फ़्रांस में भी मिला कोरोना वायरस का नया वैरिएंट, लंदन से लौटा था संक्रमित व्यक्ति
फ़्रांस में भी कोरोना वायरस का नया और ज़्यादा ख़तरनाक वैरिएंट मिला है. ये वायरस का वही वैरिएंट है जो कुछ दिनों पहले ब्रिटेन में मिला था.
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ब्रेकिंग न्यूज़, फ़्रांस में भी मिला कोरोना वायरस का नया वैरिएंट
अभी-अभी मिली जानकारी के अनुसार फ़्रांस में भी कोरोना वायरस का नया और ज़्यादा ख़तरनाक वैरिएंट मिला है. ये वायरस का वही वैरिएंट है जो कुछ दिनों पहले ब्रिटेन में मिला था.
फ़्रांसीसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि नए वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति टुअर्स शहर में रहता है और वो 19 दिसंबर को लंदन से लौटा था. वायरस के नए वैरिएंट को ज़्यादा तेज़ी से फैलने वाला बताया जा रहा है.
मंत्रालय ने कहा कि शख़्स एसिंप्टोमैटिक है और उसने ख़ुद को आइसोलेट कर लिया है.
ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया वैरिएंट मिलने के बाद कई देशों ने वहां की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था.
ब्रिटेन के अलावा दक्षिण अफ़्रीका में भी कोरोना वायरस के नए वैरिएंट की पुष्टि हुई है जिसे ज़्यादा ख़तरनाक और ज़्यादा संक्रामक बताया जा रहा है.
कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स ने वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

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इसराइल के साथ बेहतर संबंध चाहता है तुर्की पर फलस्तीनी नीति अहम: अर्दोआन

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन ने शुक्रवार को कहा कि तुर्की इसराइल के साथ बेहतर संबंध बनाना चाहता है लेकिन फ़लस्तीनियों को लेकर इसराइल की नीति“अस्वीकार्य” है.
किसी समय पर सहयोगी रहे तुर्की और इसराइल के संबंधों में हाल के सालों में कड़वाहट आई है. तुर्की फलस्तीन को लेकर इसराइल के रवैये की लगातार विरोध करता रहा है.
तुर्की ने हाल ही में अमेरिका की मध्यस्थता से इसराइल और चार मुस्लिम देशों के बीच हुए शांति समझौतों की भी आलोचना की थी.
राष्ट्रपति अर्दोआन ने इस्तांबुल में शुक्रवार की नमाज़ के बाद मीडिया से कहा, “फ़लस्तीन नीति हमारी सीमा रेखा है. इसराइल की फ़लस्तीन को लेकर नीतियां स्वीकार करना असंभव है. उनकी बेरहम कार्रवाई अस्वीकार्य है.”
उन्होंने कहा, “अगर ऊपरी स्तर पर कोई मसले नहीं होते तो हमारे संबंध बहुत अलग हो सकते थे. दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करना जारी रखा. हम अपने संबंधों को बेहतर स्थिति में लाना पसंद करते हैं.”
वहीं, इसराइल के विदेश मंत्री ने अर्दोआन के बयान पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.
2018 में ग़ज़ा में फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ इसराइल की हिंसक कार्रवाइयों के विरोध में तुर्की ने अपना राजदूत तेल अवीव से वापस बुला लिया था.
हालांकि, कुछ समय पहले तुर्की ने इसराइल के लिए अपना राजदूत नियुक्त किया है.
इस साल अगस्त में, इसराइल ने तुर्की पर इस्तांबुल में हमास के एक दर्जन सदस्यों को पासपोर्ट देने का आरोप लगाया. साथ ही इसे "एक बहुत ही निराशाजनक कदम" बताया था.
नेपाल संकट: संसद भंग करने पर सुप्रीम कोर्ट ने ओली सरकार से जवाब मांगा

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नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को अचानक से संसद भंग करने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सरकार से लिखित में इस पर स्पष्टीकरण मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट के पांच संसदीय संविधानिक पीठ ने सरकार के ख़िलाफ़ इस फैसले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये नोटिस जारी किया है.
यह पीठ नेपाल के चीफ़ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर राणा की अगुवाई में मामले पर सुनवाई कर रही है.
ओली सरकार ने हाल ही में 275 सदस्यीय संसद को भंग करने का एलान किया है.
कोर्ट ने इस संबंध में सरकार से संसद भंग करने को लेकर जो अनुशंसा की गई है, उसकी असल कॉपी मांगी है.
इसके अलावा राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने सरकार की सिफारिशों को 10 दिन के भीतर मान लिया, इसे लेकर भी फैसले की कॉपी कोर्ट ने मांगी है.
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के सिलसिले में नेपाल बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से एमिकस क्यूरी (किसी मामले में कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील) की मांग की थी.
मोदी के पीएम रहते कोई कॉरपोरेट किसानों की ज़मीन नहीं छीन सकता: अमित शाह

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गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के देश का प्रधानमंत्री रहते कोई कॉरपोरेट किसानों से ज़मीन नहीं छीन सकता.
उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का प्रावधान ज़ारी रहेगा और मंडियां बंद नहीं होंगी.
अमित शाह राजधानी दिल्ली के किशनगढ़ गांव में एक सभा को संबोधित कर रहे थे.
इस दौरान उन्होंने कहा कि किसान संगठनों को लगता है कि अगर नए कृषि क़ानूनों का कोई भी प्रावधान उनके हितों के ख़िलाफ़ है तो मोदी सरकार खुले दिमाग से उस पर चर्चा और विचार करने के लिए तैयार है.
उन्होंने किसानों को विश्वास दिलाया कि कृषि क़ानून उनके हित में हैं और उन्हें कोई नुक़सान नहीं पहुंचाएंगे.
अमित शाह ने कहा, “ना ही एमएसपी ख़त्म होगी और ना ही कोई आपकी ज़मीन ले पाएगा. मैं किसानों को कहना चाहता हूं कि जब तक पीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं तो कोई कॉरपोरेट किसानों की ज़मीन नहीं छीन सकता, ये बीजेपी का वादा है.”

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उन्होंने कांग्रेस सहित विपक्ष पर एमएसपी और कृषि क़ानूनों के अन्य प्रावधानों को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया.
अमित शाह ने कहा, “मैं पूरे देश के किसानों को बताना चाहता हूं कि विपक्ष के नेताओं को कोई समस्या नहीं है और वो एमएसपी ख़त्म होने को लेकर झूठ फैला रहे हैं.”
गृह मंत्री ने कृषि क्षेत्र में सरकार के उठाए विभिन्न कदमों के बारे में बताकर ये दिखाने की कोशिश की कि विपक्ष के मुक़ाबले मौजूदा सरकार किसानों के कल्याण को प्राथमिकता में रखती है.
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां ‘राहुल बाबा’ किसानों की कर्ज़ माफ़ी की बात करते हैं वहीं मोदी सरकार ने किसान सम्मान निधि योजना शुरू की है.
कृषि क़ानूनों के विरोध में दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर बड़ी संख्या में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि कृषि क़ानूनों को रद्द किया जाए. हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि क़ानूनों के प्रावधानों पर चर्चा के लिए वो तैयार है.
आज का कार्टून: संता जी आप रहने दीजिए
किसान विरोध प्रदर्शन को लेकर सात अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी

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भारत में कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सात अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को पत्र लिखा है. इनमें भारतीय अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं.
अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री से अपील की है कि वो किसानों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भारत सरकार के सामने उठाएं.
भारत ने विदेशी नेताओं और राजनेताओं द्वारा किसानों के विरोध पर की गई टिप्पणियों को ''अनुचित" और ''अधूरी व गलत सूचना पर आधारित'' बताया है.
इसके साथ ही कहा है कि यह मामला एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से जुड़ा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस महीने की शुरुआत में कहा था, "हमने कुछ अधूरी सूचनाओं पर आधारित टिप्पणियों को देखा है... जो भारत में किसानों से संबंधित हैं. ऐसी टिप्पणियां अनुचित हैं, खासकर कि जब वो एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से जुड़ी हों."
सांसदों के 23 दिसंबर को लिखे पत्र में कहा गया है कि यह मुद्दा (किसान विरोध प्रधर्शन) पंजाब से जुड़े सिख अमेरिकियों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है. इसके साथ ही यह अन्य भारतीय राज्यों से जुड़े भारतीय अमेरिकियों को भी प्रभावित करता है.

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सांसदों के पत्र में लिखा है, "कई भारतीय अमेरिकी इससे सीधे प्रभावित होते हैं क्योंकि पंजाब में उनका परिवार और पैतृक ज़मीन है और वो भारत में अपने परिवार को लेकर चिंतित हैं. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, हम आपसे आग्रह करते हैं कि विदेश में राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क करें."
अपने पत्र में सांसदों ने कहा है कि अमेरिका राजनीतिक विरोध प्रदर्शन से परिचित रहा है और सामाजिक अशांति के इस समय के दौरान भारत को सलाह दे सकता है.
सांसदो ने ये भी कहा है, “सांसदों के तौर पर हम मौजूदा क़ानून के अनुपालन में, राष्ट्र के लिए नीति निर्धारण के भारत सरकार के अधिकार का सम्मान करते हैं. हम भारत और विदेशों में उन लोगों के अधिकारों को भी स्वीकार करते हैं जो कृषि कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. कई भारतीय किसान इन क़ानूनों को अपनी आर्थिक सुरक्षा पर ख़तरे के तौर पर देखते हैं.”
नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में किसान दिल्ली से जुड़ी सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि तीन क़ानूनों को रद्द किया जाए.
केंद्र सरकार और किसानों के बीच कई स्तर की बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई है.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर, 25 दिसंबर 2020, सुनिए संदीप सोनी के साथ.
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लेकिन इससे आसपास रहने वाले लोगों को क्या दिक्कतें पेश आ रही हैं?
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ईसा मसीह कैसे दिखते थे? जानिए उनकी कौन सी तस्वीर है असली?
वीडियो कैप्शन, ईसा मसीह कैसे दिखते थे? जानिए उनकी कौन सी तस्वीर है असली? हममें से हर कोई जानता है कि जीसस या यीशु कैसे दिखते थे.
पश्चिमी कला में सबसे ज़्यादा बनाई गई तस्वीरों में उनकी तस्वीर का शुमार है. हर जगह उन्हें लंबे बाल और दाढ़ी के साथ दिखाया गया है.
वह लंबी बांहों वाला चोगा पहने हुए हैं (अक्सर यह चोगा सफ़ेद रंग का दिखाया गया है). इस पर एक चादर (अक्सर नीले रंग की) होती है.
यीशु का चेहरा इतना जाना-पहचाना है कि आप इसे पैन केक से लेकर टोस्ट के टुकड़ों में भी पहचान सकते हैं. लेकिन जैसा इनमें दिखता है क्या यीशु वैसे ही दिखते थे?
अमेरिका और यूरोप में अनोखे पत्थर के खंभे दिखाई दिए
ब्रिटेन में तीन सिख गिरफ़्तार, भारत में थे वॉन्टेड

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भारत में हुई एक हत्या की साजिश के संदेह में ब्रिटेन में तीन ब्रिटिश सिखों को गिरफ़्तार किया गया है.
ब्रिटेन पुलिस ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हत्या का ये मामला साल 2009 का है.
ये गिरफ़्तारियां सोमवार सुबह तब हुईं जब वेस्ट मिडलैंड पुलिस ने प्रत्यर्पण वारंट के आधार पर छापेमारी की.
तीनों अभियुक्तों को लंदन में वेस्टमिनिस्टर मजिस्ट्रेट से कड़ी शर्तों के तहत जमानत मिल गई है.
वेस्ट मिडलैंड पुलिस ने एक बयान जारी कर बताया, “वेस्ट मिडलैंड पुलिस ने सोमवार (21 दिसंबर) को गिरफ़्तार किया है.”
पुलिस ने बताया, “तीनों में से 37 और 40 साल के दो अभियुक्तों को कोवेंट्री शहर से गिरफ़्तार किया गया है और 38 साल के एक अभियुक्त को वॉल्वरहैम्प्टन शहर से पकड़ा गया है. उन्हें भारत में 2009 में हुई एक हत्या की साजिश के संदेह में पकड़ा गया है.”
अब इन तीनों के भारत में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. ब्रिटेन में कुछ अलगाववादी सिख समूहों ने दावा किया है कि गृह सचिव प्रीति पटेल ने इस तरह की कार्यवाही के लिए एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं.
सिख प्रेस एसोसिएशन ने गिरफ़्तार लोगों की ओर से एक बयान जारी करते हुए दावा किया है कि उन्हें 2009 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ सदस्य रुलदा सिंह की हत्या के सिलसिले में पकड़ा गया है, जिन्हें पटियाला में गोली मार दी गई थी और एक हफ़्ते बाद उनकी मौत हो गई थी.
उन्होंने आरोप लगाया कि ये गिरफ़्तारियां इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन के विदेश सचिव डॉमिनिक रैब की भारत यात्रा से जुड़ी हैं.
सिख फेडरेशन यूके के चेयरमैन भाई अमरीक सिंह ने दावा किया, "अगर तीनों को प्रत्यर्पित किया जाता है तो उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा और निष्पक्ष सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया जाएगा."
जयपुर-दिल्ली हाइवे पर दोनों लेन पर बैठे प्रदर्शनकारी किसान

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जयपुर-दिल्ली हाइवे पर 13 दिन से बैठे किसानों ने जब दिल्ली कूच की कोशिश की तो हरियाणा पुलिस ने दिल्ली से जयपुर आने वाली हाइवे लेन को भी बैरिकेडिंग कर बंद दिया.
पहले एक जयपुर-दिल्ली हाइवे पर एक लेन खुली हुई थी और वाहनों की आवाजाही जारी थी.
हरियाणा पुलिस ने बैरिकेड लगाकर दिल्ली-जयपुर हाइवे भी बन्द कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं.
दिल्ली जयपुर हाइवे पर शाहजहांपुर बॉर्डर के दोनों हाइवे लेन पर किसान बैठ गए हैं. पहले दिल्ली से जयपुर आने वाली लेन चालू थी. पुलिस प्रशासन जाम को खुलवाने की कड़ी मशक्कत कर रहा है.

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इस दौरान किसान हाइवे पर बैठ कर विरोध कर रहे हैं, किसानों के जाम के बाद भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है.
हजारों की संख्या में किसान हाइवे की दोनों लेन पर मौजूद हैं.
इधर, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने शनिवार (26 दिसंबर) को 2 लाख लोगों के साथ शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंचने का एलान किया है.
एनडीए के घटक दल और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल ने हाल ही में संसद की तीन समितियों से इस्तीफा भी दिया है. वह एनडीए घटक दल बने रहने या समर्थन वापस लेने पर भी शाहजहांपुर पहुंच कर फैसला करेंगे.
बांग्लादेश का दावा, भारत में कोई अवैध रूप से दाखिल नहीं हो रहा है

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बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने शुक्रवार को दावा किया कि बांग्लादेश से कोई अवैध रूप से भारत में दाखिल नहीं हो रहा है.
हालांकि, बीजीबी ने सीमा पार बढ़ती तस्करी को लेकर चिंताएं ज़ाहिर की.
सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक राकेश अस्थाना के साथ बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम ने एक संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए पिछले तीन सालों में कम से कम 86 बांग्लादेशी नागरिक भारत में मारे गए हैं.
हालांकि, अस्थाना ने कहा कि बीएसएफ ने इस साल बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के लिए 3,204 लोगों को गिरफ्तार किया है और इनमें से जिन 60 की राष्ट्रीयता की पहचान हो पाई उन्हें बीजीबी को सौंप दिया गया था.
बीएसएफ और बीजीबी के बीच चल रही पांच दिवसीय 51वीं डीजी-स्तरीय वार्ता के दौरान सीमा संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. ये वार्ता 22 दिसंबर को शुरू हुई.
इस दौरान दोनों सेनाओं ने एक संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किए और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए समन्वित रात्रि गश्त बढ़ाने का निर्णय लिया.
इस दौरान मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम ने कहा, “बांग्लादेश से भारत में कोई अवैध रूप से दाखिल नहीं हो रहा है. बांग्लादेश का जीडीपी तेज़ी से बढ़ रहा है. यहां के नागरिकों के पास नौकरी या किसी अन्य कारण से भारत आने का कोई कारण नहीं है. लोग इलाज़ के लिए वैध दस्तावेजों के साथ भारत आते हैं.”
बांग्लादेश सीमा पर रहने वाले कई परिवारों के रिश्तेदार सीमा के दूसरी तरफ़ रहते हैं. ये लोग त्योहारों के दौरान वैध दस्तावेजों के साथ अपने रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं.
बीजीबी महानिदेशक ने इन रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया है कि कुछ लोग असम से इसलिए बांग्लादेश जा रहे हैं क्योंकि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में उनका नाम नहीं आया है.
पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों और पश्चिम बंगाल में अवैध अप्रवासन एक राजनीतिक मुद्दा रहा है. हर चुनाव में अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के वादे किए जाते हैं.
दोनों देशों के अधिकारियों ने रोहिंग्याओं के अवैध प्रवेश को लेकर चिंताएं जाहिर कीं और कहा कि बीएसएफ और बीजीबी इस पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं.
साथ ही दोनों ने माना कि सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियां जैसे तस्करी में बढ़ोतरी हुई है.
रजनीकांत ब्लड प्रेशर की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए

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मशहूर अभिनेता रजनीकांत को हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अस्पताल ने अपने बयान में बताया है कि भर्ती के वक्त उनका रक्तचाप तेज़ी से बदल रहा था.
वो पिछले 10 दिनों से हैदराबाद में फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में रुके हुए हैं. उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ लोगों के कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद अपने आप को आइसोलेशन में रखा हुआ था. हालांकि उनकी कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई है.
अस्पताल ने बताया, "रजनीकांत को सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालांकि उनमें कोविड-19 के कोई लक्षण नहीं थे. उनका रक्त चाप गंभीर रूप से अनियमित था जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कर नज़र रखने की जरूरत थी."
अस्पताल के बयान के मुताबिक अनियमित रक्त चाप और थकावट के अलावा उनमें और कोई लक्षण नहीं थे.
रजनीकांत अपनी फिल्म ‘अन्नाथे’ की शूटिंग के सिलसिले में हैदराबाद गए हुए हैं. लेकिन क्रू के कुछ सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव होने के कारण इसकी शूटिंग रोक दी गई है.
क्या भारत के किसान ग़रीब हो रहे हैं?

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किसानों के लगातार जारी आंदोलन के बीच भारत सरकार इस बात पर ज़ोर दे रही हैं कि बदलाव किसानों की ज़िंदगी को बेहतर बनाएंगे.
साल 2016 में प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी बीजेपी ने वादा किया था कि 2022 तक वो किसानों की आय को दोगुनी कर देंगे.
लेकिन क्या इस बात का कोई सबूत है कि गांव में रहने वालों कि ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव आए हैं?
विवेचना: बेनज़ीर भुट्टो की ज़िन्दगी के आख़िरी 18 घंटे

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13साल पहले 27 दिसंबर 2007 को बेनज़ीर भुट्टो की रावलपिंडी में उस समय हत्या कर दी गई थी जब वह एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं.
उस दिन क्या क्या हुआ था बता रहे हैं रेहान फ़ज़ल विवेचना में.
