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हमारे विपक्षी दल भारत की भाषा बोल रहे हैंः इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का कहना है कि जिस तरह से विपक्षी राजनीतिक दल पाकिस्तान की सेना पर निशाना साध रहे हैं वैसा पहले कभी नहीं हुआ है.

लाइव कवरेज

  1. पाकिस्तान के विपक्षी दल सेना के ख़िलाफ़ भारत की भाषा बोल रहे हैंः इमरान ख़ान

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का कहना है कि जिस तरह से विपक्षी राजनीतिक दल पाकिस्तान की सेना पर निशाना साध रहे हैं वैसा पहले कभी नहीं हुआ है.

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के विपक्षी दल सेना के ख़िलाफ़ ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसी भारत की प्रोपेगैंडा मशीनरी करती है.

    उन्होंने विपक्षी दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) पर आरोप लगाते हुए कहा कि बदक़िस्मती से ये पता चला है कि इंडिया की फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाली वेबसाइटें पीडीएम को भी बढ़ावा दे रही हैं.

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कई पत्रकार ऐसे हैं जो फ़र्ज़ी ख़बरें फैला रहे थे और पीडीएम का समर्थन कर रहे थे.

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान के विपक्षी दल जिस भाषा में सेना और सेनाप्रमुख पर निशाना साध रहे हैं वैसा इतिहास में पहले कभी भी नहीं हुआ है.

  2. साल 2020 में मील का पत्थर साबित हुईं ये पाँच राजनीतिक घटनाएं

  3. किसान आंदोलन: 29 दिसंबर को सरकार से फिर मिलेंगे किसान नेता

    कृषि क़ानूनों के विरोध के मुद्दे को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर एक महीने से डेरा डाले हुए किसानों नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल 29 दिसंबर को सरकार से वार्ता के लिए जाएगा.

    कीर्ति किसान यूनियन से जुड़े राजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने बीबीसी को बताया, "तीनों क़ानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया और एमसीपी को क़ानूनी अधिकार बनाने की प्रक्रिया को लेकर सरकार से बात होगी. इसके अलावा हम कोई बात नहीं करेंगे. यदि सरकार ने ठोस भरोसा नहीं दिया तो 30 दिसंबर को ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा."

    उन्होंने कहा, "सिंघु बॉर्डर से टीकरी बॉर्डर और फिर आगे शाहजहांपुर बॉर्डर तक ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा. यदि इससे कोई दिक्कत होती है तो उसके लिए सरकार ही ज़िम्मेदार होगी."

  4. बीबीसी इंडिया बोल, 26 दिसंबर 2020., ये साल आपके लिए कैसा रहा और कौन सी घटनाएं आपको हमेशा याद रहेंगी? इसी मुद्दे पर चर्चा सुनिए, संदीप सोनी के साथ.

  5. पीएम मोदी बोले- जो लोग मुझे लोकतंत्र का पाठ पढ़ाते हैं, कश्मीर चुनाव उनके लिए आईना है

  6. किसान आंदोलन की वजह से रेलवे को कितना आर्थिक नुकसान?

    कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का आंदोलन अब भी जारी है.

    किसान आंदोलन की वजह से रेलवे को काफ़ी आर्थिक नुकसान हुआ है.

    उत्तर रेलवे के जनरल मैनेजर आशुतोष गंगल के मुताबिक अब तक रेलवे को करीब 2400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

  7. किसान आंदोलन क्या अब राजनीतिक रुख लेगा?

  8. एलएसी पर तैनात जवानों के लिए इस तरह पहुंच रहा है ज़रूरी सामान

  9. कोरोना महामारी की वजह से इस गांव को मिला पहला स्कूल

  10. प्रचंड और ओली की कम्युनिस्ट पार्टी न टूटे, इसके लिए चीन भेज रहा है नेताओं का दल

    नेपाल की मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक चीन कम्युनिस्ट पार्टी के वाइस प्रेसिडेंट समेत चार सदस्यों का एक दल काठमांडू पहुंच रहा है.

    नेपाली अख़बार काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में टूट को रोकने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

    अख़बार के मुताबिक सत्ताधारी दल में दो धड़े बन चुके हैं. एनसीपी के कम से कम दो नेताओं ने काठमांडू पोस्ट को बताया है कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना (सीपीसी) के अंतरराष्ट्रीय मामलों के वाइस प्रेसिडेंट गुओ येझाओ रविवार को काठमांडू पहुंच रहे हैं.

    चीन के दल की यात्रा को नेपाल के ज़मीनी हालात समझने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

    साल 2018 में पुष्प कमल दहाल प्रचंड के नेतृत्व की सीपीएन-माओवादी और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व की सीपीएन-यूएमल पार्टियों को मिलाकर सीपीन पार्टी का गठन किया गया था.

    काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नेपाल में चीन के दूतावास ने चीनी नेताओं की यात्रा के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है.

  11. कृषि क़ानूनों के विरोध में नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने एनडीए छोड़ा

    नागौर से लोकसभा सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने तीन कृषि केंद्रीय क़ानूनों के विरोध में एनडीए से समर्थन वापस लेने की घोषणा है.

    पत्रकार मोहर सिंह मीना ने बताया कि शनिवार को राजस्थान हरियाणा बोर्डर पर शाहजहांपुर में उन्होंने ये घोषणा की जहां प्रदर्शनकारी किसान पिछले 14 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं.

  12. कोरोना वैक्सीन: भारत में बन रहे टीके में नेपाल ने दिखाई दिलचस्पी

    भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन का परीक्षण अंतिम चरण में पहुंच चुका है, वैक्सीन का उत्पादन भी तेज़ी से हो रहा है.

    भारत सरकार ने कहा है कि टीकाकरण एक महीने में शुरू हो सकता है.

    उधर, नेपाल ने भी अपनी वैक्सीन की जरूरतों को पूरा करने की पहल शुरू कर दी है, और भारत में बन रही वैक्सीन में रुचि दिखाई है.

    भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने बीबीसी को बताया कि वैक्सीन को लेकर उन्होंने भारत में वैक्सीन निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ दिल्ली में चर्चा की.

    पश्चिमी देशों में टीकाकरण की शुरुआत के बाद से नेपाल में चर्चा तेज़ है कि वहां वैक्सीन की आपूर्ति कैसी की जाएगी.

    राजदूत आचार्य ने भारत में एक वैक्सीन निर्माता, सीरम इंस्टीट्यूट के एक वरिष्ठ अधिकारी और भारत के नीति आयोग के प्रमुख अभिताभ कांत के साथ बातचीत की.

    सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है. इस टीके को 70 से 90 प्रतिशत तक प्रभावी बताया गया है.

  13. 'शिवसेना समेत सभी विपक्षी पार्टियों को यूपीए में आना चाहिए'

    शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का नेतृत्व कर रही कांग्रेस कमज़ोर स्थिति में है. लेख में कहा गया है कि शिवसेना समेत विपक्ष की सभी पार्टियों को यूपीए के तहत एकजुट होकर मज़बूत विपक्ष पेश करना चाहिए.

    लेख में कहा गया है कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन को नज़रअंदाज़ कर रही है और इसकी एक बड़ी वजह कमज़ोर विपक्ष है. 'सामना' ने कहा है कि केंद्र सरकार पर आरोप लगाए के बजाए मुख्य विपक्षी पार्टी को अपने अंदरूनी मुद्दों की समीक्षा करनी चाहिए.

    लेख में कहा गया है, "दिल्ली की सरहदों पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन दिल्ली की सत्ता में बैठे लोग उन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर रहे हैं. सरकार की इस उदासीनता की वजह विघटित और कमज़ोर विपक्षी पार्टी है. प्रभावहीन विपक्ष की वजह से लोकतंत्र कमज़ोर हो रहा है."

    मराठी अख़बार सामना के इस लेख में कहा गया है, "राहुल गांधी व्यक्तिगत तौर पर मज़बूत लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन कुछ तो कमी है, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए मौजूदा स्थिति में किसी एनजीओ की तरह काम कर रहा है. यहां तक की यूपीए के घटक दलों ने भी किसानों के प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं लिया है. ये समझ में नहीं आ रहा है कि यूपीए की ये सदस्य पार्टियां आखिर करती क्या हैं."

    "राष्ट्रीय स्तर पर एनसीपी नेता शरद पवार एक स्वतंत्र व्यक्तित्व हैं. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अकेले लड़ाई लड़ रही हैं. देश की विपक्षी पार्टी को इस वक्त उनके साथ खड़ा होना चाहिए. ममता बनर्जी ने सिर्फ पवार से संपर्क किया है और वो बंगाल जा रहे हैं. लेकिन यह कांग्रेस के नेतृत्व में होना चाहिए था."

    "तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, अकाली दल, बहुजन समाज पार्टी, अखिलेश यादव, जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस, तेलंगाना के के चंद्रशेखर राव, ओडीशा के नवीन पटनायक, कर्नाटक के एचडी कुमारास्वामी, ये सब बीजेपी के खिलाफ़ हैं लेकिन ये सब कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का हिस्सा नहीं है. जब तक ये सब यूपीए में शामिल नहीं होंगे, विपक्ष एक मज़बूत विकल्प नहीं दे पाएगा."

    लेख में कहा गया है कि कि आगे हालात और भी खराब ना हों, इसकी ज़िम्मेदारी कांग्रेस पार्टी की है. लेख में ये भी कहा गया है कि बीजेपी के पास नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे मज़बूत नेता हैं जबकि कांग्रेस का नेतृत्व स्पष्ट नहीं है. मोतीलाल वोरा और अहमद पटेल जैसे नेताओं की मौत के बाद कांग्रेस और भी कमज़ोर हुई है.

  14. जम्मू और कश्मीर की सियासी हलचल में बीजेपी और विपक्षी पार्टियां कहां खड़ी हैं?

    लंबे समय के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में एक बार चहलपहल दिख रही है. ज़िला विकास परिषद के चुनावों में काफ़ी मतदान हुआ लेकिन किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला.

    हालांकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. उसे जम्मू में 70 और कश्मीर में तीन सीटें मिलीं. इस चुनाव को लेकर कश्मीर में क्या माहौल है, देखिए बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर की रिपोर्ट.

  15. साल 2020 क्या अब तक का सबसे ख़राब साल है?

    हम में से कई लोगों के लिए यह साल कयामत लाने वाला और उदासीनता से भरा रहा है तो कई के लिए अंतहीन वीडियो कॉल वाला जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहे.

    महामारी से बुरी तरह से प्रभावित इस साल को कुछ "अब तक का सबसे खराब साल" मान रहे हैं लेकिन इतिहास पर अगर नज़र दौड़ाएं और इतिहास के कुछ सबसे बुरे दौर से, जिनके बारे में आपको पता नहीं, उससे 2020 की तुलना करें तो आपको एहसास होगा कि इस साल को कम से कम सबसे बुरा तो नहीं ही कहा जा सकता है. देखिए यह ख़ास रिपोर्ट.

  16. किसान आंदोलन: 35 साल पुराना इतिहास दोहराता हरियाणा का एक गांव

    साल 1985. इंदिरा गांधी की हत्या को एक साल गुज़र चुका था, हत्या के बाद दंगे और सिखों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा के ज़ख्म ताज़ा थे.

    हरियाणा में रोहतक के गाँव खरावड़ के रेलवे स्टेशन पर एक सुबह पंजाब मेल पैसेंजर ट्रेन ख़राब हो गई.

    ट्रेन में बड़ी संख्या में सरदार, महिलाओं और बच्चे बैठे थे. सबको चिंता थी कि सिखों के ख़िलाफ़ ख़राब माहौल के बीच हिंदू बहुल इलाक़े में इतने सरदार क्या सुरक्षित हैं?

    अभी किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली जाने वाले कई किसान इस गाँव में आराम करने के लिए रुकते हैं.

    यहां रहने वाले रिटायर्ड कैप्टन जयवीर सिंह मलिक चाय, पानी, खाना, फल और दवाइयों के साथ उन्हें 35 साल पुराना एक क़िस्सा भी सुनाते है - सरदारों से भरी ट्रेन के ख़राब हो जाने की कहानी.

    बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "जब पंजाब के किसान हमें धन्यवाद देते हैं तो हम उन्हें बदले में पंजाब से जुड़ा वो किस्सा सुनते हैं जो 35 साल पुराना है. हमारा संबंध पंजाबियों से 35 साल पुराना हैं."

  17. कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए भारत में 28-29 दिसंबर को पूर्वाभ्यास

  18. इसराइल क्या फ़लस्तीनियों के लिए कभी एक देश नहीं बनने देगा

  19. ब्रेकिंग न्यूज़, पीएम मोदी बोले- दिल्ली में कुछ लोग मुझे हर दिन लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रहे हैं

    जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सेहत स्कीम की लॉन्चिंग पर पीएम मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पर बिना नाम लिए निशाना साधा है. इसी हफ़्ते राहुल गाँधी ने कृषि क़ानून का विरोध करते हुए कहा था कि भारत में लोकतंत्र अब कल्पनाओं में बचा है.

    नरेंद्र मोदी ने कहा, ''जम्मू कश्मीर ने तो यूटी (केंद्र शासित प्रदेश) बनने के एक साल भीतर तीनों स्तर पर पंचायत का चुनाव करा दिया. दिल्ली में कुछ लोग, सुबह शाम आए दिन मोदी को कोसते रहते हैं, टोकते रहते हैं, अपशब्दों का प्रयोग करते रहते हैं. आए दिन मुझे लोकतंत्र सिखाने के लिए रोज़ नए-नए पाठ बताते रहते हैं. मैं उन लोगों को ज़रा आज आईना दिखाना चाहता हूं.''

    ''जम्मू-कश्मीर यूटी बनने के इतने कम समय में तीन स्तर के पंचायती राज को लागू कर दिया. दूसरी ओर पुडुचेरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पंचायत और नगर निकाय के चुनाव नहीं हो रहे हैं. जो मुझे यहाँ लोकतंत्र के पाठ पढ़ाते हैं उसी की पार्टी वहाँ राज कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में ही चुनाव के लिए आदेश दिया था. लेकिन अब तक वहां चुनाव नहीं हुआ है. 2006 के बाद यहाँ चुनाव नहीं हुआ है. कुछ राजनीतिक दलों की कथनी और करनी में कितना फ़र्क़ है इस बात से भी पता चलता है.''

  20. मध्य प्रदेश की कैबिनेट में 'जबरन धर्मांतरण' विरोधी बिल को मंज़ूरी

    मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने धर्मांतरण के ख़िलाफ़ बिल को मंज़ूरी दे दी है.

    मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने बताया कि शिवराज सरकार की कैबिनेट में ध्वनिमत से ये बिल पास हुआ है और इसके बाद बिल को विधानसभा में पेश किया जाएगा.

    इस बिल का उद्देश्य जबरन धर्मांतरण को रोकना बताया गया है.

    नरोत्तम मिश्र ने ट्वीट किया, "कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन, धमकी, बल, दुष्प्रभाव, विवाह के नाम पर या अन्य कपटपूर्ण तरीक़े से प्रत्यक्ष अथवा अन्यथा उसका धर्म परिवर्तन या धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा. कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन किए जाने का षड़यंत्र नहीं कर सकेगा.“

    उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा कि अपना धर्म छुपाकर (इसे उन्होंने लवजिहाद कहा है), कानून का उल्लंघन करने पर तीन साल से दस साल तक के कारावास और 50 हज़ार रूपए का जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा सामूहिक यानी दो या दो से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन का प्रयास करने पर 5 से 10 साल तक का कारावास और एक लाख रूपए की सज़ा निर्धारित की गई है.

    नरोत्तम मिश्र ने बताया कि इस बिल के विधानसभा में पास हो जाने के बाद 1968 वाला धर्म स्वातंत्र्य कानून ख़त्म हो जाएगा.

    मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा, ''धर्मांतरण के लिए होने वाली शादियों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित #धर्म_स्वातंत्र्य_अधिनियम को कठोर बनाने के साथ कुछ ऐसे प्रावधान किए गए है जो देश के किसी भी राज्य में अब तक नहीं है.''

    मिश्र ने कहा, ''धर्मांतरण के लिए होने वाली शादियों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित #धर्म_स्वातंत्र्य_अधिनियम को कठोर बनाने के साथ कुछ ऐसे प्रावधान किए गए है जो देश के किसी भी राज्य में अब तक नहीं है.''