भारत ने एक और वैक्सीन को दी आपात इस्तेमाल की मंज़ूरी -आज की बड़ी ख़बरें

पाकिस्तान सरकार ने भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा लगाये गए 'अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन के आरोपों' को सिरे से ख़ारिज किया है.

लाइव कवरेज

  1. बांग्लादेश में शेख मुजीबउर रहमान की तस्वीर को नुक़सान पहुँचाने पर गिरफ़्तारी

    बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबउर रहमान

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    इमेज कैप्शन, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबउर रहमान

    बांग्लादेश की पुलिस ने बंगबंधु शेख मुजीबउर रहमान की दीवार में लगी तस्वीर को नुक़सान पहुँचाने पर एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.

    ढाका ट्रिब्यून के अनुसार यह घटना पीरगंज कस्बे में शुक्रवार की शाम क़रीब चार बजे हुई थी.

    गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति का नाम नूर आलम है जिसकी उम्र क़रीब 42 साल है.

    पीरगंज पुलिस स्टेशन प्रभारी (ओसी) प्रदीप कुमार रॉय ने कहा है कि नूर आलम ने तस्वीर पर ईंट से हमला किया था.

    इससे पहले भी बांग्लादेश के संस्थापक और वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता मुजीबउर रहमान की मूर्ति को लेकर विवाद हो चुका है.

    शेख हसीना ने बांग्लादेश के विजय दिवस पर एक वर्चुअल मीटिंग को संबोधित करते हुए इसका ज़िक्र किया था. शेख हसीना ने कहा था कि बंगबंधु शेख मुजीबउर रहमान की मूर्ति को लेकर जानबूझकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है.

    प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि बांग्लादेश बनाने में सभी धर्मों के लोगों ने अपने ख़ून का बलिदान दिया है और किसी के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा.

    शेख मुजीबउर रहमान की मूर्ति को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक समूह हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के नेता ममुनुल हक़ ने शेख हसीना से कहा कि वो मुजीबउर रहमान की मूर्ति लगाने की योजना को रोक दें. मुजीबउर रहमान की 1975 में परिवार के कई सदस्यों के साथ हत्या कर दी गई थी.

    बांग्लादेश

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    इमेज कैप्शन, 4 दिसंबर को ढाका में बैतुल मुकर्रम मस्जिद के बाहर लोगों ने शेख मुजीबउर की मूर्ति लगाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और बांग्लादेश में सभी मानव मूर्तियों को तोड़े जाने की मांग की.

    रहमान की मूर्ति लगाने की आलोचना करते हुए ममुनुल हक़ ने कहा था कि मूर्ति लगाना बांग्लादेश के राष्ट्रपिता का अपमान है क्योंकि वो मुसलमान थे और इस्लाम में किसी भी तरह की मूर्ति लगाने की मनाही है. बात यहीं तक नहीं थमी.

    हक़ के बाद हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के प्रमुख जुनैद अहमद बाबूनगरी ने धमकी दी थी कि बांग्लादेश में कोई भी पार्टी मूर्ति खड़ी करेगी तो उसे तोड़ दिया जाएगा.

    शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कहा है कि बंगबंधु की मूर्ति लगाने का विरोध करना देशद्रोह है. मूर्ति विवाद में हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के ख़िलाफ़ बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन हुआ था.

    हिफ़ाजत-ए-इस्लाम को बने एक दशक से भी कम वक़्त हुआ है. यह 2013 में अस्तित्व में आया. इसका मुख्यालय ढाका के बदले तटीय शहर चटग्राम में है. यहां सैकड़ों की संख्या मदरसा हैं और हजारों की तादाद में मुस्लिम बच्चे यहां पढ़ाई करते हैं.

    पाँच मई, 2013 को हिफ़ाजत-ए-इस्लाम ने ढाका के मोतीझील जिले को 12 घंटों तक अपने नियंत्रण में ले लिया था. मोतीझील को बांग्लादेश का वित्तीय ज़िला भी कहा जाता है.

    हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के लोग एक ब्लॉगर को फांसी देने की मांग कर रहे थे. उस ब्लॉगर पर ईशनिंदा का आरोप था. पुलिस पूरे इलाक़े को देर रात हिफ़ाजत-ए-इस्लाम से मुक्त करा पाई थी. जमकर हिंसा हुई थी और इसमें इस इस्लामिक धड़े के 39 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी.

    बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबउर रहमान

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  2. दुनिया के लिए कैसा होगा साल 2021?

  3. कांग्रेस नेता बूटा सिंह का निधन

    बूटा सिंह

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    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह का शनिवार को निधन हो गया.

    वह 86 साल के थे. बूटा सिंह ने पहली बार अकाली दल से चुनाव लड़ा था और 1960 के दशक में कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

    पहली बार वो 1962 में लोकसभा चुनाव जीते थे. वह 8 बार लोकसभा सांसद के रूप में चुने गए थे.

    अपने करियर के आख़िरी दौर में वो बिहार के राज्यपाल बने.

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक जताया और ट्विटर पर लिखा कि बूटा सिंह एक अनुभवी प्रशासक और ग़रीबों के कल्याण के लिए एक बुलंद आवाज़ थे.

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  4. भारत ने मंदिर तोड़े जाने पर पाकिस्तान से कार्रवाई की मांग की

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    भारत ने पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाने को लेकर दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमिशन के सामने चिंता जताई है.

    पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के करक जिले में बुधवार को एक मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आयी है.

    गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान हाई कमिशन से कहा कि पाकिस्तान सरकार मंदिर पर हमले की जांच की जानकारी भारत से साझा करे.

    भारत ने इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर सख़्त कार्रवाई करने की मांग भी की. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के मुताबिक़ पाकिस्तानी उच्चायोग को कहा गया है, “पाकिस्तान सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वो अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनकी भलाई पर ध्यान देगी.”

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान हिंदू काउंसिल ने मंदिर तोड़े जाने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया

    सूत्रों के मुताबिक़ ये भी याद दिलाया गया है कि 1997 के बाद से दूसरी बार है जब करक मंदिर को नुक़सान पहुंचाया गया है.

    इस हमले के बाद पाकिस्तान की केंद्रीय और प्रांतीय सरकार ने 30 से ज़्यादा लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं.

    पाकिस्तान के डॉन न्यूज़ के मुताबिक़ गिरफ़्तार लोगों में मौलाना और जमात-उलेमा-ए-इस्लाम के एक नेता शामिल हैं. उन्हें पूजास्थल तोड़ने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने, लूट, आगजनी और हमला करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. इसके साथ ही उन पर पाकिस्तान का आतंक-विरोधी क़ानून भी लगाया गया है.

    प्रांत के मुख्यमंत्री ने एक समारोह के दौरान कहा कि उन्होंने मंदिर को दोबारा बनाने के आदेश दिए हैं.

    पाकिस्तान में हिंदू काउंसिल के प्रमुख रमेश वंकवानी ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की और कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय कहते हुए अथॉरिटी को चार जनवरी तक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है. साथ ही ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है.

  5. दिसंबर में हुआ रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन

    जीएसटी

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    दिसंबर महीने में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा और सरकार के राजस्व में 1,15,174 करोड़ रुपए आए.

    ये आँकड़ा पिछले साल से 12 फ़ीसद ज़्यादा है.

    दिसंबर लगातार चौथा महीना है जिसमें जीएसटी कलेक्शन बढ़ता आया है. हालांकि साल 2020-21 की पहली तिमाही में लॉकडाउन की वजह से टैक्स कलेक्शन बहुत ज़्यादा घट गया था.

    दिसंबर की 12 फ़ीसद वृद्धि पिछले 21 महीने में सबसे ज़्यादा थी.

    सरकार का कहना है कि 2017 में जीएसटी आने के बाद पहली बार इतना मासिक कलेक्शन बताता है कि अर्थव्यवस्था तेज़ी से रिकवर कर रही है.

    सरकार के मुताबिक़ इसका श्रेय नियमों को ठीक से लागू करवाने और जीएसटी चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने को भी जाता है.

  6. कोरोना वैक्सीन के ड्राई रन के लिए कैसी है तैयारी

  7. कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन भारत के सभी राज्यों में आज

    वैक्सीन ड्राई रन

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    भारत के सभी राज्यों में आज कोविड 19 की वैक्सीन लगाने से पहले इसकी तैयारियों की जाँच की जाएगी. इसे वैक्सीन ड्राई रन कहा जा रहा है. इसके तहत देखा जाएगा कि स्वास्थ्यकर्मी किस हद तक तैयार हैं और उनमें किसी भी तरह की ट्रेनिंग की कमी तो नहीं है.

    इसके साथ ही सुविधाओं का भी आकलन हो सकेगा. इसमें ये भी देखा जाएगा कि वैक्सीन को स्टोरेज से टीकाकरण केंद्र तक लाने में कितना वक़्त लग रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सरकार ने ऑक्सफर्ड कोविड 19 वैक्सीन को मंज़ूरी दे दी है. यह वैक्सीन पुणे की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में बनी है. आज दूसरे चरण का ड्राई रन है. इससे पहले 28 दिसंबर को असम, आंध्र प्रदेश, पंजाब और गुजरात में हो चुका है.

    वैक्सीन ड्राई रन

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    • स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 96 हज़ार लोगों को वैक्सीन लगाने की ट्रेनिंग दी गई है. इनमें से 2,360 लोगों को नेशनल ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स में ट्रेनिंग दी गई है और 57,000 से ज़्यादा लोगों को 719 ज़िलों में ज़िला स्तर पर प्रशिक्षण मिला है.
    • इस प्रक्रिया में सभी टीका केंद्रों पर 25 स्वास्थ्यकर्मियों को कोविड-19 की डमी वैक्सीन लगाई जाएगी. इसमें इस बात की जाँच होगी कि पूरा सिस्टम वक़्त पर सही तरीक़े से काम कर रहा है या नहीं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ड्राई रन इस बात पर भी केंद्रित है कि अगर वैक्सीन लगाने के बाद किसी की तबीयत बिगड़ती है तो उसके लिए व्यवस्था कितनी तैयार है.
    • स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सभी राज्यों के अधिकारियों से कहा है कि ड्राई रन के दौरान हर एक चीज़ की मुस्तैदी पर नज़र रखें और कमियों को बताएं. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ड्राई रन के आकलन के बाद असली टीकाकरण के दौरान कमियों को मुस्तैदी से ठीक किया जा सकेगा.
    ड्राई रन

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    • समचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ड्राई रन को असली टीकाकरण की तरह देखा जाए. इस दौरान समन्वय में कमी रही तो असली टीकाकरण में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ड्राई रन से ही मुस्तैदी और कमियों का सही आकलन संभव है.
    • स्वास्थ्य मंत्री राष्ट्रीय राजधानी में ड्राई रन की निगरानी करेंगे. दिल्ली में ड्राई रन शाहदरा के गुरु तेगबहादुर हॉस्पिटल, दरियागंज के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और द्वारका के वेंकटेश्वर अस्पताल में होगा.
    • लखनऊ में छह स्थानों पर ड्राई रन का आयोजन होगा. पुणे में तीन स्वास्थ्य केंद्रों पर और छत्तीसगढ़ के सात ज़िलों में होगा.
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  8. किसानों ने कहा, अगली बातचीत में हल नहीं निकला तो विरोध होगा तेज़

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    किसान संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने चार जनवरी को होने वाली बातचीत में विवादित कृषि क़ानूनों को हटाने पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे अपने विरोध को और तेज़ करेंगे.

    एक जनवरी को पत्रकारों से बात करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने हरियाणा में मॉल और पेट्रोल पंप बंद करवाने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो किसान कुंडली-मानेसर हाइवे पर ट्रेक्टर मार्च करेंगे और उसके बाद जयपुर से दिल्ली की ओर कूच करेंगे.

    पिछले 37 दिन से हज़ारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र से छह दौर की बातचीत के बाद भी अब तक पराली जलाने और बिजली सब्सिडी के मुद्दे पर सैंद्धांतिक तौर पर सहमति बनी है.

    लेकिन विवादित क़ानूनों को वापस लिए जाने और एमएसपी को क़ानूनी तौर पर लागू करने की बड़ी मांगों पर अब भी गतिरोध बना हुआ है.

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    भारतीय किसान यूनियन-टिकैत संगठन के जनरल सेक्रेटरी युद्धवीर सिंह ने कहा, “सरकार किसानों के प्रदर्शन के हल्के में ले रही है. शाहीन बाग़ में वे प्रदर्शनकारियों को हटाने में कामयाब हो गए थे तो उन्हें लगता है कि वे हमारे साथ भी ऐसा कर सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं होगा.”

    उन्होंने कहा, “अगर सरकार चार जनवरी तक कोई फ़ैसला नहीं लेती है तो किसानों को फ़ैसला लेना होगा.”

    भारतीय किसान संघर्ष समिति नेता विकास सीसर ने कहा कि अगर गतिरोध बना रहता है तो प्रदर्शनकारी हरियाणा में मॉल, पेट्रोल पंप और टोल प्लाज़ा बंद करने की तारीख़ बताएंगे. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता और उसकी सहयोगी जेजेपी राज्य में लगातार विरोध प्रदर्शन झेलेंगे.

    उनका कहना है कि ये संयुक्त किसान मोर्चा की रणनीति है कि एनडीए के सदस्यों को टारगेट कर उन पर किसानों के लिए गठबंधन तोड़ने का दबाव बनाया जाए.

    यूनियन नेताओं का कहना है कि 30 दिसंबर को जो कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर ट्रेक्टर मार्च निकालने की योजना थी, वो अब छह जनवरी को निकाला जाएगा अगर अगली बातचीत में कोई ठोस फ़ैसला नहीं होता है तो.

    स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि फ़िलहाल प्रदर्शनकारी हरियाणा-राजस्थान सीमा पर शाहजहांपुर में डटे हुए है और अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ती है तो वे दिल्ली की ओर बढ़ेंगे.

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    31 दिसंबर तो कुछ किसानों ने शाहजहांपुर में पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए थे तो हरियाणा पुलिस के साथ झड़प भी हुई.

    योगेंद्र यादव ने बताया कि अब तक सिर्फ पांच फ़ीसद मुद्दों पर ही चर्चा हुई है. किसान आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर है. 30 दिसंबर की बातचीत में पूंछ बाहर आ गई है लेकिन पूरा हाथी बाहर आना बाक़ी है.”

    इस बीच, अकादमिक जगत के 866 लोगों ने कृषि क़ानून के पक्ष में बयान दिया है. इसके मुताबिक़ विवादित क़ानूनों से कृषि मुक्त होगी और किसान सही दामों पर अपनी फसल बेचने में सक्षम होंगे. ये चिट्ठी शिक्षा विभाग ने सार्वजनिक की है जिस पर प्रोफेसरों के अलावा आठ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने साइन किया है.

    इस बयान में कहा गया है, “हमें सरकार के किसानों की रोज़ी-रोटी की सुरक्षा के आश्वासन पर पूरा भरोसा है, ये क़ानून किसानों की प्लेट से खाना नहीं छीनेंगे. सरकार अपनी मिनिमन गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की नीति पर कायम है.”

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