केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक सड़क दुर्घटना में घायल, पत्नी की मौत
दुर्घटना कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ ज़िले में अंकोला के पास हुई है. मंत्री और उनकी पत्नी को फ़ौरन हेलिकॉप्टर एंबुलेंस से गोवा ले जाया गया, जहाँ केंद्रीय मंत्री की पत्नी का निधन हो गया.
लाइव कवरेज
भाजपा सरकार को मान लेना चाहिए कि किसानों का आंदोलन सही है- कांग्रेस
कृषि
कानून और किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस
ने मौजूदा परिस्थिति को निराशाजनक बताया है और कानूनों पर कुछ वक़्त के लिए रोक क्यों
ना लगाया जाए ये सवाल अटर्नी जनरल से पूछा है.
सुप्रीम
कोर्ट की इन टिप्पणियों पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है.
कांग्रेस
ने ट्वीट किया है, ‘’ सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के
बाद बिल वापसी और माफी मांगते हुए भाजपा सरकार का किसान विरोधी रवैया नरम पड़ना
चाहिए.’’
‘’आज
भाजपा सरकार को ये मानना चाहिए कि वो काले कानूनों के जरिए किसानों के विनाश की
पटकथा लिख रही थी और किसानों का आंदोलन सही है.’’
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
ब्रेकिंग न्यूज़, चीफ़ जस्टिस ने पूछा- लोग खुदकुशी कर रहे हैं, क्या कानून रोका नहीं जा सकता?
सुचित्र मोहंती, बीबीसी हिंदी के लिए
कृषि कानून को
चुनौती देने वाले और दिल्ली की तमाम सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने
वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने कहा है कि अभी जो
हो रहा है उससे वह बेहद निराश हैं.
चीफ़ जस्टिस ने सरकार का पक्ष
पेश कर रहे अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा है कि क्या बातचीत
नाकाम हो गई है?
उन्होंने इसके बाद टिप्पणी करते हुए कहा - ‘’एक महीने से ये सब चल रहा है, हमें समझ नहीं आ रहा कि सरकार और किसानों के
बीच क्या बातचीत चल रही है.’’
‘’ये एक संवेदनशील परिस्थिति है. हम चाहते हैं कि इस
मामले में कोई सौहार्दपूर्ण निष्कर्ष दे सकें.’’
चीफ़ जस्टिस नेअटर्नी जनरल से पूछा है कि क्या कृषि कानून को कुछ वक़्त के लिए
रोका जा सकता है?
उन्होंने कहा है कि
एक भी याचिका ऐसी नहीं है जिसमें कहा गया हो कि ये कानून अच्छे हैं.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘’ क्या परेशानी है, क्या ये कानून कुछ
वक़्त के लिए रोके नहीं जा सकते हैं, क्या हो रहा है? लोग खुदकुशी कर रहे हैं,
बुज़ुर्ग परेशान हैं, महिलाएं प्रदर्शन में हिस्सा ले रही हैं, क्या हो रहा है?‘’
इमेज स्रोत, Getty Images
ब्रेकिंग न्यूज़, किसान आंदोलनः सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
इमेज स्रोत, Getty Images
सुप्रीम कोर्ट ने कृषि क़ानूनों से संबंधित कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए किसानों और सरकार के बीच जारी बातचीत पर गहरी निराशा जताई है.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने सख़्त टिप्पणी करते हुए पूछा - "हमें नहीं पता कि क्या बातचीत चल रही है?"
उन्होंने साथ ही पूछा कि क्या इन कृषि कानूनों को कुछ वक़्त के लिए रोका जा सकता है?
समाचार एजेंसी पीटीआई के
मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, “हमें नहीं पता कि आप समाधान का हिस्सा हैं या समस्या का
हिस्सा हैं.”
कोर्ट ने कहा कि हमारे
सामने एक याचिका ऐसी नहीं आई है जिसमें इन कृषि क़ानूनों को किसानों के लिए
फायदेमंद बताया गया हो.
शीर्ष अदालत ने कृषि
क़ानूनों पर समिति की ज़रूरत को दोहराया और कहा कि अगर पैनल क़ानूनों को लागू करने
से रोकने की सिफारिश करेगा, तो वो उसे मानेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कृषि
क़ानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों से भी कहा, “भले ही आपको भरोसा हो या
ना हो, हम भारत का सुप्रीम कोर्ट हैं, हम अपना काम करेंगे.”
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को कृषि क़ानूनों पर कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है.
इनमें डीएमके सांसद तिरूचि शिवा और आरजेडी सांसद मनोज झा की याचिकाएँ भी शामिल हैं जिनमें केंद्र सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारी किसानों को दिल्ली की सीमाओं से तुंरत हटाने की मांग करने वाली एक याचिका पर भी सुनवाई होनी है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
पोस्ट X समाप्त
दिल्ली में बर्ड फ्लू की पुष्टि, संसदीय समिति की बैठक आज
इमेज स्रोत, MONEY SHARMA/AFP via Getty Images
बर्ड फ्लू के मामले अब
दिल्ली में भी मिले हैं. दिल्ली के पशुपालन विभाग के मुताबिक़, मृत कौवों और बत्तखों
के आठ नमूनों की जांच के बाद राष्ट्रीय राजधानी में बर्ड फ्लू मिलने की पुष्टि हुई
है. सभी नमूने एवियन फ्लू से पॉज़िटिव पाए गए हैं.
दिल्ली और महाराष्ट्र
समेत अब तक 9 राज्यों में बर्ड फ्लू के मामले मिले हैं. इस फ्लू को फैलने से रोकने
के लिए राष्ट्रव्यापी कोशिशें हो रही हैं. अब तक उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान,
मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और गुजरात अपने यहां हाल में हुई पक्षियों की
मौतों के पीछे एवियन इन्फ्लुएंजा का कारण होने की पुष्टि कर चुके हैं.
इस बीच कृषि मामलों की
संसदीय समिति ने पशुपालन मंत्रालय के अधिकारियों से देश में पशु टीके की उपलब्धता
का पता लगाने के लिए कहा है. समिति आज दोपहर तीन बजे बैठक भी करने वाली है.
दिल्ली ने फिलहाल जीवित पक्षियों
के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है और गाज़ीपुर स्थित सबसे बड़े थोक पोल्ट्री बाज़ार
को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है.
वहीं महाराष्ट्र में
राजधानी मुंबई से लगभग 500 किमी दूर, परभणी इस बीमारी का एपिसेंटर बन गया है. ज़िला
कलेक्टर दीपक मधुकर मुगलिकर ने मीडिया को बताया, “पिछले दो दिनों में लगभग 800 पोल्ट्री बर्ड्स मृत मिले हैं,
जिनमें सभी मुर्गे हैं. उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए थे और अब पुष्टि हो चुकी
है कि उनकी मौत का कारण बर्ड फ्लू था.”
उन्होंने बताया, “इसकी पुष्टि मुरुंबा गांव में हुई है. यहां लगभग आठ पोल्ट्री
फार्म और 8,000 पक्षी हैं. हमने और फैलाव को
रोकने के लिए उन पोल्ट्री पक्षियों को मारने के आदेश दिए हैं.”
पिछले हफ्ते सरकार ने साफ़ किया था कि बमारी “जूनोटिक” हैलेकिन सरकार के मुताबिक़, भारत में
इंसानों में भी संक्रमण मिलने के मामले आए हैं.
इमेज स्रोत, Mayank Makhija/NurPhoto via Getty Images
भारत: 24 घंटे में संक्रमण के 16,311 नए मामले, 161 मौतें
भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 16,311 नए मामले आने के बाद कुल पॉज़िटिव मामलों की संख्या 1,04,66,595 और 161 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 1,51,160 हुई.
देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या अब 2,22,526 है और कुल डिस्चार्ज हुए मामलों की संख्या 1,00,92,909 है.
इमेज स्रोत, bbc
कई राज्यों में पहुंचा बर्ड फ्लू, पक्षियों को मारने के आदेश और एडवाइज़री जारी
इमेज स्रोत, MONEY SHARMA/AFP via Getty Images
अब तक कई राज्यों में बर्ड
फ्लू फैलने की पुष्टि हो चुकी है.
केंद्र के पशुपालन और डेयरी
विभाग ने रविवार को बयान देकर सात राज्यों में इसके प्रसार की पुष्टि की, जिनमें
केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश
शामिल हैं.
इसके बाद शाम में महाराष्ट्र
के पशुपालन आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने कहा कि राज्य से लिए गए सैंपल में एवियन इन्फ्लूएंजा
वायरस मिलने की पुष्टी हुई है.
रविवार को हिमाचल प्रदेश
की पोंग डैम लेक वन्यजीव अभयारण्य में 215 प्रवासी पक्षी मृत मिले, अधिकारियों के
मुताबिक़ समझा जा रहा है कि इसके बाद बर्ड फ्लू से मरने वाले कुल प्रवासी पक्षियों
की संख्या 4,235 हो गई है.
इस बीच शनिवार को सोलन
ज़िले में चंडीगढ़-शिमला हाइवे के किनारे बहुत सारे मरे हुए पोल्ट्री पक्षी फेंके
हुए मिले थे. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बहुत सारे कौए भी
मरे हुए मिले हैं.
महाराष्ट्र के पशुपालन आयुक्त
का कहना है कि बर्ड फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए परभणी और लातूर के केंद्रों से
एक किलोमीटर के दायरे में पक्षियों को मारने के आदेश दिए गए हैं. इंडियन एक्सप्रेस
के मुताबिक़, उन्होंने कहा कि 10 किलोमीटर का सर्विलांस ज़ोन बनाया गया है और
स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है.
वहीं उत्तर प्रदेश पशुपालन
विभाग ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं. लोगों से चिड़ियाघर और पक्षी अभयारण्य जाने से
बचने की अपील की जा रही है और कहा जा रहा है कि वो किसी भी तरह के पक्षी के संपर्क
में आने से बचें. प्रशासन से कहा गया है कि किसी भी पक्षी की अप्राकृतिक मौत की
जानकारी साझा की जाए.
इस बीच,
पंजाब में गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज़
यूनिवर्सिटी ने रविवार को पोल्ट्री किसानों और चिकन खाने वालों के लिए एक एडवाइज़री
जारी की.
एडवाइज़री में कहा गया कि
फिलहाल पंजाब में बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं आया है, फिर भी पोल्ट्री किसान ज़्यादा
सतर्क रहें और साफ़-सफाई का ध्यान रखें. इसमें ये भी कहा गया, “70 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा
तापमान पर ठीक से खाना पकाने से इन्फ्लूएंज़ा वायरस मर जाता है. एक फार्म से दूसरे
फार्म में आमतौर पर जीवित पक्षियों, लोगों और दूषित वाहनों, उपकरणों के ज़रिए संक्रमण फैलता है.”
इमेज स्रोत, Mayank Makhija/NurPhoto via Getty Images
प्रधानमंत्री मोदी टीकाकरण पर आज सभी मुख्यमंत्रियों से करेंगे बात
इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images
प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी आज सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बातचीत
करेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़, बातचीत के दौरान
कोविड-19 की स्थिति और कोविड टीकाकरण को शुरू करने के बारे में विचार-विमर्श हो सकता है. भारत
में कोविड टीकाकरण अभियान 16 जनवरी से शुरू किया जाना है.
देश के टीका नियामक-
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया ने भारत में बनी कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीके के आपातकालीन
इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. सरकार का कहना है कि इन टीकों की सुरक्षा और प्रभाव के
मूल्यांकन के बाद ये निर्णय लिया गया है.
कोविड-19 टीके को
सबसे पहले लगभग तीन करोड़ स्वास्थ्य कर्मचारियों और कोविड नियंत्रण में लगे अग्रिम
पंक्ति के योद्धाओं को लगाया जाएगा. उसके बाद 50 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोगों को और 50 साल से कम के
उन लोगों को भी लगाया जाएगा जो जानलेवा बीमारियों से पीड़ित हैं. इन लोगों की संख्या
लगभग 27 करोड़ है.
प्रधानमंत्री ने शनिवार
को देश में कोविड-19 की स्थिति और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में कोविड टीकाकरण
की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की थी.
किसानों को दिल्ली सीमा से हटाने की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इमेज स्रोत, Raj K Raj/Hindustan Times via Getty Images
सुप्रीम कोर्ट
आज यानी सोमवार को प्रदर्शनकारी किसानों को दिल्ली की सीमाओं से तुंरत हटाने की मांग
करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करेगा. इसके अलावा कृषि क़ानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर भी सुनवाई की
जाएगी.
इस बीच सरकार और
किसानों के बीच गतिरोध बना हुआ है. 7 जनवरी को केंद्र और किसान संगठनों के बीच हुई
आठवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही थी. सरकार ने विवादित क़ानूनों को रद्द करने
से इनकार कर दिया और किसान नेताओं ने कहा कि वो आखरी सांस तक लड़ेंगे और उनकी ‘घर वापसी’ तभी होगी जब ‘क़ानून वापसी’ होगी.
याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी.
आज की सुनवाई को अहम माना जा रहा है, क्योंकि केंद्र और किसान नेताओं के बीच अगली
बैठक 15 जनवरी को होनी है.
पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि उन्हें किसान आंदोलन को लेकर
ज़मीन पर कोई बात बनती नहीं दिख रही है, लेकिन केंद्र ने कोर्ट से कहा था कि सरकार
और संगठनों के बीच सभी मसलों को लेकर “स्वस्थ चर्चा” चल रही है और क़रीब भविष्य में दोनों पक्षों के किसी नतीजे पर पहुंचने की
अच्छी संभावना है. इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 11 जनवरी तक के लिए टाल दी थी और
कहा था कि हम स्थिति को समझते हैं और बातचीत को प्रोत्साहित करते हैं.
आठवें दौर की बातचीत के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि कोई
नतीजा नहीं निकला क्योंकि किसान नेताओं ने क़ानूनों को रद्द करने की उनकी मांग के
अलावा कोई और तरीक़ा सामने नहीं रखा.
शनिवार को, एक किसान संस्था, कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन (सीआईएफ़ए)ने तीनों क़ानूनों के समर्थन में शीर्ष अदालत का रुख किया. उसने कहा कि क़ानून
किसानों के हित में हैं, किसानों की आमदनी बढ़ाएंगे और कृषि के लिए फायदेमंद
होंगे.
नमस्कार! ये बीबीसी हिंदी का लाइव पन्ना है जहाँ हम आपको दिनभर की बड़ी ख़बरें और ज़रूरी लाइव अपडेट देंगे. शनिवार की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.