भारत सरकार ने ऑक्सफ़र्ड वैक्सीन के निर्यात पर रोक लगाई -आज की बड़ी ख़बरें
दुनिया में वैक्सीन के सबसे बड़े निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया का कहना है कि सरकार न उसके वैक्सीन निर्यात करने पर रोक लगा दी है.
लाइव कवरेज
सिंघु बॉर्डर पर बारिश के बीच किसानों का विरोध प्रदर्शन
दिल्ली में हुई बारिश के बीच कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का विरोध प्रदर्शन 40वें दिन भी जारी है.
रविवार सुबह हुई बारिश के बाद सिंघु बॉर्डर पर बॉर्डर पर पानी भर गया है. लोग सड़क से पानी साफ कर रहे हैं और भीगने से बचने के लिए टेंट के नीचे जगह ले रहे हैं.
किसान संगठनों और सरकार के बीच सात बैठकें हो चुकी हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया है.
30 दिसंबर को सातवें चरण की बैठक हुई थी जिसके बाद कुछ सकारात्मक संदेश मिले थे. अब चार जनवरी को अगली बैठक होनी है.
हज़ारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि कृषि क़ानून को रद्द किया जाए. हालांकि, सरकार क़ानूनों में बदलाव का प्रस्ताव दे रही है.
देखिए बारिश के बीच सिंघु बॉर्डर की तस्वीरें:
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ब्रेकिंग न्यूज़, कोविशील्ड और कोवैक्सीन के इमर्जेंसी इस्तेमाल को मिली मंज़ूरी
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इंडिया ड्रग्स रेग्युलेटर ने ऑक्सफ़ोर्ड कोविड 19 वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेक कोवैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है.
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कहा है कि कोविशील्ड वैक्सीन को 70.42% प्रभावी पाया गया है.कोवैक्सीन भारत की वैक्सीन है. इसे भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर बनाई है.
डीसीजीआई के निदेशक डॉक्टर वीजी सोमानी ने वीजी सोमानी ने कहा कि भारत बायोटेक कोवैक्सीन सुरक्षित है और इम्युन को मज़बूत करने में सक्षम है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीसीजीआई के अहम फ़ैसले पर ट्वीट कर कहा, ''डीसीजीआई ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक वैक्सीन को मंज़ूरी दी है. इसे देश को कोरोना मुक्त होने में मदद मिलेगी. बधाई भारत.''
उन्होंने बताया कि कोरोना पर बनी सब्जेक्ट
एक्सपर्ट कमिटी ने शनिवार को भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के
लिए सशर्ती मंजूरी देने की सिफारिश की थी.
इससे पहले शुक्रवार को सीरम इंस्टिट्यूट
की कोविशील्ड को भी इसी तरह की मंज़ूरी दी गई थी.
डीसीजीए के निदेशक ने बताया कि भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन
के इंसानों और विभिन्न जानवरों की प्रजातियों पर किए गए सभी ट्रायल का डेटा
सीडीएससीओ के साथ साझा किया था. अभी तक उपलब्ध डेटा के आधार पर वैक्सीन को
सुरक्षित पाया गया है.
सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी ने वैक्सीन की
सुरक्षा और प्रतिरक्षा पर डेटा की समीक्षा की और सार्वजनिक हित में आपातकालीन
स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के लिए अनुमति देने की सिफ़ारिश की है, ख़ासतौर पर
कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए. देश में चल रहे कंपनी के क्लीनिकल ट्रायल
जारी रहेंगे.
कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों की दो डोज़
दी जाएंगी. इन्हें 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना होगा. वहीं, कैडिला हेल्थकेयर को वैक्सीन के तीसरे
चरण के क्लीनिकल ट्रायल की मंज़ूरी दी गई है.
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इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और इस खोज में शामिल लोगों को बधाई दी.
उन्होंने कहा, “एक जोश से भरी लड़ाई को मज़बूत करने के लिए एक निर्णायक मोड़! डीसीजीआई की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक की वैक्सीन को मंज़ूरी देना एक स्वस्थ और कोविड से मुक्त देश की ओर बढ़ता कदम है. भारत को बधाई. हमारे मेहनती वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तनकर्ताओं को बधाई.”
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पीएम ने कहा, "यह गर्व की बात है कि जिन दो वैक्सीन के इमर्जेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है, वे दोनों मेड इन इंडिया हैं. यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमारे वैज्ञानिक समुदाय की इच्छाशक्ति को दर्शाता है. वह आत्मनिर्भर भारत, जिसका आधार है- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया."
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उन्होंने लिखा, "विपरीत परिस्थितियों में असाधारण सेवा भाव के लिए हम
डॉक्टरों, मेडिकल प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों, पुलिसकर्मियों, सफ़ाईकर्मियों
और सभी कोरोना वॉरियर्स के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. देशवासियों का
जीवन बचाने के लिए हम सदा उनके आभारी रहेंगे."
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के सीईओ और
मालिक अदार पूनावाला ने कोविशील्ड को मंज़ूरी मिलने पर खुशी ज़ाहिर की है.
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अदार पूनावाला ने ट्वीट किया, “सभी को नया साल मुबारक हो! सीरम इंस्टीट्यूट
ने वैक्सीन के भंडारण के लिए जो जोखिम लिया आख़िरकार
उसका फल मिल गया है. कोविशील्ड, भारत की पहली कोविड-19 वैक्सीन के
सुरक्षित, प्रभावी होने की स्वीकृति मिली है और आने वाले हफ़्तों में
इस्तेमाल के लिए तैयार है.”
टीकाकरण संवेदनशील प्रक्रिया, भाजपा सजावटी-दिखावटी इवेंट ना समझे: अखिलेश यादव
समाजवादी
पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कोरोना वैक्सीन ना लगाने के बयान के बाद एक और ट्वीट
किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार इसे सजावटी-दिखावटी इवेंट ना बनाए.
अखिलेश यादव ने
कहा, “कोरोना का
टीकाकरण एक संवेदनशील प्रक्रिया है इसीलिए भाजपा सरकार इसे कोई सजावटी-दिखावटी
इवेंट न समझे और अग्रिम पुख़्ता इंतज़ामों के बाद ही शुरू करे. ये लोगों के जीवन
का विषय है. अत: इसमें बाद में सुधार का ख़तरा नहीं उठाया जा सकता है.गरीबों के टीकाकरण की निश्चित तारीख़ घोषित हो.”
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अखिलेश यादव ने शनिवार सुबह एक प्रेस
वार्ता में कहा था कि ‘वे बीजेपी की वैक्सीन नहीं लेंगे.’
अखिलेश
यादव ने कहा था, “मैं तो नहीं लगवाऊंगा ये
वैक्सीन... मैंने अपनी बात कह दी. बीजेपी लगाएगी वैक्सीन, तो उसका भरोसा
करूंगा मैं? अरे जाओ भाई. अपनी सरकार आयेगी, तो सबको फ़्री वैक्सीन लगेगी.
हम बीजेपी का वैक्सीन नहीं लगवा सकते.”
हालांकि, इसके बाद उन्हें आलोचना का
भी सामना करना पड़ा. बीजेपी नेताओं ने इस बयान को वैज्ञानिकों का अपमान बताया और उन
पर वैक्सीन पर राजनीति करने का आरोप लगाया.
बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने कहा, “अखिलेश यादव का यह बयान बहुत ही
दुर्भाग्यपूर्ण है. इसकी निंदा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि वे टीकाकरण नहीं
करायेंगे क्योंकि यह बीजेपी की वैक्सीन है. यहाँ ज़्यादा खेदजनक बात यह है कि एक
युवा नेता होते हुए उन्होंने ऐसा कहा. हैरानी की बात है कि वे राजनीति और कोविड
वैक्सीन को अलग नहीं रख पाये. यह दिखाती है कि वे राजनीति के ऊपर सोच ही नहीं
पाते.”
पाकिस्तान के बाज़ार में 'अम्मा का खाना' देने वाली नासिरा नवाज़
कड़ाके की ठंड और ऊपर से बारिश के बावजूद डटे हैं किसान
बारिश और ठंड के बीच दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन
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दिल्ली में बारिश और कड़ाके की ठंड के
बीच कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. उन्हें उम्मीद
है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी.
गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद एक विरोध
प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम इतने खराब मौसम में अपने परिवारों से
दूर सड़कों पर रह रहे हैं. हमें उम्मीद है कि सरकार कल हमारी मांगे मान लेगी.”
दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर हज़ारों किसान
पिछले 37 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि कृषि क़ानूनों को
रद्द किया है. हालांकि, सरकार क़ानून में बदलाव का प्रस्ताव दे रही है.
30 दिसंबर को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह
तोमर और किसान नेताओं के बीच बातचीत हुई थी. अगली बैठक चार जनवरी की जाएगी.
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सऊदी अरब ने विदेशी उड़ानों पर लगाया प्रतिबंध हटाया
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सऊदी अरब ने दिसंबर में लगाया अस्थायी यात्रा प्रतिबंध हटा दिया है. ये प्रतिबंध कोविड-19 के नए वेरिएंट के ख़तरे को देखते हुए लगाया गया था.
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने रविवार
सुबह ये जानकारी दी. ये यात्रा प्रतिबंध कई देशों पर लगाया गया था.
सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक़ गृह
मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि रविवार सुबह 11 बजे से सऊदी अरब में हवा,
ज़मीन और समुद्र के रास्ते प्रवेश फिर से शुरू हो गया है.
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हालांकि, कुछ प्रतिबंध अब भी लागू हैं जैसे ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका और अन्य देशों से आ रहे वो लोग जो सऊदी के नागरिक नहीं हैं उन्हें सऊदी अरब में प्रवेश से पहले 14 दिन इन देशों के बाहर रुकना होगा.
इसी तरह सऊदी नागरिक, जिन्हें मानवीय और आवश्यक मामलों के लिए प्रवेश करने की अनुमति है, उन्हें कोविड-19 के नए वेरिएंट वाले देशों से आने पर 14 दिन अपने घरों में निगरानी में रहना होगा.
ब्रिटेन में मिले कोविड-19 के नए वेरिएंट के मामले अब कई यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, स्वीडन और स्पेन में भी सामने आ रहे हैं. दक्षिण अफ़्रीका, जॉर्डन, कनाडा और जापान में भी नया वेरिएंट पाया गया है.
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सऊदी अरब में वैक्सीनेशन की भी शुरुआत हो गई है. हाल ही में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का वैक्सीन लगवाते हुए एक वीडियो सामने आया था.
यहां कोविड-19 के मामलों और उससे होने वाली मौतों में भी गिरवाट होनी शुरू हो चुकी है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक शनिवार को 101 नए मामले दर्ज़ किए गए जो पिछले नौ महीनों में सबसे कम हैं.
सऊदी अरब में कोरोना वायरस के अब तक 362,488 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 2,772 सक्रीय मामले हैं और 401 गंभीर स्थिति में हैं. एक जनवरी तक देश में 6,230 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो चुकी है.
कोविड वैक्सीन सबसे पहले तीन करोड़ हेल्थकेयर वर्कर्स को मुफ़्त में
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शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने
पहले चरण में देश के तीन करोड़ हेल्थ वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स को फ्री
वैक्सीन दिए जाने की बात कही है.
उन्होंने ट्वीट किया, “कोविड 19 वैक्सीन दिए
जाने के पहले चरण में सबसे अधिक वरीयता वाले एक करोड़ हेल्थकेयर वर्कर्स और दो
करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स को मुफ़्त वैक्सीन लगवाई जाएगी. जुलाई तक बाक़ी 27 करोड़
वरीयता वाले लोगों को वैक्सीन दिए जाने को लेकर फ़ैसला किया जा रहा है.”
इससे पहले
डॉक्टर हर्षवर्धन ने लोगों से अपील की थी कि वे वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभाव को
लेकर किसी अफवाह के बहकावे में न आएं. उन्होंने ज़ोर दिया कि वैक्सीन अप्रूवल में
किसी प्रक्रिया से समझौता नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि पोलियो टीकाकरण अभियान शुरू करने से पहले
भी लोगों में वैक्सीन को लेकर हिचक थी लेकिन हमें अपनी सफलता याद रखनी चाहिए. उन्होंने
मीडिया से भी अपील की कि वे ज़िम्मेदारी से काम करें और किसी भी बात को छापने से
पहले वे तथ्य जांच लें.
एक दिन पहले ही
भारत ने वैक्सीन की ओर एक और कदम उठाया है. सरकार गठित विशेषज्ञों के पैनल ने
शुक्रवार को पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट में बन रही ऑक्सफोर्ड वैक्सीन कोविशील्ड को
लेकर अपने सुझाव डीसीजीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल) को भेज दिए हैं.
डॉक्टर हर्षवर्धन
ने बताया कि सुदूर इलाकों तक वैक्सीन पहुंचे, इसके लिए कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रकचर
को अपग्रेड किया गया है. बाक़ी संसाधन भी पहुंचा दिए गए हैं.
उन्होंने
बताया, “हर छोटी चीज़ का ध्यान रखते हुए इस
अभियान से जुड़े विभिन्न लोगों को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई है.”
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इसराइल युद्ध के लिए उकसा रहा, झाँसे में न आएँ ट्रंप: ईरान
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ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया है कि वो इसराइल के 'झाँसे' में न आएं.
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इसराइल अमेरिका को युद्ध के लिए भड़का रहा है.
ईरानी जनरल क़ासिम सुलेमानी के मारे जाने के एक साल पूरे होने पर ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका को चेताया है.
अमेरिका ने इराक़ में जनरल क़ासिम सुलेमानी को एक ड्रोन हमले में मार दिया था. ईरान ने आरोप लगाया है कि इसराइल इराक़ में अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों पर हमला करवा रहा है ताकि उसकी बदनामी हो.
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अमेरिका ने ईरान समर्थित लड़ाकों पर इराक़ में अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों पर नियमित हमले का आरोप लगाया है. इराक़ में अमेरिकी दूतावास के क़रीब भी हमले हुए हैं. किसी भी ईरान समर्थित लड़ाकों के समूह ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने ट्वीट कर कहा है, ''इराक़ से नई ख़ुफ़िया सूचना से संकेत मिले हैं कि इसराइली एजेंट अमेरिकी ठिकानों पर हमले करवा रहे हैं ताकि सत्ता से विदा हो रहे ट्रंप कोई युद्ध छेड़ें और उसे इन हमलों के सहारे उचित ठहाराया जा सके. राष्ट्रपति ट्रंप आप इसे लेकर सतर्क रहिए. ऐसा कोई भी क़दम उठाया गया तो बुरी तरह से पलटवार होगा.''
क़ासिम सुलेमानी की जगह लेने वाले इस्माइल ग़ानी ने शुक्रवार को कहा था कि ईरान जनरल सुलेमानी का बदला लेने के लिए तैयार है. अमेरिकी सेना ने बुधवार को दो परमाणु क्षमता से लैस बी-52 बमवर्षक मध्य-पूर्व में भेजे थे. कहा जा रहा है कि यह ईरान को संदेश देने के लिए था.
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पाकिस्तान ने अचानक लश्कर कमांडर ज़की-उर-रहमान को क्यों गिरफ़्तार किया
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मुंबई में 26/11 के हमलों के मास्टरमाइंड कहे जाने
वाले लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर ज़की-उर-रहमान लखवी को पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया
गया है.
पाकिस्तान के आतंक निरोधी विभाग ने
लखवी को आतंकवाद के लिए फंडिग के आरोप में गिरफ़्तार किया है.
गिरफ़्तारी एक ऐसे वक़्त में हुई है जब
अगली एफएटीएफ बैठक होने में कुछ हफ़्ते बचे हैं जिसमें फ़ैसला लिया जाएगा कि
पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा जाए या नहीं.
फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफ़एटीएफ़ एक
अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में हो रही
मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीतियां बनाना है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के
बाद चरमपंथ की फंडिंग को रोकने का उद्देश्य भी इसमें शामिल किया गया.
पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधी विभाग के प्रवक्ता ने
बताया, “लखवी पर एक डिस्पेंसरी के ज़रिए आतंकवाद के लिए फंडिग इकट्ठी
करने का आरोप है.उसने इस डिसपेंसरी से फंड इकट्ठा कर
उसे आतंकवादी फंडिग के लिए और निजी खर्चे के लिए इस्तेमाल किया.”
इस बयान में बताया गया कि इस आरोप के
साथ ये बात भी जुड़ी है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लखवी को प्रतिबंधित
आतंकवादियों की लिस्ट में डाला है और इसलिए बिना विशेष इजाज़त वह किसी फंड का
इस्तेमाल नहीं कर सकता.
इस मामले को लाहौर की एंटी-टेररिज़म कोर्ट में सुना जाएगा.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के अनुसार भारतीय अधिकारियों ने इस
कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान के लिए ये आम
बात हो गई है कि वो एफएटीएफ की बैठक से पहले बड़े आतंकवादी चेहरों को गिरफ्तार
करके दिखाता है.
अप्रैल 2015 में मुंबई हमलों के कथित मास्टरमाइंड ज़की-उर-रहमान लखवी को अडियाला जेल के रिहा कर दिया गया था.
तब लाहौर हाई कोर्ट ने लखवी की नज़रबंदी को ख़त्म करते हुए उन्हें दस लाख के दो ज़मानती मुचलकों पर रिहा करने का आदेश दिया था. भारत लखवी को 2008 में हुए मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड मानता है जिनमें 166 लोग मारे गए थे. लखवी को पाकिस्तान ने 7 दिसंबर 2008 को गिरफ़्तार किया था.
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