अमेरिका ने बड़े साइबर हमले के 'संगीन' ख़तरे की चेतावनी दी

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि हैकिंग अभियान से सरकार, संवेदनशील इंफ़्रास्ट्रक्चर और निजी सेक्टर को 'संगीन ख़तरा' है.

लाइव कवरेज

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, कृषि क़ानूनों को अस्थाई तौर पर अमल में न लाने पर विचार करे केंद्र सरकार- सुप्रीम कोर्ट

    किसान आंदोलन

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    किसान आंदोलन से जुड़ी याचिका की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मामले की सुनवाई पूरी न होने तक वो कृषि क़ानूनों को अस्थाई तौर पर अमल में न लाने पर विचार करे.

    बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहन्ती के मुताबिक़ चीफ़ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल कोर्ट में किसानों का पक्ष रखने के लिए कई भी मौजूद नहीं है इसलिए इस मामले में कोई आदेश नहीं पास किया जा सकता. इस मामले की सुनवाई आगे कोर्ट की वेकेशन बेंच करेगी.

    चीफ़ जस्टिस ने केंद्र सरकार से कहा कि वो विवादित कृषि क़ानूनों को अस्थाई तौर पर अमल में न लाने पर विचार करें. इसके उत्तर में केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता.

    ऐसे में चीफ़ जस्टिस ने कहा, “पहले से कुछ भी न कहें और जो सलाह है उस पर ग़ौर करें. इस बीच किसानों के संगठनों को भी नोटिस जारी किया जाए.”

    मामले की सुनवाई अब अगले सप्ताह सर्दी की छुट्टियों के दौरान होगी. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता चाहें तो कोर्ट की वेकेशन बैंच के पास जा सकते हैं.

    गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन करना किसानों का मौलिक अधिकार है और इसे लेकर अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी.

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस एसए बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन की बेंच कर रही है.

    इससे पहले बुधवार को कोर्ट ने किसान संगठनों को भी इस मामले में एक पक्ष बनाने की अनुमति दी थी और कहा था कि ये ‘राष्ट्रीय मुद्दा‘ बन सकता है और इसलिए इसे शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए एक कमिटी बनाई जाए जिसमें भारतीय किसान यूनियन, भारत सरकार और अन्य किसान संगठनों के सदस्य हों.

  2. कश्मीर: पहली बार चलेगी नाव वाली अनोखी एंबुलेंस

    जम्मू-कश्मीर में नाव के ज़रिए पहली बार एंबुलेंस सेवा की शुरुआत होने जा रही है.

    यह अनोखी एंबुलेंस सेवा डल झील में शुरू होगी और इससे हज़ारों लोगों को फ़ायदा पहुँचने की उम्मीद है.

    स्थानीय निवासी तारिक़ अहमद को नाव वाली एंबुलेंस सेवा का ख़याल तब आया जब दो महीने पहले वो कोरोना पॉज़िटिव हुए और उन्हें अस्पताल जाना पड़ाय तारिक़ अहमद का अपना एक शिकारा (हाउसबोट) चलाते हैं.”

    उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “जब मैं कोरोना पॉज़िटिव हुआ तो कोई मेरी मदद के लिए आगे नहीं आया, सिवाय मेरे कुछ दोस्तों के जो मुझे नाव से अस्पताल ले गए. इससे मुझे बहुत दुख पहुँचा और मैंने उन हज़ारों लोगों के लिए अलग एंबुलेंस बनाने का सोचा जो शिकारा में रहते हैं''

    अहमद ने कहा, ''डल झील में शिकारा चलाने वाले लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धी कई दिक्कतें हैं और इमर्जेंसी के समय उन्हें अस्पताल तक पहुँचने में बहुत कठिनाई होती है. ऐसे में नाव के माध्यम से चलने वाली ये एंबुलेंस लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगी.”

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  3. ब्रेकिंग न्यूज़, फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कोरोना पॉज़िटिव

    इमैनुएल मैक्रों

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    फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आया है. अभी-अभी मिली जानकारी के मुताबिक़, फ़्रांसीसी राष्ट्रपति भवन एलीज़े पैलेस ने एक बयान जारी करके यह जानकारी दी है.

    बयान के मुताबिक़ 42 वर्षीय मैक्रों में कोरोना के लक्षण देखने को मिले थे जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट कराया गया था.

    एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि मैक्रों अब भी फ़्रांस के ‘इन चार्ज’ हैं और घर से ही सारा कामकाज संभाल रहे हैं.

    एलीज़े पैलेस ने गुरुवार को जारी किए गए अपने बयान में कहा, “राष्ट्रपति आज कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. उनमें शुरुआती लक्षण देखे जाने के बाद उनका आरटी पीसीआर टेस्ट कराया गया था.”

    हालाँकि अभी ये पता नहीं चल सका है कि राष्ट्रपति मैक्रों कोरोना वायरस की चपेट में कैसे आए. इस बीच उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान और उन्हें सूचित किए जाने की कोशिश की जा रही है.

    इस बीच फ़्रांसीसी प्रधानमंत्री ज्याँ कैस्टेक्स ने भी ऐहतियात के तौर पर ख़ुद को आइसोलेट कर लिया है. प्रधानमंत्री गुरुवार को सीनेट में फ़्रांस कोविड टीकाकरण नीति के बारे में बताने वाले थे लेकिन अब ये काम स्वास्थ्य मंत्री ओलीविये वेरों करेंगे.

    एलीज़े पैलेस के बयान में ये भी नहीं बताया गया है कि मैक्रों की पत्नी ब्रिजेट मैक्रों पॉज़िटिव हैं या नहीं.

    इमैनुएल मैक्रों से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कोरोना पॉज़िटिव हो चुके हैं.

    फ़्रांस में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण इसी हफ़्ते रात का कर्फ़्यू लगाया गया था.

    जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के आँकड़ों के अनुसार फ़्रांस में कोरोना संक्रमण से अब तक 59,400 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं.

    फ़्रांस कोरोना महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित यूरोपीय देशों में से एक है.

  4. किसान आंदोलन का 22वां दिन, सिंघु बॉर्डर पर किन हालातों में हैं किसान

    सिंघु बॉर्डर पर किसानों के साथ बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा

  5. ब्रेकिंग न्यूज़, कृषि क़ानून का विरोध करना किसानों का मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

    किसान आंदोलन

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    किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जस्टिस शरद ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना किसानों का मौलिक अधिकार है.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन को लेकर अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी.

    हालाँकि जस्टिस बोबडे ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के तरीक़े को देखा जा सकता है. जस्टिस बोबडे ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से आम लोगों को दिक़्क़त नहीं होनी चाहिए.

    जस्टिस बोबडे ने कहा, ''कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करना किसानों का मौलिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता. इसे ज़रूर देखा जा सकता है कि किसी की ज़िंदगी को कोई नुक़सान न हो. जब तक विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और बिना कोई संपत्ति का नुक़सान पहुँचाए हो रहा है तब तक संवैधानिक है."

    "अगर विरोध-प्रदर्शन का मक़सद हासिल करना है तो संवाद शुरू करना होगा. पुलिस इस बात को सुनिश्चित करे कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में बल का इस्तेमाल न करे.''

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  6. कुणाल कामरा पर अवमानना मामले को लेकर कल आएगा फ़ैसला

    कुणाल कामरा

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    स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना का मामला शुरू किया जाए या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को फ़ैसला सुना सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.

    इस मामले में एक याचिकाकर्ता के वकील निशांत कटनेश्वर्कर ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने मामला शुरू करने के लिए पहले ही अनुमति दे दी थी.

    अवमानना की याचिका कामरा पर सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक ट्वीट करने के कारण दायर की गई थी.

  7. ब्रेकिंग न्यूज़, शेख़ हसीना ने 1971 के मुक्ति संग्राम के लिए भारत का किया आभार

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    बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने गुरुवार को कहा कि भारत बांग्लादेश का सच्चा दोस्त है और उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत और उसकी सेना के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया.

    भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने गुरुवार को वर्चुअल समिट के दौरान भारत-बांग्लादेश के बीच चिल्हाटी-हल्दीबाड़ी रेल लिंक की शुरुआत की.

    1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से यह रेल मार्ग बंद था जो 55 साल बाद दोबारा शुरू हो रहा है.

    शेख़ हसीना ने कहा, “बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में 50 साल पूरे करने के कगार पर है. 26 मार्च 2021 को आपका (प्रधानमंत्री मोदी) ढाका दौरा 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के हमारे संयुक्त स्मरणोत्सव को भव्यता देगा.”

    “अपनी जान देने वाले मैं 30 लाख शहीदों को श्रद्धांजलि देती हूं. 1971 युद्ध में शहीद हुए मैं भारतीय सेना के जवानों को नमन करती हूं. मैं भारत के लोगों और भारत सरकार को आभार देती हूं जिन्होंने हमारी मुक्ति के लिए पूरे दिल से समर्थन दिया.”

    बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘भारत हमारा सच्चा दोस्त है.’

    इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारी ‘नेबरहुड फ़र्स्ट’ नीति का बांग्लादेश सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है. बांग्लादेश के साथ रिश्ते मज़बूत करना पहले दिन से मेरी प्राथमिकता में था.”

  8. किसान प्रदर्शनों से जुड़ी जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने किया ख़ारिज

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    दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान प्रदर्शनों को लेकर दायर की गई एक जनहित याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले को सुन रहा है.

    मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल ने कहा कि इस याचिका को पंजाब, हरियाणा और इलाहाबाद में भी दायर किया जा सकता था.

  9. ब्रेकिंग न्यूज़, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के 24,010 नए मामले

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    भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 24,010 नए मामले सामने आए हैं. इसके बाद भारत में कुल मामलों की संख्या 99,56,558 हो गई है.

    वहीं, इसी दौरान 355 नई मौतें हुई हैं जिसके बाद भारत में कोविड-19 से होने वाली मौतों का आंकड़ा 1,44,451 हो गया है.

    अभी भी 3,22,366 सक्रिय मामले देश में मौजूद हैं जबकि 94,89,740 लोग ठीक हो चुके हैं.

  10. केरल निकाय चुनावों में एलडीएफ़ को बढ़त, बीजेपी ने किया जनता का धन्यवाद

    केरल के स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट करके ‘बेहतर जनादेश’ के लिए केरल की जनता का धन्यवाद किया है.

    उन्होंने लिखा है कि बीजेपी लगातार एलडीएफ़ और यूडीएफ़ दोनों मोर्चों की भ्रष्ट, सांप्रदायिक और पाखंडी राजनीति को उजागर करना जारी रखेगी.

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    केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ़ पहले नंबर पर रही है. उसने 941 में से 514 ग्राम पंचायतों, 6 में से 5 नगर निगमों और 14 में से 11 ज़िला पंचायतों में बढ़त बरक़रार रखी है.

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि यह ‘मज़बूत प्रदर्शन जनता की जीत है’, इसके अलावा लेफ़्ट फ़्रंट 108 ब्लॉक पंचायतों में भी आगे है.

    बीजेपी का प्रदर्शन पहले से बेहतर रहा है. माना जा रहा है कि सबरीमला मंदिर मुद्दे को लेकर उसे लाभ हुआ है.

    देर शाम तक आए रुझानों में बीजेपी 24 ग्राम पंचायतों में बढ़त बनाए हुए थी जबकि 2015 में उसे केवल 14 में जीत मिली थी.

    बीजेपी किसी ब्लॉक या ज़िला पंचायत में बढ़त नहीं बनाए हुए है जहां पर राजनीतिक वोट ज़्यादा मायने रखता है लेकिन उसने नगर निगमों में अपनी स्थिति को बेहतर किया है.

    2015 में नगर निगमों में जहां उसके 51 सदस्य थे अब वे बढ़कर 55 हो गए हैं जबकि नगर पालिकाओं में उसकी उपस्थिति 236 डिविज़न से बढ़कर 320 डिविज़न हो गई है.

    स्थानीय निकाय चुनावों को अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफ़ाइनल माना जा रहा है.

  11. किसानों की विधवाएं कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में हुईं शामिल

    किसानों की विधवाएं कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में हुईं शामिल

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    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार क़र्ज़ से तंग आकर कथित तौर पर ख़ुदकुशी करने वाले किसानों की विधवाओं समेत सैंकड़ों महिलाएं बुधवार को मोदी सरकार के नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों में शामिल हो गईं. इन महिलाओं का कहना है कि इन नए क़ानून की वजह से उनकी आजीविका पर ख़तरा मंडराने लगा है.

    सितंबर में लागू किए गए क़ानूनों को लेकर किसान लगभग एक महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन क़ानूनों में कृषि क्षेत्र को नियंत्रण मुक्त बनाने की बात है और ये किसानों को सरकारी थोक बाज़ारों से अलग अपनी फ़सल ख़रीदारों को बेचने की अनुमति देता है.

    छोटे किसानों को डर है कि इससे उनकी फ़सलों के लिए मिलने वाली न्यूनतम क़ीमतों की गारंटी ख़त्म हो जाएगी और उन्हें बड़े खुदरा विक्रेताओं की दया का मोहताज़ होना पड़ेगा.

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    नई दिल्ली की सीमा पर स्थित एक प्रदर्शन स्थल पर पंजाब से आईं एक 40 वर्षीय विधवा महिला हर्षदीप कौर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, “अगर ये काले क़ानून आते हैं तो और किसान कर्ज़ के बोझ में दबते जाएंगे. और भी माएं और बहनें मेरी तरह विधवा हो जाएंगी.”

    परेशान किसानों की ख़ुदकुशी भारत में सालों से एक गंभीर मसला रहा है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक़, 2018 में क़रीब 10,350 किसानों और खेतिहर मज़दूरों ने ख़ुदकुशी की, जो भारत में हुई सभी आत्महत्याओं का क़रीब 8% था.

    हर्षदीप कौर बताती हैं कि उनके पति ने तीन साल पहले ख़ुदकुशी कर ली थी. अपने पति की पासपोर्ट साइज़ फोटो लिए वो कहती हैं कि उनके पति पर पाँच लाख रुपये का क़र्ज़ हो गया था.

    पंजाब के एक किसान रमनदीप सिंह मान कहते हैं कि बुधवार देर शाम एक 65 वर्षीय सिख संत ने एक प्रदर्शन स्थल पर ख़ुदकुशी कर ली.

    मान कहते हैं, संत बाबा राम सिंह ने अपने सूसाइड नोट में लिखा कि वो “प्रदर्शनकारी किसानों की हालत देखकर आहत हैं.”

    सिंह की आत्महत्या के लिए सरकारी उदासीनता को ज़िम्मेदार ठहराते हुए विपक्षी नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को तुरंत क़ानून रद्द करने चाहिए.

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    तीन क़ानूनों में किए गए सुधारों के तहत खेती उपज की बिक्री, क़ीमत और स्टोरेज के नियमों में ढील दी गई है.

    प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को आश्वास्त करने की कोशिश की कि बदलाव उनके लिए नई संभावनाएं पैदा करेंगे, लेकिन बहुत कम ने उनकी बात पर यकीन किया. किसान यूनियन के नेताओं और सरकार के बीच हुई कई दौर की बातचीत विफल रही है.

    एक प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक किसान यूनियन के नता गुरबक्श सिंह कहते हैं, “हम प्रदर्शन जारी रखेंगे.” गुरबक्श सिंह का कहना है कि आंदोलन का केंद्र बने हुए पंजाब से और महिलाओं को लाने के लिए दर्जनों बसों और ट्रैक्टरों का इतंज़ाम किया जा रहा है.

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  12. सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन पर क्या-क्या हुआ?

    जस्टिस बोबडे

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    मोदी सरकार के खेती-किसानी पर तीन नए क़ानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन आज 22वां दिन भी जारी है. सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई रास्ता नहीं निकल पा रहा है.

    दूसरी तरफ़ दिल्ली की सीमाओं पर हज़ारों की संख्या में किसान कड़ाके की ठंड में दिन-रात अपनी माँगों को लेकर डँटे हुए हैं.

    अब मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश शरद ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने देश भर के किसान नेताओं की एक कमिटी बनाने की बात कही.

    इसमें भारतीय किसान यूनियन भी रहेगा, जो पूरे आंदोलन को लेकर काफ़ी मुखर है. इसके अलावा इस कमिटी में सरकार के प्रतिनिधि भी रहेंगे. यही कमिटी पूरे गतिरोध को सुलझाएगी.

    बुधवार को जस्टिस बोबड़े ने कहा, ''यह कमिटी पूरे गतिरोध को सुलझा सकती है. इस कमिटी में किसान नेता और बीकेयू जैसे किसान यूनियन शामिल हो सकते हैं.''

    कोर्ट में भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ''सरकार बातचीत के लिए तब भी तैयार थी और अब भी तैयार है. लेकिन किसान कह रहे हैं कि क़ानून रद्द करने पर ही बात होगी. ये बात करने भी आ रहे हैं तो 'हाँ या ना' लिखे इश्तिहार लेकर आ रहे हैं. मंत्री बात करने की कोशिश कर रहे हैं तो किसान नेता कुर्सी पीछे कर मंत्री की तरफ़ पीठ कर ले रहे हैं. मेरा फ़र्ज़ है कि कोर्ट में बताऊं. सरकार बातचीत को लेकर बहुत सकारात्मक है और तीनों क़ानूनों की हर लाइन पर बात करने के लिए तैयार है.''

    किसान आंदोलन

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    मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा, ''किसानों की समझ है कि कृषि क़ानून उनके ख़िलाफ़ है...आपकी वार्ता काम नहीं कर पा रही है और अब तक नाकाम रही है. अगर सरकार बातचीत को लेकर प्रतिबद्ध है तो पहले तय करे कि कौन किसान नेता बात करना चाहते हैं..17 दिसंबर को भी इस पर सुनवाई होगी. 18 दिसंबर छुट्टी से पहले का आख़िरी दिन है.''

    सुप्रीम कोर्ट वकीलों और क़ानून के छात्रों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. याचिक में कहा गया है कि लंबे समय से आंदोलन के कारण उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. हालांकि कोर्ट ने कहा कि पहले इस मामले में किसानों को भी शामिल करना होगा.

    किसान आंदोलन

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  13. नमस्कार

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