अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पारित हो गया है. ट्रंप ने एक बयान जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
लाइव कवरेज
सुप्रीम कोर्ट के कमेटी बनाने पर क्या बोले किसान?
वीडियो कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट के कमेटी बनाने पर क्या बोले किसान?
दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट की पहल का स्वागत तो करते हैं मगर उनका आरोप है कि जो कमिटी किसानों की मांगों को लेकर बनाई गई है 'वो सरकार के ही पक्ष' में काम करेगी.
किसानों के संगठनों के प्रतिनिधि और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि जिन चार लोगों की कमिटी बनाई गई है उनपर किसानों को भरोसा इसलिए नहीं है क्योंकि इनमें से कुछ एक ने कृषि बिल को लेकर सरकार का खुलेआम समर्थन किया है.
सुप्रीम कोर्ट में चली कार्यवाही के बाद दिल्ली की सरहद से फ़ोन पर बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि किसान अपना आंदोलन जारी रखेंगे और अपने आंदोलन के स्थल को भी नहीं बदलेंगे.
उनका कहना था, "हम सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करते हैं कि माननीय मुख्य न्यायाधीश और बेंच के दूसरे न्यायाधीशों ने कम से कम आंदोलन कर रहे किसानों की मुश्किलों को तो समझा. सर्वोच्च अदालत ने आंदोलन करने के अधिकार का भी बचाव किया है. ये बहुत बड़ी बात है."
जानिए क्या है औरंगाबाद का इतिहास?
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औरंगाबाद सिटी और औरंगाबाद ज़िले का नया नाम रखने पर बहस जब-तब उठ खड़ी होती है. हाल में औरंगाबाद शहर में 'लव औरंगाबाद' और 'सुपर संभाजीनगर' लिखे साइन-बोर्ड जगह-जगह देखने को मिले.
इसने शहर के नाम को लेकर होने वाले विवाद को एक बार फिर हवा दी और इसमें कई राजनीतिक पार्टियाँ कूद पड़ीं.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना है कि 'शिवसेना कई सालों से औरंगाबाद का नाम बदलने की माँग करती रही है. राज्य में अब शिवसेना सत्ता में है, लिहाज़ा उसे अब इस शहर का नाम संभाजीनगर कर यह माँग पूरी करनी चाहिए.'
दूसरी ओर कांग्रेस ने यह साफ़ कर दिया है कि 'वह शहर का नया नाम रखने के किसी भी क़दम का पुरज़ोर विरोध करेगी.'
आज का कार्टून: पीछे देखो पीछे
भारत में वैक्सीन की सप्लाई पर आज का कार्टून.
नरेंद्र मोदी भारत के नाराज़ किसानों का मूड कैसे नहीं पढ़ पाए?
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किसान आंदोलन के 49 दिन बाद और आठ चरण की वार्ता के बावजूद केंद्र सरकार किसानों को मनाने में नाकाम रही है.
दिल्ली की सीमाओं को घेर कर बैठे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान तीनों क़ानूनों की वापसी से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि 'वो प्रदर्शन स्थलों को तभी छोड़ेंगे, जब सरकार तीनों क़ानून वापस ले लेगी.'
मोदी सरकार किसानों के उत्पादों की बिक्री, क़ीमत और भण्डारण को लेकर नये क़ानून लायी है.
सरकार का दावा है कि इन क़ानूनों से किसानों की स्थिति सुधरेगी.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर की गईं कुछ याचिकाओं पर सुनवाई के बाद तीनों क़ानूनों पर अस्थायी रोक लगा दी है.
अदालत में आगे क्या हो सकता है, इस बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है.
लेकिन सवाल है कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी आख़िर कैसे सबसे ज़्यादा प्रभावित कहे जा रहे पंजाब और हरियाणा के किसानों का मूड नहीं समझ पाये?'
क्या गड़बड़ पंजाब की एक सहयोगी पार्टी (अकाली दल) की वजह से हुई जिसने पहले इन क़ानूनों का समर्थन किया था, पर बाद में इन क़ानूनों को किसान-विरोधी बताते हुए सरकार से नाता तोड़ लिया.
और क्या मोदी सरकार को यह लगा था कि इन क़ानूनों के आने से उनके लोकप्रिय समर्थन में किसी भी तरह का नुक़सान नहीं होगा?
कर्नाटक में सीएम येदियुरप्पा ने फिर किया मंत्रिमंडल का विस्तार, सात नए मंत्री शामिल
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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बुधवार को अपने 17 महीने पुराने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए सात मंत्रियों को शामिल किया है और संकेत दिया कि एक्साइज़ मंत्री एच नागेश को हटा दिया जाएगा.
राज्यपाल वजुभाई वाला ने राजभवन में एक समारोह में मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
नए मंत्रियों में विधायक उमेश कट्टी (हुक्केरी), एस अंगारा (सुलिया), मुरुगेश निरानी (बिलगी) और अरविंद लिंबावली (महादेवपुरा), और एमएलसी आर शंकर, एमटीबी नागराज और सी पी योगेश्वर हैं.
इस मौक़े पर मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ मौजूद थे. साथ ही भाजपा नेता और पदाधिकारी, जिनमें कर्नाटक के प्रभारी महासचिव अरुण सिंह, राज्य इकाई के अध्यक्ष नलिन कुमार कात्याल भी शामिल हुए.
गठबंधन के 17 विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिर गई थी और जुलाई 2019 में येदियुरप्पा के पदभार ग्रहण करने के बाद से ये तीसरा मंत्रिमंडल विस्तार है.
इन नए मंत्रियों में कांग्रेस-जेडीएस के पूर्व सदस्य भी शामिल हैं. येदियुरप्पा ने कांग्रेस-जेडीएस के बाग़ी बने भाजपा एमएलसी आर शंकर और एमटीबी नागराज को मंत्रिमंडल में शामिल किया है.
दोनों ने कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार में मंत्री के रूप में काम किया था.
एक अन्य एमएलसी योगेश्वर को भी मंत्रालय में शामिल किया गया जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 2019 में राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
टीएमसी के पूर्व राज्य सभा सांसद केडी सिंह को ईडी ने किया गिरफ़्तार
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प्रवर्तन निदेशालय ने टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद और कारोबारी केडी सिंह को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बुधवार को बताया कि अल्केमिस्ट लिमिटेड कंपनी के 59 वर्षीय संस्थापक केडी सिंह पर जांच में असहयोग करने का आरोप लगाया गया है जिसके बाद मंगलवार रात प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें तीन दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है.
तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य केडी सिंह काफ़ी समय से पार्टी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होते हुए नहीं देखे गए हैं.
ईडी ने सितंबर 2019 में केडी सिंह और उनके साथ जुड़े लोगों के परिसरों पर छापे मारे थे.
उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में जांच चल रही है.
पहला मामला कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफ़आईआर पर आधारित है जबकि दूसरा मार्किट रेगुलेटर सेबी द्वारा दायर चार्जशीट के आधार पर है.
सिख नेता नवदीप बैंस के इस्तीफ़े के बाद जस्टिन ट्रूडो की कैबिनेट में फेरबदल
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कनाडा में भारतीय मूल के सिख नेता नवदीप बैंस के अचानक इस्तीफा देने के बाद प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कैबिनेट में फेरबदल किया है और एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी है.
मंगलवार को जस्टिन ट्रूडो ने ट्विटर पर कहा, "नवदीप बैंस ने कहा है कि वो अपने परिवार के साथ ज़्यादा वक़्त बिताने के लिए इनोवेशन, साइंस और इंडस्ट्री मिनिस्टर का पद छोड़ रहे हैं. उनकी घोषणा के बाद खाली हुई जगह को भरने के लिए हम बदलाव कर रहे हैं."
एक वीडियो संदेश में नवनीत बैंस ने कहा कि परिवार के साथ समय बिताने के लिए मैं राजनीति से रिटायर हो रहे हैं.
माना जा रहा है कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे, हालांकि नवनीत बैंस ने ये भी कहा है कि वे अगले चुनावी मुहिम का हिस्सा ज़रूर रहेंगे.
साल 2015 में जब ट्रूडो कनाडा की सत्ता में आए थे तो उन्होंने सिख समुदाय के चार मंत्रियों को अपनी कैबिनेट में जगह दी थी.
नवनीत बैंस उन चार लोगों में से एक थे.
इससे पहले नवनीत बैंस साल 2005 में प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव रहे थे. बैंस साल 2004 से 2011 तक सांसद रहे. ट्रूडो की कैबिनेट में अब केवल दो सिख मंत्री रह गए हैं.
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दिल्ली में 10वीं और 12वीं के बच्चे 18 जनवरी से जा सकेंगे स्कूल
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प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारियों और प्रैक्टिकल क्लास को चलाने के लिए दिल्ली के सरकारी सहायता प्राप्त और ग़ैरसरकारी स्कूल 10वीं और 12वीं कक्षा के बच्चों को बुला सकेंगे.
दिल्ली सरकार के आदेश के मुताबिक़ दिल्ली के स्कूल 18 जनवरी से इन बच्चों को बुला सकते हैं लेकिन इसके लिए अभिभावकों की मंज़ूरी ज़रूरी होगी.
समाचार एजेंसी एएनआई के आदेश में ये भी कहा गया है कि स्कूल आने वाले बच्चों का रिकॉर्ड रखा जाएगा और इसका इस्तेमाल हाजिरी के मक़सद से नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि बच्चे को स्कूल भेजना या न भेजना पूरी तरह से अभिभावकों की इच्छा पर निर्भर करता है.
वैक्सीन के बारे में भ्रांतियां न फैलाएं – केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद
केजरीवाल ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वैक्सीन मुफ़्त नहीं देती है तो दिल्ली सरकार
ज़रूरत पड़ने पर वैक्सीन मुफ़्त में मुहैया करवाएगी.
केजरीवाल ने साथ ही वैक्सीन को
लेकर भ्रम ना फैलाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और वैज्ञानिकों
ने सभी प्रोटोकॉल फॉलो कर ये दवाई लाई है, इसलिए इस पर कोई शंका नहीं होनी चाहिए.
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चीन में पांच महीने बाद कोरोना के मामलों में तेज़ी, चार शहरों में लॉकडाउन
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चीन में पांच महीने से भी
ज़्यादा वक़्त बाद कोरोना संक्रमण के एक दिन में सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किए गए
हैं. जबकि कोरोना की अगली लहर से बचने के लिए चीन के चार शहरों में लॉकडाउन लागू
है, टेस्टिंग बढ़ा दी गई है और दूसरे कदम भी उठाए जा रहे हैं.
ज़्यादातर नए मामले
राजधानी बिजिंग के नज़दीक मिले हैं. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़
उत्तरपूर्वी चीन के एक प्रांत में भी मामलों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है. मामले
बढ़ने के बीच 28 मिलियन से ज़्यादा लोगों को होम क्वारंटीन में डाल दिया गया है.
नेशनल हेल्थ कमिशन ने एक
बयान में कहा कि चीन में कुल 115 नए मामलों की पुष्टि हुई है, इसके मुक़ाबले एक
दिन पहले 55 मामले दर्ज किए गए थे. 30 जुलाई के बाद एक दिन में ये सबसे ज़्यादा
बढ़त है.
कमिशन ने बताया कि 107
मामले लोकल इंफेक्शन थे. 90 मामले बिजिंग से लगने वाले हिबे प्रांत में दर्ज किए
गए, वहीं उत्तरपूर्वी हेलुंगजांग प्रांत में 16 नए मामले सामने आए.
हिबे के तीन शहरों में
लॉकडाउन लगा दिया गया है, वहीं बिजिंग शहर के प्रशासन ने स्क्रीनिंग और दूसरे
एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिया है ताकि अन्य क्लस्टर बनने से रोका जा सके.
हेलुंगजांग प्रांत ने बुधवार
को कोविड-19 इमरजेंसी घोषित कर दी. प्रांतीय राजधानी हार्बिन की सीमा से लगने वाले
सूहुआ शहर ने अपने 5.2 मिलियन नागरिकों के लिए लॉकडाउन लगा दिया है.
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ब्रेकिंग न्यूज़, किसान आंदोलन: कांग्रेस ने उठाए सुप्रीम कोर्ट की समिति पर सवाल
कांग्रेस पार्टी ने कृषि क़ानूनों पर किसानों के विरोध के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी पर सवाल उठाये हैं.
पार्टी ने सवाल किया है कि ‘जो लोग इन काले क़ानूनों
को सही ठहरा चुके हैं, वे किसानों के साथ न्याय कैसे करेंगे?’
बुधवार को प्रेस से बात करते हुए
पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “कमेटी के जो चारों सदस्य
हैं, वे पहले से ही मोदी जी के साथ खड़े हैं, वे काले क़ानूनों के साथ खड़े हैं.
एक सदस्य तो यह तक कह चुके हैं कि इन क़ानूनों से ही किसानों को आज़ादी मिलेगी. एक
अन्य सदस्य तो सरकार को ज्ञापन दे चुके हैं कि वे इन क़ानूनों के समर्थन में सरकार
के साथ खड़े हैं. खेत और खलिहान की मोदी जी की साज़िश के साथ खड़े हैं, तो ये
कमेटी किसानों के साथ न्याय कैसे करेगी? या कैसे
कर सकती है? और इसका नतीजा क्या निकलेगा?”
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कांग्रेस पार्टी का कहना है कि किसानों और केंद्र सरकार के बीच जारी विवाद को सुलझाने के लिए जो कमेटी बनायी गई है, उसमें शामिल सदस्य पहले ही सार्वजनिक तौर पर यह निर्णय रख चुके हैं कि ‘ये तीनों काले क़ानून सही हैं.’
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “पहले सदस्य कमेटी के हैं अशोक गुलाटी जी, उन्होंने बाक़ायदा ये लेख लिखा कि ये तीन क़ानून बिल्कुल सही हैं, ये भी कहा कि विपक्षी दल भटक गये हैं व किसान भी शायद भटक गये हैं. उन्होंने ये भी कहा कि मैं पहले से ही कह रहा हूँ कि इन क़ानूनों के फ़ायदे किसानों के समझ नहीं आ रहे!”
हालांकि, कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के मामले में चिंता ज़ाहिर कर केंद्र सरकार को सच का आईना दिखाया है.
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कोरोना: बीते 24 घंटे में संक्रमण के 15,968 नये मामले, 202 लोगों की मौत
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भारत में बीते 24 घंटे में कोविड-19 संक्रमण के 15,968 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 202 लोगों की मौत हुई है.
केंद्रीय स्वास्थ्य
मंत्रालय के मुताबिक़ पिछले 24 घंटे में ही 17,817 लोग कोरोना से
ठीक हुए हैं.
देश में अब कोरोना
संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 1 करोड़ 4 लाख 95 हज़ार 147 हो गई है.
सक्रिय मामलों की संख्या
इस वक़्त 2 लाख 14 हज़ार 507 है. वहीं अब तक
1 करोड़ 1 लाख 29 हज़ार 111 लोग ठीक हो चुके
हैं.
कोविड-19 से अब तक भारत में
कुल 1 लाख 51 हज़ार 529 लोगों की जान गई है.
महाभियोग: ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट करेंगे उनकी ही पार्टी के सांसद
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुर्सी से हटाने की डेमोक्रेट्स की कोशिशों को अब
उनके ही कुछ साथी रिपब्लिकन्स का साथ मिलने लगा है.
प्रतिनिधि सभी की तीसरी सबसे वरिष्ठ रिपब्लिकन लिज़ चेनी ने कहा है कि वो बीते
हफ़्ते की यूएस कैपिटल पर हुई हिंसा को देखते हुए ट्रंप पर महाभियोग चलाने के लिए मतदान
करेंगी.
पूर्व उप-राष्ट्रपति डिक चेनी की बेटी लिज़ चेनी ने महाभियोग का समर्थन करने
की बात कही. रिचर्ड निक्सन के वक़्त के बाद से ये पहली बार है जब राष्ट्रपति की
ख़ुद की पार्टी के किसी नेता ने ऐसा किया हो.
लिज़ चेनी ने एक बयान में कहा, “इससे पहले अमेरिका के किसी
राष्ट्रपति ने अपने ऑफ़िस और संविधान की शपथ से इतना बड़ा विश्वासघात नहीं किया है.”
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लिज़ ने साथ ही कहा कि ट्रंप ने “भीड़ को बुलाया, उन्हें इकट्ठा किया, इस हमले को हवा दी.”
हाउस के दो अन्य रिपब्लिकन सदस्यों, जॉन काटको और एडम किंज़िनर ने कहा कि वो भी महाभियोग के लिए मतदान करेंगे.
इससे पहले राष्ट्रपति ने अपने समर्थकों के हमले की ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था.
20 जनवरी को डेमोक्रेट जो बाइडन उनकी जगह ले लेंगे.
हाउस ने बुधवार को मतदान करने की योजना बनाई है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ विद्रोह भड़काने के आरोप लगाए जाएंगे. इसके बाद वो ऐसे दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे, जिनके ख़िलाफ़ दो बार महाभियोग चलाया गया.
नेताओं को भी पहले चरण में मिले वैक्सीन, पुदुचेरी के मुख्यमंत्री की पीएम से माँग
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पुदुचेरी के मुख्यमंत्री
वी नारायणसामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि टीकाकरण के
पहले चरण में राजनीतिक पार्टी के नेताओं, मंत्रियों और विधायकों को भी वैक्सीन लगवाने
की अनुमति दी जाए.
वी नारायणसामी ने
बताया, “मैंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा है
कि राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, मंत्रियों और विधायकों को भी टीकाकरण के पहले
चरण में वैक्सीन लगवाने दी जाए. इस तरह वो एक उदहारण पेश करेंगे जिससे आम जनता में
भी विश्वास पैदा होगा.”
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने इससे पहले कहा था कि टीकाकरण के पहले चरण में क़रीब तीन करोड़
स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों को वैक्सीन लगाई जाएगी. उन्होंने साथ
ही कहा था, “दूसरे चरण में 50 साल से
ज़्यादा उम्र वाले लोगों और 50 साल से कम उम्र वाले उन लोगों को वैक्सीन लगाई
जाएगी जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं.”
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प्रधानमंत्री मोदी ने ये भी कहा था कि नेताओं को सबसे पहले वैक्सीन नहीं दी जाएगी, लेकिन उनका जब नंबर आएगा तो उन्हें वैक्सीन दी जाएगी. उन्होंने टीकाकरण अभियान को लेकर नेताओं को ख़ास हिदायत दी थी कि वो अपनी बारी आने पर ही कोरोना का टीका लगवाएं और इस दौरान नियमों को उल्लंघन ना करें.
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक भी कह चुके हैं कि लोगों के मन में कोरोना वैक्सीन को लेकर संशय है इसलिए प्रधानमंत्री मोदी पहले टीका ख़ुद ही लगवाएं.
भारत में टीकाकरण का पहला चरण 16 जनवरी से शुरू हो रहा है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की कोरोना वायरस वैक्सीन कोविशील्ड की पहली खेप मंगलवार को पुणे से देश की 13 अलग-अलग जगह पहुंचाई गई.
कोविशील्ड उन दो कोरोना वायरस वैक्सीन में से एक है जिसे भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी मिली है.
किसान आंदोलनः सुप्रीम कोर्ट की समिति के सदस्य बोले, ‘किसानों को न्याय मिलेगा’
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किसान आंदोलन के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई चार सदस्यीय
समिति में शामिल अनिल घनवत ने कहा है कि “प्रदर्शनकारी किसानों को न्याय
मिलेगा.”
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों कृषि क़ानूनों पर
रोक लगा दी और विशेषज्ञों की एक समिति गठित की, जो कृषि क़ानूनों को लेकर किसानों
की शिकायतों और सरकार की बात सुनेगी और दो महीने के अंदर अदालत में अपनी रिपोर्ट
पेश करेगी.
महाराष्ट्र के प्रमुख किसान संगठन शेतकारी संगठन के अध्यक्ष
अनिल घनवत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “ये
आंदोलन कहीं जाकर रुकना चाहिए और किसानों के हित में एक क़ानून बनाया जाना चाहिए.
पहले हमें किसानों को सुनना पड़ेगा, अगर उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और
कृषि उपज बाज़ार समित (एपीएमसी) को लेकर कोई ग़लतफ़हमी है, तो हम उसे दूर करेंगे,
उन्हें ये भरोसा दिया जाना ज़रूरी है कि जो भी हो रहा है वो उनके हित में ही हो
रहा है.”
उन्होंने कहा, “कई किसान
नेता और संगठन एपीएमसी के एकाधिकार से आज़ादी चाहते हैं, इसे रोकने की ज़रूरत है
और किसानों को अपनी फसल बेचने की आज़ादी दी जानी चाहिए. बीते 40 सालों से ये मांग
की जा रही थी. जिन किसानों को एमएसपी चाहिए, उन्हें वो मिले और जिन्हें इससे
आज़ादी चाहिए, उनके पास भी विकल्प होना चाहिए.”
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इस बीच प्रदर्शनकारी किसान नेताओं ने साफ़ किया कि वो समिति बनाने के अदालत के फ़ैसले को स्वीकार नहीं करेंगे.
किसान नेताओं के मुताबिक़, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए इस समिति को ला रही है. उनका दावा है कि इस समिति के सभी सदस्य सरकार के समर्थन में हैं और ये सदस्य क़ानूनों को ही सही बात रहे हैं.
घनवत कहते हैं कि किसानों का ये मानना बिल्कुल ग़लत है.
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उन्होंने कहा, “ये पूरी तरह से एक ग़लतफ़हमी है. अशोक गुलाटी कोई राजनीतिक नेता नहीं है या ना ही किसी समूह का हिस्सा हैं. वो एक कृषि अर्थशास्त्री हैं. मैं भी इसपर निष्पक्ष रहा हूं, मैंने कभी किसी राजनीतिक पार्टी के लिए काम नहीं किया, बल्कि हमेशा किसानों के लिए काम किया, और आने वाले दिनों में जो कुछ भी होगा, हम पूरी कोशिश करेंगे कि हम पूरे देश के किसानों के हित को देखते हुए मसले का हल निकालेंगे, ना कि सिर्फ महाराष्ट्र या पंजाब के किसानों को ध्यान में रखकर.”
घनवत के अलावा सुप्रीम कोर्ट की समिति में भारतीय किसान संगठन के मान धड़े के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, इंटरनैशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी को शामिल किया गया है.
घनवत ने कहा कि समिति तब तक अपना काम शुरू नहीं कर सकती, जब तक कि उसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिशा-निर्देश ना मिल जाएं.
उन्होंने कहा, “जैसे ही ये मिलेंगे, हम सभी किसान नेताओं से मुलाक़ात करेंगे और उनकी मांगों को लेकर उनकी राय लेंगे और पूछेंगे कि ये कैसे किया जा सकता है.”
घनवत ने साथ ही कहा, “मैं अपने निजी विचारों को किनारे रखूंगा, प्रदर्शनकारी किसान नेताओं को समिति के साथ मिलकर काम करना चाहिए और अपने विचार व्यक्त करने चाहिए.”
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