फ़्रांस में भी मिला कोरोना वायरस का नया वैरिएंट, लंदन से लौटा था संक्रमित व्यक्ति
फ़्रांस में भी कोरोना वायरस का नया और ज़्यादा ख़तरनाक वैरिएंट मिला है. ये वायरस का वही वैरिएंट है जो कुछ दिनों पहले ब्रिटेन में मिला था.
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साल 2020: वो सितारे जिन्होंने इस बरस दुनिया को अलविदा कहा
साल 2020 ख़त्म होने की कग़ार में है. विश्व में ये साल ऐतिहासिक घटनाओं के लिए जाना जाएगा.
एक वायरस के कारण शुरू हुई कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया में लाखों लोगों की मौत हुई है.
वहीं इस साल हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के कई बड़े दिग्गज सितारे दुनिया को अलविदा कह अपनी अंतिम यात्रा पर निकल पड़े.
कृषि क़ानूनों के विरोध के नाम पर कुछ पार्टियाँ राजनीतिक एजेंडा बढ़ा रही हैं - मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान आंदोलन पर तंज कसते हुए कहा है कि नए कृषि क़ानूनों के विरोध के नाम पर कुछ पार्टियाँ अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं.
मोदी ने किसान योजनाओं का लाभ उठाने वाले अलग-अलग राज्यों के किसानों से बात करते हुए ये टिप्पणी की है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल सरकार की तरफ से कई कोशिशों के बावजूद भी किसी न किसी राजनीतिक कारण से ये चर्चा नहीं होने दे रहे हैं. उन्होंने किसानों से किसी के बहकावे में ना आने की अपील की.
उन्होंने कहा," कुछ राजनीतिक दल जिन्हें देश की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से नकार दिया है, वो आज कुछ किसानों को गुमराह करके जो कुछ भी कर रहे हैं, उन सभी को बार-बार नम्रता पूर्वक सरकार की तरफ से अनेक प्रयासों के बावजूद भी किसी न किसी राजनीतिक कारण से ये चर्चा नहीं होने दे रहे हैं."
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार उनलोगों से भी बात करने के लिए तैयार है जो उनके विरोधी हैं, मगर बातचीत मुद्दों, तथ्यों और तर्कों पर होनी चाहिए.
इस मौक़े पर प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को भी निशाने पर लिया.
उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना का फायदा पश्चिम बंगाल के किसानों को नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा, “मुझे आज इस बात का अफसोस है कि मेरे पश्चिम बंगाल के 70 लाख से अधिक किसान भाई-बहनों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है. बंगाल के 23 लाख से अधिक किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं. लेकिन राज्य सरकार ने वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को इतने लंबे समय से रोक रखा है.”
तंज करते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग 30-30 साल तक बंगाल में राज करते थे, एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा को लेकर उन्होंने बंगाल को कहां से कहां लाकर खड़ा कर दिया है, ये सारा देश जानता है. आप ममता जी के 15 साल पुराने भाषण सुनेंगे तो पता चलेगा कि इस विचारधारा ने बंगाल को कितना बर्बाद कर दिया था.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "स्वार्थ की राजनीति करने वालों को जनता बहुत बारीकी से देख रही है.
जो दल पश्चिम बंगाल में किसानों के अहित पर कुछ नहीं बोलते वो दल यहां किसान के नाम पर दिल्ली के नागरिकों को परेशान करने में लगे हुए हैं, देश की अर्थनीति को बर्बाद करने में लगे हुए हैं."
उन्होंने कहा कि नए कृषि सुधार के ज़रिए हमने किसानों को बेहतर विकल्प दिए
हैं और इन क़ानूनों के बाद किसान जहां चाहें जिसे चाहें अपनी उपज बेच
सकते हैं और किसान को जहां सही दाम मिले वो वहां पर उपज बेच सकता है.
पीएम मोदी ने सवाल किया, "देश के किसान को इतने अधिकार मिल रहे हैं तो इसमें गलत क्या
है? अगर किसानों को अपनी उपज बेचने का विकल्प ऑनलाइन माध्यम से
पूरे साल और कहीं भी मिल रहा है तो इसमें गलत क्या है?"
प्रधानमंत्री
मोदी ने कहा कि सरकार किसान के साथ हर कदम पर खड़ी है और सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि एक मज़बूत क़ानून
किसानों के पक्ष में खड़ा रहे.
उन्होंने साथ ही कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग के नाम पर भी देश में भ्रम फैलाया जा रहा है.
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कृषि क़ानून को साल दो साल प्रयोग के तौर पर देखिए: राजनाथ सिंह
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दिल्ली के द्वारका में एक रैली को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंदोलनकारी किसानों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया. राजनाथ सिंह ने कहा कि सभी तरह की समस्याओं का निदान संवाद के ज़रिए होता है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि किसानों के साथ बातचीत जारी रहे.
राजनाथ सिंह ने कहा, ''कृषि क़ानून लागू होने दीजिए और अगर यह किसानों के लिए लाभकारी नहीं होता है तो हम ज़रूरी संशोधन के लिए तैयार हैं. हमारी सरकार ऐसा कोई भी क़दम नहीं उठाएगी, जिससे किसानों के हित प्रभावित होंगे. आज़ाद भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने जितने क़दम उठाए हैं, उतना किसी ने नहीं किया. जो किसान धरने पर हैं उनके प्रति एक किसान परिवार में जन्म लेने के नाते अथाह श्रद्धा है.''
राजनाथ सिंह ने कहा, ''साल दो साल इसे प्रयोग तो होने दीजिए. अगर एक बार आपको लगे कि यह किसानों के लिए लाभकारी नहीं है तो हम सारे संशोधन करने के लिए तैयार हैं.''
राजनाथ सिंह ने कहा कि कृषि क़ानून के बारे में ग़लतफ़हमी फैलाई जा रही है. रक्षा मंत्री ने कहा, ''मुझे अच्छी तरह पता है कि कौन से प्रावधान किसानों के हक़ में हैं और कौन से प्रावधान किसानों के विरोध में है. मैंने पूरा क़ानून पढ़ा है और इसमें कुछ भी किसान विरोधी नहीं है.''
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पीएम मोदी किसान लाभार्थियों से कर रहे हैं बात
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त जारी की, प्रधानमंत्री ने 9 करोड़ से अधिक किसान लाभार्थियों के खातों में 18,000 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की.
इस दौरान पीएम मोदी ने किसान योजनाओं का लाभ उठाने वाले अलग-अलग राज्यों के किसानों से बात भी की.
वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यक्रम में कहा कि पीएम किसान
सम्मान निधि बहुत ही महत्वकांशी योजना है और इससे ग़रीब किसान को बहुत लाभ हुआ है.
कृषि मंत्री ने
इस दौरान ये भी कहा, “पंजाब सहित थोड़े से कुछ किसान भाई-बहनों के मन में नए कानूनों को लेकर भ्रम पैदा हुआ है. मैं उनको आग्रह करता हूं कि वो इस आंदोलन को त्याग कर सरकार के वार्ता के निमंत्रण पर आएं. मुझे आशा है कि किसान नए कानून के मर्म और महत्व को समझेंगे और हम समाधान की ओर अग्रसर होंगे.”
भारत: बीते 24 घंटे में कोरोना के 23,068 नए मामले, 336 मौतें
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भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 23,068 नए मामले सामने आए हैं और 336 लोगों
की मौत हुई है.
इसके बाद कुल पॉज़िटिव मामलों की संख्या 1,01,46,846 पहुंच गई है और कुल मौतों
की संख्या 1,47,092 हो गई है.
देश में सक्रिय मामलों की संख्या अब 2,81,919 है. वहीं 24,661 डिस्चार्ज के बाद कुल डिस्चार्ज
की संख्या 97,17,834 हो गई है.
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किसान आंदोलनः अमेरिका के सात सांसदों ने विदेश मंत्री पॉम्पियो से कहा, भारत से बात करें
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अमेरिका के सात वरिष्ठ सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो को एक चिट्ठी लिख उनसे भारत में किसानों के आंदोलन के मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात करने का आग्रह किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इनमें भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं.
23 दिसंबर को भेजे गए इस पत्र में सांसदों ने लिखा है कि अमेरिका में बसे कई भारतीय इस मुद्दे से सीधे प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि उनके परिवार के लोग पंजाब में रहते हैं और वहाँ उनकी पैतृक संपत्तियाँ भी हैं.
उन्होंने लिखा,"हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर विदेशों में राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को मज़बूत करें".
सांसदों ने ये भी कहा कि ये मुद्दा वैसे ख़ास तौर पर अमेरिका में बसे ऐेसे सिख लोगों से जुड़ा है जिनके संबंध पंजाब से हैं, मगर इसका असर वहाँ बसे ऐसे भारतीयों पर भी पड़ेगा जिनके संबंध दूसरे राज्यों से हैं.
उन्होंने साथ ही लिखा है कि अमेरिका इस मुद्दे पर भारत को परामर्श दे सकता है क्योंकि उसे राजनीतिक विरोधों के बारे में अनुभव है.
भारत ने अभी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है मगर भारत सरकार इससे पहले किसानों के बारे में विदेशी नेताओं के बयानों को "ग़लत-जानकारी से भरा" और "अवांछित" बताती रही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस महीने के शुरू में कहा था, "हमने भारत के किसानों के बारे में कई ग़लत-जानकारियों वाले बयान देखे हैं. ऐसे बयान अवांछित हैं, ख़ास तौर पर जब वो एक लोकतांत्रिक देश के अंदरूनी मामलों में दखले देते हों."
इससे पहले भी इस महीने के आरंभ में अमेरिका के तीन सांसदों ने अमेरिका में भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के प्रति समर्थन जताया था.
गत मंगलवार को भी एक अमेरिकी सांसद डेविड थ्रोन ने भारत सरकार से प्रदर्शनकारी किसानों को सुरक्षा देने का आग्रह किया था और सुप्रीम कोर्ट के मामले में मध्यस्थता करने की पेशकश की सराहना की थी.
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कोविड: मेक्सिको, चिली और कोस्टा रिका में टीकाकरण शुरू
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मेक्सिको की एक नर्स लैटिन अमेरिका में कोरोना का टीका लगवाने वाली पहली शख़्स
बन गई हैं. मेक्सिको ने गुरुवार को अपने टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी.
मेक्सिको को शुरुआत में यूएस-जर्मन फाइज़र-बायोएनटेक वैक्सीन की 3,000 खुराक मिली थीं.
यहां अमेरिका, ब्राज़ील और भारत के बाद माहमारी की वजह से दुनिया में सबसे ज़्यादा
मौतें हुई हैं.
इसके कुछ वक़्त बाद गुरुवार को ही, चिली और कोस्टा रिका ने भी अपने यहां फाइज़र-बायोएनटेक
वैक्सीन लगाना शुरू कर दिया.
अर्जेंटीना भी अगले कुछ दिनों में टीकाकरण शुरू करेगा, लेकिन उसने शुरुआत में टीकाकरण
के लिए रूस में बनी स्पुत्निक वी वैक्सीन को चुना है. गुरुवार सुबह राजधानी ब्यूनस
आयर्स में वैक्सीन की तीन लाख खुराक डिलिवर हुई.
वहीं क्षेत्र में सबसे ज़्यादा मौतें झेलने वाले ब्राज़ील की फरवरी के मध्य तक
टीकाकरण शुरू करने की कोई योजना नहीं है. जबकि वहां मामलों की संख्या में लगातार
वृद्धि दर्ज की गई है.
ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ाएर बोलसोनारो ने कहा कि वो टीका लगवाने के बारे में
नहीं सोच रहे हैं. उनका मानना है कि उनके अंदर कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ रोग प्रतिरोधक
शक्ति विकसित हो गई है. वो इस साल की शुरुआत में कोरोना पॉज़िटिव हुए थे.
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मोदी सरकार ने फिर किसानों को भेजा बातचीत का न्योता
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किसान संगठनों की ओर से बातचीत की पेशकश ठुकराए जाने के बाद केंद्र सरकार ने
गुरुवार को एक बार फिर वार्ता के लिए न्योता भेजा और उनकी ओर से उठाए गए सभी मसलों का तार्किक समाधान खोजने की अपनी
प्रतिबद्धता को दोहराया.
संगठनों के नाम लिखी तीन पन्नों की चिट्ठी में कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव
विवेक अग्रवाल ने कहा कि सरकार हमेशा खुले दिमाग और ईमानदार इरादे से मसलों पर
चर्चा करती रही है.
विवेक अग्रवाल ने किसानों से आगे की बातचीत के लिए उनकी सुविधा
से एक तारीख़ और वक़्त चुनने की गुज़ारिश की. साथ ही उन्होंने उन मसलों की जानकारी
मांगी, जिनपर चर्चा की जानी है.
इससे एक दिन पहले ही संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार की बातचीत की पेशकश को
ठुकरा दिया था. ये नई चिट्ठी एसकेएम के जवाब के संदर्भ में ही लिखी गई है.
हालांकि नई चिट्ठी में लिखा है कि कृषि सुधार से जुड़े तीनों क़ानूनों का
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कोई संबंध नहीं है और ये एमएसपी पर किसी तरह से
असर नहीं डालेंगे; इसलिए इस मोर्चे पर कोई
नई मांग रखना उचित नहीं होगा. चिट्ठी में लिखा है कि सरकार अब भी संगठनों की ओर से
उठाए गए सभी मसलों पर चर्चा के लिए तैयार है.
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संगठनों ने बुधवार को अपने जवाब में पहले दिए गए लिखित प्रस्ताव को ये कहते हुए ठुकरा दिया था कि इसमें आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधनों का ज़िक्र नहीं है.
चिट्ठी में स्पष्ट किया गया कि लिखित प्रस्ताव उन मुद्दों पर आधारित था जिनकी पहचान तीन दिसंबर की बैठक में की गई थी. चिट्ठी में ये भी लिखा है कि सरकार उन मसलों पर भी बातचीत के लिए तैयार है जिनकी पहचान 3 दिसंबर की बैठक में नहीं की गई थी.
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के महासचिव अविक शाह ने कहा कि सरकार को किसानों के "असली मुद्दों" पर बात करनी चाहिए.
समन्वय समिति के महासचिव ने कहा, “सरकार को सिर्फ ख़ुद से बात करना बंद करनी चाहिए और आंदोलनकारी किसानों से बात करनी चाहिए. उसे उन मसलों पर बात करनी होगी जिन्हें आंदोलनकारी किसानों ने सामने रखा है. सरकार को कदम उठाना होगा. बयानबाज़ी का वक़्त गुज़र चुका है. होशियार और चालाक बनने का वक़्त निकल गया है. समस्याओं को शब्दों के ज़रिए सुलझाने का वक़्त निकल गया है. एक असली समस्या है और हमें इसका असली समाधान चाहिए.”
उन्होंने कहा, “किसान भी शांति चाहते हैं, लेकिन सरकार को एक चिट्ठी भेजकर उन शर्तों के बारे में बताना चाहिए जिनके तहत तीनों क़ानूनों को रद्द किया जाएगा. अगर आप सार्वजनिक रूप से कहेंगे कि रद्द करने का कोई सवाल नहीं है, ये क़ानून अच्छे हैं और फिर आप चिट्ठी लिखते हैं कि आप बातचीत करना चाहते हैं तो ऐसेकाम नहीं चलेगा.”
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दिल्ली में 51 लाख लोग कोविड वैक्सीन लगाने के लिए चिह्नित हुए
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद
केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली में 51 लाख लोगों को वैक्सीन
देने के लिए चिह्नित किया गया है.
केजरीवाल ने कहा कि केंद्र
सरकार की प्राथमिकता के अनुसार इन लोगों को चिह्नित किया गया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री
ने ये भी कहा कि वैक्सीन की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है लेकिन इसके स्टोरेज और संभावित
साइड इफेक्ट के इलाज को लेकर भी तैयारी की जा चुकी है.
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केजरीवाल ने कहा, ''केंद्र सरकार ने पहले चरण में तीन तरह के लोगों के लिए वैक्सीन देने की प्राथमिकता रखी है. पहले हेल्थकेयर वर्कर्स (तीन लाख के क़रीब) फिर फ़्रंटलाइन वर्कर्स (6 लाख लोग) इसके बाद 50 साल से ऊपर की उम्र वालों (48 लाख लोग) को वैक्सीन दी जाएगी. एक व्यक्ति को दो डोज़ वैक्सीन लगेगी. इस हिसाब से एक करोड़ दो लाख वैक्सीन की ज़रूरत पहले चरण में पड़ेगी. दिल्ली में 74 लाख वैक्सीन डोज़ स्टोर करने की क्षमता है और अगले कुछ दिनों में यह क्षमता एक करोड़ 15 लाख हो जाएगी.''
केजरीवाल ने कहा, ''जिन्हें चिन्हित किया गया है उनका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. जिनका रजिस्ट्रेशन हो रहा है उन्हें एसएमएस कर दिया जाएगा कि किस तारीख़ को आना है. सारी तैयारी पूरी कर ली गई है. जिनमें वैक्सीन लगाने के बाद साइड इफेक्ट आएगा उनके इलाज की भी व्यवस्था कर ली गई है.''
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