिक स्टेट के लड़ाके सीरिया के बागूज़ मे अपनी ज़मीन हार गए थे, ये उनके ख़ुद के शासन का पतन था. लेकिन आज अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी है कि इस्लामिक स्टेट का ख़तरा अभी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है."
उनके मुताबिक़, “पश्चिम, उत्तर पश्चिम और पूर्वी अफ्रीका में इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों का गंभीर ख़तरा बढ़ रहा है. मोज़ाम्बिक में आम लोगों पर और राहतकर्मियों पर हमला कर उनसे सिर को धड़ से अलग करना ऐसे ही समूह का काम है."
साल 2019 से 2020 के बीच इस तरह के हमले जिनकी ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है इनमें एक तिहाई इज़ाफा हुआ है. साथ ही इराक़ और सीरिया के कई हिस्सों में भी चरमपंथी गतिविधियाँ बढ़ी हैं और यहाँ जिहादियों ने अपने नेटवर्क फिर से बना लिए हैं.
विदेश मंत्रियों की इस बैठक में नेटो के महासचिव भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि दुनिया से इस्लामिक स्टेट का पूरी तरह ख़ात्मा करने के लिए एक साथ मिलकर काम किए जाने की ज़रूरत है.
अगर कोरोना महामारी के कारण स्थिति नहीं बिगड़ी तो इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबंधन की अगली बैठक इटली में होगी.
चीनी प्रयोगशाला से कोरोना वायरस लीक होने को लेकर WHO ने अब क्या कहा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस ने कहा है कि ‘यह कहने के लिए अभी और गहन अध्ययन की ज़रूरत है कि कोविड-19 एक चीनी प्रयोगशाला से निकला हुआ वायरस है.’
ग़ेब्रेयेसुस ने कहा है कि ‘चीनी प्रयोगशाला वाली थ्योरी के सच होने की संभावना सबसे कम है और बिना गहन अध्ययन के इस बारे में कुछ कहना ठीक नहीं होगा.’
वहीं, अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को पर्याप्त जानकारी नहीं देने के लिए चीन की आलोचना की है.
चीन अब तक लगातार उसकी प्रयोगशाला से इस वायरस के लीक होने के आरोपों को ग़लत ठहराता आया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की एक टीम ने 14 जनवरी से 10 फ़रवरी तक चीन के वुहान शहर का दौरा किया था.
चीन के वुहान शहर में ही (दिसंबर 2019 में) कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे पहले मामले की आधिकारिक पुष्टि हुई थी.
इस अंतरराष्ट्रीय टीम ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया कि ‘चीन में विशेषज्ञों की टीम को ज़रूरी डेटा नहीं मिल सका’और उन्होंने भविष्य में बेहतर डेटा शेयरिंग की ज़रूरत बताई है.
विशेषज्ञों की इस टीम के अनुसार, इस बात की संभावना सबसे ज़्यादा है कि यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में आया.
हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने चीनी प्रयोगशाला वाली थ्योरी को सिरे से नकारा नहीं, बल्कि उन्होंने इस बारे में अधिक जाँच की ज़रूरत बताई है.
चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस ताज़ा बयान पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.