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बर्ड फ्लू की ख़तरे के बीच 17 बत्तखों की मौत पर दिल्ली में एलर्ट -आज की बड़ी ख़बरें

देश के विभिन्न हिस्सों में बर्ड फ्लू के खतरों के बीच दिल्ली के संजय झील में 17 बत्तख मरे पाए गए हैं. अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि एलर्ट जोन घोषित करने की बात बताई है.

लाइव कवरेज

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, अमेरिका ने चीन को नाराज़ करने वाला एक और सख़्त क़दम उठाया

    अमेरिका ने लंबे समय से अमेरिकी और ताइवान के अधिकारियों के बीच संपर्क पर प्रतिबंध लगाया हुआ था जिसे अब हटाया जा रहा है.

    अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीनी सरकार के तुष्टीकरण के लिए दशकों पहले अमेरिका ने ख़ुद पर ये प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन अब ये नियम ख़त्म कर दिया गया है.

    इस क़दम से चीन नाराज़ हो सकता है और अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है.

    ट्रंप सरकार ने अपने आख़िरी दिनों में ये फ़ैसला लिया है.चीन ताइवान को अपना अपना हिस्सा मानता है लेकिन ताइवान के नेताओं का कहना है कि उनका मुल्क संप्रभु है.

    विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शनिवार को कहा, “आज मैं इस तरह के ख़ुद लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा करता हूं. अब अमेरिका-ताइवान के संबंधों में इस तरह के प्रतिबंधों से कोई रूकावट नहीं आएगी."

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ताइवान एक जीवंत लोकतंत्र और एक विश्वसनीय अमेरिकी भागीदार है और ये प्रतिबंध अब वैध नहीं हैं.

    इस घोषणा के बाद ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने माइक पोम्पियो को धन्यवाद किया और कहा कि वह "आभारी" हैं.

    उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, "ताइवान और अमेरिका के बीच घनिष्ठ साझेदारी हमारे साझा मूल्यों, समान हितों और स्वतंत्रता और लोकतंत्र में अटल विश्वास पर आधारित है."

    पिछले अगस्त में अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा मंत्री एलेक्स अज़ार दशकों बाद ताइवान में बैठक आयोजित करने वाले पहले टॉप-रैंकिग अमेरिकी राजनीतिज्ञ बने.

    चीन ने अपने जवाब में अमेरिका से कहा है कि वह "वन चाइना" सिद्धांत का सम्मान करे.

    अमेरिका ताइवान को हथियार भी बेचता है. हालांकि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक रक्षा संधि नहीं है, जैसा कि अमेरिका की जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस के साथ है.

    चीन और ताइवान 1940 के दशक में एक गृह युद्ध के दौरान अलग हो गए थे.

    चीन लंबे समय से ताइवान की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश कर रहा है और दोनों ही प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव चाहते हैं.

    हाल के वर्षों में तनाव तब बढ़ गया जब चीन ने कहा कि ताइवान को वापस लेने के लिए बल प्रयोग भी किया जा सकता है.

    हालाँकि ताइवान को केवल कुछ मुट्ठी भर देशों की मान्यता प्राप्त है. इसकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के कई देशों के साथ मज़बूत व्यापारिक और अनौपचारिक संबंध हैं.

  2. भारत में 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू

    स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान 16 जनवरी से शुरू होगा और सबसे पहले तीन करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को प्राथमिकता दी जाएगी.

    मंत्रालय ने कहा कि इसके बाद 50 साल से ऊपर के लोगों के स्वैच्छिक टीकाकरण और 50 से कम उम्र के पहले से किसी बीमारी से ग्रसित (को-मोर्बिडिटी)लोगों का टीकाकरण होगा. इनकी संख्या तक़रीबन 27 करोड़ है.

    टीकाकरण कार्यक्रम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों के साथ देश में महामारी की स्थिति की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक के बाद ये घोषणा की गई.

    मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दो वैक्सीन - कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की इजाज़त दे दी है.

    मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ केंद्र की तैयारियों के बारे में जानकारी दी गई है. "टीकाकरण अभ्यास लोगों की भागीदारी (जन भागदारी), चुनाव के अनुभव (बूथ रणनीति) और यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम के सिद्धांतों का इस्तेमाल करेगा. मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं, विशेष रूप से राष्ट्रीय कार्यक्रमों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से कोई समझौता नहीं होगा.”

  3. सुप्रीम कोर्ट पर फ़ैसला छोड़ हल निकालने में देरी कर रही है सरकार: किसान यूनियन

    पंजाब के किसान संगठनों ने शनिवार को कहा कि केंद्र ने कृषि कानूनों का सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए हल निकालने की जो बात कही है, वो इस मुद्दे को लंबा खींच कर आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए सरकार की एक चाल है.

    पंजाब के सबसे बड़े संगठनों में से एक भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) और किसान मज़दूर संघर्ष समिति जो अब भी अमृतसर में 'रेल रोको' आंदोलन चला रही है, इन्होंने कहा है कि किसानों के साथ 8 जनवरी की बैठक के दौरान केंद्र ने सुझाव दिया कि कृषि क़ानूनों से संबंधित फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ना अच्छा होगा और ये स्पष्ट रूप से संकेत हैं कि सरकार एक समाधान खोजने में देरी करना चाहती है.

    बीकेयू (उगराहां) के राज्य सचिव शिंगारा सिंह मान ने द हिंदू को बताया, “सुप्रीम कोर्ट पर इस मुद्दे को छोड़ने का सुझाव बताता है कि सरकार चल रहे विवाद का हल खोजने में देरी करना चाहती है. उनका इरादा केवल इस मुद्दे को लंबा खींचना है और हमारी मांगों को पूरा नहीं करना है. सरकार लोगों के आंदोलन को दबाना चाहती है. हमने पहले ही सरकार के सुझाव को ख़ारिज कर दिया है.”

    उन्होंने कहा, “सरकार की मंशा बहुत स्पष्ट है. वे अदालतों को शामिल करके किसान आंदोलन को तोड़ना चाहते हैं.”

    वे कहते हैं कि बीकेयू-उग्राहन अन्य संगठनों के साथ सभी विवादित कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और सभी राज्यों में सभी फ़सलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी ख़रीद को एक क़ानूनी अधिकार बनाने के लिए मज़बूती से खड़ा है.

    किसान मज़दूर संघर्ष समिति की पंजाब इकाई के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बैठक में भाग लेने वाली सभी यूनियनों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ने के सरकार के संकेत को ख़ारिज कर दिया था.

    उन्होंने कहा, “सरकार मामले को लंबे समय के लिए अदालत में ले जाना चाहती है. वे इस मुद्दे को हल नहीं करना चाहते.”

    पंधेर ने कहा कि किसान संगठन अपने आंदोलन को तेज करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं और उन्होंने 26 जनवरी को नई दिल्ली में प्रस्तावित 'ट्रैक्टर परेड' को सफल बनाने के लिए देश भर के किसानों और खेतिहर मजदूरों से अपील की है.

    भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र ने कानून बनाए हैं और वो आसानी से उन्हें निरस्त भी कर सकता है.

    उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट जाने की ज़रूरत नहीं है. सरकार को किसानों की मांग को सुनना चाहिए और कानूनों को तुरंत रद्द करना चाहिए.”

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