चीन: चाकू से हुए हमले में सात लोगों की मौत, सात घायल -आज की बड़ी ख़बरें

सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ़्तार कर लिया है. हालांकि हमले के पीछे का मक़सद अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है

लाइव कवरेज

  1. मोटर वाहनों से जुड़े डॉक्युमेंट्स की वैधता 31 मार्च तक बढ़ाई गई

    ट्रैफिक

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    कोरोना वायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए रविवार को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (आरसी) समेत वाहनों से जुड़े कई अन्य दस्तावेज़ों की वैधता को 31 मार्च 2021 तक के लिए बढ़ा दिया है.

    मंत्रालय की नई एडवाइज़री के अनुसार, वाहनों से संबंधित जो दस्तावेज़ 1 फ़रवरी 2020 से लेकर 31 मार्च 2021 के बीच अमान्य होने वाले थे, उन्हें राहत दी गई है.

    इससे पहले, कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ महीने पहले मोटर वाहनों से जुड़े सभी कागज़ों की वैधता 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ाने का निर्णय लिया था.

    इसके तहत फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (आरसी) समेत कुछ प्रमुख दस्तावेज़ शामिल हैं.

  2. सीबीआई बताए सुशांत ने आत्महत्या की या क़त्ल हुआः अनिल देशमुख

    सुशांत सिंह राजपूत

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    महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सीबीआई से कहा है कि वो यह बताए कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी या उनका क़त्ल हुआ था. उन्होंने कहा कि सीबीआई को इस मामले में अपनी जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करनी चाहिए.

    समाचार एजेंसी पीटीआी के मुताबिक अनिल देशमुख ने एक प्रेस वार्ता में कहा, 'सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में महाराष्ट्र और देश के लोग बेसब्री से सीबीआई की जांच रिपोर्ट का इंतेज़ार कर रहे हैं. लोग मुझसे मामले के बारे में पूछते हैं. मैं सीबीआई से गुज़ारिश करता हूं कि सीबीआई बताए कि ये आत्महत्या थी या क़त्ल था.'

    उन्होंने कहा कि सीबीआई को मामले की जांच सौंपे हुए पांच-छह महीने हो चुके हैं. अब सीबीआई को अब जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर देनी चाहिए ताकि लोगों को बता चल रहे.

    इस साल 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत का शव संदिग्ध हालत में उनके बांद्रा स्थित घर पर मिला था. शुरुआत में महाराष्ट्र पुलिस ने उनकी मौत को आत्महत्या माना था और इस मामले में दुर्घटनावश मौत की रिपोर्ट दायर की थी. बाद में इस मामले सीबीआई को सौंप दिया गया था.

    19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने भी मामला सीबीआई को सौंपे जाने को सही ठहराया था. सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने पटना में उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया था. उनपर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए गए थे.

    सीबीआई ने मामले की जांच बिहार पुलिस से ली थी. इसी साल अक्तूबर में दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों के एक दल ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत का क़त्ल नहीं हुआ था. उन्होंने इसे फंदे पर लटककर मौत का मामला बताया था.

  3. कोरोना संक्रमण: भारत के लिए अच्छे संकेत, छह महीने पहले की स्थिति

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    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 18,732 नये मामले दर्ज किये गए हैं.

    बीते छह महीने में यह पहली बार है जब एक दिन में कोविड के 19,000 से कम मामले दर्ज किये गए हैं.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी बड़ी सफलता बताया है. मंत्रालय का कहना है कि इस वैश्विक महामारी के ख़िलाफ़ भारत सरकार बिल्कुल सही दिशा में काम कर रही है.

    रविवार से पहले, 1 जुलाई 2020 को 18,653 मामले दर्ज किये गए थे.

    अधिकारियों ने बताया है कि बीते 24 घंटे में क़रीब साढ़े 21 हज़ार लोग संक्रमण के बाद पूरी तरह ठीक हुए है. भारत में अब तक 97 लाख 61 हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना संक्रमण होने के बाद पूरी तरह ठीक हुए हैं.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संक्रमण के एक्टिव मामलों और संक्रमण के बाद ठीक हुए लोगों की संख्या के बीच अंतर लगातार कम हो रहा है.

  4. तुर्की का नया क़ानून जिससे डरे हुए हैं मानवाधिकार संगठन

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    तुर्की की संसद ने रविवार को एक नया क़ानून पारित किया है जिसके तहत संगठनों और संस्थाओं पर सरकार की निगरानी बढ़ने की संभावना जताई गई है.

    एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई मानवाधिकार समूहों के अनुसार, नये क़ानून की वजह से सामाजिक संगठनों की स्वतंत्रता सीमित रह जायेगी.

    नये क़ानून के अनुसार, तुर्की के आंतरिक मंत्री को उन संगठनों के सदस्यों को बदलने की इजाज़त होगी जिनकी जाँच आतंकवाद के आरोपों के लिए की जा रही है. इसके अलावा मंत्रालय को नये क़ानून के तहत संस्थाओं की गतिविधियों को रोकने के लिए अदालतों में आवेदन करने की भी शक्ति मिलेगी.

    बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी इस क़ानून में शामिल किया गया है और क़ानून में उन्हें भी दण्डित करने का प्रावधान है.

    तुर्की की संसद द्वारा पास किये गए इस क़ानून के मसौदे को राष्ट्रपति अर्दोआन की पार्टी ने ही तैयार किया है.

    इस सप्ताह की शुरुआत में, एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन समेत कुछ मानवाधिकार संगठनों ने एक बयान में यह कहा था कि तुर्की में आतंकवाद के आरोप मनमाने ढंग से लगाये जा रहे हैं और उन लोगों को भी दण्डित किया जा रहा है जिनके मामलों में अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है.

    संगठनों ने कहा, “यह देखते हुए कि हज़ारों नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, राजनेता, पेशेवर संगठनों के सदस्य जाँच (आतंकवाद विरोधी क़ानून) के दायरे में है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह क़ानून लगभग सभी विरोधी संगठनों को लक्षित करेगा.”

    2016 में एक असफल तख़्तापलट के बाद सैकड़ों लोगों के ख़िलाफ़ आतंकवाद के आरोपों के आधार पर जाँच शुरू की गई थी. एमनेस्टी और अन्य नागरिक समूहों के सदस्यों की इस संबंध में जाँच की गई और उन पर मुक़दमा चलाया गया, जबकि सैकड़ों संस्थाओं को बंद भी कर दिया गया.

  5. आरसीपी सिंह बने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष

    राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

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    जनता दल यूनाइटेड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आरसीपी सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया है. आरसीपी सिंह बिहार से राज्यसभा के सांसद भी हैं.

    मूलरूप से नालंदा ज़िले के रहने वाले राम चंद्र प्रसाद सिंह यूपी काडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं. वो नीतीश कुमार के प्रधान सचिव भी रहे हैं.

    वे नीतीश कुमार के अच्छे दोस्त और सियासी सलाहकार भी हैं. आरसीपी सिंह सबसे पहले साल 1996 में नीतीश कुमार के संपर्क में आए थे.

    तब वे तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव थे. नीतीश कुमार भी नालंदा ज़िले से ही हैं और उनकी और आरसीपी सिंह की जाति भी समान है.

  6. इमरान ख़ान पर मरियम का तंज- शेरवानी पहनने की जल्दी क्यों थी

  7. पाकिस्तान: बेनज़ीर भुट्टो की ज़िंदगी के वो आख़िरी 18 घंटे

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  10. नृत्य इतिहासकार पदमश्री सुनील कोठारी का निधन

    पदमश्री से सम्मानित डांस इतिहासकार और आलोचक सुनील कोठारी का रविवार सुबह दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया.

    उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ. वे 87 वर्ष के थे.

    एक क़रीबी पारिवारिक दोस्त विधा लाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “वे एक महीना पहले ही कोविड पॉजिटिव पाए गए थे और उनकी हालत अच्छी नहीं थी.”

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    सुनील कोठारी अपने घर में ही रिकवरी कर रहे थे लेकिन रविवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ने पर अस्पताल लाया गया.

    सुनील कोठारी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय नृत्यों में पढ़ाई शुरू की.

    उन्होंने नृत्य पर 20 किताबें लिखी हैं.

  11. मन की बात में पीएम मोदी ने सिख गुरुओं की क़ुर्बानी याद की

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सिख गुरु गोबिंद सिंह और गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ‘इन महान लोगों के बलिदान से हमारी संस्कृति को सुरक्षित रखने में मदद मिली.’

    ‘मन की बात’ एक मासिक कार्यक्रम है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नाम संदेश देते हैं. हालिया कार्यक्रम इस वर्ष का अंतिम रेडियो कार्यक्रम था जिसमें पीएम मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह के बेटों सहित सिख संतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ‘हम उनके बलिदानों और उनकी दया की भावना के लिए उनके ऋणी बने हुए हैं.’

    मोदी ने कहा, “हमारे देश में आतताइयों से, अत्याचारियों से, देश की हज़ारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाज़ों को बचाने के लिए कितने बड़े बलिदान दिये गए हैं. आज उन्हें याद करने का भी दिन है. आज के ही दिन गुरु गोविंद सिंह जी के पुत्रों, साहिबज़ादे ज़ोरावर सिंह और फ़तेह सिंह को दीवार में ज़िंदा चिनवा दिया गया था. अत्याचारी चाहते थे कि साहिबज़ादे अपनी आस्था छोड़ दें, महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें, लेकिन हमारे साहिबज़ादों ने इतनी कम उम्र में भी ग़ज़ब का साहस दिखाया, इच्छाशक्ति दिखाई. दीवार में चिने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊंची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन फिर भी वो टस से मस नहीं हुए.”

    पीएम मोदी ने यह भी कहा कि “लोग गुरु गोविंद सिंह जी के परिवार के लोगों द्वारा दी गई शहादत को बड़ी भावपूर्ण अवस्था में याद करते हैं. उनकी शहादत ने संपूर्ण मानवता को, देश को, नई सीख दी. इस शहादत ने हमारी सभ्यता को सुरक्षित रखने का महान कार्य किया. हम सब उस शहादत के कर्ज़दार हैं.”

  12. ईरानी राष्ट्रपति रूहानी को डर- अमेरिका कहीं पैसा ना ज़ब्त कर ले

    AFP

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    ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि ‘अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए अमेरिकी बैंकों के माध्यम से ही भुगतान करे.’

    रूहानी ने यह डर भी जताया है कि अमेरिका वैक्सीन के लिए दिये गए पैसे को ज़ब्त भी कर सकता है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर 2018 में परमाणु समझौता तोड़ने के बाद से कई तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं. दोनों देशों के बीच तभी से तनातनी जारी है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका समेत कई देशों में ईरान की संपत्ति पहले से ज़ब्त है और रूहानी के ताज़ा बयान से इस संबंध में ईरान की चिंता का पता चलता है.

    राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ईरान की कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स की एक बैठक में कहा, “हम कोविड वैक्सीन के लिए उस देश से पैसा ट्रांसफ़र करना चाहते हैं, जहाँ हमारा पैसा है.” इस बैठक में रूहानी ने किसी देश का नाम लिये बिना यह भी दावा किया कि ‘उस देश को इस ट्रांसफ़र से कोई समस्या नहीं है.’

    सैद्धांतिक रूप से, दवाओं पर किसी तरह के प्रतिबंध नहीं लगाये जाते हैं. लेकिन सच्चाई ये है कि अंतरराष्ट्रीय बैंक संभावित मुक़दमेबाज़ी से बचने के लिए ईरान से जुड़े लेन-देन पर कुछ शर्तें रखते हैं.

    रूहानी ने यह भी कहा कि ‘अमेरिका के ट्रेज़री ऑफ़िस ऑफ़ फ़ॉरन एसेट्स कंट्रोल ने पहले संकेत दिये थे कि इस तरह की लेन-देन से उन्हें कोई समस्या नहीं है. लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने अब अपना रुख़ बदल लिया है.’

    रूहानी के अनुसार, अमेरिका अब कह रहा है कि वैक्सीन ख़रीद के लिए जो भी पैसा ट्रांसफ़र होगा, उसे पहले अमेरिकी बैंकों से गुज़रना पड़ेगा.

    अप्रैल में, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा था कि ‘ईरान ने अपनी 1.6 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति से जुड़ी क़ानूनी लड़ाई जीत ली है जिसे लंबे समय से लक्ज़मबर्ग में अमेरिका के अनुरोध पर ज़ब्त करके रखा गया था.’

    हालिया बैठक में रूहानी ने कहा, “आप जैसे लोगों पर कौन भरोसा कर सकता है? आपने हर जगह हमारे पैसे को चुराया है.”

    मध्य-पूर्व के देशों में ईरान कोरोना वायरस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित है. फ़रवरी से अब तक ईरान में लगभग 12 लाख केस दर्ज हो चुके हैं और क़रीब 54 हज़ार लोगों की इस महामारी के कारण मौत हुई है.

    रूहानी ने कहा है कि इस कशमकश की वजह से वैक्सीन की ख़रीद में थोड़ी देर ज़रूर हो सकती है, पर वो इसमें सफल होंगे.

    ट्रंप

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  13. सऊदी क्राउन प्रिंस के वैक्सीन लगाते ही सऊदी अरब में हुआ ये असर

    मोहम्मद बिन सलमान

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    सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर तौफ़िक़ अल-रबीआ ने कहा है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान की वैक्सीन लगवाने वाली तस्वीर और वीडियो सामने आने के बाद पिछले कुछ घंटे में कोविड वैक्सीन के लिए रजिस्टर करने वालों की संख्या पाँच गुना बढ़ गई है.

    सऊदी अरब में राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण योजना जारी होने के बाद बीते गुरुवार तक पाँच लाख लोगों ने वैक्सीन के लिए रजिस्टर किया था.

    सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्री ने ट्वीट कर कहा है, ''जैसे ही ख़बर आई कि क्राउन प्रिंस ने कोविड वैक्सीन की पहली डोज लगवाई है वैसे ही वैक्सीन लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन दर पाँच गुना बढ़ गई. ऐसा कुछ ही घंटों में हुआ. वैक्सीन लगाने वालों की संख्या भी तीन गुनी हो गई. हम क्राउन प्रिंस की इस प्रभावी पहल के लिए आभार और शुक्रगुज़ार हैं.''

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    स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वैक्सीन लगाने वालों की संख्या भी तीन गुना बढ़ गई है.

    बताया जा रहा है कि अब तक 10 हज़ार लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है.

    इस बीच देश में कोरोनावायरस के मामलों में भी गिरावट आई है और नए वेरियेंट का कोई मामला सामने नहीं आया है.

    लेकिन प्रिवेंटिव मेडिसिन के सहायक उप मंत्री डॉक्टर अब्दुल्लाह आसिरी ने चेतावनी दी है कि वायरस एक बड़ा ख़तरा है.

    उन्होंने कहा, “हमें ये पता है कि म्यूटेशन से वायरस का व्यवहार नहीं बदल रहा और ना लोगों को संक्रमित करने की क्षमता.”

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    डॉक्टर आसिरी का कहना है कि म्यूटेशन वाले वायरस से कोरोना वायरस की दूसरे स्ट्रेन से ज़्यादा ख़तरा नहीं है.

    अगर म्यूटेशन ना हो तो शायद ही ऐसा होता है कि वायरस एक व्यक्ति को दोबारा संक्रमित करे क्योंकि पहले संक्रमण के बाद बनी एंटीबॉडी से चार-पांच महीने का बचाव मिल जाता है.

    जेद्दाह में स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन मिलने लगी है. योजना के मुताबिक़ पहले चरण में फ्रंटलाइन स्टाफ़ पर फोकस किया गया है.

    देश में हर दिन आने वाले कोरोना संक्रमण मामले 200 से नीचे ही रहे हैं. शनिवार को 163 नए मामले हुए और अब तक कुल 3,62,066 मामले हो चुके हैं.

    अब तक 3,53,004 लोग ठीक हो चुके हैं. रिकवरी रेट 97.49 फ़ीसद है. देश में कोरोना से कुल 6, 176 मौतें हुई हैं.

  14. नेपाल में पीएम ओली और प्रचंड की जंग के बीच चीन हुआ सक्रिय

    चीनी राजदूत हो येंकी

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    इमेज कैप्शन, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के साथ चीनी राजदूत हो येंकी

    जब इस साल मई में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर विवाद बढ़ गया था तब चीनी राजदूत होऊ यांकी पार्टी की हाई कमान और राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से मिलने पहुंच गईं थी.

    इसके बाद कुछ वक़्त के लिए पार्टी में समझौता बना रहा.

    लेकिन जुलाई में फिर से पार्टी में बढ़े तनाव के चलते होऊ यांकी सक्रिय हुईं. तब भी स्थिति नियंत्रण में रही थी.

    लेकिन बीते रविवार प्रधानमंत्री केपी ओली ने लोकसभा भंग करने का फ़ैसला किया, ये जानते हुए भी कि इससे पार्टी में दरार पैदा होगी. इस क़दम से होऊ और चीन हैरान नज़र आ रहे हैं.

    चीन ने अब एक वरिष्ठ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी नेता को नेपाल भेजा है.

    गुओ येझू

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    इमेज कैप्शन, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में अंतरराष्ट्रीय विभाग के उपमंत्री गुओ येझू रविवार को काठमांडू पहुंच रहे हैं

    काठमांडू पोस्ट के अनुसार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में अंतरराष्ट्रीय विभाग के उपमंत्री गुओ येझू रविवार को काठमंडू पहुंच रहे हैं. इस ख़बर की पुष्टि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दो नेताओं ने दी है.

    पार्टी के दोनों गुटों के स्रोतों ने बताया है कि वे अपनी टीम के साथ नेपाल में चार दिन के दौरे पर होंगे.

    नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के डिप्टी हेड बिष्नु रीजल ने काठमांडू पोस्ट को बताया है कि चीन ने गुओ के काठमांडू आने के बारे में बताया है.

    उन्होंने कहा, “फ़िलहाल मेरे पास आपको देने के लिए ज़्यादा जानकारी नहीं है.”

    जानकारों का मानना है कि चीन का नेतृत्व नेपाल में सीपीएन-यूएमएल और माओवादी सेंटर को साथ लाया ताकि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को खड़ा किया जा सके और उसकी दिलचस्पी पार्टी की एकता और गठबंधन बनाए रखने में बनी हुई है.

    पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और सुशील कोइराला के कार्यकाल में विदेश मामलों के सलाहकार रहे दिनेश भट्टाराज कहते हैं कि चीन ने नेपाल में बहुत निवेश किया है और भारत के साथ उसका मुक़ाबला रहा है, इसलिए भी उसकी दिलचस्पी नेपाल में बढ़ रही है. उन्होंने कहा, “अब जो राजनीतिक बदलाव नेपाल में हो रहे हैं, इससे चीन चिंतित ज़रूर है.”

  15. भारत 2025 में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ब्रिटेन को छोड़ देगा पीछे: थिंक टैंक

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    भारत 2020 में अर्थव्यवस्था की विश्व रैंकिंग में छठे पायदान पर खिसकता नज़र आ रहा है लेकिन एक थिंक टैंक के मुताबिक़ 2025 तक वो ब्रिटेन को ओवरटेक करते हुए पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

    साल 2030 तक भारत तीसरे पायदान पर भी पहुँच सकता है. 2019 में भारत ब्रिटेन को ओवरटेक कर पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना था.

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    ब्रिटेन के थिंक टैंक सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिज़नेस रिसर्च (सीईबीआर) ने शनिवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की.

    इस रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत महामारी की वजह से पिछड़ा है. इसका नतीजा हुआ कि 2019 में ब्रिटेन से आगे बढ़ने के बावजूद इस साल के पूर्वानुमान के मुताबिक़ ब्रिटेन भारत से आगे निकल गया है और 2024 तक रहेगा जिसके बाद भारत फिर से बढ़त बनाएगा.”

    थिंक टैंक के मुताबिक़ रुपए के कमज़ोर होने की वजह से ब्रिटेन भारत से आगे निकला है. सीईबीआर ने अनुमान लगाया है कि 2021 में भारत की आर्थिक गतिविधि नौ फ़ीसद और 2022 में सात फ़ीसद बढ़ेगी.

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    “जैसे-जैसे भारत आर्थिक तौर पर और ज़्यादा विकास करेगा, वृद्धि धीमी होगी और सालाना जीडीपी वृद्धि दर 2035 तक 5.8 फ़ीसद पर पहुंचेगी.”

    इस रिपोर्ट के अनुसार भारत 2027 तक जर्मनी और 2030 तक जापान से आगे निकल जाएगा.

    इसी थिंक टैंक ने अनुमान लगाया है कि 2028 तक चीन अमेरिका से आगे निकलते हुए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. पहले जो अनुमान लगाए गए थे, उससे पांच साल पहले ही ये होता दिख रहा है क्योंकि दोनों देश महामारी की वजह से नुक़सान तो झेल रहे हैं लेकिन उनकी रिकवरी में अंतर होगा.

  16. किसान संगठन अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार

    किसान आंदोलन

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    नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन को एक महीना हो चुका है और विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.

    उन्होंने अपना चार पॉइंट का एजेंडा सामने रखा है जिसमें इन क़ानूनों को हटाने का मॉडल और एमएसपी की क़ानूनी गारंटी देना शामिल है.

    स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस में बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 29 दिसंबर को 11 बजे बातचीत का प्रस्ताव रखा है.

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    कृषि क़ानून और एमएसपी के अलावा कमिशन फोर एयर क्वॉलिटी मैनेंजमेंट इन एनसीआर ऑर्डिनेंस 2020 में बदलाव किया जाए जिससे कि किसानों को सज़ा के दायरे में न रखा जाए. इसके अलावा किसानों के हितों की रक्षा के लिए बिजली संशोधन विधेयक 2020 के ड्राफ्ट में बदलाव किया जाए.

    योगेंद्र यादव ने बताया, “हमें ये चारों बातें बातचीत के एजेंडा में चाहिए और इसी क्रम में.”

    उन्होंने कहा कि किसान संगठन हमेशा ईमानदार बातचीत के लिए तैयार थे और हैं.

    किसान यूनियनों ने 24 दिसंबर को सरकार के बातचीत के प्रस्ताव के बाद ये जवाब दिया है.

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    वहीं, कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को भेजी चिट्ठी में किसान संगठनों ने कहा है कि सरकार बैठकों में हो रही बातचीत के तथ्य छुपाकर जनता को गुमराह कर रही है.

    ख़त में लिखा है, “हमने लगातार ये मांग रखी है कि हम केंद्र के इन क़ानूनों की पूरी तरह वापसी चाहते हैं जबकि सरकार ने इस तरह हमारा स्टैंड दिखाया है जैसे कि हम इन क़ानूनों में संशोधन की बात कर रहे हैं. अगर आप किसानों को सम्मानजनक तरीक़े से सुनने को लेकर ईमानदार हैं जैसा कि आपने अपनी चिट्ठी में कहा तो सरकार को पिछली बैठकों के बारे में ग़लत जानकारी नहीं फैलानी चाहिए. जो पूरी स्टेट मशीनरी ने किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का कैंपेन चलाया है, उसे अब से बंद कर दीजिए.”

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