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जम्मू और कश्मीर में ग़ैर क़ानूनी ढंग से रह रहे 155 रोहिंग्या जेल भेजे गए -आज की बड़ी ख़बरें

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने लंबे समय से रह रहे म्यांमार के अवैध प्रवासियों के बायोमीट्रिक और अन्य ज़रूरी विवरणों को इकट्ठा करने के लिए जम्मू में शनिवार को एक विशेष अभियान चलाया.

लाइव कवरेज

  1. इमरान ख़ान ने हासिल किया विश्वास मत, समर्थन में पड़े 178 वोट

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत हासिल कर लिया है. 342 सीटों वाली नेशनल असेंबली में उन्हें विश्वास मत हासिल करने के लिए 172 वोट चाहिए थे.

    क्रिकेटर से राजनेता बने 68 वर्षीय इमरान ख़ान ने बुधवार को अपने वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज शेख़ बहुत क़रीबी मुक़ाबले में सीनेट चुनाव हारने के बाद निचले सदन में विश्वास मत हासिल करने का फ़ैसला किया था.

    सीनेट चुनावों में वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ इस्लामाबाद की सीट पर कड़े मुक़ाबले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से हार गए थे.

    इस हार के बाद ये सवाल पैदा होने लगे थे कि क्या इमरान ख़ान के पास सदन में बहुमत है या नहीं?

    इसके बाद ही इमरान ख़ान ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत साबित करने की बात कही थी.

    वहीं इस उलटफेर के बाद विपक्ष ने इमरान ख़ान से इस्तीफ़े की माँग की थी.

    विश्वास मत हासिल करने के दौरान क्या हुआ सदन में?

    शनिवार को विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने एक सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया. जिसमें कहा गया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान, पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 91 के खंड (7) के तहत इस सदन में विश्वास की माँग करते हैं.

    राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के निर्देशों पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान इमरान को 342 सदस्यीय संसद के निचले सदन में 172 वोटों की ज़रूरत थी और उन्होंने 178 वोट हासिल किए.

    सत्तारूढ़ गठबंधन में 181 सदस्य थे लेकिन एक सांसद फ़ैसल वोडा के इस्तीफ़े के बाद यह संख्या 180 रह गई. वहीं विपक्षी गठबंधन के सदस्यों की संख्या 160 है, जबकि एक सीट खाली है.

    नेशनल असेंबली में सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सदस्यों की संख्या 157 थी, जो फ़ैसल वोडा के इस्तीफ़े के बाद घटकर 156 रह गई. हालाँकि सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि वोडा इस विश्वास मत में वोट दे सकते हैं क्योंकि अभी उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया गया है. जबकि विपक्ष यह कहता रहा कि चूँकि उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है तो वे वोट नहीं डाल सकते.

    यह शक्ति परीक्षण विपक्ष के बिना हुआ क्योंकि 11 दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने वोटिंग का बहिष्कार किया था.

  2. महिलाओं को लुभाता कबड्डी का खेल

    कबड्डी भारत में महिलाओं के लिए नई संभावनाओं से भरा खेल है.

    पिछले साल बीबीसी के एक शोध में पाया गया था कि कबड्डी में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी में असमानता बाकी खेलों के मुकाबले कम है. लेकिन क्यों?

    ऐसी क्या वजहें हैं जो भारतीय महिलाओं को कबड्डी की ओर खींचती हैं.

    बीबीसी संवाददाता जाह्नवी मूले और दलजीत अमी की ये रिपोर्ट देखिए...

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लिए एक नया एजुकेशन बोर्ड बनाने की घोषणा की

    दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि ‘उनकी कैबिनेट ने दिल्ली बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन के गठन को मंज़ूरी दे दी है.’

    उन्होंने बताया, “इस बोर्ड की एक गवर्निंग बॉडी होगी, जिसकी अध्यक्षता दिल्ली के शिक्षा मंत्री करेंगे. रोज़मर्रा की कार्यवाही को देखने के लिए बोर्ड की एक एग्ज़ीक्यूटिव बॉडी भी होगी जिसके लिए एक सीईओ नियुक्त किये जायेंगे. इन दोनों में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा. मसलन, कुछ उद्यमी, शिक्षा विशेषज्ञ और कुछ स्कूलों के प्रिंसिपल इसमें रहेंगे.”

    केजरीवाल ने कहा, “ये अंतरराष्ट्रीय स्तर का बोर्ड बनाया जा रहा है. इंटरनेशनल प्रैक्टिस को हम स्कूलों और बोर्ड में लेकर आयेंगे. सेशन 2021-22 में हम 20-25 सरकारी स्कूलों को इस बोर्ड में शामिल करने वाले हैं. हालांकि, दिल्ली में 1000 सरकारी और क़रीब 1700 निजी स्कूल हैं और हमें उम्मीद है कि 4-5 साल में स्वेच्छा से वो सभी इस बोर्ड में शामिल हो जायेंगे.”

    केजरीवाल ने बताया कि जिन 20-25 सरकारी स्कूलों को दिल्ली बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन के अंतर्गत लाया जाने वाला है, उनकी सीबीएसई बोर्ड से मान्यता रद्द हो जायेगी.

    उन्होंने कहा कि इन चुनिंदा सरकारी स्कूलों का चयन स्कूल के प्रिंसिपलों से बात करके किया जायेगा. साथ ही बच्चों के अभिभावकों और अध्यापकों से भी इस बारे में बात की जायेगी.

    उन्होंने कहा कि ‘यह बोर्ड तीन लक्ष्यों को पूरा करेगा. इसके ज़रिये हमें ऐसे बच्चे तैयार करने हैं जो कट्टर देशभक्त हों, जो आने वाले समय में हर क्षेत्र में देश की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार हों. हमारे बच्चे अच्छे इंसान बनें और ये बोर्ड बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए तैयार करेगा.’

  4. दस लाख का नोट: आर्थिक संकट और महंगाई के बीच वेनेज़ुएला सरकार का नया क़दम

    वेनेज़ुएला की केंद्रीय बैंक ने देश में भयंकर मुद्रास्फीति के बीच दस लाख बोलिवार का नया करेंसी नोट जारी किया है.

    मौजूदा विनियम दर पर दस लाख बोलिवार का यह करेंसी नोट आधा अमेरिकी डॉलर के बराबर होगा.

    केंद्रीय बैंक के मुताबिक़, देश की अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

    केंद्रीय बैंक ने कहा है कि ‘अगले सप्ताह में दो लाख और पाँच लाख बोलिवार के करेंसी नोट भी जारी किये जायेंगे.’ फ़िलहाल, वेनेज़ुएला में दस हज़ार, बीस हज़ार और पचास हज़ार बोलिवार के करेंसी नोट चलन में हैं.

    तेल की क़ीमतों में आई गिरावट के कारण वेनेज़ुएला पिछले क़रीब सात वर्षों से आर्थिक संकट की चपेट में है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वेनेज़ुएला में मुद्रास्फीति 2,600 प्रतिशत से अधिक चल रही है.

    वेनेज़ुएला में बीते कुछ समय से बहुत से लोग स्थानीय मुद्रा की जगह अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल करते रहे हैं. इसी वजह से वेनेज़ुएला की सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाना चाहती है, क्योंकि स्थानीय करेंसी नोट बहुत जल्दी अपना मूल्य खो देते हैं.

    वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अपनी अर्थव्यवस्था पर संकट के लिए अमेरिका के लगाये गये प्रतिबंधों को दोषी ठहराते रहे हैं.

    जबकि आलोचकों का कहना है कि वेनेज़ुएला की आर्थिक मुश्किलों की जड़ें मादुरो और उनके गुरु रहे ह्यूगो शावेज़ की हस्तक्षेपवादी नीतियों के कारण है.

  5. म्यांमार: मोबाइल में कैद हो रही सुरक्षाबलों की बर्बरता

    म्यांमार में पिछले महीने हुए सैन्य तख़्तापलट का विरोध करने वालों ने ख़ुद पर हो रहे ज़ुल्म को दुनिया के सामने लाने के लिए एक हथियार चुना है और वो है उनका मोबाइल फ़ोन.

    प्रदर्शनकारी अपने मोबाइल फ़ोन के कैमरे में क़ैद कर रहे हैं कि कैसे वहां की सेना लोकतंत्र समर्थकों पर डंडे और गोलियां बरसा रही है.

    देखिए, कैसे ये सिटिज़न जर्नलिस्ट सोशल मीडिया के ज़रिए वहाँ की ज़मीनी हक़ीकत को सामने लाने की कोशिश रहे हैं.

  6. किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे, एक्सप्रेस-वे जाम करने के लिए जुट रहे किसान

    देश में हो रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को आज सौ दिन पूरे हो गए हैं. इस मौक़े पर नई दिल्ली को अन्य राज्यों से जोड़ने वाले छह लेन के एक्सप्रेस-वे को बंद करने के लिए किसान एकजुट हो रहे हैं.

    किसानों का कहना है कि इसके ज़रिए वो सरकार पर दवाब डालना चाहते हैं और चाहते हैं कि सरकार विवादित कृषि क़ानून वापिस ले.

    सितंबर 2020 में लागू किये गए कृषि क़ानूनों के विरोध में बड़ी संख्या में किसान कारों और ट्रैक्टरों पर सवार होकर एक्सप्रेस-वे पर पहुँच रहे हैं.

    पंजाब के 68 साल के अमरजीत सिंह ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि “मोदी सरकार ने लोगों के इस विरोध प्रदर्शन को 'ईगो' यानी अपने 'अहम् का मुद्दा' बना लिया है. वो किसानों का दुख नहीं देख पा रहे. उन्होंने हमारे सामने विरोध के अलावा कोई और रास्ता छोड़ा ही नहीं.”

    आज कुंडली-मानेसर-पलवल हाईवे जाम करेंगे किसान

    किसान एकता मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि 'किसान कुंडली-मानेसर-पलवल हाईवे जाम करेंगे.'

    उन्होंने कहा, “किसान 11 बजे के बाद रास्ता जाम करेंगे और सड़क पर धूप में बैठकर विरोध जताएंगे.”

    वहीं टिकरी बॉर्डर पहुँचे राकेश टिकैत ने कहा, “हमें अपने लिए गर्मियों और बरसात के दिनों की व्यवस्था करनी होगी, लेकिन हम यहाँ से नहीं उठेंगे. सरकार ने कहा है कि कृषि क़ानूनों से लाभ होगा. हमारा कहना है कि हमें उस व्यक्ति से मिला दो जो हमें बता दे कि क्या लाभ होगा और कैसे होगा. हम ये गणित समझना चाहते हैं.”

    उन्होंने कहा कि "आंदोलन लंबा चलने वाला है. माँग पूरी होने पर किसान ख़ुद चला जाएगा."

    बीते साल दिसंबर के महीने से ही हज़ारों की संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं.

    दिसंबर की कड़कड़ाती ठण्ड के गुज़र जाने के बाद, अब सीमा पर किसान गर्मियों की तैयारियाँ कर रहे हैं.

    उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी बात नहीं मानती, वो पीछे नहीं हटेंगे.

    किसानों का विरोध प्रदर्शन अधिकतर शांतिपूर्ण रहा है, लेकिन 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें एक किसान की मौत हो गई थी.

    उस दिन कुछ लोगों ने दिल्ली के लाल क़िले पर सिखों का पारंपरिक झंडा फहरा दिया था. बाद में इस मामले में पुलिस ने कई पत्रकारों पर उस दिन की घटनाओं को ग़लत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया.

  7. भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल पुलिस की फ़ायरिंग में एक युवक की मौत के बाद तनाव

    समीरात्मज मिश्र

    बीबीसी हिंदी के लिए

    उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ज़िले में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली पुलिस के साथ हुई झड़प और फिर गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई और एक युवक घायल हो गया.

    इस घटना के बाद सीमा पर स्थित गांवों के लोगों में काफ़ी नाराज़गी है और तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है.

    पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश ने बीबीसी को बताया कि फ़िलहाल शांति बनी हुई है और नेपाली अधिकारियों के साथ हुई बैठक में आगे से ऐसी घटनाओं के न होने पर क़दम उठाने की बात कही गई है.

    एसपी जयप्रकाश का कहना था, “चार युवक सीमा पर करके गए थे. झड़प और गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई है जबकि दूसरे घायल युवक को अब लखनऊ रेफ़र कर दिया गया है. बाक़ी दो युवक सकुशल अपने घर वापस लौट आए हैं. मृत युवक का शव पोस्टमॉर्टम के बाद नेपाल पुलिस ने युवक के परिजनों को सौंप दिया है. हम घटना के कारणों की अपने स्तर से जांच कर रहे हैं.”

    गुरुवार को पीलीभीत ज़िले के कुछ युवक नेपाल सीमा पार कर गए थे और किसी बात पर स्थानीय पुलिस से उनका विवाद हो गया.

    विवाद के बाद पुलिस वालों की ओर से हुई गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई और एक युवक घायल हो गया. तीनों युवकों ने भागकर अपनी जान बचाई.

    नेपाल पुलिस का दावा था कि युवक तस्करी में शामिल थे लेकिन पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश का कहना है कि हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. चारों युवक एक ही गांव के थे.

    नेपाल पुलिस के इस फ़ायरिंग के बाद स्थानीय नागरिकों में काफ़ी आक्रोश है.

    वहीं, इस घटना के बाद यूपी से लगी नेपाल की सभी सीमाओं पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है और चौकसी बढ़ा दी गई है.

  8. किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे

    किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे हो गए हैं. इस मौक़े पर हरियाणा के पलवल में प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी.

    कैमरा: बुशरा शेख़

  9. नौवीं की छात्रा ने बनाई अनोखी व्हीलचेयर

    तेलंगाना की नौवीं क्लास में पढ़ने वाली एक बच्ची की व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले लोगों की ज़िंदगी और आसान कर दी है.

    उन्होंने एक हाइड्रॉलिक व्हील चेयर डिज़ाइन की है जिसे ज़मीन की सतह से ऊपर उठाया जा सकता है.

    उनकी उस उपलब्धि के बाद राज्य सरकार ने उन्हें एक घर देने का भी एलान किया है.

    देखिये, बीबीसी संवाददाता बाला सतीश की रिपोर्ट.

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम पहली पारी में 365 रन बनाकर आउट, वाशिंगटन सुंदर पहला शतक पूरा नहीं कर पाये

    इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच में भारतीय टीम पहली पारी में 365 रन बनाकर आउट हो गई.

    भारतीय टीम ने पहली पारी में इंग्लैंड पर 160 रन की बढ़त बना ली है. इंग्लैंड टीम पहली पारी में 205 रन बनाकर आउट हुई थी.

    मुक़ाबले के तीसरे दिन, भारतीय गेंदबाज़ वाशिंगटन सुंदर अपना शतक पूरा नहीं कर पाये. उन्होंने 174 गेंदों पर, एक छक्के और 10 चौकों की मदद से 96 रन जोड़े.

    वॉशिंगटन सुदंर टेस्ट क्रिकेट में अपने पहले शतक के बेहद क़रीब थे, लेकिन इंग्लैंड टीम ने दूसरे छोर पर तेज़ी से विकेट लेकर खेल समाप्त कर दिया.

    भारत की पहली पारी में, बल्लेबाज़ ऋषभ पंत ने अपना शतक पूरा किया. उन्होंने 118 गेंदों पर 101 रन बनाये और वे जेम्स एंडरसन की गेंद पर आउट हुए.

  11. कोरोना के मामले घटते देख अपनी कोशिशों में ढील ना दें: विश्व स्वास्थ्य संगठन

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहॉनम गीब्रिएसुस ने सभी देशों से अपील की है कि ‘वो कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ अपने प्रयासों में कमी ना होने दें.’ यह अपील उन्होंने इस चेतावनी के साथ की है कि ‘कोरोना महामारी की तीसरी या चौथी वेव भी आ सकती है.’

    उन्होंने माना कि लोग कोविड से जुड़े प्रतिबंधों का पालन करते-करते ऊब चुके हैं. पर उन्होंने कोविड की गिरती मृत्यु दर का हवाला देते हुए कहा कि ‘यह समझना एक भूल होगी कि महामारी ख़त्म हो गई है.’

    उन्होंने ब्राज़ील की स्थिति पर विशेष रूप से चिंता ज़ाहिर की, जहाँ राष्ट्रपति ज़ाएर बोलसोनारो ने कोविड से जुड़े प्रतिबंधों को ग़ैर-ज़रूरी करार दिया है.

    उन्होंने कहा, “स्थिति वाक़ई गंभीर है और हम इसे लेकर चिंतित हैं. ब्राज़ील सरकार को जन-स्वास्थ्य के क्षेत्र में थोड़ी आक्रामक कोशिशें करने की ज़रूरत है. एक ओर जहाँ दुनिया के अधिकांश देशों में संक्रमण के मामले लगातार घट रहे हैं, वहीं ब्राज़ील की स्थिति में कोई ख़ास सुधार देखने को नहीं मिला है. हमें लगता है कि ब्राज़ील की सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि ब्राज़ील को कुछ कड़े क़दम उठाने होंगे, ताकि कोरोना संक्रमण उसकी सीमाओं से बाहर ना जाने लगे.

    वे बोले, “हमारी चिंता सिर्फ़ ब्राज़ील तक सीमित नहीं है. हमें डर है कि कहीं ब्राज़ील के पड़ोसी देशों में भी यह स्थिति ना बन जाये. इस वक़्त यह पूरे लातिन अमेरिका के लिए एक ख़तरा है.”

  12. हॉन्ग-कॉन्ग के लोकतंत्र पर चीन ने कसा 'शिकंजा'

    नेशनल पीपल्स कांग्रेस को संबोधित करते हुए चीन के प्रीमियर ली केचियांग ने कहा कि हॉन्ग-कॉन्ग में कोई दख़लंदाज़ी न करे.

    उन्होंने हॉन्ग-कॉन्ग की चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर बदलाव करने का भी ऐलान किया और कहा कि "यहाँ की चुनाव व्यवस्था में व्यापक बदलाव किये जाएँगे ताकि हॉन्ग-कॉन्ग का भार 'देशभक्त' लोगों को दिया जा सके."

  13. दलाई लामा ने लगवाई कोरोना वैक्सीन

    बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने आज धर्मशाला के एक अस्पताल में कोरोना का टीका लगवाया है.

    टीका लगवाने के बाद उन्होंने कहा, "गंभीर समस्याओं को होने से रोकने में ये वैक्सीन बहुत मददगार है, दूसरे मरीज़ों को भी ये लगवाना चाहिए."

  14. तेल की बढ़ती क़ीमतों पर क़ाबू करना केंद्र और राज्य सरकार, दोनों की ज़िम्मेदारी: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों को ‘सरकार के लिए धर्म-संकट’ बताते हुए कहा कि ‘वे उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को समझती हैं, लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ी हुई क़ीमतों के बारे में केंद्र और राज्य सरकार, दोनों को मिलकर बात करनी चाहिए क्योंकि इनकी बिक्री से होने वाले मुनाफ़े को दोनों के बीच बाँटा जाता है.’

    शुक्रवार को इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प्स के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “जब केंद्र सरकार तेल पर टैक्स यानी एक्साइज़ ड्यूटी के ज़रिये राजस्व वसूलती है, तो उसका 41 प्रतिशत राज्यों को जाता है. ऐसे में ये कहना कि तेल की बढ़ती क़ीमत के लिए सिर्फ़ केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है, सही नहीं है. इसलिए मेरा सुझाव है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को इस बारे में बैठकर बात करनी चाहिए.”

    जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने किसी राज्य की सरकार से इस बारे में बात की है? तो उन्होंने कहा कि “अब तक इस बारे में किसी राज्य से उनकी चर्चा नहीं हुई.”

    ग़ौरतलब है कि पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों का एक बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का ही होता है.

    दिल्ली में 90 रुपये लीटर से ऊपर जो पेट्रोल बिक रहा है, उसमें क़रीब 50 रुपये टैक्स ही देना पड़ रहा है. इसीलिए यह माँग उठ रही है कि पेट्रोल और डीज़ल पर लगने वाले टैक्स में कटौती की जाये.

    क्या पेट्रोल-डीज़ल को जीएसटी में शामिल किया जायेगा? इस पर वित्त मंत्री ने कहा, “इस बारे में जीएसटी काउंसिल विचार कर सकती है.”

    इस दौरान वित्त मंत्री ने फ़िल्म निर्माता अनुराग कश्यप और अभिनेत्री तापसी पन्नू के ठिकानों पर हुई आयकर विभाग की रेड के बारे में भी बात की.

    उन्होंने कहा, “जब पिछली सरकार में आयकर विभाग की रेड होती थी, तो ठीक था और जब इस सरकार में रेड होती है, तो वो ग़लत है. ये वही लोग हैं जिनके यहाँ 2013 में भी रेड हुई थी. पर तब यह मुद्दा नहीं था, जिसे अब मुद्दा बनाया जा रहा है.”

  15. भवानीपुर से हारने का डर ममता बनर्जी को नंदीग्राम लाया: कैलाश विजयवर्गीय

    तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के फ़ैसले पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि 'भवानीपुर से चुनाव हारने के डर से ममता ने ये फ़ैसला लिया है.'

    उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी भवानीपुर से हारने के डर से नंदीग्राम आईं है और लेकिन वो वहां भी हारेंगी."

    उन्होंने ये भी जानकारी दी कि चुनाव के लिए बीजेपी के उम्मीदवारों के नामों का अंतिम फ़ैसला हो गया है और जल्द इसकी घोषणा की जाएगी.

  16. फ़्रीडम हाउस की रिपोर्ट को भारत सरकार ने बताया भ्रामक, कहा- 'सभी को है समानता का अधिकार'

    भारत सरकार ने शुक्रवार को अमरीकी संगठन फ़्रीडम हाउसकी रिपोर्ट में भारत के दर्जे को ’स्‍वतंत्र देश’ से घटाकर ’आंशिक रूप से स्‍वतंत्र देश’ किये जाने को भ्रामकऔर अनुचित बताया है.

    एक बयान जारी कर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि देश में संघीय ढांचा है और अनेक राज्‍यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं जो ये बताता है कि भारत में लोकतंत्र है और विभिन्‍न विचारधाराओं को यहां महत्‍व दिया जाता है.

    बयान में कहा गया है कि देश में किसी ख़ास समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव की नीतियां अपनाए जाने का आरोप ग़लत है और संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार के तहत सरकार के लिए सभी नागरिक एकसमान हैं.

    सरकार ने कहा कि क़ानूनों पर अमल करते समय किसी ख़ास समुदाय का वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जाता और एक समान प्रक्रिया का पालन किया जाता है.

    साल 2019 में दिल्ली में हुए हिंसक दंगों के बारे में सरकार ने अपने बयान में कहा कि क़ानून और व्‍यवस्‍था लागू करने वाली एजेंसियों ने तेज़ी से और पूरी निष्पक्षता से अपना काम किया. उन्होंने स्थिति को काबू में करने के लिए उचित कार्रवाई की.

    राजद्रोह क़ानून के दुरुपयोग को लेकर, सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस प्रशासन राज्य के विषय हैं और क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों के पास होती है, क़ानून को अमल में लाने वाली एजेंसियां व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाती हैं.

    सरकार ने कहा कि देश में देश के अनुच्छेद 19 के तहत संविधान सभी को अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार देता है है और चर्चा और असहमति भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा रहे हैं. हालांकि सरकार ने ये भी कहा कि कभी-कभी क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित किया जाता है.

    क्या कहा गया था रिपोर्ट में?

    इसी सप्ताह वॉशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक फ़्रीडम हाउस ने अपनी रिपोर्ट‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2021’ में भारत के फ्रीडम स्कोर को घटा दिया है. रिपोर्ट में भारत का दर्जा पिछले साल के "फ्री" यानी स्वतंत्र से "पार्टली फ्री" यानी आंशिक रूप से स्वतंत्र कर दिया गया है.

    इंटरनेट फ्रीडम स्कोर के आधार पर भी भारत को रिपोर्ट में आंशिक रूप से स्वतंत्र का दर्जा दिया गया है.

    इस रिपोर्ट में दुनियाभर के देशों में राजनीतिक और नागरिक स्वतंत्रता का आकलन किया जाता है. इसके अलावा इसमें कुछ चुनिंदा जगहों को मानवीय और राजनीतिक स्वतंत्रता के कई मानकों के आधार पर परखा जाता है. सभी मानकों के आधार पर इस रिपोर्ट में देशों को स्कोर दिया जाता है.

  17. नमस्कार!

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