गुरुवार देर रात से ही
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में किसान जुटना शुरू हो गए हैं.
बुधवार रात को यहां किसानों के कैंप की
बिजली काट दी गई थी और गाज़ीपुर बॉर्डर पर सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई थी, जिससे
किसानों में नाराज़गी थी.
केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसान बीते साल के नवंबर माह के अंतिम सप्ताह से ही दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर बॉर्डर पर
विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां मौजूद अधिकतर किसान भारतीय किसान यूनियन के सदस्य हैं जो अपने नेता राकेश
टिकैत के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक शुक्रवार आधी रात के बाद स्थिति का जायज़ा
लेने के लिए गाज़ियाबाद ज़िला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने गाज़ीपुर में किसानों के प्रदर्शनस्थल का दौरा किया.
स्थानीय प्रशासन ने वहां धारा
144 लागू कर दी है और इसके तहत वहां पर लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है.
रात के करीब एक बजे तक किसान नेता राकेश
टिकैत अपने समर्थकों के साथ वहां मंच पर बैठे रहे.
इससे पहले मीडिया से बात करते हुए वो भावुक हो गए थे और कहा था कि वो प्रदर्शन स्थल से पीछे नहीं हटेंगे और
वे अपना अनशन शुरू कर रहे हैं.
टिकैत ने रोते हुए कहा कि अगर कृषि
क़ानून वापस नहीं हुए तो वह आत्महत्या कर लेंगे.
उन्होंने कहा कि जो किसान वापिस चले गए
हैं वो अपने ट्रैक्टरों
के साथ वापस आएंगे.
इस बीच गाज़ीपुर
में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से किसानों का आना लगातार जारी है.
गाज़ियाबाद
पुलिस के एक अधिकारी के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है कि प्रदर्शनस्थल
से सुरक्षाबलों को हटाया जा रहा है और सीमित संख्या में ही वहां सुरक्षाबलों की
तैनाती की जाएगी.
उनका कहना था कि
गुरुवार को सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाने के बाद से ही गाज़ीपुर सीमा पर तनाव
बढ़ाना शुरू हो गया था.
बीते दो महीनों से
दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों का कहना है
कि ये क़ानून एमएसपी की व्यवस्था को खत्म कर कृषि के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के
प्रवेश का रास्ता साफ करेंगे.
हालांकि सरकार का कहना है कि ये क़ानून अच्छे दाम पर
अपनी फसल बेचने के लिए किसानों के लिए बेहतर मौक़े बनाएगी.
यूपी सरकार ने दिया किसान आंदोलन ख़त्म कराने का आदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को राज्य में अलग-अलग जगहों पर चल रहे किसान-आंदोलन को समाप्त कराने का आदेश दिया है.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने यह ख़बर सरकारी अधिकारियों के हवाले से दी है. आधिकारिक सूत्रों के हवाले से एजेंसी ने ख़बर दी है कि 28 जनवरी गुरुवार को गाज़ियाबाद ज़िला प्रशासन ने एक आदेश जारी कर कहा था कि जो भी लोग गाज़ीपुर सीमा पर बिना अनुमति के बैठे हुए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं वे शाम तक उस जगह को खाली कर दें.
गाज़ीपुर उन कई सीमाओं में से एक है जहां किसान और कामगार नए कृषि क़ानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.
यह आदेश 26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान भड़की हिंसा के बाद जारी किया गया है. 26 जनवरी को भड़की इस हिंसा में क़रीब 400 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान हुआ है.
बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने इस आदेश की पुष्टि के लिए जब गाज़ियाबाद के आला अधिकारी से बात की तो उनका कहना था कि ऐसा कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, यह मौखिक तौर पर है.