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ट्रंप को तत्काल राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए संसद में बहस जारी

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स में राष्ट्रपति ट्रंप को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया है.

लाइव कवरेज

  1. Farmer Protest LIVE: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसान नेताओं की प्रेस कॉन्फ़्रेंस

  2. बिहार और बंगाल पहुंची कोरोना की वैक्सीन कोविशील्ड की पहली खेप

    कोरोना वायरस की वैक्सीन कोविशील्ड की पहली खेप सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, पुणे से पं. बंगाल की राज़धानी कोलकाता और बिहार की राजधानी पटना पहुंच गई है.

    कोलकाता के बेग़ बज़ार इलाके में स्थित सेंट्रल फैमिली मेडिकल स्टोर में इस वैक्सीन को रखा गया है. वहीं, पटना में नालंदा मेडिकल कॉलेज में वैक्सीन को रखा गया है.

    इसके अलावा दिल्ली, कर्नाटक, चेन्नई, अहमदाबाद जैसे 13 राज्यों में आज वैक्सीन की खेप पहुंचाई गई है.

    एयरइंडिया, इंडिगो सहित 9 एयरलाइंस के ज़रिए 56.5 लाख खुराक़ को देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा गया है.

    16 जनवरी से पहले फ़ेज़ के टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी.

    पहले फ़ेज़ में देशभर के 3 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों को ये वैक्सीन दी जाएगी जिसका खर्च केंद्र सरकार उठाएगी. सीरम इंस्टीट्यूट ने जानकारी दी है कि वैक्सीन के एक खुराक़ की कीमत 200 रूपये होगी.

  3. मोदी सरकार मौजूदा कृषि कानून रद्द करे और किसानों के साथ मिलकर नया कानून बनाए-अजित सिंह

    राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और पूर्व कृषि मंत्री चौधरी अजित सिंह ने कहा है कि सरकार को मौजूदा कृषि कानून रद्द करके नया कानून बनाना चाहिए जिसे वह किसानों से बात करके तैयार करे और संसद की सलेक्ट कमिटी में भेजे.

    बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से उन्होंने खुलकर इस कानून की कमियों पर बात की और बताया कि किसान क्यों इस कानून से डरे हुए हैं.

    उन्होंने कहा, "पहली बात तो ये है कि ये कानून बड़ी जल्दी में पास किए गए हैं. अध्यादेश लाया गया, किसानों के किसी समूह से बात नहीं की गई, पास करने से पहले ये बिल सलेक्ट कमिटी में नहीं गया और राज्यसभा में तो क़ायदे से वोटिंग भी नहीं कराई गई, ध्वनि मत से जबरन पास कराया गया."

    "अब जब बीते 47 दिन से किसान सड़कों पर बैठे हैं, साठ लोग मर चुके हैं और सरकार की ओर से दुख तक प्रकट नहीं किया गया. सरकार का मक़सद धीरे-धीरे एमएसपी और मंडी सिस्टम को ख़त्म करना है. देखिए सरकार कहती है एमएसपी बढ़ा रहे हैं लेकिन एमएसपी पर खरीदारी बिलकुल नहीं होती है. धान का दाम 1900 रुपये हैं बाज़ार में 1100 रुपये में मिल रहा है, यही हाल सभी फ़सलों का है, महज़ 6 फ़ीसदी किसानों को एमएसपी मिल पा रही है."

    "जो सरकारी संस्था है फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया वह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदारी करती है. जब मनमोहन सरकार का कार्यकाल ख़त्म हुआ था तो उस वक़्त एफ़सीआई पर 11 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का कर्ज़ था. ये 10 साल में किया गया कर्ज़ था. आज ये कर्ज़ तिगुना हो चुका है. बजट में एफ़सीआई के लिए जो रक़म तय की जाती है सरकार को भी मुहैया नहीं कराती."

    "एफ़सीआई अगर दिवालिया हो जाए तो क्या होगा. आपने बड़े-बड़े व्यापारियों को स्टोरेज का विकल्प दे दिया तो वो अगर स्टोर करेंगे तो दाम भी वही तय करेंगे. तो होगा ये कि जब फ़सल बाज़ार में आएगी तो वे दाम गिरा देंगे और जब फ़सल आनी बंद हो जाएगी तो वो दाम चढ़ा देंगे, यही समस्या है."

    "दूसरा सरकार कहती है कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग. देखिए कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में दाम सरकार तय करती है और ये भी तय करती है कि किसान को वही दाम मिले. आपको क्या लगता है 2-3 एकड़ की ज़मीन वाला किसान सही दाम ना मिलने पर कोर्ट जा कर लड़ पाएगा, लाखों केस कोर्ट में पड़े हुए हैं."

    "देखिए देश में बड़े से बड़े अर्थशास्त्रियों को किसानों के अर्थशास्त्र से कोई मतलब नहीं रहा है नतीजा ये है कि किसानों कि मासिक औसत आय 8 हज़ार रुपये है. इस रक़म में काम हो सकता है?"

    "सरकार इस कानून को रद्द करके फिर से किसानों से बात कर नया कानून बनाए और इसे सलेक्ट कमिटी के भेजे. इसमें परेशानी क्यों है? और सरकार को जल्दी क्यों है?"

    सरकार को कौन सा नया सिस्टम अपनाना चाहिए इसके जवाब में वह कहते हैं, "सरकार कहती है कि हमने एमएसपी बढ़ा दी है, 1965 में जब एमएसपी एक प्रशासनिक नोटिफिकेशन के ज़रिए लाया गया था तो उसमें ये था कि धान-गेहूं या जो भी फ़सल एमएसपी सिस्टम में है उसे सरकार को खरीदना होगा. आज सरकार ने खरीदना क़रीब-क़रीब बंद कर दिया गया है. भंडारण की सीमा इसलिए तय की गई थी ताकि बड़े बड़े कॉरपोरेट घराने इसका भंडारण ना कर सकें. अगर एफ़सीआई दिवालिया हो गई और सरकार ने भंडारण बंद कर दिया तो किसान की हालत दयनीय हो जाएगी. पहले तो सरकार को एमएसपी पर किसानों से फ़सल खरीदने का काम करना चाहिए. लिखने कर देने से क्या होता है सरकार लिख कर दे देगी लेकिन खरीद तो नहीं रही है. कानूनी जामा आपको देना होगा और कहना होगा कि एमएसपी से कम दाम में कॉरपोरेट भी नहीं खरीद सकता तो समस्या वहीं हल हो जाएगी."

    "मौजूदा सरकार की तुलना किसी भी पुरानी सरकार से नहीं की जा सकती. एक किस्सा सुनाता हूं- साल 2009 में यूपीए सरकार एक अध्यादेश लाई की गन्ने की जो राज्यों की तय की गई कीमत है उसे हटाकर केंद्र की तय कीमत पर खरीद की जाए, जो राज्य की कीमत से कम थी. सभी पार्टियों ने दिल्ली को घेरने का काम किया और दो दिन में ही सरकार ने अध्यादेश वापस ले लिया. लेकिन ये सरकार तो सुनने को तैयार ही नहीं है."

    "मैं मानता हूं कि मंडी सिस्टम में ख़ामियां है लेकिन सरकार तो मंडी ही ख़त्म कर देगी. इसका एक ही रास्ता है कि कानून रद्द हो और फिर से किसानों से बात करके नया कानून बनाया जाए."

  4. किसान आंदोलन: मैंने SC की समिति के नेतृत्व का प्रस्ताव ठुकराया - जस्टिस लोढ़ा

    सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए कृषि कानूनों पर रोक लगते हुए इस संबंध में आगे बातचीत के लिए एक समिति गठित की है.

    इस समिति की अध्यक्षता के लिए सोमवार को हुई सुनवाई में जस्टिस लोढ़ा का नाम सबसे पहले सामने आया था.

    अब न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए जस्टिस आरएम लोढ़ा ने बताया, "मैंने समिति की अध्यक्षता करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया."

    अब वो इस समिति का नेतृत्व नहीं कर रहे हैं.

    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों वाली समिति बनाई है जिसमें बीएस मान, प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल धनवंत शामिल हैं.

  5. किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तानी घुस चुके हैं: अटॉर्नी जनरल

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों कृषि कानून पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा है कि ये आदेश अनिश्चित काल के लिए नहीं है. कोर्ट ने कहा कि हमारा मकसद एक सकारात्मक माहौल बनाना है.

    सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा कि एक आवेदन बेंच से सामने आया है जिसमें कहा गया है कि प्रतिबंधित समूह इस प्रदर्शन में मदद कर रहे हैं? क्या आप इस बात को मानते हैं या ख़ारिज करते हैं?

    इसके जवाब में केके वेणुगोपाल ने कहा कि इस आंदोलन में खालिस्तानी घुस आए हैं.

    चीफ़ जस्टिस ने ये भी कहा है कि अगर किसान चाहें तो दिल्ली पुलिस कमिश्नर से रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति मांग सकते हैं.

  6. तीन कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद दिल्ली के गाज़ीपुर बॉर्डर में कैसा है माहौल?, ज़्यादा जानकारी के साथ समीरात्मज मिश्र और पीयूष नागपाल

  7. वॉट्सऐप: नई पॉलिसी है 'ख़तरे की घंटी', भारत में कोई क़ानून नहीं

  8. कोरोना वैक्सीन की पहली खेप पुणे से रवाना

  9. कृषि क़ानूनों पर SC ने लगाई रोक, सिंघु बॉर्डर पर कैसा है माहौल?, ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि क़ानूनों पर रोक लगाई

    सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि क़ानूनों के लागू होने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है.

    पिछले साल बने इन क़ानूनों को लेकर विभिन्न किसान संगठन पिछले महीने से दिल्ली सीमा पर धरने पर बैठे हैं.

    अदालत ने साथ ही इस संबंध में आगे वार्ता के लिए एक समिति गठित कर दी है.

    इस समिति के सदस्य होंगे - बीएस मान, प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल धनवंत.

    सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शनकारी किसानों से सहयोग करने के लिए कहा और कहा कि 'कृषि क़ानूनों पर जारी गतिरोध को दूर करने के मक़सद से एक समिति गठित करने उन्हें कोई भी शक्ति नहीं रोक सकती'.

  11. ब्रेकिंग न्यूज़, हम कमिटी बना रहे हैं ताकि परेशानी सुलझा सकें-चीफ़ जस्टिस

    सुप्रीम कोर्ट में कृषि क़ानूनों से संबंधित याचिकाओं पर मंगलवार को दूसरे दिन सुनवाई शुरू हो चुकी है. अदालत आज इस बारे में आदेश जारी करने वाली है.

    मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने प्रदर्शनकारी किसानों के रुख़ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'हम एक कमिटी का गठन कर रहे हैं ताकि हमें एक साफ़ तस्वीर नज़र आ सके'

    उन्होंने कहा, "हम ये तर्क नहीं सुनना चाहते कि किसान कमिटी के पास नहीं आना चाहते, हम परेशानी को सुलझाना चाहते हैं. अगर किसान अनंतकाल तक आंदोलन करना चाहते हैं तो कर सकते हैं.''

    उन्होंने ये भी कहा कि 'हम कानूनों को निलंबित करने की योजना बना रहे हैं लेकिन अनिश्चित काल के लिए नहीं'.

  12. साइना नेहवाल और एचएस प्रणॉय कोरोना पॉज़िटिव पाए गए

    बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और एचएस प्रणॉय कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं.

    बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि दोनों ही खिलाड़ी बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं होंगे और अस्पताल में उन्हें 10 दिन तक क्वारंटीन में रहना होगा.

    दोनों ही खिलाड़ी इस वक्त थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हैं जहां ये प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे थे.

  13. मध्य प्रदेशः ज़हरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत

    मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िले में ज़हरीली शराब पीने से कम-से-कम 10 लोगों की मौत हो गई है.

    राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि इस मामले में थानेदार को तत्काल बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

    उन्होंने कहा, "एक टीम इस मामले की जांच कर रही है और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है. दोषी बच नहीं सकेगा.’’

  14. दिल्ली पहुंची कोरोना की वैक्सीन कोविशील्ड

    कोविड-19 की वैक्सीन कोविशील्ड की पहली खेप दिल्ली पहुंच चुकी है. एयरइंडिया, इंडिगो सहित 9 एयरलाइंस के ज़रिए 56.5 लाख खुराक को देश के अलग-अलग हिस्सों में पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट से भेजा जा रहा है.

  15. अमेरिकाः ट्रंप-समर्थक और हिंसा कर सकते हैं, एफ़बीआई की चेतावनी

    एफ़बीआई ने चेतावनी दी है कि जो बाइडन के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह से पहले पूरे अमेरिका में हथियारबंद प्रदर्शन हो सकते हैं.

    ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि हथियारबंद समूह 20 जनवरी को बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह से पहले सभी 50 राज्यों की कैपिटल और वाशिंगटन डीसी में इकट्ठा होने की योजना बना रहे हैं.

    शपथ ग्रहण समारोह के लिए कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की जा रही है. सोमवार को बाइडन ने पत्रकारों से कहा कि वो अमेरिकी कैपिटल के बाहर शपथ ग्रहण करने से डरेंगे नहीं.

    संभावना है कि अब भी बाइडन और कमला हैरिस बिल्डिंग के बाहर ही शपथ ले सकते हैं. उनका शपथ ग्रहण समारोह उस घटना के दो हफ्ते बाद होगा जब चुनाव नतीजों के विरोध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक यूएस कैपिटल की इमारत में घुस आए थे. इस घटना में हिंसा हुई और कुछ लोगों की जान भी चली गई थी.

    होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के कार्यकारी प्रमुख चैड वुल्फ ने सोमवार को कहा कि उन्होंने यूएस सीक्रेट सर्विस को बुधवार के समारोह के लिए छह दिन पहले विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है.

    अधिकारियों के मुताबिक़, समारोह को मद्देनज़र 15,000 राष्ट्रीय गार्ड के बलों को तैनात किया जा सकता है.

  16. कोरोना अपडेट: 12 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए

    देश में बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस के नए मामले 12 हज़ार से ज़्यादा सामने आए हैं. वहीं 167 लोगों की संक्रमण से मौत हुई है. इस वक़्त भारत में कोरोना वायरस से कुल संक्रमित लोगों की संख्या एक करोड़ चार लाख, 79 हज़ार है.

  17. कोविशील्ड वैक्सीन की 56 लाख से ज़्यादा डोज़ 13 शहरों में पहुंचेगी

    केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि आज एयर इंडिया, स्पाइस जेट और इंडिगो एयरलाइंस की 9 उड़ानें पुणे से कोविशील्ड वैक्सीन की 56.5 लाख डोज़ लेकर दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, गुवहाटी, शिलांग, अहमदाबाद, हैदराबाद, विजयवाड़ा, भुवनेश्वर, पटना, बेंगलुरु, लखनऊ और चंडीगढ़ पहुंचेगी.

    सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविड-19 वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ पुणे एयरपोर्ट से देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाई जा रही है. इसके बाद 16 जनवरी से देश में टीकाकरण शुरू होने जा रहा है.

  18. कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खेप सीरम इंस्टीट्यूट से रवाना

    कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में आज से निर्णायक चरण की शुरुआत हो गई है. देश में वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू होने से चार दिन पहले आज कोविशिल्ड वैक्सीन की पहली खेप सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से रवाना हुई.

    आज सुबह 5 बजे वैक्सीन को ट्रकों में भरकर पुणे एयरपोर्ट पहुंचाया गया. इन ट्रकों में वैक्सीन के लिए ज़रूरी तापमान का ख़ास ध्यान रखा गया. पुणे एयरपोर्ट से इन वैक्सीन को देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जाएगा.

    वैक्सीन के ट्रांसपोर्टेशन के काम को देख रहे एक सूत्र ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ट्रकों में वैक्सीन के 478 बक्से लदे थे, हर बक्से का वज़न 32 किलो था.

    ट्रक मंजरी स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से निकलकर 15 किलोमीटर दूर एयरपोर्ट पहुंचे.

    सूत्र ने बताया कि सुबह 10 बजे तक वैक्सीन को देश भर की 13 अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया जाएगा.

    सीरम इंस्टीट्यूट से निकलने से पहले ट्रकों की “पूजा” की गई.

    कोविशिल्ड वैक्सीन को पुणे से जिन जगहों पर ले जाया जा रहा है, उनमें दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, करनाल, हैदराबाद, विजयवाड़ा, गुवहाटी, लखनऊ, चड़ीगढ़ और भुवनेश्वर शामिल हैं.

    सूत्र ने बताया कि वैक्सीन को दो कार्गो विमानों समेत आठ कमर्शियल उड़ानों में पुणे से लाया जाएगा. उनके मुताबिक़, पहला कार्गो विमान हैदराबाद, विजयवाड़ा और भुवनेश्वर को कवर करेगा और दूसरा कार्गो विमान कोलकाता और गुवहाटी जाएगा.

    सोमवार को गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने ट्वीट किया ता कि उनके राज्य को मंगलवार सुबह 10.45 बजे कोरोना वायरस वैक्सीन की पहली खेप मिल जाएगी.

    केंद्र सरकार ने सोमवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को एडवांस में छह करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन का ऑर्डर दे दिया था. भारत वैक्सीनेशन के पहले चरण में 16 जनवरी से तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों को वैक्सीन देना शुरू करेगा.

    सोमवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन एक्सरसाइज़ होगी. उन्होंने कहा कि भारत में अगले कुछ महीनों में 30 करोड़ से ज़्यादा लोगों को टीका दिया जाएगा, जबकि दुनिया भर के 50 देशों में एक महीने में अब तक सिर्फ 2.5 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन दी गई है.

  19. ब्रेकिंग न्यूज़, किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट आज जारी करेगा आदेश

    सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को कृषि क़ानूनों और किसान आंदोलन को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर आदेश जारी करेगा.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कोर्ट साथ ही इस मामले पर जारी गतिरोध को दूर करने के लिए देश के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का भी आदेश सुना सकता है.

    सोमवार को मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि इस संबंध में अलग-अलग आदेश जारी किए जा सकते हैं.

    सुप्रीम कोर्ट ने बाद में अपनी वेबसाइट पर सूचित किया कि 12 जनवरी को इस संबंध में आदेश जारी किए जाएँगे.

    इससे पहले सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तेवर बहुत ही सख़्त देखने को मिले.

    अदालत ने साफ़ कहा कि केंद्र सरकार ने बिना विचार विमर्श किए हुए कृषि क़ानूनों को लाया है और महीने भर से भी अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ बातचीत का भी कोई नतीजा नहीं निकल रहा है.

    अदालत ने साफ़ कहा कि सरकार या तो क़ानूनों को लागू करने पर फ़िलहाल रोक लगा दे या फिर सुप्रीम कोर्ट ख़ुद ही क़ानूनों पर रोक लगा देगा.

    सर्वोच्च अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन को अब तक जिस तरह से संभाला है उसे लेकर अदालत को बहुत निराशा हुई है.

    अदालत ने किसानों से भी पूछा कि प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग क्या कर रहे हैं?

    हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट विरोध प्रदर्शन के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन यह देखा जाना चाहिए कि अभी जिस जगह पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है क्या उसमें कोई बदलाव संभव है.

    अदालत ने आशंका जताई कि जिस तरह से हालात बिगड़ रहे हैं, उनमें हिंसा होने का भी ख़तरा है.

    अदालत ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो इसके लिए सभी ज़िम्मेदार होंगे.

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