‘लद्दाख में पैंगोंग झील के दो किनारों से भारत-चीन सेनाओं का पीछे हटना शुरू’

चीन के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि भारत और चीन के बीच हुए नौवें दौर की सैन्य कमांडर-स्तरीय वार्ता में बनी सहमति के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है.

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  1. नेपाल और चीन के बीच तातोपानी बॉर्डर पॉइंट खुला

    नेपाल

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    नेपाल से चीन को जोड़ने वाला तातोपानी-खासा बॉर्डर पॉइंट फिर से खोल दिया गया है. नेपाली अख़बार काठमांडू पोस्ट के अनुसार तातोपानी ड्राईपोर्ट के प्रमुख लाल बहादुर खत्री ने बताया कि चीनी प्रशासन ने नेपाल की ओर से आवाजाही की अनुमती दे दी है.

    नेपाल में सामानों से भरे कार्गो आने लगे हैं.

    खत्री ने बताया कि ‘’तीन फलों और रोज़मर्रा की चीज़ों से भरे तीन कार्गो मंगलवार को चीन से नेपाल में दाख़िल हुए.’’

    तातोपानी सीमा को 20 जनवरी को मैत्री पुल पर मरम्मत के काम के लिए बंद किया गया था. ये वो पुल है जो नेपाल को चीन से जोड़ता है.

    दरअसल, भोतेकोशी नदी में बारिश और तिब्बत के न्यलाम इलाक़े की झीलों के पानी से बाढ़ आ गई थी जिसके कारण ये पुल क्षतिग्रस्त हो गया था.

    भोतेकोशी ग्रामीण नगर निगम के प्रमुख राजकुमार पौडेल ने नेपाली मीडिया से बताया, ‘’हमें लग रहा था कि आने वाले तीन हफ़्तों तक चीन ये सीमा बंद रखेगा क्योंकि तिब्बत में लहोसर त्योहार 12 फ़रवरी को है. ऐसा लग रहा था कि तब तक सीमा बंद रहेगी. लेकिन अब चेकप्वॉइंट को थोड़-थोड़ा खोला जा रहा है. लंबे वक़्त से सीमा के बंद रहने के कारण स्थानीय व्यापारियों पर इसका काफ़ी असर पड़ा था.‘’

    सोमवार को कस्टम अधिकारियों ने बताया था कि मरम्मत का काम पूरा हो जाने के बावजूद सीमा को खोला नहीं जा सका था क्योंकि चीन की ओर बीते कुछ दिनों से बर्फ़बारी हो रही थी.

    2015 में आए भूकंप के बाद चार साल तक बंद रहने के बाद तातोपानी-खासा सीमा 29 मई, 2019 में खोली गई थी. इसके बाद कोविड-19 के कहर को देखते हुए इसे जनवरी 2020 में बंद कर दिया गया था.

    इसके बाद बीते साल अप्रैल में चीन ये सीमा खोलने को तैयार हुआ ताकि कोरोना वायरस से जुड़ी दवाएं और उपकरणों को पहुंचाया जा सकें. हालांकि इस दौरान मालगाड़ियों का आना-जाना लगभग बंद था.

    काठमांडू से शुरू होने वाला तातोपानी-खासा सीमा बिंदु 115 किलोमीटर लंबा है, जो चीन से नेपाल के व्यापार का एक अहम रास्ता है.

    नेपाल ने चीन के साथ 15 अक्तूबर 1961 को दोनों देशों के बीच रोड लिंक बनाने के लिए एक समझौता किया. इसके तहत काठमांडू से खासा तक एरानिको हाइवे बनाने की बात हुई. इस समझौते का भारत समेत कई पश्चिमी देशों ने भी विरोध किया. समझौते के हिसाब से चीन ने एरानिको हाइवे बनाया और इसे 1967 में खोला गया. कहा जाता है कि इस सड़क का निर्माण चीनी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने किया. यह भारत से निर्भरता कम करने की शुरुआत थी.

    हालाँकि इस हाइवे को दुनिया का सबसे ख़तरनाक रोड कहा जाता है. भूस्खलन यहाँ लगातार होता है और अक्सर यह सड़क बंद रहती है. नेपाल इसी रूट के ज़रिए चीन से कारोबार करता है, लेकिन ये बहुत ही मुश्किल है. यहाँ भारी बारिश होती है जिससे, भूस्खलन यहाँ आम बात है. 144 किलोमीटर लंबी यह सड़क एकदम खड़ी ढाल में है और कहा जाता है कि इस पर गाड़ी चलाना जान जोखिम में डालने की तरह है.

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  2. अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के बीच मोदी अब भी लोकप्रिय: सर्वे

  3. मैं एक भारतीय मुसलमान हूँ: फ़ारूक़ अब्दुल्ला

    फ़ारूक़ अब्दुल्ला

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    नेशनल कॉन्फ़्रेंस नेता फ़ारूक़ अब्दुल्ला मंगलवार को लोकसभा में अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने कृषि क़ानूनों पर मोदी सरकार की जमकर आलोचना की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकार पर लोकतंत्र को कमज़ोर करने का भी आरोप लगाया.

    डीडीसी चुनाव नतीज़ों को पटलने की कोशिश

    राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण देते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा, ‘’केंद्र शासित राज्य जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए ज़िला विकास परिषद के चुनाव निष्पक्ष तरीके से हुए. दिसंबर में चुनाव पूरे हुए. लेकिन चुनाव अधिकारी इस पद के चुनाव में जनता के दिए गए फ़ैसले को किसी के इशारे पर बदलने की कोशिशों में जुटे हैं‘’

    '’डीडीसी चुनाव उचित तरीक़े से कराए गए लेकिन अब ज़िला कलेक्टर और अधिकारी लोगों पर दबाव बना रहे हैं कि वह किसी अन्य चेयरपर्सन का चुनाव करें.‘’

    गुपकर गठबंधन का हिस्सा रही नेशनल कॉन्फ्रेंस को इस चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें मिली थीं. अब्दुल्ला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र को ख़त्म करने की कोशिश कभी अच्छे नतीजे नहीं दे सकती.

    उन्होंने कहा, ‘’जनादेश न छीनें. कई साल पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस से एक और जनादेश छीना गया और उस सरकार ने दो सालों में सत्ता खो दी, साथ ही लोगों में उसके ख़िलाफ़ बुरी भावना भी पैदा हुई.‘’

    कृषि कानून पत्थर पर लक़ीर नहीं

    फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने किसानों का समर्थन करते हुए कहा, ‘'कृषि क़ानून कोई धर्मग्रंथ की लाइन नहीं है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता. किसानों से बात करिए, ये वक़्त अपनी प्रतिष्ठा में तन कर खड़े होने का नहीं है.‘’

    ''जो आज किसानों के साथ हो रहा है ये सरकार का वही रवैया है जो पाँच अगस्त, 2019 में जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनाया गया था. जब दिल्ली में बैठकर राज्य से अनुच्छेद 370 और 35A हटाया गया था.''

    उन्होंने कहा, ‘’आप हमें विश्वास में ले सकते थे. हमारी पार्टी ने तिरंगे को बचाते हुए 1,500 लोगों को खो दिया और अब आप हमें पाकिस्तानी और चीनी एजेंट कह रहे हैं. मैं एक मुस्लिम हूँ और मैं एक भारतीय मुस्लिम हूँ,” आपने मुसलमानों को उनकी जगह दिखाने के लिए राज्य को दो भागों में तोड़ दिया.‘’

    उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेताओं द्वारा देश के पूर्व नेताओं की आलोचना हमारे देश का चलन नहीं है

    ‘’मेरे पिता को पंडित नेहरू ने जेल में डलवाया लेकिन दोनों के बीच कटुता नहीं आई. जब वे मिले तो आपस में रोए. मेरी गुजारिश है कि आप किसानों से बात करें.‘’

    अबदुल्ला

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  4. एम. जे अक़बर बनाम प्रिया रमानी मामले में आज आएगा फ़ैसला

    साल 2018 में शुरू हुए मी टू मुहिम में कई महिलाओं ने ख़ुद के साथ हुए यौन शोषण के बारे में खुलकर बताया था. इसी दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी ने तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

    एमजे अकबर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया था और उन्होंने रमानी के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दायर किया था. तब अकबर को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

    इस मानहानि के केस में बुधवार को दिल्ली की एक अदालत फ़ैसला सुनाएगी. रमानी नेवोग इंडिया के लिए 'टू द हार्वी वाइन्सटीन ऑफ़ द वर्ल्ड' नाम से लिखे अपने लेख को री-ट्वीट करते हुए ऑफिस में उत्पीड़न की बात कही थी.

    एम. जे अक़बर

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