कोविड-19: फ्रांस, जर्मनी और इटली ने एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन पर रोक लगाई

यूरोप में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन लगाने के बाद ख़ून के थक्के से संबंधित दिक्कतों के कई मामले सामने आए हैं.

लाइव कवरेज

  1. अमेरिका ने की संपर्क की कोशिशें लेकिन उत्तर कोरिया ‘नहीं दे रहा जवाब’

    किम जॉन्ग उन

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने बताया है कि वह उत्तर कोरिया की सरकार से फ़रवरी से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है लेकिन उनकी ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है.

    अधिकारियों ने बताया है कि अमेरिका कई तरीक़ों से उत्तर कोरिया से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है ताकि दोनों देशों के बीच तनाव कम किया जा सके.

    उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के कारण दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है.

    पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शासक किम जॉन्ग-उन के बीच तीन बैठकें पहले हो चुकी हैं.

    हालांकि, यह वार्ता नाकाम रही क्योंकि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों को समाप्त करने से इनकार कर दिया था. अमेरिकी और पश्चिमी ताक़तों की यह मांग रही है कि उत्तर कोरिया सबसे पहले परमाणु हथियारों को नष्ट करे.

    उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने अभी तक जो बाइडन को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में भी स्वीकृति नहीं दी है.

    अमेरिका ने उत्तर कोरिया से संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया मिशन के ज़रिए संपर्क करने की कोशिशें की हैं.

    एक अमेरिकी अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि उत्तर कोरिया के साथ संपर्क की ‘कई कोशिशें’ की गई थीं लेकिन उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन उत्तर कोरिया के लिए अपनी नीति की समीक्षा की घोषणा कर चुके हैं जिसको अप्रैल में सार्वजनिक किया जाएगा.

  2. असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा, बीजेपी मुस्लिम विरोधी पार्टी नहीं, पर देश के दुश्मनों की पहचान ज़रूरी

    सर्वानंद सोनोवाल

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    असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा है कि ‘बीजेपी मुस्लिम विरोधी पार्टी है – यह एक मिथ है.’

    उन्होंने कहा, “पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का पालन करती है और प्रदेश में कहीं किसी आदमी को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा गया.”

    द हिन्दू अख़बार को दिये इंटरव्यू में 59 वर्षीय सोनोवाल ने कहा, “हमने लोकतंत्र की भावना और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को बरक़रार रखा है. लेकिन हमें असम के दुश्मनों की पहचान करनी होगी. हम ऐसी ताक़तों को कभी अनुमति नहीं देंगे जो ना सिर्फ़ राष्ट्र के लिए, बल्कि हमारी कला, संस्कृति, भूमि और भाषा के लिए भी ख़तरा हैं.”

    आगामी असम विधानसभा चुनाव के लिए सोनोवाल ने माजुली से अपना नामांकन दाखिल किया है.

    भाजपा की अगुवाई वाले महागठबंधन की सरकार में सोनोवाल के पाँच साल बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों से बचे रहे, लेकिन उन्हें एनआरसी और सीएए जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

    सोनोवाल के प्रतिद्वंद्वी कहते हैं कि सीएए की वजह से असम में बांग्लादेशी हिन्दुओं की बाढ़ आ जाएगी जो असम की स्थानीय संस्कृति और भाषा के लिए बड़ी चुनौती होगी.

    मगर सोनोवाल का मानना है कि विपक्ष के लोग जानबूझकर सीएए को मुद्दा बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “ये तिल का ताड़ बनाने जैसी बात है. कुछ तत्व अपने निजी हितों को पूरा करने के लिए सीएए के आसपास झूठ का जाल बिछा रहे हैं. कुछ ने कहा कि सीएए की वजह से एक करोड़ हिन्दू बांग्लादेशी भारत में आ जाएंगे. कुछ इसे दो करोड़ बताते हैं. लेकिन समय के साथ उनके झूठ उजागर हो गए. लोगों ने इसे देखा और हमें पंचायत चुनाव (दिसंबर, 2018), आदिवासी परिषद चुनाव (जनवरी, 2019) और 2019 के लोकसभा चुनाव में स्पष्ट जनादेश दिया. लोग जानते हैं कि सीएए देश की अखंडता को नुक़सान नहीं पहुँचाता है. और हम इसमें संशोधन करने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं. कांग्रेस ने भी यह किया था.”

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    पर आपको क्यों लगता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में लोग आपको वोट करेंगे? इस सवाल पर सोनोवाल ने कहा, “क्योंकि हमारे सत्ता में आने के बाद, लोगों ने अराजकता, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, आतंक और बिचौलियों के शासन को समाप्त होते देखा और सुशासन, शांति, योजनाओं के उचित कार्यान्वयन की शुरुआत देखी. हम परफ़ेक्ट होने का दावा नहीं करते, लेकिन लोगों ने हमें काम करते देखा है. हमने ऐसे मुद्दों का संज्ञान लिया जो लोगों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि लोग चाहते हैं कि हम फिर से बागडोर संभालें. असम में कोई ‘एंटी-इनकम्बेंसी’नहीं है.”

    इस बार के चुनाव में बीजेपी के सामने कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाला एक बड़ा गठबंधन है जिसमें आठ दल शामिल हैं. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट का नेतृत्व करने वाले बदरुद्दीन अजमल ने कहा है कि ‘बीजेपी को असम से निकाल फेंकने उनका लक्ष्य है.’ असम में क़रीब 35 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. क्या ये सब उनके लिए चुनावी लड़ाई को मुश्किल नहीं बनाता?

    इसके जवाब में सोनोवाल ने कहा, “कांग्रेस और एआईयूडीएफ़, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. उनके विचार और सिद्धांत एक जैसे हैं. वो हमेशा हमारे लोगों के अस्तित्व को ख़तरे में डालने वाली ताक़तों का साथ देते हैं. लोगों को उनका ढांचा समझ आ चुका है और भले ही उनके गठबंधन में कितनी भी पार्टियाँ हों, लोग उन्हें नकार देंगे. लोग जानते हैं कि कौन उन्हें शांति, विकास और स्थिरता दे सकता है.”

  3. नमस्कार!

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