एम्स: नर्सिंग यूनियन ने हड़ताल वापस ली

दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले और फिर एम्स प्रशासन से मीटिंग के बाद नर्सिंग यूनियन ने हड़ताल वापस लेने का फ़ैसला किया.

लाइव कवरेज

  1. किसानों का आंदोलन अब किस ओर?

    किसानों का आंदोलन अब किस ओर? भारतीय किसान यूनियन के प्रेसीडेंट जोगिंदर सिंह से बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता अरविंद छाबड़ा.

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त

  2. गडकरी ने पूछा- किसान आंदोलन में नक्सल मामले के एक व्यक्ति की तस्वीर क्यों दिखी

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार के सीनियर मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि किसानों का शोषण रोकने के लिए कृषि क़ानून लाए गए हैं. गडकरी ने कहा कि किसानों को उचित क़ीमत मिले इसके लिए यह ज़रूरी था.

    एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में गडकरी ने कहा कि किसान की उपज की क़ीमत किसान तय करे न कि कोई दलाल. गडकरी ने कहा कि कृषि क़ानून से किसानों को फ़ायदा है.

    उन्होंने कहा, ''किसानों को कन्फ़्यूज करने की कोशिश की जा रही है. तीनों बिलों में क्या ग़लत है इसे बताया जाए. अगर कुछ जोड़ना है तो यह भी बताया जाए कि क्या जोड़ना है. जहाँ बंजर ज़मीन पर किसान फसल नहीं उगा पा रहे हैं वहां अगर कॉर्पोरेट की मदद से खेती हो जाए तो क्या दिक़्क़त है. किसानों की ज़मीन कोई ले नहीं सकता. अगर पंजाब और हरियाणा के किसान को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग नहीं करनी है तो नहीं करे.''

    गडकरी ने कहा, ''संसद में इस बिल पर चर्चा हुई थी. इसके बाद भी हम संशोधन के लिए तैयार हैं''.

    गडकरी ने कहा, ''हमारे गढ़चिरौली ज़िले के एक व्यक्ति पर नक्सल मामले में कार्रवाई हुई. कोर्ट ने उसे बेल नहीं दिया. उसकी तस्वीर इस आंदोलन में कहां से आई? उसका खेती से क्या संबंध है? जिसने देश विरोधी भाषण दिए वे इस आंदोलन में कहाँ से आए?'' गडकरी ने कहा, ''हम किसी भी तरह का आकलन नहीं निकाल रहे. कुछ ऐसे तत्व हैं जो आंदोलन का फ़ायदा उठाकर इसमें घुसने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ लोग इसका ग़लत फ़ायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं.''

    गडकरी ने कहा, ''जो फ़ोटो दिखाए गए उससे किसानों का कई संबंध नहीं है. मेरे क्षेत्र में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और लगातार उसे रोकने में लगे हैं. हमारे पास 280 लाख टन चावल हैं और गोदाम में रखने के लिए जगह नहीं है. हम किसानों के हित को लेकर लगातर काम कर रहे हैं. हम इथेनॉल बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. अनाज और गन्ने के वैकल्पिक इस्तेमाल पर हम लगातार विचार कर रहे हैं. मैं चाहता हूं किसान बात करें. हम अब भी चर्चा और संशोधन के लिए तैयार हैं. किसानों के अच्छे सुझाव आते हैं तो हम छह से ज़्यादा संशोधन कर सकते हैं.''

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

  3. केजरीवाल बोले- हमारी पार्टी 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी

    अरविंद केजरीवाल

    इमेज स्रोत, Getty Images

    आम आदमी पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को घोषणा की है कि उनकी पार्टी 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता वहाँ की पार्टियों से ऊब चुकी है और उन्हें विकल्प की ज़रूरत है.

    केजरीवाल ने कहा, ''दिल्ली में हमें जनता ने तीन बार मुख्यमंत्री बनाया. पंजाब में आम आदमी पार्टी मुख्य विपक्षी पार्टी है. यूपी के लोग दिल्ली में बड़ी संख्या में रहते हैं. लोग हमारे पास आकर आग्रह करते हैं कि यूपी में भी आम आदमी पार्टी को चुनाव लड़ना चाहिए क्योंकि लोग वहां की पार्टियों से ऊब चुके हैं. यूपी के लोगों को पढ़ाई और दवाई के लिए दिल्ली क्यों आना पड़ता है? अगर दिल्ली के सरकारी अस्पताल सबसे बेहतर हो सकते हैं तो यूपी के क्यों नहीं हो सकते? दिल्ली के सरकारी स्कूल अच्छे हो सकते हैं तो यूपी के क्यों नहीं हो सकत? यूपी में बिजली बिल कम क्यों नहीं हो सकता?''

    केजरीवाल ने कहा, ''यूपी की भ्रष्ट राजनीति के कारण वहां विकास नहीं हो पा रहा है. आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में सही और साफ़ इरादे से काम करेगी. सरकारों में पैसे की कमी नहीं होती बल्कि इरादे और ईमानदारी की कमी होती है.''

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  4. सॉफ्ट पावर में हम चीन से बहुत आगे हैं: राजनाथ सिंह

    राजनाथ सिंह

    इमेज स्रोत, Getty Images

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया बदल रही है और पहले की हुई संधियां संकट में हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि ताक़त का प्रदर्शन न केवल हिमालय के इलाक़ों में ही नहीं हो रहा है बल्कि पूरे हिन्द-प्रशांत में किया जा रहा है.

    रक्षा मंत्री ने कहा, ''जब भी लाइन ऑफ कंट्रोल पर हालात बिगड़ते हैं तो भारत और चीन की सेना की ताक़त की तुलना की जाती है. इसे लेकर गंभीर बहस हो सकती है कि किसके पास ज़्यादा सैन्य ताक़त है. लेकिन जब सॉफ्ट पावर की बात होगी तो इसे लेकर कोई संदेह नहीं है कि भारत चीन से बहुत आगे है.''

    राजनाथ सिंह ने ये बात फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की वार्षिक आम सभा में सोमवार को कही. राजनाथ सिंह ने कहा, ''लोकेशन, आकार, आबादी और अर्थव्यवस्था के कारण भारत हमेशा से वैश्विक सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से अहम रहा है. एलएसी पर सैन्य निर्माण कार्य में व्यापक तेज़ी आई है और कई बड़े काम हुए हैं. हमारी सेना ने अदम्य साहस का परिचय दिया है.''

    दूसरी तरफ़ भारत के चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को कोलकाता में कहा कि भारत की फ़ौज के पास पर्याप्त क्षमता है और सीमा पर किसी भी तरह की चुनौती से निपटने के लिए तैयार है.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  5. कृषि क़ानून से महंगाई चार साल में 16 गुना बढ़ जाएगी: केजरीवाल

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच किसान आंदोलन को लेकर जमकर वार-प्रतिवार हो रहा है. दोनों एक-दूसरे पर किसान आंदोलन को समर्थन देने को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

    दोनों मुख्यमंत्री दिखाने में लगे हैं कि वो किसानों के असली हितैषी हैं. सोमवार को तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसानों के समर्थन में भूख हड़ताल भी की. केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि नए कृषि बिल से महंगाई बढ़ेगी और ये कुछ पूंजिपतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    उन्होंने इन क़ानूनों को किसान और जन विरोधी बताया. अरविंद केजरीवाल के साथ उनके मंत्री, विधायक और पार्टी नेता भी किसानों के समर्थन में अनशन पर बैठे. दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी के मुख्यालय में अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, ''नए कृषि क़ानून से महज़ चार सालों में ही ज़रूरी वस्तुओं की क़ीमत क़रीब 16 गुना बढ़ जाएगी.''

    दूसरी तरफ़ पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल की भूख हड़ताल को नाटक क़रार दिया है. केजरीवाल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए, ''कैप्टन जी, मैं शुरू से किसानों के साथ खड़ा रहा हूँ. दिल्ली के स्टेडीयम जेल नहीं बनने दिया, केंद्र से लड़ा.

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    मैं किसानों का सेवादार बनके उनकी सेवा कर रहा हूँ. आपने तो अपने बेटे के ED केस माफ़ करवाने के लिए केंद्र से सेटिंग कर ली, किसानों का आंदोलन बेच दिया? क्यों?.'' अमरिंदर सिंह ने इसके जवाब में कहा, ''सभी पंजाबियों को पता है कि मैं ईडी या किसी अन्य केस को लेकर झुकने वाला नहीं हूं. केजरीवाल अगर आपको राजनीतिक फ़ायदा हो तो आप अपनी आत्मा भी बेच सकते हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि किसान आपके नाटक में आ जाएंगे तो पूरी तरह से ग़लत हैं.''

    केजरीवाल ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री उस कमिटी में शामिल थे जिसने कृषि बिल को ड्राफ़्ट किया था. दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि तीनों कृषि बिल आपने देश को गिफ़्ट किया है.

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    केजरीवाल ने पूछा कि बीजेपी उनसे कृषि बिल को लेकर उनके दोहरे मानदंड पर कोई सवाल क्यों नहीं पूछती है? कैप्टन अमरिंद सिंह ने केजरीवाल को दिए जवाब में कहा, ''केजरीवाल अपनी सरकार की नाकामी छुपाना चाहते हैं. इन्हें डर लग रहा है कि पंजाब के विधानसभा चुनाव में किसान असली जगह बता देंगे. जिस कमिटी में होने की बात आप कह रहे हैं उसमें कृषि बिल की कभी चर्चा नहीं हुई. और स्वाभाविक है कि बीजेपी मेरे ऊपर कोई इल्ज़ाम नहीं लगा सकती क्योंकि आपकी तरह मैंने कोई गोपनीय समझौता नहीं किया है.''

    कैप्टन अमरिंदर सिंह को जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा, ''यह रिकॉर्ड है कि आप इस कमिटी के हिस्सा थे, जिसने कृषि बिल ड्राफ्ट किया था. आपके पास अधिकार था कि इस बिल को रोक सकते थे. आप तब केंद्र के साथ क्यों खड़े रहे?''

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    केजरीवाल ने कहा कि नए कृषि क़ानूनों से बड़ी निजी कंपनियों को क़ीमत बढ़ाने का लाइसेंस मिल जाएगा. केजरीवाल ने कहा, ''इन क़ानूनों के कारण भयानक महंगाई बढ़ेगी और लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा. इस दर से लोगों की सैलरी नहीं बढ़ेगी. आप ये मत सोचिए कि किसानों का समर्थन कर आप उनकी लड़ाई लड़ रहे हैं बल्कि किसान हम सबकी लड़ाई लड़ रहे हैं. अगर ये क़ानून वापस नहीं लिए गए तो आम लोग संकट में फँस जाएंगे. हमें इसलिए इन क़ानूनों का विरोध करना चाहिए.''

    केजरीवाल ने कहा महंगाई इसलिए बढ़ेगी क्योंकि इस क़ानून से जमाखोरी बढ़ेगी. उन्होंने कहा, ''जैसे प्याज की महंगाई बढ़ती है तो हम पता करते हैं कि महंगाई क्यों बढ़ी. पता चलता है कि प्याज की जमाखोरी की गई है. मार्केट में प्याज नहीं आता और महंगा हो जाता है. दाल के साथ भी ऐसा ही होता है कि पैसे वाले जमाखोरी कर लेते हैं. लेकिन इस क़ानून में लिखा है कि कोई कितना भी स्टोर कर सकता है. अब स्टोरी की सीमा ख़त्म कर दी गई है. इस क़ानून में लिखा है कि एक साल में महंगाई डबल हो जाएगी तभी रेड मारी जाएगी.''

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, बीते 5 महीनों में कोरोना संक्रमण के सबसे कम मामले

    महिला

    इमेज स्रोत, Getty Images

    तक़रीबन पांच महीने में पहली बार भारत में एक दिन में सबसे कम कोरोना संक्रमण मामले पाए गए हैं.

    बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 22,065 नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद कुल मामलों की संख्या 99,06,165 हो गई है.

    वहीं, इसी दौरान 354 लोगों की मौत हुई है जिसके बाद कुल मौतों का आंकड़ा 1,43,709 हो गया है.

    इस बीमारी से अब तक 94,22,636 लोग ठीक भी हो चुके हैं.

  7. 'हमारे जनप्रतिनिधियों ने क़ानून बिना पढ़े ही साइन कर दिया'

  8. किसान यूनियनों ने मोदी सरकार से वार्ता बहाल करने के लिए रखीं तीन शर्तें

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    किसान यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच फिर से बातचीत शुरू हो सकती है. मोदी सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों को लेकर किसान सड़क पर हैं और वे माँग कर रहे हैं कि तीनों क़ानून रद्द किए जाएं क्योंकि इनसे उनकी आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा.

    दूसरी तरफ़ सरकार का कहना है कि इन क़ानूनों से कृषि को लाभाकारी बनाया जा सकेगा और दशकों की यथास्थिति टूटेगी. सरकार और किसान नेताओं के बीच पाँच चरण की बात हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है. सरकार संशोधन के लिए तैयार है लेकिन क़ानून वापस लेने पर राज़ी नहीं है.

    इस गतिरोध के बीच सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार बातचीत बहाल करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि तारीख़ तय होने के बात वो बता देंगे. उधर इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही देश भर के 250 से ज़्यादा किसान समूहों की समिति अखिल भारतीय किसान संघर्ष कमिटी (AIKSCC) ने कहा कि बातचीत शुरू हो सकती है लेकिन उनकी कुछ शर्तें हैं.

    AIKSCC की वर्किंग कमिटी के हनन मुल्ला ने कहा है कि मोदी सरकार किसान आंदोलन में मतभेद पैदा करना चाहती है.

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    पंजाब के जितने किसान यूनियन हैं वो कृषि क़ानून रद्द करने से कम पर तैयार नहीं हैं. इनका कहना है कि बातचीत शुरू होने से पहले तीन चीज़ें स्पष्ट हो जानी चाहिए.

    पहली शर्त यह है कि बातचीत पुराने प्रस्तावों पर नहीं हो सकती क्योंकि इन्हें पहले ही ख़ारिज किया जा चुका है. दूसरी शर्त यह है कि सरकार नया एजेंडा पेश करे और तीसरी शर्त के मुताबिक़ वार्ता क़ानून रद्द करने पर केंद्रित होनी चाहिए.

    आंदोलनकारी किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार इन लाइनों पर बात करना चाहती है को वार्ता बहाल की जा सकती है. AIKSCC के सचिव अविक साहा ने सोमवार को कहा, ''सरकार लगातार पुराने प्रस्तावों से छलने की कोशिश कर रही है. हम इन प्रस्तावों को पहले ही नकार चुके हैं.

    अगर सरकार तीनों कृषि क़ानूनों और इलेक्ट्रिसिटी बिल 2020 को वापस लेने के लिए तैयार है तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं.'' इससे पहले कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पाँच राज्यों को किसान प्रतिनिधिमंडलों से मुलाक़ात की थी और उन्होंने नए कृषि क़ानूनों का समर्थन किया था.

    नरेंद्र तोमर ने कहा है कि वार्ता फिर से शुरू होगी क्योंकि उनकी सरकार किसानों के मुद्दों को लेकर गंभीर है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार किसान नेताओं से फ़ोन पर भी अनौपचारिक रूप से बात कर रही है.

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

  9. किसान आंदोलन के 19वें दिन आपसी मतभेद सतह पर आए

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    हज़ारों आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली की सीमाओं और देश भर में धरने के साथ भूख हड़ताल की. किसानों की माँग है कि मोदी सरकार तीन नए कृषि क़ानूनों को रद्द करे. किसानों का कहना है कि इन क़ानूनों से उनकी आजीविका चौपट हो जाएगी और कॉर्पोरेट को बढ़ावा मिलेगा.

    दूसरी तरफ़ केंद्र सरकार इस आंदोलन को ख़त्म करने के लक्ष्य से किसान नेताओं से व्यक्तिगत मुलाक़ात करने की कोशिश कर रही है. इस बीच किसान नेताओं के मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं. ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्यव समिति के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह को पद से हटा दिया क्योंकि उन्होंने सरकार से अलग से बात करने की इच्छा ज़ाहिर की थी.

    उनका कहना था कि मांग एमएसपी के लिए नियम बनाने पर केंद्रित होनी चाहिए न कि क़ानून रद्द करने पर. इसी तरह पंजाब के किसान यूनियनों ने ख़ुद को भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के मानवाधिकार संबंधी विरोध-प्रदर्शनों से अलग कर लिया. भारतीय किसान यूनियन (उगहारां) भी सोमवार की भूख हड़ताल में शामिल नहीं हुआ.

    किसान यूनियनों के बीच यह विभाजन दिल्ली की सीमाओं पर जारी विरोध प्रदर्शन के 19वें दिन हुआ. किसान और सरकार के बीच पाँचवें चरण की वार्ता के बाद से ही बातचीत बंद है. किसानों का कहना है कि सरकार तीनों क़ानून रद्द करेगी तभी कोई समाधान निकलेगा जबकि सरकार का कहना है कि संशोधन करने को तैयार है लेकिन क़ानून वापस नहीं लिए जाएंगे.

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    किसानों की भूख हड़ताल में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए. हरियाणा राजस्थान सीमा पर रेवाड़ी के नज़दीक सैकड़ों किसान बैठे हुए हैं और दिल्ली-जयपुर हाइवे पर गाड़ियों की आवाजाही बंद है.

    वीएम सिंह ने का कहना है कि वो क़ानून रद्द करने की माँग से ख़ुद को अलग करते हैं. वीएम सिंह ने द हिन्दू अख़बार से कहा, ''अगर एमएसपी गारंटी क़ानून पास हो जाता है तो ये तीनों क़ानून ख़ुद से ही निष्प्रभावी हो जाएंगे. हमेशा से हमारी असली माँग यही रही है. दूसरे संगठन अपनी गोलपोस्ट लगातार बदल रहे हैं. अगर सरकार हमें बातचीत के लिए बुलाती है तो मैं यूपी के किसानों की तरफ़ से बातचीत करने के लिए तैयार हूं.''

    वीएम सिंह उत्तर प्रदेश में धान और गन्ने के किसानों के लिए एक संगठन चलाते हैं. वीएम सिंह का कहना है कि तीनों क़ानूनों को रद्द करने से देश के किसानों के बीच यथास्थिति मज़बूत होगी. एमएसपी गारंटी क़ानून से किसानों की आय बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि वो गतिरोध का समर्थन नहीं कर सकते.

    अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति देश भर के 250 से ज़्यादा किसान समूहों का संगठन है जो इस किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है. वीएम सिंह के बयान को लेकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) की वर्किंग कमिटी की रविवार रात सिंघु बॉर्डर पर बैठक हुई और वीएम सिंह के बयान से किनारा करने का फ़ैसला किया गया.

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इस बैठक के बाद हनन मुल्ला, जो कि वाम नेता हैं और AIKSCC की वर्किंग कमिटी का हिस्सा हैं, ने कहा कि इस आंदोलन का पहला लक्ष्य है कि सरकार क़ानून रद्द करे क्योंकि इससे भारत की खेती-किसानी बर्बाद हो जाएगी. उन्होंने कहा कि दूसरी माँग एमएसपी गारंटी क़ानून है. मुल्ला ने कहा कि आंदोलन का एक लक्ष्य यह भी है. उन्होंने कहा, ''सरकार हमारे बीच विभाजन करवाना चाहती है. वीएम सिंह आंदोलन की भावना से अलग बोलने लगे थे, इसलिए उन्हें हटा दिया गया है.''

    बीकेयू का विरोध-प्रदर्शन

    पंजाब के सभी किसान समूहों के बीच भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) राज्य का सबसे बड़ा किसान यूनियन है. इसे लेकर भी रविवार को किसान यूनियनों के बीच विभाजन दिखा. 10 दिसबंर को मानवाधिकार दिवस था और बीकेयू उगराहां के कार्यकर्ता सिंघु बॉर्डर पर जेल में बंद एक्टिविस्टों की रिहाई के लिए एक प्रदर्शन में शामिल हुआ.

    इसके बाद केंद्र के मंत्रियों ने कहना शुरू कर दिया था कि ये सबूत हैं कि इस आंदोलन को माओवादी और वामपंथी धड़ों ने हाईजैक कर लिया है. इसके बाद दूसरे किसान संगठनों ने बीकेयू उगराहां के प्रदर्शन से ख़ुद को अलग कर लिया.

    भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह ने कहा कि ऐसी माँगों को कभी और रखने की ज़रूरत है और अभी पूरी तरह से कृषि क़ानूनों को रद्द करने पर आंदोलन केंद्रित रखना चाहिए. उन्होंने कहा, ''अगर किसी को ग़लत तरीक़े से जेल में डाला गया है तो हम उसका विरोध करते हैं लेकिन यह मंच ऐसे विरोध-प्रदर्शनों के लिए नहीं है. हम अपनी माँगों पर केंद्रित रहना चाहते हैं.''

    इसके जवाब में बीकेयू (उगराहां) के नेता भी सोमवार को किसानों की भूख हड़ताल में शामिल नहीं हुए. हालांकि इस संगठन के सदस्य पंजाब के अलग-अलग इलाक़ों में कृष क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं. बीकेयू (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा, ''हमलोग भूख हड़ताल में शामिल नहीं हुए क्योंकि हमें किसी भी फ़ैसले में शामिल नहीं किया जा रहा है.''

    किसान आंदोलन

    इमेज स्रोत, Getty Images

  10. नमस्कार

    बीबीसी हिन्दी के इस लाइव पेज में आपका स्वागत है. हम यहाँ दिन भर किसान आंदोलन के साथ देश और दुनिया की तमाम बड़ी ख़बरों से आपको अवगत कराएंगे. पिछले 24 घंटों के अपडेट्स देखने के लिए यहाँ क्लिक करें.