आटे और चीनी के संकट के बाद अब पाकिस्तान में गैस संकट के बादल मंडराते नज़र आ रहे है.
इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा रहा है क्योंकि पाकिस्तानी सरकार ने ग़ैर-निर्यात उद्योग के लिए गैस सप्लाई एक महीने के लिए रोक दी है.
सुई साउदर्न गैस कंपनी (एसएसजीसी) ने 31 दिसंबर को अधिसूचना के ज़रिए उद्योगों को सूचित किया, “हमें दिसंबर 2020 के मध्य से जनवरी 2021 के आख़िर तक सामान्य उद्योगों (ग़ैर-निर्यात) के लिए तय पावर इकाइयों को सीमित करना है.”
अधिसूचना में बताया गया है कि आपूर्ति में कटौती ऊर्जा पर कैबिनेट कमिटी की 26 नवंबर 2020 की बैठक में लिया गया था.
पाकिस्तानी अख़बर द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब उद्योगों को इस तरह के गैस संकट का सामना करना पड़ रहा है. सर्दियों के सीज़न में ठंड बढ़ने के बाद ईंधन की मांग भी बढ़ती है.
बड़ी संख्या में घरों में सर्दियों में ठंड से बचने के लिए स्टोव, हीटर और गीज़र की ज़रूरत पड़ती है जिसके कारण गैस की खपत बढ़ जाती है.
जियो टीवी के अनुसार, कराची में घरेलू और औद्योगिक दोनों उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है. कई रिहाइशी इलाक़ों में गैस सप्लाई स्थगित कर दी गई है.
गुजरांवाला में लोगों को महंगे सिलिंडर ख़रीदने पड़ रहे हैं और मुल्तान में गैस की कमी के चलते सीएनजी स्टेशनों को बंद करना पड़ा है.
उद्योगपतियों का कहना है कि गैस संकट जनवरी में बढ़ेगा जो फ़रवरी के मध्य तक जारी रहेगा.
जियो टीवी के अनुसार, देश के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने कराची के गवर्नर हाउस में उद्योगपतियों से मुलाक़ात की है और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वो गैस संकट पर संबंधित मंत्रियों से बात करेंगे.
वहीं, कराची चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष शर्क़ वोहरा ने कहा है कि निर्यात में बढ़ोतरी के बीच गैस संकट का उभरना चिंता का विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए.
कोरांगी एसोसिएशन ऑफ़ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष शेख़ उमर रेहान द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहते हैं, “अगर सरकार ने बंदरगाहों पर नए गैस (री-गैसिफ़ाइड लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस /आरएलएनजी) आयात टर्मिनल स्थापित करने का काम किया होता तो स्थिति बेहतर होती.”
इमरान ख़ान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ने अगस्त 2018 में सरकार बनाई थी लेकिन अभी भी उसे देश के लिए सबसे ज़रूरी आरएलएनजी आयात टर्मिनल पर काम करना है.
पिछली सरकारों के समय देश ने दो आयात टर्मिनल विकसित किए थे. इसके ज़रिए रोज़ाना 120 करोड़ क्यूबिक फ़ीट प्रतिदिन गैस का आयात होता है.