You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.

Take me to the main website

उत्तराखंडः तपोवन टनल के 130 मीटर भीतर तक पहुंचा बचाव दल - सीएम रावत

उत्तराखंड में ग्लेशियर फ़टने से मची तबाही में अब तक क्या- क्या जानकारियां सामने आई हैं?- दिनभर की ज़रूरी अपडेट के लिए बीबीसी हिंदी के इस लाइव पन्ने से जुड़े रहें.

लाइव कवरेज

  1. बीबीसी हिंदी के इस लाइव पन्ने से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद. आज यानी 9 फरवरी के सभी ज़रूरी अपडेट्स और महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

  2. प्रधानमंत्री मोदी ने की जो बाइडन से बात

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन से फ़ोन पर बात की है.

    एक ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति जो बाइडन से बात की और उन्हें उनकी कामयाबी के लिए शुभकामनाएं दीं. हमने क्षेत्रीय मुद्दों और अपनी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की. हमने जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति ज़ाहिर की.'

    एक और ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा, 'राष्ट्रपति बाइडन और मैं नियम आधारित अंतरराष्ट्रिय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम एशिया-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति और सुरक्षा के लिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए इच्छुक है.'

  3. उत्तराखंड: अब तक 20 से अधिक शव बरामद किए गए- डीजीपी

    उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया है कि चमोली हादसे में 8 फरवरी को 8 बजे तक 26 मृतकों के शव बरामद किए जा चुके हैं.

    उनका कहना है कि 171 लोग अब भी लापता है. माना जा रहा है कि इनमें से क़रीब 35 लोग अब भी तपोवन टनल में फंसे हुए हैं. उन्हें निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है.

    लेकिन उत्तराखंड आपदा प्रबंधन के बताए आंकड़े इससे थोड़ा अलग हैं. आपदा प्रबंधन के अनुसार 197 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.

    सात फरवरी को चमोली जिले में ग्लेशियर फटने की वजह से धौली गंगा और अलकनंदा नदी में बाढ़ आ गई. नदी के कई तटबंध टूट गए. इसमें ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन विष्णुगढ़ प्रोजेक्ट को बड़ा नुकसान पहुँचा है.

    इन परियोजनाओं से जुड़ी सुरंग में पानी के तेज़ बहाव के साथ आया मलबा भर गया है. इस सुरंग में कई मज़दूर अब भी फंसे हुए हैं.

  4. वीके सिंह के बयान पर चीन ने दी प्रतिक्रिया

    चीन के विदेश मंत्री के प्रवक्ता वांग वेन्बिन ने चीन के सरकार समर्थित अख़बार ग्लोबल टाइम्स में छपी एक ख़बर का हवाला देते हुए लिखा है कि भारत बार-बार भारत-चीन के बीच के लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) का उल्लंघन कर रहा है और लगातार टकराव की स्थिति पैदा कर रहा है.

    अख़बार के अनुसार सीमा पर तनाव की यह मुख्य वजह है.

    विदेश मंत्री के प्रवक्ता ने कहा कि "हम भारत से आग्रह करते हैं कि दोनों देश आपसी सहमती से जिस समझौते पर पहुँचे हैं उसे ईमानदारी से लागू करें और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए कदम उठाएं."

    अख़बार का कहना है कि सीमा विवाद के मामले में भारत चीन को 'आक्रामक' कहता आया है लेकिन भारत के एक मंत्री ने भारत के चीन से अधिक बार एलएसी के अतिक्रमण की बात स्वीकार की है.

    चीन के विदेश मंत्री की यह प्रतिक्रिया ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख के बाद आई है जिसमें कहा गया है कि भारत के केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ने एक बयान में कहा है कि भारत ने चीन से अधिक बार एलएसी का अतिक्रमण किया होगा लेकिन भारत सरकार ने इसके बारे में बताया नहीं.

    समाचार पत्र द हिंदू ने 7 फरवरी की एक रिपोर्ट में वीके सिंह के हवाले से लिखा था, “आप लोग जानते नहीं है कि हमने कितनी बार अतिक्रमण किया है. चीनी मीडिया इसे कवर नहीं करता है. मैं आपको आश्वस्त करता हूँ, अगर चीन ने 10 बार अतिक्रमण किया है, तो हमने कम से कम 50 बार किया होगा.”

  5. इंडोनेशिया के एक गांव में ये कैसी बाढ़?

    इंडोनेशिया के एक गांव में बाढ़ का जो पानी पूरे गांव में फैला वो ख़ून जैसा लाल रंग का पानी था.

    दरअसल बाढ़ की वजह से पानी सबसे पहले कपड़े डाई करने वाली (रंग करने वाली) एक फैक्ट्री में घुसा और इसके बाद पूरे गांव में मानो ऐसा लगा कि ख़ून की ही बाढ़ आ गई है.

    रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

  6. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 8 फरवरी 2021, सुनिए संदीप सोनी के साथ.

  7. किसान आंदोलन: पीएम मोदी के भाषण पर क्या बोले किसान?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद में किसानों को एक बार फिर वार्ता का न्योता दिया.

    साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि किसानों को विरोध प्रदर्शन अब ख़त्म कर देना चाहिए और प्रदर्शन के लिए बुज़ुर्गों को अपने-अपने घर लौट जाना चाहिए.

    इस पर सिंघु बॉर्डर पर मौजूद किसान प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा?

    वीडियो: पीयूष नागपाल

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, बचाव दल तपोवन टनल के 130 मीटर तक भीतर पहुंचा- सीएम रावत

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज आपदाग्रस्त जोशीमठ इलाक़े का दौरा किया. दौरे के बाद उन्होंने कहा कि, "बचाव दल तपोवन सुरंग के 130 मीटर अंदर तक जा चुका है. अब और 50 मीटर अंदर तक पहुंचने में ढाई से तीन घंटे का वक्त लग सकता है."

    आईटीबीपी, आर्मी, एसडीआरएफ़ और एनडीआरएफ़ की संयुक्त टीमें तपोवन टनल में राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं.

  9. कार्टून: टीआरपी-जीवी

    पीएम के आंदोलनजीवी वाले कमेंट पर आज का कार्टून.

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों का विरोध जनआंदोलन है, ये जारी रहेगा - राकेश टिकैत

    किसानों ने आज शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कहा, किसानों का विरोध प्रदर्शन एक तरह का जनआंदोलन है जो आगे अक्तूबर तक जारी रहेगा.

    किसान नेताओं ने कहा, "बात केवल कृषि क़ानूनों तक सीमित नहीं है, बल्कि एसेन्शियल कोमोडिटीज़ ऐक्ट की है. इसका असर केवल किसानों पर नहीं पड़ेगा. आज केवल किसान आंदोलन कर रहे हैं लेकिन लोग ये न सोचें इसका असर केवल उन्हीं पर पड़ेगा. इसका असर बाद में कंज्यूमर्स पर भी पड़ेगा."

    किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, "हम इंतज़ार करेंगे कि वो हमें बातचीत के लिए बुलाएं. सरकार बातचीत का न्योता देगी तो हम ज़रूर जाएंगे."

    आगे की रणनीति के बारे में उन्होंने कहा, "अब आगे हम अलग-अलग जगह जा कर किसान पंचायत करेंगे और लोगों तक अपनी बात पहुंचाएंगे."

  11. 180 मीटर लंबी टनल में अब भी फंसे हैं दर्जनों लोग

    उत्तराखंड में ग्लेशियर के फटने के कारण हुई तबाही के बाद लापता हुए क़रीब 200 लोगों की तलाश जारी है.

    प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अब तक 11 शवों के बरामद किए जाने की पुष्टि की है.

    रविवार को उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने के कारण बर्फ और पानी पहाड़ के ऊपर से तेज़ी से नीचे की तरफ बहना शुरू हुआ जिस कारण दो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन विष्णुगढ़ प्रोजेक्ट) को भारी नुकसान पहुंचा है और असपास बने घर और पुल बह गए हैं.

    हादसे के वक्त तपोवन टनल में काम जारी था और वहां दर्जनों मज़दूरों के फंसे होने की आशंका है. आईटीबीपी, आर्मी, एसडीआरएफ़ और एनडीआरएफ़ की संयुक्त टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं.

    साथ ही आसपास के इलाक़ों में फंसे लोगों तक खाद्य पदार्थ और ज़रूरत का सामान पहुंचाने का काम जारी है.

    आईटीबीपी के प्रवक्ता डीआईजी अपर्णा कुमार ने कहा है कि तपोवन टनल में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचावकर्मी टनल की खुदाई कर मलबा बाहर निकाल रहे हैं.

    उन्होंने कहा, "ये एक बड़ा टनल यानी बड़ी सुरंग है. अब तक हम 70 से 80 मीटर तक टनल का रास्ता साफ़ कर भीतर जाने में सक्षम हुए हैं. लेकिन टनल में काफी सारा मलबा घुस आया था और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था.अब दो जेसीबी मशीनें टनल के भीतर घुसकर सफ़ाई का काम कर रही हैं."

    "ये 180 मीटर लंबी टनल है और इससे बाहर निकलने के एक रास्ते के पास बीते कल से 30 से 40 मज़दूरों के फंसे हुए हैं. हम उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं."

  12. किसान संगठनों ने सरकार से बातचीत की अगली तारीख़ तय करने को कहा

    केंद्र सरकार के लाए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन करने वाले किसान संगठनों ने सरकार से अगले दौर की बातचीत के लिए तारीख़ तय करने को कहा है.

    राज्यसभा में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि - सरकार लगातार किसानों के संपर्क में है. कोई तनाव की स्थिति नहीं है. एक-दूसरे की बात समझने-समझाने का प्रयास हो रहा है.

    इसके बाद अब किसान संगठनों ने कहा है कि सरकार को उन्हें अगले दौर की बातचीत के लिए वक्त देना चाहिए.

  13. पीएम मोदी के न्योते और बयान पर क्या बोले प्रदर्शन कर रहे किसान?

  14. आपदा प्रभावित गाँवों में राहत सामग्री पहुँचाई गई

    उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट करके दी जानकारी.

    उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा- "मैं देहरादून के प्रभावित क्षेत्रों में जा रहा हूँ और रात्रि प्रवास करूँगा. राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं और सरकार इसमें कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है. केंद्र की हमें पूरे मदद मिल रही है. मेरा आप सभी से अनुरोध है कि इस हादसे को विकास के ख़िलाफ़ प्रॉपगैंडा का कारण ना बनाएँ."

  15. उत्तराखंड: तपोवन की वो सुरंग जो हादसे में मौत की सुरंग बन गई

    उत्तराखंड में चमोली की सुरंग से अब तक 25 लोगों को जीवित निकाला गया है. आठ शव भी बरामद किए गए हैं.

    रविवार को हुए हादसे में अब तक 154 लोग लापता हैं. ये सुरंग 59 मीटर गहरी है.

    ITBP और बचाव दल सुरंग से कीचड़ निकालने की कोशिश कर रहा है, ताकि भीतर फंसे 35-40 लोगों को बाहर निकाला जा सके.

    वीडियो: उत्तराखंड सूचना विभाग और SDRF

  16. उत्तराखंड में क्यों मची तबाही, ग्लेशियर क्यों टूटा?

    ग्लेशियरों पर शोध करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक़, हिमालय के इस हिस्से में ही एक हज़ार से अधिक ग्लेशियर हैं.

    विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे प्रबल संभावना ये है कि तापमान बढ़ने की वजह से विशाल हिमखंड टूट गए हैं जिसकी वजह से उनसे भारी मात्रा में पानी निकला है. और इसी वजह से हिमस्खलन हुआ होगा और चट्टानें और मिट्टी टूटकर नीचे आई होगी.

    स्टोरी: नवीन सिंह खड़का

    आवाज़: विशाल शुक्ला

    वीडियो एडिटिंग: देबलिन रॉय

  17. उत्तराखंड: झारखंड सरकार ने जारी किये हेल्पलाइन नंबर

    झारखंड सरकार ने अपने राज्य के लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किये हैं. यह हेल्पलाइन नंबर उन लोगों के लिए जारी किये गए हैं जो चमोली में फंसे हुए हैं.

  18. उत्तराखंड: त्रासदी के बाद बचाव कार्य जारी, आईटीबीपी, आर्मी, एसडीआरएफ़ और एनडीआरएफ़ की टीमें मौके पर

    आईटीबीपी, आर्मी, एसडीआरएफ़ और एनडीआरएफ़ की संयुक्त टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. राहत टीमें तपोवन टनल में पहुंच चुकी हैं और बचावकार्य जारी है.

  19. उत्तराखंड: लापता कामगारों के पूर्वी उत्तर प्रदेश-बिहार के होने की आशंका

    डीजीपी अशोक कुमार के हवाले से न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने लिखा है - "जो कामगार अभी भी लापता हैं, उनमें से ज़्यादातर के पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के होने की आशंका है. मुझसे इस संबंध में संपर्क किया गया है. लापता लोगों में से क़रीब 30 लोग लखीमपुर खीरी के हैं."

    डीजीपी अशोक कुमार ने बताया, अब तक हमने 18 शव बरामद किए हैं और लापता लोगों की संख्या 202 है. हमने टनल में 80 मीटर तक मलबा हटा दिया है, आगे मशीनें लगी हुई हैं. शाम तक कुछ सफलता मिलने की उम्मीद है.

  20. सबसे बड़ी चुनौती सुरंग में फंसे 34 लोगों को बचाना- केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह

    विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह के हवाले से न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने लिखा है कि - इस वक्त हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरंग में फंसे क़रीब 34 लोगों को बचाना है. अभी हम सुरंग के अंदर 70 मीटर तक गए हैं और करीब 180 मीटर तक और जाना है. किस तरह से हम सुरंग से मलबा निकालें, इसके लिए पदाधिकारियों के साथ बातचीत की गई है.

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रीमोट मॉनिटरिंग के ज़रिए ग्लेशियर्स पर नज़र रखी जा रही है. अगर लोगों को शुरुआत से ही चेतावनी पर रखा जाए तो बहुत सी जानें बचायी जा सकती हैं.