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किसान नेताओं का दावा- 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में हिंसा भड़काने की थी योजना

सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने देर रात एक शख़्स को पेश करके दावा किया है कि ट्रैक्टर रैली में गोलीबारी की योजना थी.

लाइव कवरेज

  1. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा ने कहा है कि वो शिवमोगा ज़िले में हुनासोंडी गांव का दौरा करेंगे.

    इसी गांव के पास के एक खदान के नज़दीक ट्रक में बुधवार देर रात हुए विस्फोट में कई लोगों की मौत हो गई थी. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

  2. तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने लगवाई कोवैक्सीन

    तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर सी विजयभास्कर ने भारत बायोटेक की बनाई कोवैक्सीन कोरोना वैक्सीन लगवाई है.

    वैक्सीन लेने के बाद उन्होंने ट्वीट किया, "मैं एक डॉक्टर और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य के तौर पर स्वास्थ्यकर्मियों का भरोसा बढ़ाने के लिए वैक्सीन लगवा रहा हूं. मैं सभी से गुज़ारश करता हूं कि कोविड-19 से बचने के लिए वो कोरोना की वैक्सीन लगवाएं."

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, राज्यपाल से स्वीकार किया ममता बनर्जी मंत्रिमंडल से राजीव बनर्जी का इस्तीफ़ा

    प्रभाकर मणि तिवारी

    कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पश्चिम बंगाल के दौरे से पहले राज्य की सत्तारूढ़ ममता बनर्जी सरकार को एक और झटका लगा.

    शुक्रवार को पार्टी के विधायक और वन मंत्री राजीव बनर्जी ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने ममता बनर्जी को अपना इस्तीफ़ा पहले ही भेज दिया है लेकिन इसकी प्रति राज्यपाल को भी भेजी है.आमतौर पर कोई भी मंत्री इस्तीफ़ा देने पर मुख्यमंत्री को बताता है और मुख्यमंत्री ही उनका इस्तीफ़ा राजभवन में मंजूरी के लिए भेजती हैं. लेकिन इस मामले में राजीव ने राज्यपाल को भी अपने इस्तीफ़े की प्रति भेजी.

    शुक्रवार दोपहर के बाद राजीव राज्यपाल से औपचारिक मुलाक़ात करने के लिए राजभवन पहुंचे.

    राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है.

    अपने इस्तीफ़े की जानकारी राजीव बनर्जी ने फ़ेसबुक पेज पर दी थी.

    राजीव बनर्जी ने फ़ेसबुक पर लिखा, "आज मैं पश्चिम बंगाल के वन विभाग के मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे रहा हूं. वर्षों से मैंने पूरी ज़िम्मेदारी और लगन के साथ अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश की है. मैंने आप सभी को अपना परिवार माना है और आपके समर्थन ने मुझे और अधिक प्रयास करने और बेहतर तरीके से आपकी सेवा में बने रहने के लिए हमेशा प्रेरित किया है, इसलिए मैं इस मंच पर अपने औपचारिक इस्तीफ़े की घोषणा कर रहा हूं और इस संबंध में संबंधित प्राधिकरण को सूचित कर दिया है. उम्मीद करता हूं कि आने वाले वर्षों में मैं आपमें से हर एक की सेवा में यथा संभव बेहतर तरीके से लगा रहूंगा क्योंकि यही एकमात्र कारण है कि मैं राजनीति में हूं."

    इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम लिखे गए अपने इस्तीफ़े की प्रति भी फ़ेसबुक पर अपलोड की.

    ममता मंत्रिमंडल से तीसरा इस्तीफ़ा

    ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल से बीते कुछ दिनों में तीसरा इस्तीफ़ा है. कुछ दिन पहले खेल एवं युवा कल्याण मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला ने भी मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

    बीते दिनों नंदीग्राम के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने भी इस्तीफ़ा दिया और वो बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

    वहीं नादिया ज़िले के विधायक अरिंदम भट्टाचार्य दिल्ली जाकर बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

    इसके अलावा विधायक प्रवीण घोषाल ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व की आलोचना की है. माना जाता है कि उनके भी बीजेपी में जाने का रास्ता तैयार हो रहा है.

    उनके अलावा लगभग 34 तृणमूल नेता बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. इनमें पाँच विधायक भी शामिल हैं.

    राजीव बर्नजी के भी बीजेपी में जाने की अटकलें तेज़ हो गई हैं.

  4. सोनिया गाँधी ने केंद्र सरकार को किसान आंदोलन और आर्थिक मोर्चे पर घेरा

    काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने केंद्र सरकार पर किसानों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाने को लेकर बड़ा प्रहार किया है.

    उन्होंने कहा, "सरकार ने किसानों के साथ अब तक की बातचीत में चौंका देने वाली असंवदेनशीलता और अहंकार का प्रदर्शन किया है.

    सोनिया गाँधी काँग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के दौरान ये बोलीं. इस दौरान उन्होंने सरकार को आर्थिक मोर्चे पर भी घेरा.

    उन्होंने कहा, "सरकार को निजीकरण की घबराहट ने जकड़ लिया है."

    इस दौरान सोनिया ने पत्रकार अर्नब गोस्वामी के व्हाट्सएप्प बातचीत लीक को लेकर कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा से पूरी तरह समझौता किया गया."

    उन्होंने कहा, "जो लोग दूसरों को देशभक्ति और राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट देते हैं, वे अब पूरी तरह से उजागर हो गए हैं."

  5. किसान आंदोलनः 11वें दौर की बैठक से पहले किसान नेताओं ने क्या कहा?

    केंद्र सरकार और किसानों के बीच आज 11वें दौर की बातचीत हो रही है. नए कृषि क़ानूनों को रद्द करने की अपनी माँग पर बीते वर्ष 26 नवंबर से दिल्ली की सीमा पर आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच अबतक दस दौर की बेनतीजा बातचीत हुई है.

    11वें दौर की बातचीत के लिए किसान सिंघु बॉर्डर से बस में रवाना हुए. उससे पहले उन्होंने कहा कि वो अपनी माँग को लेकर डटे हुए हैं और जब तक तीनों कृषि क़ानून रद्द नहीं किए जाते और एमएसपी पर ख़रीद को क़ानूनी जामा नहीं पहनाया जाता वो विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे.

    इस बैठक में जाने से पहले भारतीय किसान यूनियन पंजाब के अध्यक्ष फरमान सिंह संधू ने कहा, "इस बैठक में हम पूरे मन से जा रहे हैं. हमने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और अपनी दलील दी है कि इन तीन नए क़ानूनों को रद्द करे. आज एमएसपी पर चर्चा होगी."

    जय किसान आंदोलन से महिला किसान नेता रविंदर पाल कौर ने कहा कि "उम्मीद है इसलिए बात करने जा रहे हैं."

    ट्रैक्टर रैली के बारे में उन्होंने कहा कि महिलाएं भी 26 जनवरी की इस रैली का हिस्सा होंगी.

    सुप्रीम कोर्ट की कमेटी पर उन्होंने कहा, "इसमें उलझने का मतलब ही नहीं बनता, हमने तो पहले ही कह रखा है कि हमें इस पर कोई कमेटी नहीं बनानी है. तीनों क़ानून रद्द होंगे तभी हम मानेंगे."

    एक अन्य नेता ने कहा, "सरकार ने क़ानून बनाए हैं तो उन्हें ही इसे रद्द करना होगा. पिछली बैठक में उन्होंने इसे डेढ़ साल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन हमने इसे नहीं माना. सरकार को सोचना पड़ेगा कि तीनों क़ानून कैसे रद्द किए जाएं. हमारा आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक कि इन क़ानूनों को रद्द नहीं किया जाता. किसानों के धर्म, जाति अलग हो सकते हैं लेकिन इन तीन नए क़ानूनों को लेकर सभी एक मत हैं."

    ट्रैक्टर रैली पर फरमान सिंह संधू ने कहा 72वाँ गणतंत्र दिवस हम मनाएंगे. आज की बैठक में उम्मीद है कि सरकार हमें रास्ता देगी. हम रिंग रोड का रास्ता लेकर अंदर जाएंगे और देश के इस महापर्व को मनाएंगे."

    किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा, "सरकार ने अभी किसी भी क़ानून को रद्द करने या सभी फ़सलों को ख़रीदने का मन नहीं बनाया है. देखते हैं सरकार क्या कहती है इस मीटिंग में वैसे सरकार के रुख को देखते हुए ज़्यादा उम्मीदें रखना उचित नहीं दिखता."

    एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि "पिछली बैठक में हमने सरकार को किसानों को मिल रही एनआईए की नोटिस के बारे में अवगत कराया. इस पर सरकार ने हमें आश्वासन दिया है कि जो भी नोटिस आए हैं उसकी लिस्ट हम उन्हें दे दें. सरकार उसे वापस ले लेगी."

    उन्होंने जोर देकर कहा कि "लोगों की चुनी हुई सरकार है. क़ानून ग़लत है और सरकार स्थगित करने की बात कह रही है तो वह इसे वापस क्यों नहीं ले रही. इसे वापस लेना ही होगा."

    26 जनवरी को होने वाली रैली के बारे में उन्होंने कहा कि दिल्ली के रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली शांतिपूर्ण होगी.

  6. बाइडन ने कोरोना को लेकर की 10 बड़ी घोषणाएँ, रास्ता ट्रंप से अलग

  7. सरकार और किसान यूनियनों के बीच 11वें दौर की वार्ता आज

    दिल्ली के विज्ञान भवन में शुक्रवार को सरकार और किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच 11वें दौर की बातचीत होने वाली है.

    इससे पहले 10वें दौर की बातचीत में सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि किसान अगर विरोध वापस ले लें तो वो 18 महीनों के लिए कृषि क़ानूनों को निलंबित करेंगे.

    संयुक्त किसान मोर्चा ने गुरुवार की शाम सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और कहा था कि कृषि क़ानूनों को वापस लेने से कम में वो नहीं मानेंगे.

    किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि "आगे की बातचीत में हम सरकार को कहेंगे कि इन क़ानूनों को वापस कराना, एमएसपी पर क़ानूनी अधिकार लेना यही हमारा लक्ष्य है."

    उनका कहना था कि किसानों ने सर्वसम्मति से ये निर्णय लिया है.

    हालाँकि इसके बाद भारतीय किसान यूनियन के जगजीर सिंह डल्लेवाल ने कहा, “अभी इस तरह का कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है. हमारी बातचीत जारी है.”

  8. कर्नाटक में खदान के क़रीब ट्रक में विस्फोट, कई लोगों के मारे जाने की आशंका

    कर्नाटक के शिवमोगा ज़िले में एक खदान के क़रीब ट्रक में विस्फोट हुआ है जिसमें कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.

    एक पुलिसकर्मी ने बीबीसी के सहयोगी पत्रकार इमरान क़ुरैशी को पुष्टि करते हुए बताया है कि इस ट्रक में भारी मात्रा में जिलेटिन की छड़ें रखी थीं.

    पुलिसकर्मी का कहना है, “हम अभी घटनास्थल पर यह पता लगा पाने में असमर्थ हैं कि कितने लोगों की मौत हुई है क्योंकि वहां पर काफ़ी अंधेरा है और धमाके की दुर्गंध के कारण भी वहां पहुंच पाना मुश्किल है.”

    ट्रक में भारी मात्रा में जिलेटिन की छड़ों के साथ-साथ मज़दूर भी सवार थे.

    समाचार एजेंसी पीटीआई और एएनएआई ने पुलिस के हवाले से कहा है कि कम से कम 6 लोगों की मौत हुई है.

    वहीं समाचार एजेंसी एएनआई का कहना है कि हादसे में कम से कम 8 लोगों की मौत हुई है.

    ऐसा अनुमान है कि अब्बालगेरे गांव के नज़दीक़ हुनासोंडी में एक खदान के क़रीब यह विस्फोट हुआ है और पुलिस ने एक बम निरोधक दस्ते को भी बुलाया है.

    शिवमोगा ज़िले के डिस्ट्रिक्ट डिप्टी कमिश्नर केबी शिवकुमार ने कहा है, “हमने पूरे इलाक़े की घेराबंदी कर दी है. हम नहीं चाहते हैं कि उस जगह पर लोग जाएं क्योंकि अंधेरे के कारण हम दूसरा हादसा होने देना नहीं चाहते हैं. हम नहीं जानते हैं कि वहां विस्फोटक सामग्री पड़ी है या नहीं.”

    यह धमाका रात 10 बजकर 20 मिनट के क़रीब हुआ जिसका शोर और उसके झटके पड़ोस के चिकमंगलुरु ज़िले तक महसूस किए गए.

    शुरुआत में इस रहस्यमयी शोर को कई लोगों ने भूकंप समझा और वे अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए. कई घरों की खिड़कियों के शीशे भी टूट गए.

    शिवमोगा मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा का गृह ज़िला भी है.

  9. बगदाद में हुए दोहरे आत्मघाती धमाके, आईएस ने ली ज़िम्मेदारी

    इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इराक़ की राजधानी बगदाद में हुए दोहरे ब्लास्ट की ज़िम्मेदारी ली है. गुरुवार को हुए इस हमले में 32 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए.

    आईएस से जुड़े न्यूज एजेंसी अमाक़ के मुताबिक इस हमले का लक्ष्य शिया मुस्लिम थे. आईएस सुन्नी मुसलमानों का ग्रुप है.

    बीते तीन सालों के दरम्यान यह बगदाद में हुआ सबसे बड़ा हमला है.

    इस हमले में आत्मघाती हमलावरों ने तायरान स्क्वायर में कपड़े की बाज़ार में खुद को उड़ा दिया.

    आईएस ने इस हमले के कई घंटे बाद मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर अपने अकाउंट के ज़रिए इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

    2017 में इस क्षेत्र में सेना से हारने के बाद आईएस की तरफ से बहुत कम आत्मघाती हमले हुए हैं.

    कभी पूर्वी इराक से पश्चिमी सीरिया तक के क़रीब 88,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट का नियंत्रित था और वो लगभग 80 लाख लोगों पर अपना क्रूर शासन चलाता था.

    युद्ध के मैदान में आईएस की हार के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने अगस्त 2020 में अनुमान लगाया था कि 10 हज़ार से अधिक आईएस लड़ाके आज भी इराक़ और सीरिया में सक्रिय हैं.

    इसके स्लीपर सेल छोटे स्तर के विद्रोह जारी रखे हैं, जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं और सुरक्षा बलों को टारगेट कर रहे हैं.

    गृह मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार की सुबह हुए इस हमले में पहला आत्मघाती हमलावर बाज़ार में जा घुसा और अचानक बीमार पड़ने का बहाना कर अपने आस पास भीड़ इकट्ठा कर लिया.

    एक दुकानदार ने रायटर्स न्यूज़ एजेंसी को बताया, "हमलावर ने अपने हाथ से डेटोनेटर दबाया. तुरंत धमाका हुआ जिसमें कई लोगों के शरीर टुकड़े टुकड़े हो गए."

    मंत्रालय के मुताबिक, पहले धमाके बाद जब घायलों की मदद के लिए लोग इकट्ठा होने लगे तो दूसरा हमलावार ने खुद को उड़ा दिया.

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तायरान स्क्वायर बीते लगभग एक साल से कोरोनो वायरस से जुड़े प्रतिबंधों में ढील के बाद व्यस्त था.

    बगदाद में इससे पहले आखिरी आत्मघाती हमला इसी स्क्वायर में जनवरी 2018 को हुआ था, तब 35 लोग मारे गए थे.

    इराक़ी राष्ट्रपति बरहाम सालेह ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि "सरकार देश को अस्थिर करने के इन दुष्ट प्रयासों के ख़िलाफ़ मजबूती से कदम उठाएगी."

    मार्च में इराक की यात्रा की योजना बना रहे पोप फ्रांसिस ने सालेह को भेजे एक संदेश में इस "क्रूरता और मूर्खतापूर्ण हमले की निंदा की है."

    अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस हमले की निंदा की है.

    2018 में किया गया हमला संसदीय चुनावों से कुछ महीने पहले हुआ था और इराक इस साल के अंत में एक और आम चुनाव की योजना बना रहा है.

    सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि मतदाताओं और नई पार्टियों को पंजीकृत करने के लिए अधिकारियों को अधिक समय देने के लिए वोटिंग जून से अक्तूबर के बीच पुनर्निर्धारित की जाएगी.

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