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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के
अनुसार, बीते 24 घंटे में भारत में कोरोना संक्रमण के 11,649 नये मामले दर्ज किये
गये हैं और 9,489 लोग अस्पतालों में उपचार के बाद घर लौट गये हैं.
बीते 24 घंटे में 90 लोगों की
कोविड-19 से मौत हुई है जिन्हें मिलाकर भारत में कोविड से मरने वालों की संख्या एक
लाख 55 हज़ार 732 हो गई है.
भारत में सक्रिय मामलों की संख्या
अब 1 लाख 39 हज़ार के क़रीब रह गई है.
मंत्रालय ने बताया है कि टीकाकरण
अभियान के तहत अब तक क़रीब 83 लाख लोगों को कोविड वैक्सीन लगायी जा चुकी है.
पेरू में कोविड वैक्सीन लगवाने पर विदेश मंत्री को देना पड़ा इस्तीफ़ा
इमेज स्रोत, Twitter/Elizabeth Astete Rodríguez
पेरू की विदेश मंत्री एलिज़ाबेथ
एस्टेटे को कोविड वैक्सीन लगवाने की वजह से इस्तीफ़ा देना पड़ा है.
उन्होंने रविवार को यह स्वीकार
किया कि ‘उन्होंने देश में सरकारी टीकाकरण अभियान शुरू होने से
पहले और क्लीनिकल ट्रायल के बाहर, ख़ुद को कोरोना का टीका लगवाया.’ एलीज़ाबेथ के अनुसार, उन्होंने जनवरी में चीनी कंपनी
सिनोफ़ार्मा की वैक्सीन लगवाई थी.
इससे एक दिन पहले, राष्ट्रपति
फ़्रैनसिस्को सागस्ती ने स्वास्थ्य मंत्री पिलार माज़ेटी का इस्तीफ़ा मंज़ूर कर
लिया था. माज़ेटी ने अपना इस्तीफ़ा तब दिया, जब पूर्व राष्ट्रपति मार्टिन विज़कारा
के वक़्त से पहले वैक्सीन लगवा लेने को लेकर विवाद खड़ा हुआ.
मार्टिन विज़कारा को नवंबर में
भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अपना पद छोड़ना पड़ा था. ताज़ा वैक्सीन विवाद पर
उन्होंने कहा है कि ‘टीका लगवाने के लिए उन्होंने कोई लाइन नहीं तोड़ी है,
बल्कि ट्रायल में शामिल होकर उन्होंने यह टीका लगवाया.’
हालांकि, स्थानीय मीडिया ने उनके इस दावे पर सवाल
खड़े किये हैं.
एलिज़ाबेथ एस्टेटे ने पिछले साल नवंबर
में विदेश मंत्री का पद संभाला था.
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उन्होंने इस्तीफ़ा देने के बाद कहा कि “मुझे 22 जनवरी को टीका लगा था. यह टीका मैंने पेरू की एक यूनिवर्सिटी के ऑफ़र पर लगवाया जो पेरू में चीनी कंपनी सिनोफ़ार्मा के ट्रायल की इंचार्ज है. ये टीका बचे हुए टीकों से लगवाया गया था.”
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मुझे पता है कि मैंने बहुत बड़ी ग़लती की है, इसलिए मैंने वैक्सीन की दूसरी डोज़ नहीं ली. लेकिन इस ग़लती के लिए मैंने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है.”
पेरू की सरकार ने जनवरी 2021 की शुरुआत में सिनोफ़ार्मा से कोविड वैक्सीन की क़रीब तीन करोड़ 80 लाख डोज़ ख़रीदने की घोषणा की थी.
एक सप्ताह पहले ही पेरू को सिनोफ़ार्मा से तीन लाख डोज़ मिली हैं और इसी सप्ताह, मंगलवार को पेरू में आधिकारिक तौर पर टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई है.
सरकारी डेटा के अनुसार, पेरू में कोविड-19 की वजह से क़रीब 44 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.
महाराष्ट्र: जलगाँव में हुए सड़क हादसे में 16 मज़दूरों की मौत
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समाचार एजेंसी पीटीआई ने महाराष्ट्र पुलिस के हवाले से लिखा है कि 'जलगाँव ज़िले में एक ट्रक पलटने की वजह से 16 मज़दूरों की मौत हो गई है.'
स्थानीय मीडिया के अनुसार, दुर्घटना देर रात क़रीब एक बजे यवल रोड पर हुई. यहाँ पपीता ले जा रहे ट्रक ने मोड़ पर अचानक नियंत्रण खो दिया और पलट गया. पपीते से भरे इस ट्रक में कई मज़दूर भी सवार थे.
जानकारी के मुताबिक़, यवल तालुका के किंगाँव के पास यह ट्रक पलटा. इस सड़क दुर्घटना में दो लोग घायल भी हुए हैं. दोनों घायलों का नज़दीकी अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया है.
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टूलकिट मामला: बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने लिखा, ‘बुरहान वानी और कसाब भी 21 साल के थे’
इमेज स्रोत, DISHA RAVI / FACEBOOK
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता
और ‘बेंगलुरु सेंट्रल’ संसदीय क्षेत्र से पार्टी के सांसद पीसी मोहन ने पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा
रवि की तुलना मुंबई के 26/11 हमले में पकड़े गए पाकिस्तानी चरमपंथी मोहम्मद अजमल आमिर क़साब से की है.
पीसी मोहन ने ट्विटर पर लिखा है, “बुरहान वानी भी 21 वर्ष का था. अजमल क़साब भी 21 वर्ष
का ही था. उम्र बस एक संख्या है. कोई भी क़ानून से ऊपर नहीं है. क़ानून को अपना
काम करने दीजिये. एक अपराध, हमेशा अपराध ही रहेगा.”
अपने इस ट्वीट के साथ उन्होंने #DishaRavi का इस्तेमाल किया है और दिशा रवि की एक तस्वीर भी
पोस्ट की है.
इमेज स्रोत, Twitter
उन्होंने लिखा है कि ‘जो लोग दिशा रवि का बचाव कर रहे हैं, उन्हें दिल्ली
पुलिस के बयान को पढ़ना चाहिए.’
पीसी मोहन ने दिल्ली पुलिस का वो
ट्वीट भी शेयर किया है, जिसमें लिखा है, “दिशा रवि उस टूलकिट की एडिटर हैं. वे उसे तैयार करने और उसे सोशल मीडिया पर
सर्कुलेट करने वाले मुख्य साज़िशकर्ताओं में हैं. उन्होंने ही उस टूलकिट के अंतिम
ड्राफ़्ट को बनाने वाली टीम के साथ काम किया था ताकि भारत के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाई
जा सके. दिशा ने ही ग्रेटा थनबर्ग के साथ ये टूलकिट शेयर की थी.”
भाजपा सांसद पीसी मोहन विदेश
मामलों पर बनी संसदीय समिति के सदस्य भी हैं. उनके ट्वीट को सोशल मीडिया पर शेयर
किया जा रहा है.
उनके बाद,
पार्टी की प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने भी इस संबंध में ट्विट किया. उन्होंने लिखा, “किसी अपराध
का उम्र या लिंग से कोई लेना-देना होता है? पूर्व
प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्याकाण्ड में शामिल महिलाएं भी कथित रूप से 17 या
24 वर्ष की थीं. निर्भया के रेपिस्ट और उसकी हत्या करने वालों में भी एक 17 वर्ष
का था.”
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रविवार को दिल्ली की एक अदालत ने
22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया
था.
शनिवार शाम दिल्ली पुलिस की स्पेशल
सेल ने 'टूलकिट मामले' में बेंगलुरु से दिशा को गिरफ़्तार किया था.
दिशा ने बेंगलुरु के एक प्राइवेट कॉलेज
से बीबीए की डिग्री ली है और वो पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था 'फ़्राइडेज़ फ़ॉर फ़्यूचर' के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं.
हालांकि, दिशा को पुलिस हिरासत में भेजे जाने
पर कई क़ानून के जानकारों ने सवाल उठाये हैं.
लिखा जा रहा है कि 'महिला का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोर्ट में वकील की मौजूदगी सुनिश्चित किये बिना, जज ने उन्हें पाँच दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश कैसे दिया?'
उनके वकील की मौजूदगी के बिना उन्हें
पुलिस कस्टडी में भेजने को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है.
सोशल मीडिया पर दिशा के समर्थन में
भी बहुत से लोगों ने लिखा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा ने भी पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ़्तारी को लेकर
दिल्ली पुलिस की आलोचना की है और उन्हें जल्द से जल्द रिहा करने की माँग की है.
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