'सुरक्षा ख़तरे' के मद्देनज़र यूएस कैपिटल बिल्डिंग को बंद किया गया - आज की बड़ी ख़बरें
जो बाइडन के अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभालने से दो दिन पहले सुरक्षा कारणों से वॉशिंगटन डीसी की कैपिटल बिल्डिंग को बंद कर दिया गया है.
लाइव कवरेज
सुशांत सिंह राजपूत केसः बंबई हाई कोर्ट ने कहा, मीडिया ट्रायल के कारण इंसाफ़ में बाधा पहुंचती है
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बंबई हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि खुदकुशी जैसे मामलों में रिपोर्टिंग करते समय मीडिया को संयम बरतना चाहिए.
कोर्ट ने ये भी कहा कि मीडिया ट्रायल से न्याय के प्रशासन में बाधा पहुंचती है और न्यायालय की अवमानना होती है.
बंबई हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी ने कहा कि प्रेस को किसी अपराध की जांच पर बहस करने से बचना चाहिए और उसे अपनी रिपोर्टिंग को केवल सूचना देने तक सीमित रखना चाहिए जो जनहित में हो.
बंबई हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले में उनकी मौत के बाद कुछ चैनलों की रिपोर्टिंग अवमानना के दायरे में आती थी.
हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि इन चैनलों के ख़िलाफ़ अवमानना का मामला नहीं चला जाएगा.
पश्चिम बंगाल: शिवसेना बीजेपी के हिंदू वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाएगी?
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पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाला विधानसभा चुनाव लगातार दिलचस्प मोड़ ले रहा है.
राज्य में बीते दस साल से राज कर रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार को एक ओर जहां बीजेपी से कड़ी चुनौती मिलने के आसार नज़र आ रहे हैं वहीं दूसरी ओर, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने भी मैदान में उतरने का एलान कर दिया है.
अब बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना ने भी सौ से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर सबको चौंका दिया है.
बंगाल में शिवसेना के ज़मीनी आधार और उसके चुनावी इतिहास को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए ही उसने मैदान में उतरने का फ़ैसला किया है?
कम से कम राजनीतिक पर्यवेक्षकों और बंगाल बीजेपी के नेता तो यही मानते हैं. शिवसेना के मैदान में उतरने के पीछे मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी का हाथ भी बताया जा रहा है
ली जेई योंग: सैमसंग के उत्तराधिकारी को रिश्वत कांड में जेल की सज़ा
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सैमसंग के उत्तराधिकारी ली जेई योंग को दक्षिण कोरिया के एक हाई कोर्ट ने ढाई
साल की जेल की सज़ा सुनाई है. उन्हें रिश्वत से जुड़े मामले में ये सज़ा सुनाई गई
है.
इसी मामले में देश की पूर्व राष्ट्रपति पार्क गुन-हे का नाम भी आया था, जो
रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं. इसी मामले में दोबारा मुकदमा चलाया
गया, जिसमें अब ली जेई योंग को सज़ा हुई है.
ली ने कंपनी का नेतृत्व तब संभाला था, जब 2014 में उनके पिता ली कुन-ही को दिल
का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके पिता का पिछले साल ही
निधन हुआ है.
ली 2014 से सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के वास्तविक प्रमुख
रहे हैं. अदालत के इस फ़ैसले से भविष्य में दिग्गज तकनीक कंपनी में उनकी भूमिका पर
असर पड़ सकता है.
सज़ा की ख़बर आने के बाद सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के
शेयरों में 4% से अधिक की गिरावट आई, जो इससे पहले तक कुछ बेहतर स्थिति में आने शुरू
हुए थे.
सज़ा की वजह से ली कम से कम
अस्थायी तौर पर कंपनी में किसी तरह का कोई निर्णय नहीं ले पाएंगे.
अदालत के फ़ैसले के अनुसार, ली ने "रिश्वतें दी और राष्ट्रपति से कहा कि वो
सैमसंग के प्रमुख के तौर पर उनके निर्बाध उत्तराधिकार में मदद करने के लिए अपनी
शक्ति का इस्तेमाल करें."
"यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भी राजनीतिक पावर
में बदलाव होता है तो देश की शीर्ष कंपनी और दिग्गज वैश्विक इनोवेटर सैमसंग बार-बार अपराधों में शामिल होती है."
अदालत ने ली को रिश्वत देने, गबन करने और लगभग 8.6 बिलियन डॉलर की क्रिमिनल प्रोसीड्स
पर परदा डालने का दोषी पाया, और कहा कि सैमसंग
की ओर से बीते साल की शुरुआत में बनाई गई स्वतंत्र अनुपालन समिति अभी तक पूरी तरह
से काम करने नहीं लगी है.
ली के वकीलों की टीम ने फ़ैसले पर निराशा जताई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सज़ा के चलते कंपनी के नेतृत्व
में एक वैक्यूम आ सकता है और ये भविष्य में बड़े निवेशों को लेकर सैमसंग के निर्णय
को बाधित कर सकता है.
सेजोंग विश्वविद्यालय में एक बिज़नेस प्रोफेसर किम
डाए-जोंग ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा,
"ये वास्तव में सैमसंग
के लिए एक बड़ा झटका और एक बड़ा संकट है."
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अमृतसर से बिहार के जयनगर जा रही एक यात्री ट्रेन की
दो बोगियां सोमवार सुबह लखनऊ में पटरी से उतर गईं.
रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक़, इस हादसे में किसी
की जान का नुक़सान नहीं हुआ है.
वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक जगत शुक्ला ने बताया
कि 4674 शहीद एक्सप्रेस घटना के तुरंत बाद अपनी आगे की यात्रा के लिए रवाना हो गई.
डीआरएम नार्दर्न रेलवे संजय त्रिपाठी के मुताबिक़, हादसा
सुबह 8 बजे के क़रीब तब हुआ, जब ट्रेन चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक
से निकली और इसकी दो बोगियां पटरी से उतर गईं.
डीआरएम ने बताया कि पटरी से उतरने वाली बोगियों में से
एक एसी थ्री टीयर और दूसरी स्लीपर थी और इनमें कुल 130 यात्री सफर कर रहे थे.
पटरी से उतरी बोगियों के यात्रियों को अन्य डिब्बों
में शिफ्ट कर दिया गया और ट्रेन सुबह 10.25 बजे रवाना हो गई.
मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है
जिसे सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है.
एसपी (रेलवे पुलिस) सौमित्र यादव ने बताया कि ये घटना
उस समय घटी जब ट्रेन प्लेटफॉर्म से चली थी और इसकी गति केवल पांच से सात किमी
प्रति घंटा थी.
वहीं उत्तर प्रदेश के इटावा में एक राजधानी एक्सप्रेस
ट्रेन मवेशियों के एक झुंड पर चढ़ गई. जिसमें आठ जानवरों की मौत हो गई है. ये
जानवर पटरी पर घूम रहे थे.
हादसा रविवार देर शाम हुआ. अधिकारियों ने सोमवार को
बताया कि जसवंत नगर और बलराई रेलवे स्टेशन के बीच हुए इस हादसे का कारण घना कोहरा
था.
क़रीब 10 अन्य जानवर घायल हुए हैं. जिन्हें इलाज के लिए
नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया.
सिराज और शार्दुल चमके, भारत के सामने 328 का लक्ष्य
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इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत
ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच ब्रिसबेन में चल रहे चौथे टेस्ट के चौथे दिन भी बारिश ने खेल में बाधा डाली और चौथे दिन के खेल को वक़्त से पहले ही ख़त्म करना पड़ा.
ब्रिसबेन के गाबा मैदान में ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी 294 रन पर सिमट गई. इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने जीत के लिए 328 रनों का लक्ष्य रखा है.
मोहम्मद सिराज और शार्दुल ठाकुर की प्रभावशाली गेंदबाज़ी के कारण भारत ने 294 रन पर ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में आउट कर दिया.
जब बारिश के कारण खेल रोका गया, तब तक भारत ने बिना किसी नुक़सान के चार रन बना लिए थे.
पश्चिम बंगालः ममता बनर्जी का एलान, नंदीग्राम से लड़ेंगी विधानसभा चुनाव
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि वे नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी.
वर्ष 2016 में इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर शुभेंदु अधिकारी जीते थे.
पिछले साल वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.
नंदीग्राम में एक चुनावी रैली में ममता बनर्जी ने ये घोषणा की.
उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने वालों को लेकर वे चिंतित नहीं है, क्योंकि जब टीमएमसी का गठन हुआ था, इनमें से कोई वहाँ नहीं था.
एक मिलीमीटर का कीड़ा जिसने एक देश की अर्थव्यवस्था बचा ली
रासायनिक कीटनाशकों की खोज से पहले फसलों में लगने वाले कीड़ों को ख़त्म करने के लिए किसान छोटे शिकारी जीवों पर निर्भर रहे हैं. वही प्रथा अब नए रूप में सामने आई है.
दक्षिण पूर्व एशिया में जैव विविधता से समृद्ध जंगलों में लाखों किसान कसावा की खेती पर निर्भर हैं. इस नक़दी फसल की खेती एक-दो हेक्टेयर ज़मीन वाले छोटे किसान भी करते हैं और हज़ारों हेक्टेयर वाले बड़े किसान भी. कसावा के स्टार्च का इस्तेमाल प्लास्टिक और गोंद बनाने में होता है.
कसावा को जब पहली बार दक्षिण अमरीका से लाया गया तब यहां के किसान बिना किसी कीटनाशक की मदद के इसकी खेती करते थे.
2008 से इसमें मिलीबग कीड़े लगने लगे और फसल बर्बाद होने लगी. घाटे की भरपाई के लिए किसानों ने जंगल की ज़मीन में घुसपैठ करनी शुरू की ताकि थोड़ी ज़्यादा फसल ले सकें.
स्टोरीः विलियम पार्क
वीडियो कैप्शन, एक मिलीमीटर का कीड़ा जिसने एक देश की अर्थव्यवस्था बचा ली
किसानों की ट्रैक्टर रैली देखना पुलिस का काम, हमारा नहीं- सुप्रीम कोर्ट
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किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गणतंत्र दिवस के दौरान किसे दिल्ली में आने की इजाज़त दी जाएगी ये सुरक्षा व्यवस्था का मामला है और ये फ़ैसला पुलिस का होना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाहियों पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती ने बताया कि चीफ़ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच सोमवार को गणतंत्र दिवस पर किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई कर रही थी.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चीफ़ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामा सुब्रमण्यन शामिल हैं.
इस दौरान कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में प्रवेश का मामला सुरक्षा व्यवस्था का है और किसे किन शर्तों पर इसकी इजाज़त दी जाएगी ये पुलिस तय कर सकती है.
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को कोर्ट ने कहा कि कोर्ट इस मामले में कोई फ़ैसला नहीं ले सकती.
इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा, "हमने पिछली बार कहा था कि दिल्ली में किसे प्रवेश की इजाज़त दी जानी चाहिए, इसका फ़ैसला लेना दिल्ली पुलिस के दायरे में आता है. किसानों को इजाज़त दी जानी चाहिए या नहीं ये क़ानून व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है और इस मामले में फ़ैसला कोर्ट नहीं ले सकती."
इससे पहले अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि किसानों की ट्रैक्टर रैली ग़ैर-क़ानूनी होगी और आशंका है कि इसके ज़रिए पांच हज़ार लोग दिल्ली में प्रवेश करेंगे.
इसके बाद कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से सवाल किया कि क्या सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें ये बताए कि पुलिस एक्ट के तहत उनके पास कौन-से अधिकार हैं?
अटॉर्नी जनरल ने ये भी कहा कि कोर्ट अगर इस संबंध में आदेश दे तो इससे पुलिस को मज़बूती मिलेगी.
कोर्ट ने उनसे कहा कि देश के सामने फिलहाल अभूतपूर्व स्थिति है, "लेकिन क्या आप ये चाहते हैं कि हम आपको ये बताएं कि आपके पास क्या ताकत है? मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप करने को ग़लत तरीके से समझा जा रहा है. शहर से भीतर कौन प्रवेश करेगा और किसे इसकी इजा़जत नहीं मिलेगी, ये देखना कोर्ट का काम नहीं है."
कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई अब आगे बुधवार को होगी.
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दो महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान सरकार के तीनों कृषि क़ानून का विरोध कर रहे हैं.
किसानों ने कहा है कि 26 जनवरी के दिन वो विरोध प्रदर्शन करेंगे और ट्रैक्टर रैली का आयोजन करेंगे. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की केंद्र सरकार की एक याचिका की सुनवाई कर रहा है जिसमें कोर्ट से हस्तक्षेप करने की गुहार की गई है.
दिल्ली पुलिस के द्वारा दर्ज की गई इस याचिका में सरकार ने कहा है कि किसी तरह के प्रस्तावित विरोध या रैली से गणतंत्र दिवस समारोह बाधित होगा और ये 'देश को शर्मनाक़ होगा.'
इससे पहले 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन से जुड़ी केंद्र सरकार की याचिका सुनने का फ़ैसला किया था, और इसके लिए 18 जनवरी का दिन तय किया था.
बेंच ने इस मामले में नोटिस जारी करने का आदेश दिया था और कहा था कि नोटिस विरोध प्रदर्शन में शामिल किसानों के यूनियनों को दिया जाए. केंद्र सरकार का कहना था कि विरोध प्रदर्शन कर सकने के अधिकार का इस्तेमाल कभी भी 'राष्ट्र का नाम ख़राब करने के लिए' नहीं किया जा सकता.
सरकार ने कोर्ट से गुज़ारिश की थी कि वो गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली, ट्रॉली रैली, गाड़ियों के मार्च या किसी और तरीके से दिल्ली आने पर रोक लगाने संबंधी आदेश दे.
अब तक मिल रही रिपोर्टों के अनुसार किसान नेताओं ने कहा है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली हरियाणा-दिल्ली सीमा पर आयोजित किया जाएगा और किसान न तो दिल्ली के लाल किले की तरफ आने की कोशिश करेंगे और न ह गणतंत्र दिवस की परेड को बाधिक करने की कोशिश करेंगे.
12 जनवरी को कोर्ट ने अगे आदेश तक विवादित कृषि क़ानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के लिए एक समिति के गठन का आदेश दिया था जिसमें चार सदस्य शामिल थे.
इस आदेश के कुछ दिनों बाद ही भारतीय किसान यूनियन और ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन समिति के अध्यक्ष भूपेंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग करने का ऐलान कर दिया था.
पाक पीएम बोले, मोदी सरकार ने चुनाव में उठाया बालाकोट का फ़ायदा
अर्नब गोस्वामी कथित व्हाट्सएप चैट लीक मामले
में अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी टिप्पणी की है.
उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट कर मोदी सरकार पर बालाकोट हमले का राजनीतिक फ़ायदा उठाने का आरोप लगाया है.
सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, "मैंने संयुक्त
राष्ट्र में अपने भाषण में कहा था कि कैसे मोदी सरकार ने बालाकोट संकट का इस्तेमाल
अपने घरेलू चुनाव में फ़ायदे के लिए किया, भारतीय पत्रकार की सामने आई चैट बताती
हैं कि कैसे मोदी सरकार और भारतीय मीडिया के बीच एक नेक्सस काम कर रहा है."
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कथित चैट्स के मुताबिक़ अर्नब गोस्वामी को बालाकोट हमले की
जानकारी हमले के तीन दिन पहले ही थी. मुंबई पुलिस की चार्जशीट के अनुसार ब्रॉडकास्ट ऑडियंस
रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व सीईएओ पार्थो दासगुप्ता और अर्नब गोस्वामी के बीच 23 फरवरी,
2019 को हुई चैट में उन्होंने कहा था कि "कुछ
बड़ा होने वाला है."
चैट के जो जब दासगुप्ता ने अर्नब से सवाल किया कि क्या दाऊद को लेकर
कुछ होने वाला है तो अर्नब ने कहा "...नहीं, पाकिस्तान.
इस बार. यह सामान्य स्ट्राइक से बड़ा होने वाला है."
दिल्ली में दस महीने बाद खुले स्कूल
राजधानी दिल्ली में दस महीनों बाद 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए सरकारी और निजी स्कूल खुल रहे हैं.
इससे पहले सीबीएसई ने कहा था कि इस साल मई में ऑफ़लाइन तरीके के बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी.
कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मार्च में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान स्कूलों को भी बंद किया गया था जिसके बाद से स्थिति में सुधार होने तक स्कूलों को बंद रखने का फ़ैसला किया गया था.
स्कूल खोलने से पहले उन्हें कोरोना महामारी के मद्देनज़र छात्रों के लिए सभी तरह के सुरक्षा इंतज़ाम करने को कहा गया था.
दिल्ली के डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर छात्रों को शुभकामनाएं दी है और कहा है कि उन्हें खुशी है कि सीमित तरीके से ही सही लेकिन दिल्ली में स्कूल फिर खुल रहे हैं.
उन्होंने लिखा "दसवीं और बारहवीं के उन छात्रों को शुभकामनाएं जो दस महीने बाद एक बार फिर स्कूल में कदम रखेंगे. हालांकि स्कूलों को सीमित काम के लिए खोला जा रहा है और कोरोना महामारी से जुड़े नियमों का पालन भी किया जा रहा है, लेकिन मुझे खुशी है कि स्कूल खुल रहे हैं."
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ब्रेकिंग न्यूज़, चौबीस घंटों में कोरोना के 13,788 मामले
एक महीने में दूसरी बार देश में कोरोना संक्रमण के 14,000 से कम मामले दर्ज किए गए हैं.
सरकार द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब तक भारत में कोरोना संक्रमण के कुल 1,05,71,773 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. बीते कल देश में कोरोना के 13,788 ताज़ा मामले दर्ज किए गए जबकि 145 लोगों की इससे मौत हुई.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक देश में 1,02,11,342 लोग संक्रमण के बाद ठीक हो चुके हैं और देश में फिलहाल कोरोना की मृत्यु दर 1.44 फीसदी हो गई है.
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वेब सिरीज़ 'तांडव' को लेकर विवाद, यूपी में दर्ज हुई एफ़आईआर
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अमेज़न प्राइम वीडियो पर 15 जनवरी को रिलीज़ हुई वेब सिरीज़ 'तांडव' के रिलीज़
होने के बाद से ही इस पर विवाद शुरू हो गया है. कई संगठन और बीजेपी नेता इस पर
प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं.
इस सिरीज़ को लेकर लखनऊ के हज़रतगंज थाने में एफ़आईआर दर्ज
कराई गई है. एफ़आईआर में कहा गया है कि इस सिरीज़ में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान
किया गया है और जातीय भेदभाव से भरी टिप्पणी की गई है.
ये एफ़आईआर अमरनाथ यादव नाम के सब-इंस्पेक्टर ने दर्ज कराई
है जो खुद हज़रतगंज थाने में तैनात हैं.
लखनऊ में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र ने बताया कि अमेज़न प्राइम वीडियो की ओरिजिनल कंटेंट हेड अपर्णा पुरोहित, वेब सीरीज़ के निर्देशक अली
अब्बास जफ़र, निर्माता हिमांशु कृष्ण मेहरा, लेखक गौरव सोलंकी सहित एक अन्य के
ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया गया है.
एफ़आईआर में सिरीज़ के कुछ दृश्यों और संवादों पर आपत्ति जताते हुए
कहा गया है, "वेब सीरीज़ के पहले एपिसोड के 17वें मिनट में हिंदू देवी-देवताओं को गलत ढंग से रूप धारण
कर धर्म से जोड़कर अमर्यादित तरीके से बोलते दिखाया गया है. ये धार्मिक भावनाओं को भड़काने
वाला है. इसी तरह पहले एपिसोड के 22वें मिनट में जातिगत द्वेष फ़ैलाने वाले संवाद का इस्तेमाल किया गया है. पूरी वेब सिरीज़ में प्रधानमंत्री जैसे गरिमामय पद को ग्रहण
करने वाले व्यक्ति का चित्रण अत्यंत अशोभनीय ढंग से किया गया है और जातियों को छोटा-बड़ा दिखाकर विभक्त करने वाले और
महिलाओं का अपमान करने वाले दृश्य हैं."
”साथ ही निम्न स्तरीय भाषा का प्रयोग किया गया है, जो धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला और आघात पहुंचाने वाला है. ऐसे ही संवाद और भी एपिसोड में मौजूद हैं.”
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एफ़आईआर में ये आरोप भी लगाए गए हैं कि सिरीज़ की मंशा एक समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर वर्ग विद्वेष फैलाने की है.
9 एपिसोड वाली इस सीरीज़ के रीलीज़ होने के दो दिन के भीतर इसे लेकर विरोध के स्वर सोशल मीडिया पर सामने आने लगे हैं. इन विरोध कर रहे लोगों में सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी से जुड़े लोग भी शामिल हैं.
बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक लीगल नोटिस भेजकर अमेज़न इंडिया से ये वेब सीरीज़ प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा है.
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कपिल मिश्रा ने ये भी दावा किया है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से अमेज़न प्राइम को तांडव सिरीज़ को लेकर नोटिस भेजा गया है.
उनका कहना है कि मंत्रालय ने इस पर तुरंत जवाब मांगा है.
दूरदर्शन ने भी ट्वीट कर कहा है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस वेब सिरीज़ को लेकर अमेज़न प्राइम से सफाई देने को कहा है.
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इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट किया, "जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, घटिया वेब सिरीज की आड़ में नफ़रत फैलाने वाली वेब सीरीज तांडव की पूरी टीम के खिलाफ़ योगीजी के उत्तर प्रदेश में गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, जल्द गिरफ्तारी की तैयारी."
तांडव एक पॉलिटिकल ड्रामा है जिसमें कॉलेज राजनीति से लेकर देश की राजनीति तक, सत्ता पाने की जद्दोजहद दिखाया गया है. इसमें सैफ़ अली ख़ान, डिंपल कपाड़िया और ज़िशान अयूब मुख्य भूमिका में हैं.
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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कहा है कि शान्ति, सौहार्द व आपसी भाईचारे का वातावरण ख़राब न हो इसके लिए सिरीज़ में जो भी आपत्तिजनक दृश्य़ हैं उन्हें हटा दिया जाना उचित होगा.
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ब्राज़ील के लिए वेनेज़ुएला ने भेजा ऑक्सीजन
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वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलास मादुरो ने कहा है कि ब्राज़ील के उत्तरी अमेज़न राज्य के लिए उन्होंने ज़रूरी ऑक्सीजन भेजा है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार उन्होंने रविवार को कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर से भरे ट्रकों का ये काफिला सोमवार सवेरे तक अमेज़न तक पहुंचेगा. अमेज़न फिलहाल कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है.
वेनेज़ुएला के दक्षिण के एक राज्य के गवर्नर जस्टो नोगुएरा का संदेश पढ़ते हुए मादुरो ने कहा कि सोमवार को ऑक्सीजन सिलेंडर से लदे 6 ट्रकों को ब्राज़ील के सैंटा एलेना दे उवारेन सीमा पर ब्राज़ील के स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपा जाएगा.
ये ट्रक आगे अमेज़न राज्य की राजधानी मानुस के अस्पतालों तक पहुंचाए जाएंगे जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
इन ट्रकों के ज़रिए 1 लाख 36 हज़ार लीटर ऑक्सीजन ब्राज़ील पहुंचाया गया है जिन्हें 14,000 ऑक्सीजन सिलेंडरों में भरा जा सकता है.
मादुरो ने कहा कि "हम ब्राज़ील के लोगों को बताना चाहते हैं कि हम हमेशा उनकी मदद करने के लिए तत्पर हैं."
सोमवार को ब्राज़ील के स्वास्थ्य अधिकारियों ने चीनी कंपनी साइनोवैक बायोटेक की बनाई कोरोना वैक्सीन और ब्रिटेन में बनी एस्ट्राज़ेनिका की कोरोना वैकेसीन के आपात इस्तेमाल को अनुमति दे दी थी.
इससे पहले ब्राज़ील से राष्ट्रपति ज़ायर बोलसोनारो खुद कोरोना वैक्सीन लगवाने से इनकार कर चुके हैं. महामारी की शुरूआत में बोलसोनारो इसे 'सामान्य फ्लू' कहा था.
कोरोना महामारी के निपटने के उनके तरीके के लिए देश के भीतर कई बार उनकी आलोचना की गई है.
जॉन्स हॉप्किन्स युनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार अब तक ब्राज़ील में 8,488,099 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं और 2,09,847 लोगों की इससे मौत हुई है. कोरोना से हुई मौतों के मामले में अमेरिका के बाद ब्राज़ील दूसरे नंबर पर है.
कोरोना वैक्सीन को लेकर आज हो सकती है अहम बैठक
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कोविड-19 की वैक्सीन को
लेकर आगे की रणनीति क्या होगी इस पर सोमवार को सरकार की अहम बैठक हो सकती है.
सामाचार एजेंसी एएनआई के
मुताबिक़ सरकारी अधिकारी, फ़ार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के प्रतिनिधि और इससे जुड़ी
पार्टियों के साथ बैठक कर सकते हैं ताकि टीकाकरण के लिए आगे की योजना पर चर्चा की
जा सकें.
स्वास्थ्य विभाग के
मुताबिक़ पहले दो दिनों में यानी 16 और 17 जनवरी को कुल दो लाख 24 हज़ार लोगों का टीकाकरण
किया गया है. टीकाकरण के बाद इसके साइड इफेक्ट यानी एइएफ़आई (एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्युनाइजेशन) के 447 मामले रिपोर्ट
किए गए हैं.
किसान आंदोलनः 40 लोगों को NIA का नोटिस, बादल ने कहा- केंद्र डराना चाहता है
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बीजेपी की सहयोगी पार्टी
रही शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एअनआईए) की ओर से किसान आंदोलन से
जुड़े नेताओं और समर्थकों को किए गए समन का विरोध किया है. उन्होंने केंद्र सरकार
पर जांच एजेंसियों का इस्तेमाल लोगों को डराने के लिए करने का आरोप लगाया है.
अकाली दल प्रमुख सुखबीर
सिंह बादल ने ट्वीट कर कहा, "किसान नेताओं और
आंदोलन के समर्थकों को एनआईए और ईडी की पूछताछ के जरिये डराने-धमकाने की केंद्र
सरकार की कोशिशों की कड़ी निंदा करता हूं. वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं."
उन्होंने आगे लिखा, नौवें दौर की बातचीत
के बाद भी असफल होने के बाद ये एकदम साफ हो गया है कि भारत सरकार केवल किसानों को थकाने-कमज़ोर
करने की कोशिश कर रही है.
सुखबीर सिंह बादल ने क्या कहा
पत्रकारों से बात करते
हुए उन्होंने ख़ालसाएड नाम के एनजीओ को एनआईए के समन पर कहा, "ख़ालसाएड एक ऐसी
संस्था है जिसे दुनियाभर में सेवा करने के लिए जाना जाता है, ये संस्था सेवा भाव
के लिए थाईलैंड, बोस्निया पहुंच जाती है. ख़ालसाएड अपने देश के कई राज्यों में
जाती है, जब गुजरात जाती है तो इन्हें वो अच्छा लगता है, लेकिन यहां लगता है
केंद्र निराशा हो गई है और ये कर रही है. उन्हें लग रहा है कि ये सब करके और
लंबे वक्त तक आंदोलन चलता रहा तो खुद ख़त्म हो जाएगा लेकिन ऐसा करके वो किसानों के
इरादों को मज़बूत कर रही है."
"उन्हें लगता है नोटिस दे कर 60 दिन से ठंड में बैठे लोगों को डरा देगी तो ये
केंद्र सरकार की भूल है. किसान इस तरह के नोटिस की परवाह नहीं करेंगे, उन्हें जितना अधिक तंग
किया जाएगा उतना संघर्ष तेज़ होगा."
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एनआईए ने लगभग 40 लोगों को नोटिस जारी किया है जिसमें लोक भलाई इंसाफ़ वेलफ़ेयर के प्रमुख बलदेव सिंह का नाम है, बलदेव सिंह उस डेलिगेशन का हिस्सा है जो सरकार से हो रही बातचीत में शामिल है. इसके अलावा अभिनेता दीप सिंह संधु जो किसान आंदोलन के समर्थक हैं और एनजीओ ख़ालसाएड का नाम भी इसमें शामिल है.
दरअसल ये समन 15 दिसंबर को दायर किए गए एक एफ़आईआर के सिलसिले में किया गया है. इस एफ़आईआर के अनुसार प्रतिबंधित खालिस्तानी समूह सिख्स फ़ॉर जस्टिस फ़ंड जुटा कर भारत में खालिस्तानी-समर्थक समूहों को फंड भेज रही है. सिख्स फॉर जस्टिस पर साल 2019 में गृह मंत्रालय ने प्रतिबंध लगाया था
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