पत्रकारों पर मुक़दमा दर्ज करने की बजाय मामले की जांच करानी चाहिए- ह्यूमन राइट्स वॉच
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए जाने की आलोचना की है.
ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के बाद आठ पत्रकारों के ख़िलाफ़ जो आपराधिक आरोप लगाए गए हैं वो बेबुनियाद हैं.
इन पत्रकारों के ख़िलाफ़ राजद्रोह, सांप्रदायिक भावना को भड़काने और राष्ट्रीय एकता को नुक़सान पहुँचाने के आरोप लगाए गए हैं.
संस्था की दक्षिण एशिया निदेशक, मीनाक्षी गांगुली ने कहा है, “भारतीय अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने, सरकार के आलोचकों को परेशान करने और घटनाओं की रिपोर्टिंग करने वालों पर मुक़दमे दायर करने की नीति पर चल रहे हैं. ऐसा करने की जगह उन्हें 26 जनवरी को राजधानी में हुई हिंसा की पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से जाँच करानी चाहिए.”

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