तीन नए कृषि क़ानूनों
के ख़िलाफ़ 26 नवंबर से दिल्ली
की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शनिवार को देशव्यापी चक्का जाम किया लेकिन
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को इससे दूर रखा गया था.
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय
प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इन दोनों राज्यों में चक्का जाम नहीं करने की घोषणा की थी.
अब टिकैत के उस फ़ैसले
को लेकर किसान नेताओं के बीच मतभेद हो गया है. वरिष्ठ किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने
इसे जल्दबाज़ी में बिना सलाह-मशविरा लिया गया फ़ैसला बताया है.
शनिवार को देशव्यापी
चक्का जाम के बाद जब पत्रकारों ने इन दो राज्यों में चक्का जाम नहीं करने के बारे में वरिष्ठ किसान नेता दर्शनपाल सिंह से सवाल किया तो उन्होंने कहा, "यह जल्दबाज़ी में लिया गया फ़ैसला है, अच्छा होता कि वो मीडिया में इसकी घोषणा करने से
पहले संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के साथ इस बारे में पहले बातचीत कर लेते."
उन्होंने कहा,
“टिकैत जी को लगा कि उत्तराखंड और यूपी में दंगे
हो सकते हैं, इसके बाद तुरंत उन्होंने
प्रेस में बयान दिया. अगर और लोगों से बात करके कोई बयान देते तो अच्छा होता. हालाँकि
बाद में उन्होंने हमसे बात की और फिर यह संयुक्त फ़ैसला था. लेकिन मैं मानता हूं कि
उन्हें जल्दबाज़ी में ऐसा नहीं करना चाहिए था.”
साथ ही उन्होंने यह
भी कहा कि एसकेएम के साथ सब कुछ ठीक चल रहा है और लोगों को यह नहीं मान लेना चाहिए
कि नेताओं के बीच मतभेद चल रहे हैं.
शुक्रवार को जब राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं करने का फ़ैसला किया था तब उनसे वजह पूछी गई थी तो उन्होंने कहा था कि, उनको कभी भी दिल्ली बुलाया जा सकता है और इन दोनों राज्यों के लोगों को भविष्य के लिए स्टैंडबाई पर रखा गया है."
इसके बाद उन्होंने यह भी कहा था, "इन जगहों पर हिंसा फ़ैलाने का प्रयास किया जा सकता है, इसलिए हमने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं करने का फ़ैसला किया है."
शनिवार को चक्का जाम के बाद गाज़ीपुर में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को जब ठीक लगे हमसे बात कर ले. हमारा मंच भी वही है और पंच भी वही.
उन्होंने यह भी कहा कि किसान सरकार से किसी दबाव में बातचीत नहीं करेंगे, जब प्लेटफॉर्म बराबरी का होगा तभी बातचीत होगी.
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार तीनों क़ानूनों को निरस्त नहीं करती तो वे दो अक्तूबर तक दिल्ली की सीमा पर बैठे रहेंगे.
उधर सिंघू बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता दर्शनपाल सिंह ने भी कहा कि किसान संगठन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें नया प्रस्ताव लेकर आना चाहिए क्योंकि नए कृषि क़ानूनों को एक से डेढ़ साल तक के लिए निलंबित रखने का उनका मौजूदा प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है.
उन्होंने कहा कि "हम बातचीत के लिए तैयार हैं. गेंद सरकार के पाले में है. हमने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि पिछला प्रस्ताव हमें स्वीकार्य नहीं है. अब उन्हें नए प्रस्ताव के साथ आना चाहिए."