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कोरोना वायरस: बोरिस जॉनसन ने ब्रिटेन में लॉकडाउन की घोषणा की

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही लोगों से घर में रहने की अपील की.

लाइव कवरेज

  1. सेंसेक्स रिकॉर्ड बढ़त के साथ बंद

    सेंसेक्स आज 307.82 अंक की बढ़त के साथ 48,176.80 अंक के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर और निफ्टी 114.40 अंक के साथ से 14,132.90 अंक पर बंद हुआ.

    बाज़ार के खुलते ही सेंसेक्स में 240 अंकों का उछाल देिखा था, और ये पहली बार 48,000 के आंकड़े के पार गया.

  2. किसान संगठनों और सरकार के बीच सातवें दौर की बैठक जारी

    केंद्र सरकार और किसानों के बीच सातवें दौर की बातचीत जारी है. बातचीत दिल्ली के विज्ञान भवन में हो रही है.

    बीबीसी संवाददाता ख़ुशहाल लाली के मुताबिक़, बातचीत तय समय से आधे घंटे देरी के बाद शुरू हुई. बैठक में मौजूद केंद्रीय कृषि मंत्री केंद्रीय नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से मिलने से पहले अधिकारियों के साथ एक बैठक की.

    बैठक की शुरुआत आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए की गई.

    इस दौरान मुख्य तौर पर दो मुद्दों पर फ़ैसला होना है. किसानों की माँग है कि तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लिया जाए और दूसरा न्यूनतम समर्थन मूल्य को क़ानूनी दर्जा दिया जाए.

    हालांकि सरकार का अभी तक रुख़ साफ़ है कि वो क़ानून वापस लेने के लिए तैयार नहीं है.

    उधर किसानों का कहना कि वो क़ानून को वापस लिए जाने से कम किसी चीज़ पर तैयार नहीं हैं.

    दिल्ली की सीमा पर कड़ाके की ठंड और बारिश में धरने पर बैठे किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी माँगें नहीं मानी जाती हैं तो वे गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली निकालेंगे.

  3. कोरोना महामारी से लड़ाई और निशाने पर सरकार विरोधी आवाज़ें

  4. ब्रिटेन में ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू

    इंग्लैंड में 82 वर्षीय, डायलिसिस के मरीज़ ब्रायन पिंकर को ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजे़नेका की बनाई गई कोविड-19 वैक्सीन दी गई. ट्रायल के बाद पहली बार किसी व्यक्ति को ये वैक्सीन दी गई है.

    ब्रायन पिंकर के कहा कि वो बहुत ख़ुश हैं, वो ऑक्सफ़ोर्ड में ही पैदा हुए थे और “उन्हें गर्व है कि इसका आविष्कार ऑक्सफ़ोर्ड में हुआ.”

    "मैं अब इस साल के अंत में अपनी पत्नी शिर्ले के साथ शादी की 48वीं सालगिरह मनाने का इंतज़ार कर रहा हूं.”

    ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स एनएचएस फ़ाउंडेशन ट्रस्ट के प्रमुख नर्सिंग अधिकारी सैम फ़ॉस्टर ने पिंकर को वैक्सीन दी. उन्होंने कहा, "ऑक्सफ़ोर्ड के चर्चिल अस्पताल के लिए पहला ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन देना सौभाग्य की बात थी. यहां से सौ मीटर दूर ही इसे विकसित किया गया है.”

    भारत ने भी इस वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है और आने वाले कुछ दिनों में इसका इस्तेमाल देश में शुरू हो जाएगा.

  5. भारत ने धर्मनिरपेक्षता को दफ़्न कर दिया: पाकिस्तान

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि भारत ने धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को हिन्दुत्व की राजनीति में दफ़्न कर दिया है.

    रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक़, एक बयान में क़ुरैशी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की खुलेआम आलोचना हो रही है. क़ुरैशी ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो रहा है और किसान भी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने भारत को लेकर चौथा डोज़ियर सौंपा है.

    क़ुरैशी ने कहा कि उन्होंने सबूतों के साथ भारत पर आंतकवाद फैलाने की बात रखी है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा लगातार उठाता रहेगा. क़ुरैशी ने कहा कि कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का हक़ है और इसके सफल होने तक पाकिस्तान हर मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाएगा.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, ''हमने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और जेनेवा में मानवाधिकार कमिश्नर को पत्र लिख भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर में राजनीतिक बंदियों की निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की है. हमने इनकी जल्दी से जल्दी रिहाई की मांग उठाई है.''

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, सातवें दौर की बातचीत के लिए किसान विज्ञान भवन पहुंचे

    केंद्र सरकार और किसानों के बीच सातवें दौर की बातचीत आज शुरू होने जा रही है. बातचीत के लिए किसान संगठनों के नेता विज्ञान भवन पहुंच रहे हैं.

    इस दौरान मुख्य तौर पर दो मुद्दों को लेकर बातचीत होगी. पहला तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लिया जाए और दूसरा न्यूनतम समर्थन मूल्य को क़ानूनी दर्जा दिया जाए.

    दिल्ली की सीमा पर कड़ाके की ठंड और बारिश में धरने पर बैठे किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली निकालेंगे.

    पिछली बार हुई बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि दोनों ही पक्ष किसानों की चार मांगों में से दो मांगों पर एक समझ बनाने के क़रीब पहुंचे थे.

    ये दो मांगें बिजली संशोधन विधेयक और वायु गुणवत्ता आयोग अध्यादेश में पराली जलाने के लिए दंड संबंधी प्रावधान को लेकर थीं.

    लेकिन सितंबर में पारित तीन कृषि क़ानूनों को निरस्त करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है.

    किसानों ने यह कहते हुए कड़ा रुख़ अख़्तियार किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे जीटी करनाल रोड पर 6 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालेंगे.

    स्वराज इंडिया के मुखिया योगेंद्र यादव ने कहा, “अगर सरकार हमारी मांगों पर सहमत नहीं होती है तो हम शाहजहाँपुर सीमा से दिल्ली की ओर अगले हफ्ते मार्च निकालेंगे.”

    26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन रैली निकालने की भी योजना है.

    सरकार के साथ बातचीत के पहले किसान नेताओं ने अपनी मांगों को फिर से दुहराया है. भारत किसान यूनियन के सदस्य जागीर सिंह दालेवाल ने कहा,“हमारी मांगें वही हैं. कृषि क़ानून वापस होने चाहिए. दो संशोधनों को वापस लिए जाने की ज़रूरत है. सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए नहीं तो हमारा आँदोलन जारी रहेगा.”

    सोमवार की बातचीत अगर नाकाम रहती हैं तो किसानों ने मॉल और पेट्रोल पंप बंद करवाने की भी बात कही है.

    रविवार को हरियाणा पुलिस ने किसानों के एक दल पर आंसू गैस छोड़े हैं. इनमें से ज़्यादातर राजस्थान के किसान थे और वे दिल्ली की ओर जा रहे थे.

    इस बीच सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर तीन किसानों के मरने की ख़बर आई है.

    किसानों की बातचीत शुरू होने से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है, ''ठंड और बारिश के बीच सड़कों पर डटे हमारे किसानों के हौंसले को सलाम. मेरी केंद्र सरकार से अपील है कि आज की बैठक में किसानों की सारी मांगें मानते हुए तीनों काले कानून वापस लिए जाएं.''

  7. किसानों पर हरियाणा पुलिस की कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा

    सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस.ए. बोबड़े को भेजे गए पंजाब के छात्रों के एक पत्र को याचिका के तौर पर अदालत ने स्वीकार कर लिया है.

    छात्रों ने पत्र लिखकर दिल्ली आना चाह रहे किसानों पर हरियाणा पुलिस के बल प्रयोग की जाँच करने की मांग की है. छात्रों ने पत्र में लिखा है कि केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर वाटर कैनन छोड़ा गया और आँसू गैस के गोले दाग़े गए.

    छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखकर मांग की है कि हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने कथित राजनीतिक प्रतिशोध के कारण किसानों के ख़िलाफ़ जो मामले दर्ज किए हैं वो वापस लिए जाएं.

    यह पत्र पंजाब विश्वविद्यालय के सेंटर फ़ॉर ह्युमन राइट्स एंड ड्यूटीज़ में मानवाधिकार के वर्तमान और भूतपूर्व छात्रों ने लिखा है. साथ ही उनकी मांग है कि अवैध रूप से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने के मामले को भी देखा जाए.

    रविवार शाम को राजस्थान-हरियाणा सीमा पर बैरिकेडिंग तोड़ हरियाणा में क़रीब 20 किलोमीटर आगे पड़ाव डाले किसानों पर आँसू गैस के गोले दाग़े गए थे.

    बीबीसी हिंदी के सहयोगी पत्रकार मोहर सिंह मीणा ने बताया था कि हरियाणा सीमा में रेवाड़ी के पास हरियाणा पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारी किसानों पर आंसू गैस के गोले दाग़े गए और पानी की बौछार की गई.

    किसान नेता रणजीत राजू का कहना था, "आंसू गैस के गोले भी एक्सपायर डेट के थे."

    उन्होंने कहा कि जो जवान उनके ऊपर आंसू गैस के गोले छोड़ रहे हैं, वे जवान भी किसान परिवार से ही हैं लेकिन वे तो सरकार के दबाव में आकर यह सब कर रहे हैं.

    गुरमोहन प्रीत सिंह और 34 अन्य छात्रों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की गई है कि वे सभी प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराएं. प्रदर्शन स्थल पर मोबाइल टॉयलेट वैन मुहैया कराई जानी चाहिए.

    पत्र में सुप्रीम कोर्ट से तुरंत दख़ल देते हुए ‘मानवाधिकारों की हो रही उपेक्षा’ को रोकने को कहा गया है.

  8. पीएम ओली ने संसद भंग करने का किया बचाव, बताया एक राजनीतिक फ़ैसला

    नेपाल के कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद भंग करने के अपने फ़ैसले का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि ये एक राजनीतिक क़दम था और इसमें न्यायिक समीक्षा की आधिकारिक अनुमति नहीं है.

    सुप्रीम कोर्ट के 25 दिसंबर के कारण बताओ नोटिस की प्रतिक्रिया में पीएम ओली ने अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के ज़रिए अपना जवाब दिया.

    द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट को दिए 11 पन्नों के जवाब मे पीएम ओली ने कहा, “संसद भंग करने की सिफ़ारिश करना और संसद भंग करना दोनों पूरी तरह राजनीतिक फ़ैसले हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद ये सिद्धांत निर्धारित किया है कि ऐसे मुद्दों पर संवैधानिक और क़ानूनी वैधता के प्रश्न न्यायिक समीक्षा का विषय नहीं होने चाहिए.”

    “पार्टी के अंदर बढ़ते टकराव के बीच मुझे नहीं लगा कि सरकार चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने में सक्षम होगी.”

    संसद भंग करने के लिए किया मजबूर

    केपी ओली ने कहा कि उन्हें नए जनादेश के लिए मजबूर किया गया क्योंकि सरकार पार्टी में हो रहे टकराव के बीच फंस गई थी.

    द राइज़िंग नेपाल के अनुसार, प्रधानमंत्री ओली ने अपने लिखित जवाब में इसका भी उल्लेख किया है कि उनका स्वार्थ केवल समृद्ध नेपाल और ख़ुशहाल नेपाली लोग चाहना है.”

    सदन को भंग करने के बाद पीएम ओली ने मध्यावधि चुनाव के लिए 30 अप्रैल और 10 मई की तारीखों की घोषणा की थी.

    ओली का दावा है कि उनका ये क़दम ‘आवश्यकता के सिद्धांत’ पर आधारित है क्योंकि पार्टी की अंतहीन समस्याओं के कारण सरकार और संसद प्रभावित हो रहे थे.

    नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते टकराव के बीच 20 दिसंबर 2020 को पीएम केपी ओली ने राष्ट्रपति को संसद भंग करने की सिफ़ारिश की थी जिसे राष्ट्रपति ने उसी दिन स्वीकार कर लिया था.

    तब से ओली दावा कर रहे हैं कि पार्टी में उनके विरोधियों पुष्प कमल दहल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल और अन्य लोगों के मुश्किलें पैदा के कारण उन्हें ये कठोर क़दम उठाना पड़ा.

  9. पाकिस्तान में आटा-चीनी के बाद अब गैस संकट

    आटे और चीनी के संकट के बाद अब पाकिस्तान में गैस संकट के बादल मंडराते नज़र आ रहे है.

    इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा रहा है क्योंकि पाकिस्तानी सरकार ने ग़ैर-निर्यात उद्योग के लिए गैस सप्लाई एक महीने के लिए रोक दी है.

    सुई साउदर्न गैस कंपनी (एसएसजीसी) ने 31 दिसंबर को अधिसूचना के ज़रिए उद्योगों को सूचित किया, “हमें दिसंबर 2020 के मध्य से जनवरी 2021 के आख़िर तक सामान्य उद्योगों (ग़ैर-निर्यात) के लिए तय पावर इकाइयों को सीमित करना है.”

    अधिसूचना में बताया गया है कि आपूर्ति में कटौती ऊर्जा पर कैबिनेट कमिटी की 26 नवंबर 2020 की बैठक में लिया गया था.

    पाकिस्तानी अख़बर द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब उद्योगों को इस तरह के गैस संकट का सामना करना पड़ रहा है. सर्दियों के सीज़न में ठंड बढ़ने के बाद ईंधन की मांग भी बढ़ती है.

    बड़ी संख्या में घरों में सर्दियों में ठंड से बचने के लिए स्टोव, हीटर और गीज़र की ज़रूरत पड़ती है जिसके कारण गैस की खपत बढ़ जाती है.

    जियो टीवी के अनुसार, कराची में घरेलू और औद्योगिक दोनों उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है. कई रिहाइशी इलाक़ों में गैस सप्लाई स्थगित कर दी गई है.

    गुजरांवाला में लोगों को महंगे सिलिंडर ख़रीदने पड़ रहे हैं और मुल्तान में गैस की कमी के चलते सीएनजी स्टेशनों को बंद करना पड़ा है.

    उद्योगपतियों का कहना है कि गैस संकट जनवरी में बढ़ेगा जो फ़रवरी के मध्य तक जारी रहेगा.

    जियो टीवी के अनुसार, देश के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने कराची के गवर्नर हाउस में उद्योगपतियों से मुलाक़ात की है और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वो गैस संकट पर संबंधित मंत्रियों से बात करेंगे.

    वहीं, कराची चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष शर्क़ वोहरा ने कहा है कि निर्यात में बढ़ोतरी के बीच गैस संकट का उभरना चिंता का विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए.

    कोरांगी एसोसिएशन ऑफ़ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष शेख़ उमर रेहान द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहते हैं, “अगर सरकार ने बंदरगाहों पर नए गैस (री-गैसिफ़ाइड लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस /आरएलएनजी) आयात टर्मिनल स्थापित करने का काम किया होता तो स्थिति बेहतर होती.”

    इमरान ख़ान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ने अगस्त 2018 में सरकार बनाई थी लेकिन अभी भी उसे देश के लिए सबसे ज़रूरी आरएलएनजी आयात टर्मिनल पर काम करना है.

    पिछली सरकारों के समय देश ने दो आयात टर्मिनल विकसित किए थे. इसके ज़रिए रोज़ाना 120 करोड़ क्यूबिक फ़ीट प्रतिदिन गैस का आयात होता है.

  10. तेल की क़ीमतों मे बढ़ोतरी, कच्चे तेल का उत्पादन ना बढ़ने की आशंका

    तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और अन्य तेल उत्पादकों के फ़रवरी में मौजूदा तेल उत्पादन को स्थिर रखने के अनुमान के कारण सोमवार को तेल की क़ीमतें बढ़ गई हैं.समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ओपेक और अन्य तेल उत्पादक तेल उत्पादन स्थिर कर सकते हैं.

    ओपेक और रूस सहित अन्य सहयोगी तेल उत्पादकों की पिछले महीने एक बैठक हुई थी.

    इस बैठक में आने वाले दिनों में मांग बढ़ने की संभावना के चलते जनवरी में प्रतिदिन पांच लाख बैरल तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया गया था. साथ ही उत्पादन की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक करने का भी फैसला किया गया.

    एनर्जी एस्पेक्ट्स और आरबीसी कैपिटल के विशेषज्ञों के मुताबिक ओपेक और अन्य उत्पादक फ़रवरी में भी जनवरी जितना ही उत्पादन बनाए रखेंगे.

    ओपेक के सेक्रेट्री जनरल मोहम्मद बारकिंदो ने रविवार को कहा कि भले ही कच्चे तेल के दाम इस साल 59 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर नौ करोड़ 59 लाख बैरल प्रतिदिन होने की उम्मीद है लेकिन फिर भी समूह को लगता है कि 2021 की पहली छमाही में मांग में कमी हो सकती है.

    उन्होंने कहा, “ये पिछले साल निवेश में हुई भारी कटौती, नौकरियों के नुक़सान और कच्चे तेल की बुरी तरह गिरी मांग से उबरने की शुरुआत भर है.”

    इस साल मार्च में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत प्रति बैरल 52.42 डॉलर थी जो 62 सेंट या 1.2 प्रतिशत बढ़ी थी. वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल के फरवरी में 55 सेंट या 1.1 प्रतिशत दाम बढ़कर प्रति बैरल 49.07 डॉलर हो गए थे.

    लेकिन, साल 2020 के अंत में तेल की कीमतें साल 2019 के औसत से कम रही हैं. वैश्विक स्तर पर हुए लॉकडाउन के कारण तेल की कीमतों में बहुत गिरावट आई थी जिनमें अब सुधार हो रहा है.

  11. किसान आंदोलन: 'ठंड, बारिश से ज़्यादा सरकार की बेरुख़ी से दुख'

  12. पाकिस्तान: शिया हज़ारा समुदाय के 11 लोगों की हत्या की ज़िम्मेदारी का दावा IS ने किया

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अल्पसंख्यक शिया हज़ारा समुदाय पर हुए हमले में 11 लोगों की जान चली गई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इस्लामिक स्टेट ने अमाक़ समाचार एजेंसी को एक पत्र भेज इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

    ये हमला बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से क़रीब 100 किमी. दक्षिण पूर्व में स्थित बोलान ज़िले के मछ इलाक़े में रविवार सुबह हुआ.

    अधिकारियों के मुताबिक़ इस हमले में कोयले की खदान में काम करने वाले 11 कामगारों की हत्या कर दी गई है. उस समय कामगार खदान के पास बने अपने कमरे में थे.

    एक सुरक्षा अधिकारी ने पहचान छुपाने की शर्त पर न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “सभी कामगारों के गले काटे गए हैं. उनके हाथ पीछे बंधे हैं और आंखों पर पट्टी बंधी हुई है.”

    व्हाट्सऐप पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो में तीन शव कमरे के बाहर दिख रहे हैं और बाकी शव खून में लथपथ अंदर पड़े हैं.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक ट्वीट करके इस घटना की निंदा की. उन्होंने कहा, “मछ बलूचिस्तान में 11 निर्दोष खदान कामगारों की निंदनीय हत्या आतंकवाद का एक और कायरतापूर्ण अमानवीय कृत्य है.”

    पीएम ने कहा, “सीमांत पुलिस को इन हत्यारों को पकड़ने और न्याय दिलाने के लिए सभी संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है.”

    पाकिस्तान में पहले भी शिया हज़ारा समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसक हमले होते रहे हैं.

    इससे पहले अप्रैल में एक बाज़ार में हुए आत्मघाती विस्फोट में 18 लोग मारे गए थे. उनमें से आधे हज़ारा समुदाय से थे.

    रविवार को हुए हमले के विरोध में शिया हज़ारा समुदाय के लोगों ने क्वेटा में पश्चिमी बायपास को जाम कर दिया और टायर जलाए.

    बलूचिस्तान 60 अरब डॉलर के चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का केंद्र है.

    पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में शिया हज़ारा समुदाय तालिबान और इस्लामिक स्टेट और अन्य सुन्नी मुस्लिम चरमपंथी समूहों के निशाने पर रहे हैं.

    साल 2013 में राजधानी क्वेटा में हुए बम विस्फोटों में हज़ारा समुदाय वाले इलाक़ों में 200 लोग मारे गए थे.

  13. किसान संगठनों और मोदी सरकार में आज फिर वार्ता, समाधान पर संशय

    कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. आज किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच आठवें दौर की बैठक होनी है.

    इस बैठक से पहले पंजाब के बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) (बीकेयू-यू) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार के ज़िद्दी स्वभाव को देखते हुए कृषि क़ानूनों को रद्द करने को लेकर कोई रास्ता निकलने की बहुत कम उम्मीद है.

    उन्होंने रविवार को अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू से कहा, “जिस तरह से सरकार में मौजूद नेता नए कृषि क़ानूनों के समर्थन में बयान दे रहे हैं और इसे किसानों के लिए फ़ायदेमंद बता रहे हैं तो मुझे चार जनवरी की बातचीत से कोई सकारात्मक नतीजा आने की बहुत कम उम्मीद है. हमारा स्टैंड बिल्कुल साफ है- हम तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क़ानूनी गारंटी चाहते हैं. अगर हमारी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो हम अपना विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकाल तक जारी रखेंगे.”

    ‘आधी बात बन गई है’

    30 दिसंबर को किसान संगठनों की केंद्र सरकार के साथ सातवें दौर की बैठक हुई थी. बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से कहा गया था कि आधी बात बन गई है.

    जोगिंदर सिंह ने कहा कि पिछली बैठक में केंद्र सरकार ने बिजली क़ानून और पराली जलाने को लेकर जुर्माने के मामले में किसानों को आश्वासन दिया है. लेकिन, जब तक हमारी मुख्य मांग नहीं मानी जाती तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा और हम उसे और तेज़ करेंगे.

    जोगिंदर सिंह ने कहा कि सरकार को समझने की जरूरत है कि पंजाब और हरियाणा में एपीएमसी के तहत मौजूदा मंडी सिस्टम बहुत अच्छी तरह काम कर रहा है और इसे चलते रहना चाहिए. यहां तक कि नए क़ानून लागू होने से पहले ही अनुबंध पर खेती की जा रही थी. इसे वैसे ही रहने दें.

    सरकार ये कहते हुए नए क़ानूनों को सही ठहरा रही है कि कई किसान संगठनों ने इसका समर्थन किया है लेकिन ये सिर्फ़ हमारे आंदोलन को कमज़ोर करने की कोशिश है. जो सगंठन कृषि क़ानूनों का समर्थन कर रहे हैं वो सिर्फ़ कागजों पर हैं. असल में उनका कोई वजूद नहीं. सरकार बस एक समानांतर मंच बनाकर मौजूदा विरोध प्रदर्शन को कमज़ोर करना चाहती है.

    बीकेयू के अध्यक्ष ने कहा कि भले ही हम पंजाब के 32 किसान संगठनों के समूह का हिस्सा नहीं हैं लेकिन सभी संगठन नए कृषि क़ानूनों को रद्द करने के लिए काम कर रहे हैं.

    उन्होंने बताया, “हमने विरोध प्रदर्शन के समर्थन में हरियाणा के गांवों से एक ट्रैक्टर मार्च शुरू किया है. इस मार्च में एक हज़ार से ज़्यादा ट्रैक्टर हिस्सा ले रहे हैं जो आने वाले दिनों में बढ़ेंगे. ये मार्च तीन जनवरी को टिकरी बॉर्डर से शुरू हुआ है और अगले तीन-चार दिनों तक जारी रहेगा.”

    इस विरोध प्रदर्शन में शामिल किसान संगठनों की मांग है कि कृषि क़ानूनों को रद्द किया जाए जबकि सरकार का कहना है कि क़ानूनों के जिन प्रावधानों पर आपत्ति है सरकार उनमें परिवर्तन के लिए तैयार है.

  14. नमस्कार!

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