राहुल गांधी ने लद्दाख सीमा विवाद पर भारत सरकार से तीन सवाल पूछे
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह को भारत-चीन सीमा विवाद पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने के बाद शाम को इस मुद्दे पर फिर ट्वीट किया.
लाइव कवरेज
म्यांमार में लोगों ने ठुकराई सैन्य शासकों की अपील, कई शहरों में प्रदर्शन जारी

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म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन जारी हैं.
म्यांमार में लोगों ने सैन्य शासकों की उस अपील को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने लोगों से उनका हाथ थामने की बात कही थी.
शुक्रवार को एक बार फिर म्यांमार के नागरिकों ने कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए.
इससे पहले, म्यांमार के यूनियन दिवस के अवसर पर जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने कथित विघटन को रोकने के लिए एकता बनाए रखने का आह्वान किया था.
लेकिन शुक्रवार को विरोध प्रदर्शनों का वही पैटर्न दिखाई दिया और नज़रबंद नेता आंग सान सू ची को रिहा कराने की माँग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ जगहों पर रबड़ की गोलियां दाग़े जाने की बात भी कही गई है.
गुरुवार को लाइव टीवी प्रसारण के ज़रिए म्यांमार-वासियों को संबोधित करते हुए जनरल मिन आंग ने कहा था कि ‘जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें उकसाया गया है. मैं उनसे एक बार फिर अपील करूंगा कि वो भावनाओं पर ध्यान दिए बिना राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगें.’
यूनियन दिवस पर म्यांमार के सैन्य शासकों ने थोड़ी दरियादिली भी दिखाई. उन्होंने 23 हज़ार से अधिक क़ैदियों को रिहा करने का आदेश दिया जिनमें 55 विदेशी क़ैदी भी शामिल हैं.
हालांकि जानकार कहते हैं कि म्यांमार के शासक पहले भी ऐसे निर्णय लेते रहे हैं, ताकि खचाखच भरी म्यांमार की जेलों का बोझ थोड़ा कम किया जा सके.
लेकिन कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं को सैन्य शासकों के इस निर्णय पर थोड़ा शक़ है.
एक छात्र कार्यकर्ता तेज़ार सान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ‘उन्हें डर है, कहीं क़ैदियों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों पर हमला करवाने के लिए ना किया जाये.’
उन्होंने कहा, “हमारे बीच बहुत बुरी मिसालें मौजूद हैं. साल 1988 में सैन्य शासकों ने फ़ौज समर्थक क़ैदियों को जेल से रिहा कर दिया था, जिन्होंने लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बहुत परेशान किया.”
माना जाता है कि साल 1988 के लोकतंत्र समर्थक विद्रोह में हज़ारों लोग मारे गये थे.
अपने भाषण में गुरुवार को जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने कहा था कि ‘लोग अपने घरों में रहें और ध्यान रखें कि कोरोना महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है.’
जनरल मिन ने कोशिश की कि लोगों को महामारी का हवाला देकर प्रदर्शनों में शामिल होने से रोका जाए. लेकिन शुक्रवार को लोगों की भीड़ हेलमेट और मास्क लगाकर विरोध प्रदर्शन करती नज़र आई.
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ब्रेकिंग न्यूज़, दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया
टीएमसी सांसद दिनेश त्रिवेदी ने शुक्रवार को राज्यसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया.
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उन्होंने संसद में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि वो इस्तीफ़ा दे रहे हैं और उनके राज्य में हिंसा हो रही है और वो इसके बारे में संसद में कुछ बोल नहीं सकते हैं.
त्रिवेदी ने कहा, “मैं अपनी पार्टी का शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने मुझे यहां भेजा. मेरा दम घुट रहा है क्योंकि हम राज्य में हिंसा पर कुछ नहीं कर पा रहे हैं. मेरी आत्मा मुझसे कहती है कि अगर मैं यहां पर बैठकर कुछ नहीं कर सकता तो मुझे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. मैं पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए काम जारी रखूंगा.”
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ट्रंप को महाभियोग का दोषी साबित करना क्यों डेमोक्रैट्स के लिए है मुश्किल

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डेमोक्रेट्स ने संसद में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महाभियोग पर अपने आरोपों का दौर पूरा कर लिया है, और कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर दंगा भड़काया. उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप को दोषी नहीं ठहराया गया तो "वह फिर से ऐसा कर सकते हैं".
गुरुवार को महाभियोग के अभियोजकों ने दंगाइयों के ही शब्द इस्तेमाल कर ट्रंप को हिंसा से जोड़ते हुए पेश किया.
अपना पक्ष रखते हुए डेमोक्रैट्स ने पुलिस, इंटेलिजेंस अधिकारियों के बयान और विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स आदि का हवाला दिया.
शुक्रवार को ट्रंप की बचाव टीम सीनेट में अपना पक्ष रखेगी.
डेमोक्रैट्स के बहुमत वाले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव ने बीते महीने ही ट्रंप पर महाभियोग के प्रस्ताव पास किया था. उन पर दंगे भड़काने का आरोप लगाया गया है. इस हफ़्ते डेमोक्रैट्स सीनेट में अपना पक्ष रख रहे थे.
ट्रंप के वकीलों ने तर्क दिया है कि वह नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव में धोखाधड़ी की बात कह कर अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे.
100 सीटों वाली सीनेट में ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. इस वक़्त दोनो पार्टियों के बीच सीटें समान रूप से विभाजित हैं. ऐसे में ट्रंप के बरी होने की संभावना है क्योंकि ज़्यादातर रिपब्लिकन सीनेटर अब तक उनके प्रति वफ़ादार रहे हैं.
यदि ट्रंप को दोषी ठहराया गया तो उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने को लेकर सदन में मतदान हो किया जाएगा.
क्या है महाभियोग
महाभियोग तब लगाया जाता है जब राष्ट्रपति रहते हुए किसी पर अपराधों के आरोप लगते हैं. इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप पर विद्रोह भड़काने का आरोप है. ट्रंप अमेरिका के पहले राष्ट्रपति हैं जिन पर दूसरी बार महाभियोग का मामला चलाया जा रहा है.
अब तक क्या हुआ है
हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव ने अपने कार्यकाल की समाप्ति से एक सप्ताह पहले 13 जनवरी को ट्रंप पर दूसरी बार महाभियोग चलाने के लिए मतदान किया. सीनेट में अब ये ट्रायल चल रहा है.
इसका मतलब क्या है?
अब जब ट्रंप राष्ट्रपति नहीं हैं तो सीनेटर उन्हें आगे कोई भी चुनाव लड़ने से रोकने के लिए मतदान कर सकते हैं. लेकिन ये तभी होगा जब वह अगर वह दोषी साबित हो जाएं.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में ली ग़ुलाम नबी आज़ाद की जगह
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कांग्रेस ने राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को नेता प्रतिपक्ष बनाया है. इससे पहले ग़ुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस के नेता थे.
ग़ुलाम नबी आज़ाद मोदी से दोस्ती और बीजेपी में जाने के सवाल पर बोले
अमेरिका के एक ट्वीट को लेकर पाकिस्तान में चिंता
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. वह कश्मीर को विवादित क्षेत्र ही मानता है.
हाल ही में अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट में विवादास्पद क्षेत्र के रूप में कश्मीर का ज़िक्र नहीं किया था, जिसके बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के सामने इसे लेकर चिंता ज़ाहिर की थी. पाकिस्तान का कहना है कि अब बाइडन प्रसाशन ने अपना रूख़ साफ़ किया है.
ट्वीट को लेकर पूछे गए एक सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है,‘’ हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है ‘’
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में 4जी इंटरनेट की बहाली होने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से ट्वीट किया गया था, ''हम भारत के जम्मू और कश्मीर में 4जी मोबाइल इंटरनेट की बहाली का स्वागत करते हैं. यह स्थानीय निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण क]दम है और हम जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए निरंतर राजनीतिक और आर्थिक प्रगति के लिए तत्पर हैं.‘’
इस ट्वीट में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को विवादित इलाक़ा नहीं लिखा था, जिसके बाद से पाकिस्तान में सवाल उठने लगे थे कि क्या बाइडन प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई नीतिगत बदलाव किया है.

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भारत-चीन सीमा विवाद: पूर्वी-लद्दाख में चीन से समझौता किसकी जीत, किसकी हार?
ब्रेकिंग न्यूज़, नरेंद्र मोदी ने चीन के सामने मत्था टेक दिया: राहुल गाँधी

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कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ भारत के हुए समझौते को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री कायर हैं इसलिए चीन के सामने डटकर खड़े नहीं हो पा रहे. गुरुवार को रक्षा मंत्री ने राज्यसभा और लोकसभा में चीन के साथ सरहद पर जारी तनाव और विवाद को लेकर हुए समझौते पर बयान दिया था.
राजनाथ सिंह ने सदन में कहा था, "मुझे सदन को यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि हमारे दृढ़ इरादे और टिकाऊ बातचीत के फलस्वरूप चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिणी तट पर सेना के पीछे हटने का समझौता हो गया है."
राहुल गाँधी ने कहा, ''पहली बात यह है कि भारत सरकार का रुख़ ये होना चाहिए था कि सरहद पर अप्रैल के पहले की जो स्थिति थी वही बहाल हो. अब भारतीय सेना के फिंगर 4 आने की बात कही गई है जबकि फिंगर 3 भारत का इलाक़ा है. पहला सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिन्दुस्तान की पवित्र ज़मीन चीन के हवाले कर दी.''
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राहुल गाँधी ने कहा, ''चीन के सामने नरेंद्र मोदी ने मत्था टेक दिया है. हमारी ज़मीन फिंगर 4 तक है लेकिन पीएम मोदी ने फिंगर 4 से 3 तक चीन को दे दिया. डेपसांग रणनीतिक इलाक़ा है. चीन यहां घुसा है लेकिन रक्षा मंत्री ने इस पर एक शब्द नहीं बोला. सच्चाई यह है कि हमारी जो पवित्र ज़मीन है उसे नरेंद्र मोदी ने चीन को दे दिया.''
गुरुवार को राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था, ''चीन अपनी सेना की टुकडि़यों को उत्तरी तट में फिंगर 8 के पूरब की दिशा की तरफ़ रखेगा. इसी तरह भारत भी अपनी सेना की टुकडि़यों को फिंगर तीन के पास अपनी स्थायी चौकी धन सिंह थापा पोस्ट पर रखेगा. इसी तरह की कार्रवाई दक्षिणी तटीय इलाक़े में भी दोनों पक्षों द्वारा की जाएगी. ये क़दम आपसी समझौते के तहत बढ़ाए जाएंगे और जो भी निर्माण आदि दोनों पक्षों द्वारा अप्रैल 2020 से उत्तरी और दक्षिणी तट पर किया गया है उन्हें हटा दिया जाएगा और पुरानी स्थिति बना दी जाएगी.''
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नेपाल ने दो भारतीय नागरिकों के पर्वतारोहण पर लगाया छह साल का बैन
नेपाल ने दो भारतीय नागरिकों पर छह साल तक का पर्वतारोहण प्रतिबंध लगाया है.
साथ ही उनके एवरेस्ट चढ़ने के प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया है. इन दो शख़्स ने दावा किया था कि उन्होंने मई 2016 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी.
इन दो भारतीय पर्वतारोहियों नरेंद्र सिंह यादव और सीमा रानी गोस्वामी को 2016 में पर्यटन विभाग की ओर से एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जो संपर्क अधिकारी ने पेश की गई तस्वीरों और चढ़ाई की रिपोर्ट को देखते हुए जारी किया था.
लेकिन नेपाल के पर्यटन मंत्रलय ने अपनी जांच में पाया है कि ये दस्तावेज़ फर्ज़ी थे.
पर्यटन मंत्रलय के प्रवक्ता तारानाथ अधिकारी ने नेपाली अख़बार काठमांडू पोस्ट को दिए गए एक बयान में कहा, ‘’ हमारी जांच रिपोर्ट बताती है कि जिन तस्वीरों को दिखा कर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का दावा किया गया वो नकली थीं. सरकार ने चढ़ाई प्रमाणपत्रों को रद्द करने और उन पर छह साल के पर्वतारोहण प्रतिबंध को जारी करने का फ़ैसला लिया है.‘’

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मुसलमान हमारे गठबंधन से नहीं डरें: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इडापड्डी के.पलानीस्वामी ने राज्य में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कहा है कि मुसलमानों को डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उन पर एआईएडीएमके के (बीजेपी के साथ) गठबंधन का प्रभाव नहीं पड़ेगा.
तिरुपुर से शुरू हुए दो दिनों के चुनावी अभियान पर निकले पलानीस्वामी ने जमात के नेताओं से मुलाक़ात में कहा, ‘’गठबंधन एक अलग बात है और विचारधारा अलग बात है. गठबंधन बदलते रहते हैं क्योंकि वह राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बनते हैं.‘’
हालांकि ये कहते हुए उन्होंने किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन एआईएडीएमके बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ती है. बीते महीने रामनाथपुरम में भी उन्होंने इसी तरह का आश्वासन दिया था.
पलानीस्वामी ने ज़ोर देते हुए कहा कि ‘’एआईएडीएमके जाति-धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं करती. बीते चार सालों में राज्य में सांप्रदायिक हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है. अगर छोटी-मोटी कोई घटना हुई तो उसमें तत्काल कार्रवाई की गई.’’
यहां उन्होंने उस घटना की ओर इशारा किया, जिसमें हाल ही में बीजेपी के राज्य सचिव आर. कल्याणरमन को पैग़ंबर मोहम्मद पर दिए गए उनके कथित बयान के लिए गिरफ्तार किया गया था.
अपने चुनावी भाषण में पलानीस्वामी ने कहा कि किसानों को ‘10 दिनों के भीतर’ फसल पर ऋण माफ़ी के प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे.
उन्होंने विपक्षी पार्टी डीएमके नेता एमके स्टालिन के उस दावे पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 12,110 करोड़ की क़र्ज़माफ़ी एक जुमला भर बनकर रह जाएगा. उन्होंने कहा- वह ग़रीबों की मुश्किलें कभी नहीं समझ सकते.
इसके बाद पलानीस्वामी ने कांगेयम में किसानों के साथ बातचीत की. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और केरल सरकारें अनामालय-नलार योजना के लिए बातचीत कर रही हैं, यह काम जल्द ही शुरू होगा.
इस साल अप्रैल-मई में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं. एआईएडीएमके राज्य में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी.
नमस्कार!
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