मोदी सरकार द्वारा लाये गए तीन कृषि
क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए किसानों को चार महीने पूरे हो गये हैं.
इस अवसर पर किसान संगठनों ने
शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान किया है.
बंद की अपील संयुक्त किसान मोर्चे
ने की है जो पंजाब के क़रीब चालीस किसान संगठनों और अन्य राज्यों के कई और किसान संगठनों
के किसानों की एक संयुक्त समिति है.
26 नवंबर 2020 को दिल्ली के पड़ोसी
राज्यों से आये किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार द्वारा लाये गए कृषि क़ानूनों
का विरोध करना शुरू किया था और सरकार से इन क़ानूनों को रद्द करने की माँग की थी.
साथ ही किसान संगठनों की माँग है
कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर फसलों की ख़रीद जारी रखे और इससे
संबंधित क़ानूनी प्रावधान लागू किये जायें.
संयुक्त किसान मोर्चा के दर्शन पाल
सिंह ने कहा कि किसान बीते चार महीने से दिल्ली में धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार
किसानों की माँग पूरी करने की बजाय उनके आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें कर रही
है.
उन्होंने अपील की है कि "इस बंद को क़ामयाब करने के लिए किसान साथी और दूसरे समर्थक शांतिपूर्ण तरीक़े से
लोगों से अपील करें और लोगों से दुकानें बंद करने की गुज़ारिश करें."
उन्होंने कहा कि किसान सरकार पर दवाब
बनाने के लिए भारत बंद का आह्वान कर रहे हैं, इसका उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं
है.
उन्होंने कहा, "एंबुलेंस और इमरजेंसी
सेवाओं के लिए किसी तरह की कोई बाधा उत्पन्न ना करें. पंजाब के अनंतपुर में जो लोग
होला-मोहल्ला मनाने जा रहे हैं, उन्हें ना रोका जाये."
ऑल इंडिया किसान सभा के नेता कृष्ण
प्रसाद ने कहा है कि किसानों का आंदोलन 112 दिनों से चल रहा है और ये अपने आप में एक
बड़ी उपलब्धि है, आने वाले समय में ये आंदोलन और तेज़ ही होगा.
उन्होंने कहा कि भारत बंद के दौरान
राज्यों, ज़िलों. तहसीलों और गाँव के स्तर पर विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा.
माना जा रहा है कि इस कारण 12 घंटों
तक यानी सवेरे 6 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक रेल और सड़क मार्ग पर यातायात प्रभावित
हो सकता है.
भारतीय ट्रेड यूनियनों की फ़ेडरेशन
सीटू के अनुसार, 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन इस भारत बंद का समर्थन कर रही हैं.
एक बयान जारी कर सीटू ने सरकार से तीनों
कृषि क़ानूनों को वापस लेने की माँग के साथ-साथ चार लेबर कोड भी वापिस लिये जाने की
माँग की है.
कांग्रेस ने किसानों के बुलाए भारत
बंद का समर्थन करने का निर्णय लिया है.
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप
सिंह सुरजेवाला ने कहा कि "26 मार्च को प्रस्तावित शांतिपूर्ण एवं गांधीवादी भारत
बंद का कांग्रेस पार्टी समर्थन करती है."
कांग्रेस अब तक किसानों की माँगों का
समर्थन करती आई है और केंद्र सरकार से कृषि क़ानून वापिस लेने की माँग करती आई है.
वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री
वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने किसानों का साथ देने और भारत बंद का समर्थन करने का फ़ैसला
किया है.
उनका कहा है कि वो विशाखापत्तनम स्टील
प्लांट के निजीकरण करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का भी विरोध करते हैं.
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को राज्य
की सरकारी बस सेवा सवेरे से लेकर दोपहर के एक बजे तक बाधित रहेगी.
ओडिशा कांग्रेस ने भी शुक्रवार को होने
वाले भारत बंद का समर्थन किया है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निरंजन
पटनायक ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की समस्या और उनकी माँगों पर कोई ध्यान नहीं
दे रही है.