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योगी आदित्यनाथ ने बंगाल पहुँचकर ममता सरकार पर किया हमला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर राज्य में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है.

लाइव कवरेज

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, लोकसभा और राज्यसभा टीवी का विलय, दोनों बने अब संसद टीवी

    सरकार ने लोकसभा टेलीविज़न और राज्यसभा टेलीविज़न का विलय संसद टेलीविज़न में कर दिया है.

    सरकार द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन के साथ बातचीत कर ये फ़ैसला लिया गया है.

    कम से कम एक साल तक या अगले आदेश तक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी रवि कूपर को संसद टीवी के सीईओ का पदभार सौंपा गया है.

    इससे पहले प्रसार भारती पूर्व चैयरमैन सूर्य प्रकाश के नेतृत्व में इस सलाह देने के लिए एक कमिटी का गठन किया गया था. कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस चैनल के ज़रिए दोनों सदनों की कार्यवाही लाइव दिखानी चाहिए, साथ ही गणतंत्र पर एक विशेष कार्यक्रम भी दिखाया जा सकता है.

    लोकसभा टेलीविज़न साल 2006 में लॉन्च किया गया था, जबकि राज्यसभा टेलीविज़न साल 2011 में अस्तित्व में आया था.

  2. चीन के साइबर हमले के मामले में भारत का साथ दे अमेरिका - अमेरिकी सांसद

    अमेरिका के एक वरिष्ठ सांसद फ्रैंक पालोन ने बाइडन प्रशासन से अपील की है कि भारत के पावर ग्रिड पर चीनी साइबर हमले के मामले में वो भारत का पक्ष लें.

    सोमवार को एक ट्वीट में फ्रैंक पलोन ने लिखा, “अमेरिका को अपने रणनीतिक साझेदार का साथ देना चाहिए और भारत के पावर ग्रिड पर चीन के ख़तरनाक हमले का विरोध करना चाहिए. इस हमले के महामारी के दौरान कारण अस्पतालों में बिजली कट गई और उन्हें जेनेरेटरों का सहारा लेना पड़ा.”

    उन्होंने लिखा, “हम चीन को ताकत और धमकी के बल पर इलाक़े में प्रभुत्व कायम नहीं करने दे सकते.”

    भारत ने क्या कहा

    इधर अमेरिकी कंपनी के शोध पर सोमवार को भारत के विद्युत मंत्रालय ने साइबर हमले में बारे में कहा था कि हमले का कोई असर नहीं पड़ा है. मंत्रालय ने न तो चीन साइबर हमले का ज़िक्र किया और न ही मुबंई पावर ग्रिड का.

    मंत्रालय ने कहा, “जिस ख़तरे की बात रिपोर्ट में की गई है उसके बारे में पावर सिस्टम ऑपरेशन कोऑपरेशन क केम पर कोई असर नहीं पड़ा है. इस तरह की घटना से न तो कोई डेटा लॉस हुआ है, न ही डेटा चुराया गया है.”

    अमेरिकी सरकार ने क्या कहा

    अमेरिकी गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उन्हें बारे में जानकारी है. प्रवक्ता ने कहा, “अधिक जानकारी के लिए हम आपको उस कंपनी के बारे में बता सकते हैं जिसने ये स्टडी की है. लेकिन साइबरस्पेस में ख़तरे के इस तरह के मामलों में गृह मंत्रालय अपने सहयोगियों के साथ मिल कर काम करता है.”

    प्रवक्ता ने कहा, “साइबरस्पेस में किसी एक देश के ख़तरनाक कदम पर हम गंभीरता से विचार करते हैं और हम एक बार ये दोहराना चाहते हैं कि साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल इंफ्रांस्ट्रक्चर और सप्लाई चेक की सुरक्षा को लेकर हम सहयोगियों के साथ मिल कर काम करते हैं.”

    साइबर सिक्योरिटी कंपनी की स्टडी

    इससे पहले विभिन्न देशों के इंटरनेट के इस्तेमाल का अध्ययन करने वाली अमेरिका की मैसाचुसेट्स स्थित साइबर सिक्योरिटी कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर ने अपनी हाल के एक रिपोर्ट में बताया था कि चीनी सरकार से जुड़े एक समूह के हैकर्स ने मैलवेयर के ज़रिए भारत के महत्वपूर्ण पावर ग्रिड को निशाना बनाया था.

    रिपोर्ट के अनुसार रेडएको नामक एक समूह ने भारतीय पावर सेक्टर को अपना निशाना बनाया है. इस गतिविधि की बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड नेटवर्क ट्रैफिक एनालिटिक्स और विश्लेषणों का मिलान कर पहचान की गई है. साइबर हमले की पहचान करने के लिए रिकॉर्डेड फ्यूचर प्लेटफॉर्म, सिक्योरिटी ट्रेल्स, स्पर, फारसाइट, आम ओपन सोर्स टूल्स और तकनीक के डेटा का इस्तेमाल किया गया.

    सोमवार को महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने इस बारे में अपने एक बयान में कहा कि 12 अक्तूबर 2020 को मुंबई में कई घंटों के पावर कट में साइबर घुसपैठ की संभावना के बारे में बिजली विभाग की शिकायत के आधार पर राज्य साइबर पुलिस विभाग ने जांच की है और इसकी रिपोर्ट मुझे और गृह मंत्री अनिल देशमुख को सौंप दी गई है. मैं इस पर विधानसभा में जानकारी दूंगा.

    12 अक्तूबर को मुंबई में क्या हुआ था?

    12 अक्तूबर 2020 को मुंबई के एक बड़े हिस्से में ग्रिड फेल होने के कारण बिजली चली गई थी. इससे मुंबई और आस-पास के महानगर क्षेत्र में जनजीवन पर गंभीर असर पड़ा था.

    इसकी वजह से लोकल ट्रेनें अपने सफ़र के बीच में ही रुक गई थीं और कोरोना महामारी के बीच हो रही छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएँ भी बाधित हुई थीं.

    बिजली गुल होने से उस दौरान मुंबई सेंट्रल, थाणे, जोगेश्वरी, वडाला, चेंबूर, बोरीवली, दादर, कांदीवली और मीरा रोड जैसे इलाक़े बुरी तरह प्रभावित हुए थे.

    2020 की शुरुआत से ही रिकॉर्डेड फ्यूचर्स इनसिक्ट ग्रुप को चीन के इस प्रोयोजित समूह की ओर से भारतीय प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर लक्षित घुसपैठ की गतिविधि देखने को मिली है.

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में छपी इस ख़बर के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या मुंबई में 12 अक्तूबर को हुआ पावर कट चीन की तरफ से भारत को एक सख्त चेतावनी तो नहीं थी.

    दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिंग ने सोमवार को इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसे बिना सबूत 'गैरज़िम्मेदाराना और ग़लत इरादों' से लगाया गया आरोप बताया है.

  3. पश्चिम बंगाल: चुनावों में टीएमसी का साथ देगी आरजेडी

    पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों मे लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस का साथ देगी.

    सोमवार को तेजस्वी यादव से ममता बनर्जी से मुलाक़ात की थी जिसके बाद उन्होंने कहा “जहां भी ज़रूरत पड़े हम ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं. हमारी पहली कोशिश है कि भाजपा को यहां पर बढ़ने से रोकना. ममता जी को जिताने में हम पूरी ताकत लगाएंगे. भाजपा ने देश के लोगों को ठगने का काम किया है.”

    वहीं मुलाक़ात के बाद ममता बनर्जी ने कहा है कि बीजेपी को यह संदेश मिलना चहिए कि ”अगर तेजस्वी लड़ रहे हैं तो हम लड़ रहे हैं.”

  4. अमेरिकी सरकार की चेतावनी, चीन के साथ काम करने से पहले इस बात का रखें ध्यान कंपनियां

    अमेरिकी सरकार ने देश में काम करने वाली कंपनियों को चेतावनी दी है कि वो ये सुनिश्चित करने की अधिक कोशिश करें कि चीन के साथ व्यापार के दौरान वो फोर्स्ड लेबर यानी ‘जबरन मज़दूरी‘ का लाभ नहीं ले रही हैं.

    इस संबंध में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेज़ेन्टेटिव कार्यालय ने कांग्रेस को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें सख्त तौर पर कहा है कि उत्पादन की प्रक्रिया में जबरन मज़दूरी करवाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है और कंपनियों को इसके लिए ज़िम्मेदारी लेते हुए ये सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद इस तरह न बनाए गए हों.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि ग़लत तरीके से व्यापार करने की चीन की उन कोशिशों को रोकने की वो ‘हरसंभव कोशिश करगें’ जिनसे अमेरिका के मज़दूरों और व्यापार को नुक़सान हो सकता है.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि देश-विदेश के उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पाद नहीं चाहिए जिनके उत्पादन में लोगों से ‘जबरन मज़दूरी‘ करवाई गई हो, और साथ ही व्यवस्थित तरीके से दमन करने वाले शासन के साथ कंपीटिशन करना मज़दूरों के हक में नहीं होगा.

    रिपोर्ट में चीन में वीगर मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को सरकार की ‘प्राथमिकताओं में से एक’ कहा गया है.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की नीति अब इस बात पर ध्यान केंद्रित करेगी कि चीनी सरकार द्वारा कथित तौर पर शिनजियांग प्रांत में वीगर और दूसरे अल्पसंख्यकों से करवाई जाने वाली जबरन मज़दूरी का लाभ अमेरिकी कंपनियां नहीं ले रही हैं.

    चीन खुद पर लगे इस तरह के आरोपों से इनकार करता रहा है.

    इसके साथ ही अब इस बात की संभावनाएं बढ़ गई हैं कि बाइडन प्रशासन इससे संबंधित नया क़ानून ला सकता है.

    बीबीसी बिज़नेस रिपोर्टर जोनाथन जोसेफ़ कहते हैं बीते महीने बाइडन ने शिनजियांग प्रांत में व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फ़ोन पर बात की थी.

    चीन इस तरह के आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी देशों की कंपनियों के लिए ये एक बड़ा मुद्दा है.

    बाइडन प्रशासन का कहना है कि नए क़ानून के अनुसार अब कंपनियों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि जिन उत्पादों को वो बेच रही हैं वो उनको बनाने में मानवाधिकारों का उल्लंघन न हुआ हो.

    इससे पहले मार्च 2020 में ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट नाम की एक थिंकटैंक ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि दुनिया के बड़े ब्रांड के लिए उत्पाद बनाने वाली चीन की फैक्ट्रियों में वीगर मुसलमानों समेत हज़ारों अल्पसंख्यकों को मुश्कित हालातों में मज़दूरों के तौर पर काम करवाया जा रहा है.

    रिपोर्ट में कहा गया था कि एक आकलन के अनुसार साल 2017 से 2019 के बीच 80,000 से अधिक वीगरों को पश्चिमी शिनजियांग के स्वायत्त प्रांत में फैक्टियों में काम करने के लिए ले जाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कइयों को सीधे डिटेन्शन सेंटर से वहां ले जाया गया है.

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में 83 बड़े ब्रांड के लिए उत्पादन करने वाली ऐसी फैक्ट्रियां हैं जहां जबरन मज़दूरी करवाई जाती है. इनमें एपल, नाइके और डेल जैसी कंपनियां शामिल हैं.

  5. नमस्कार!

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