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क्रिसमस के दौरान जर्मनी में लॉकडाउन, वजह कोरोना- आज की बड़ी ख़बरें

जर्मनी में अब 16 दिसंबर से 10 जनवरी तक लॉकडाउन होगा. जर्मन चांसलर ने कहा फ़ौरन कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

लाइव कवरेज

  1. किसानों के मुद्दे पर कृषि मंत्री ने की गृह मंत्री से मुलाक़ात

    किसानों के मुद्दों को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिह तोमर और केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने आज गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की है.

  2. पाकिस्तान के मंत्री फ़वाद हुसैन की किसान आंदोलन पर ये टिप्पणी

    पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन ने कहा, ''भारत में जो हो रहा है उसे लेकर पूरी दुनिया में पंजाबी तकलीफ़ में हैं. महाराजा रणजीत सिंह की मौत के बाद पंजाबियों की किसी ना किसी तरह घेराबंदी की जा रही है. पंजाबियों ने अपने ख़ून से आज़ादी की क़ीमत चुकाई है.पंजाबी अपनी ही नादानी के शिकार हैं.''

  3. , जयपुर-दिल्ली हाइवे पर किसानों से बात कर रही हैं बीबीसी संवाददाता देवीना गुप्ता

  4. किसान आंदोलन मज़बूत मोदी सरकार के लिए सख़्त संदेश- नज़रिया

  5. किसानों से दबाव के बीच राजनाथ सिंह से मिले दुष्यंत चौटाला

    हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार से कहा है कि आंदोलन कर रहे किसानों के साथ गतिरोध ख़त्म किया जाए. उन पर अपनी ही पार्टी के विधायकों और समर्थकों का दबाव बताया जा रहा है.

    जननायक जनता पार्टी नेता दुष्यंत ने पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से और फिर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से दिल्ली में मुलाक़ात की. इसके बाद उन्होंने कहा कि 24 से 48 घंटों के भीतर निर्णायक नतीजा निकलेगा.

    हरियाणा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत ने कहा, “मैंने केंद्रीय मंत्रियों से इस बारे में चर्चा की है. मुझे उम्मीद है कि आपसी सहमति से रास्ता निकलेगा और गतिरोध ख़त्म होगा.”

    उनका कहना था, “मुझे उम्मीद है कि अगले 24 से 48 घंटों में सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत का अंतिम दौर होगा, जिससे निर्णायक नतीजा निकलेगा.”

    ऐसा बताया जा रहा है कि दुष्यंत की पार्टी पर भी शिरोमणि अकाली दल की तरह सरकार से अलग होने का दबाव बढ़ रहा है.

    हरियाणा के इस साझीदार की तरफ़ ये दबाव तब आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए क़ानूनों को किसानों के लिए फ़ायदेमंद बताया है और एक तरह से संकेत दिया है कि क़ानून वापस लेने की किसानों की माँग नहीं मानने पर सरकार अडिग है.

    हरियाणा में भाजपा सरकार दुष्यंत चौटाला के समर्थन पर निर्भर है. ख़बरों के अनुसार दुष्यंत की पार्टी के कई विधायक इन क़ानूनों को लेकर भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेना चाहते हैं.

    पत्रकारों से बातचीत में दुष्यंत ने ज़ोर देकर कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना उनका फ़र्ज़ है. उन्होंने भाजपा के कुछ वर्गों से उठ रही इस बात से असहमति जताई कि पंजाब के ख़ालिस्तानी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं.

    दुष्यंत का कहना था कि पंजाब से आए लोगों का बर्ताव बहुत ही सकारात्मक है और उन्होंने उम्मीद जताई कि वो वैसा ही बना रहेगा.

    उधर भाजपा के एक अन्य सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और राजस्थान से सांसद हनुमान बेनीवाल नए किसान कानूनों को रद्द किए जाने की माँग पर अडिग हैं.

  6. राजस्थान के किसान आज फिर करेंगे दिल्ली कूच की कोशिश

    मोहर सिंह मीणा, बीबीसी हिंदी के लिए

    दिल्ली-जयपुर हाइवे पर शाहजहांपुर में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट क़रीब 150 किसानों के साथ मौजूद हैं. वह अपने किसान साथियों के आने का इन्तज़ार कर रहे हैं, जिसके बाद वो लोग दिल्ली के लिए निकलेंगे.

    कोटपूतली से एक हज़ार किसानों के साथ सीपीआई (एम) के पूर्व विधायक अमराराम दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं. वह किसानों के साथ शाहजहांपुर में एकजुट होकर दिल्ली कूच करेंगे.

    वहीं, हनुमानगढ़ के भादरा विधायक बलवान पूनिया भी शाहजहांपुर पहुंच रहे हैं. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल कल किसानों के साथ शाहजहांपुर पहुंचे थे, लेकिन वह वापस जयपुर लौट गए थे.

    जयपुर दिल्ली हाइवे पर अभी यातायात बाधित नहीं है, लेकिन किसानों के कोटपूतली से निकलने पर हाइवे पर जाम के हालात बन सकते हैं. वहीं, राजस्थान-हरियाणा सीमा पर किसानों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

    किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने बीबीसी से कहा, "पुलिस की लाठियों से हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, केंद्र सरकार किसानों की मांगें नहीं मानेगी तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा.''

  7. किसान विरोध प्रदर्शन को खालिस्तान की मांग से जोड़ने पर बोले ब्रिटिश सांसद

    ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सिख सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने भारतीय मीडिया में उनके खालिस्तान अलगाववादियों के क़रीबी होने की बातों पर आपत्ति जताई है. साथ ही उन्होंने किसान विरोध प्रदर्शन के समर्थन में हुई उस रैली का आयोजक होने से इनकार किया है जिसमें खालिस्तान के समर्थन में झंडे लहराए गए थे.

    उन्होंने इस संबंध में ट्वीट करके कहा, ‘‘मीडिया में कुछ लोग किसानों के शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन या उसका समर्थन करने को वालों अलगाववादियों और आतंकियों से जोड़कर ग़लत सूचना फैलाने लगे हैं. आप अपने ही देश और पेशे को नुक़सान पहुंचा रहे हैं. हेट ट्रोल फैक्ट्री: आपके अपशब्द और धमकी मुझे सच बोलने से नहीं रोकेंगे.’’

    तनमनजीत सिंह ने एक और ट्वीट किया, ‘‘मैं एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का श्रेय नहीं ले सकता तो विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की बात तो छोड़ ही दें. लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों को कमज़ोर करने के बजाए कृप्या तथ्यों पर बने रहें.’’

  8. पुलिस हिरासत में लिए गए आप नेता राघव चड्ढा

    आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वो दिल्ली नगर निगम में फंड के दुरुपयोग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर के बाहर धरना प्रदर्शन करने जा रहे थे.

    गृह मंत्री के घर के अलावा पार्टी ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के घर के बाहर भी प्रदर्शन करने की घोषणा की है. इसका नेतृत्व पार्टी की विधायक आतिशी मार्लेना करेंगी.

    पार्टी का आरोप है कि एमसीडी में 2500 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है जिसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए.

    शनिवार को राघव चड्ढा ने गृह मंत्री के घर के बाहर धरना प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पुलिस से इजाज़त मांगी थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया.

    दिल्ली पुलिस ने जवाब दिया, ‘‘गृह मंत्री के घर के बाहर किसी भी तरह की सभा की अनुमति नहीं है. आपके अनुरोध पर विचार करने के बाद उसे खारिज कर दिया गया है. आपसे दिल्ली पुलिस को सहयोग करने का अनुरोध किया जाता है.’’

    पुलिस ने कहा है, ‘‘कोविड-19 महामारी को रोकने और नियंत्रित करने के लिए राजधानी दिल्ली में सभी सामाजिक/ शैक्षणिक/ खेल/ मनोरंजन/ सांस्कृतिक/ धार्मिक/ राजनीतिक कार्यों/ अन्य सभाओं को 31.12.2020 तक प्रतिबंधित कर दिया गया है.’’

  9. कृषि क़ानूनों के विरोध में वीरता पदक लौटाएंगे पूर्व सैन्यकर्मी

    मोदी सरकार के कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे आंदोलनकारी किसानों ने जयपुर-दिल्ली हाइवे बंद करने की चेतावनी दी है. पिछले दो हफ़्तों से किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. इनकी माँग है कि तीन नए कृषि क़ानून किसानों के ख़िलाफ़ हैं और उन्हें सरकार वापस ले. हरियाणा और राजस्थान के किसान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तरफ़ कूच कर सकते हैं. ये राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर मार्च करेंगे.

    द हिन्दू की ख़बर के अनुसार सिंघु बॉर्डर पर धरना दे रहे पूर्व सैन्य कर्मियों ने पाँच हज़ार वीरता पदक इकट्ठा किए हैं जिन्हें वो कृषि क़ानूनों के विरोध में सरकार को लौटाने वाले हैं. ये लोग 26 नवंबर से सिंघु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं.

    पंजाब और हरियाणा से आए ये पूर्व सैन्य कर्मी अब मुख्यता खेती से अपनी आजीविका चलाते हैं. उन्होंने शनिवार को बताया कि उनकी योजना अगले दो दिनों में 25 हज़ार मेडल इकट्ठा करने की है. उन्होंने कहा कि लाखों की संख्या में और किसान विरोध प्रदर्शनों के लिए आ रहे हैं.

    हिन्दू से झज्जर से आए एक 80 साल के सेवानिवृत्त हवलदार बलवंत सिंह कहते हैं, ‘‘मैं किसानों और जवानों के परिवार से आता हूं जिनके घर से आठ लोग सीमा पर लड़ाई में शहीद हुए हैं. मुझे इस पर गर्व है लेकिन जैसा सरकार हमारे साथ कर रही है उससे लगता है कि ये देश रहने लायक नहीं रहा है.’’

    हरियाणा के झज्जर में सेवा मुक्त नायक कपिल देव ने बीबीसी पंजाबी के सहयोगी सत सिंह से कहा कि उन्होंने मेडल वापस करने के लिए राष्ट्रपति से 12 दिसंबर का समय भी मांगा था, पर उन्हें मुलाकात के लिए वक़्त नहीं मिला. कपिल देव हरियाणा सैनिक संघर्ष कमिटी के महासचिव हैं. कपिल देव ने कहा, ''मुझे इस बात को लेकर दुख है कि किसानों के संघर्ष को आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है.''

    ‘‘हम यहां से 26 नवंबर से आए हुए हैं और सरकार हमें सुनने की बजाए ये काले क़ानून हम पर थोपने में लगी है.’’

    गुरदासपुर से सेवानिवृत्त सुबेदार एस.पी. सिंह ने कहा कि छह किसानों को हिरासत में लिया गया है क्योंकि वो अपने पदक लौटाने के लिए पिछले हफ़्ते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने की कोशिश कर रहे थे.

    पटियाला से सेवानिवृत्त हवलदार बरतार सिंह का आरोप है कि पूर्व सैन्यकर्मियों के एक समूह को पूरे दो दिनों के लिए हिरासत में लिया गया और उनका फ़ोन और अन्य सामान ज़ब्त कर लिया गया. हम इन काले क़ानूनों के विरोध में अपने पदकों का त्याग करना चाहते हैं. इसी मक़सद से हम गुरुवार को राष्ट्रपति भवन गए थे.

    हरियाणा से सेवानिवृत्त नायक कपिल देव कहते हैं कि सरकार ने विरोध प्रदर्शनकारियों के साथ जो व्यवहार किया था उससे किसानों और पूर्व सैन्यकर्मियों और सेना के जवानों के परिवार को बहुत दुख हुआ था.

    वह कहते हैं कि ये पदक मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि वीरता के लिए दिए गए थे. लेकिन, सेना के जवान किसानों के बेहतर भविष्य के लिए इन्हें वापस करने को तैयार हैं.

    झज्जर से आए सेवानिवृत्त हवलदार सुरैश कुमार दहिया का कहना है कि सिर्फ़ किसान और जवान ही देश को आगे ले जा सकते हैं और सरकार ने हम सभी को नीचा दिखाया है.

    उनका कहना है कि किसानों पर ये क़ानून स्वीकार करने के लिए दबाव डाला जा रहा है जो तबाही की तरफ़ ले जाएगा.

  10. किसान आंदोलन से जुड़ी आठ बातें जिन्हें जानना ज़रूरी है

  11. सरकार क़ानून रद्द करने पर तैयार नहीं, किसानों का आंदोलन हुआ तेज़

    कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसान मंडियों में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें उम्मीद है कि किसान संगठन तीनों कृषि क़ानूनों के फ़ायदे समझेंगे और सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार होंगे.

    विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कृषि क़ानूनों में संशोधन के सरकार के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया था. संगठनों का कहना है कि वो कृषि क़ानूनों को रद्द करने के अलावा कुछ और स्वीकार नहीं करेंगे.

    लेकिन, कृषि मंत्री ने हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘सुधार जारी रहेंगे. उदाहरण के लिए आप अनुबंध आधारित खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) को लें. इसका उद्देश्य उनकी उपज की कीमत की गारंटी सुरक्षित करना, उनकी खेती की ज़मीन की सुरक्षा, निजी निवेश को बढ़ाना और वैश्विक रूप से पालन की जाने वाली कृषि पद्धतियों के मसलों को हल करना है.’’

    कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार जो कुछ कर सकती है वो करेगी.

    नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया, ‘‘हमने संशोधनों के ज़रिए भी ऐसा करने की कोशिश की.ऐसा करना हमारा कर्तव्य है. ये सुधार प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए हैं. अभी तक सिर्फ़ लाइसेंस प्राप्त व्यापारी ही मंडी में ख़रीदारी कर सकते थे लेकिन अब सभी कर सकते हैं. प्रतियोगिता बढ़ने से किसानों को अच्छी क़ीमत मिलेगी.’’

    उन्होंने इस बात को आधारहीन बताया कि बड़ी-बड़ी कंपनियां किसानों की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लेंगी.

    उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और कर्नाटक में अनुबंध आधारित खेती पहले से ही चल रही है. किसी की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया गया. इस क़ानून में हमने प्रावधान किया है कि किसान अनुबंध से बाहर आ सकते हैं लेकिन ख़रीदार ऐसा नहीं कर सकता. वो अनुबंध नहीं छोड़ सकता और अगर वो ऐसा करता है तो उसे 150 प्रतिशत जुर्माना भरना होगा.’’

    ये पूछे जाने पर कि इस विरोध प्रदर्शन के चुनावी प्रभाव को लेकर क्या बीजेपी में किसी तरह की चिंता है.

    कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘ऐसा होना स्वाभाविक है कि जब हम कुछ अच्छा करने निकलते हैं तो एक संघर्ष और दर्द का दौर आता है. इतिहास वो ही बनाते हैं जो इतिहास से आगे निकल जाते हैं.’’

    नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को हरियाणा से आए किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की थी. इन किसानों ने तीनों कृषि क़ानूनों का समर्थन किया है. उनका कहना है तीनों क़ानून रद्द होने पर वो कई मौक़े खो देंगे. अगर कृषि क़ानूनों को निरस्त किया गया तो वो विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे.

    हरियाणा के करनाल में प्राकृतिक खेती समाज के जगत राम ने कहा, ‘‘हम किसान उत्पादक संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रगतिशील किसान हैं. सुधार हमारे लिए बड़े अवसर लाएंगे. हमारी आवाज़ भी मायने रखनी चाहिए.’’

    वहीं, विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने अपना आंदोलन तेज़ करने की चेतावनी दी है. इसे देखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर हज़ारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

    पुलिस ने विरोध प्रदर्शनकारियों को दिल्ली से आगरा जाने वाली मुख्य हाइवे को जाम करने से रोका. बड़ी संख्या में किसानों ने कई जगहों पर टोल प्लाज़ा शुल्क फ्री भी करवाए.

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि किसान संगठनों के नेता 14 दिसंबर को भूख हड़ताल पर बैठेंगे.

    किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने बताया, ‘‘हज़ारों किसान राजस्थान में शाहजहांपुर से सुबह 11 बजे मार्च शुरू करेंगे और जयपुर-दिल्ली हाइवे जाम कर देंगे.’’

    इस बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में तीनों कृषि क़ानूनों को समझाने के लिए 100 से ज़्यादा प्रेस कॉन्फ्रेंस और 700 किसान बैठकें करने की घोषणा की है.

    कृषि मंत्री ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से समाधान खोजने के लिए बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की. किसानों और सरकार के बीच अंतिम बैठक नौ दिसंबर को हुई थी.

    पुलिस के मुताबिक किसान संगठनों के टोल प्लाज़ा शुल्क फ्री करने की चेतावनी के बाद उत्तर प्रदेश में पुलिस ने कई किसान नेताओं को उनके घरों में ही रोक दिया.

    उन्होंने बताया कि राज्य भर में राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर लगभग 130 टोल प्लाज़ा पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई थी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि कोई सड़क बंद ना की जाए. यूपी के पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी ने कहा कि कहीं भी कोई हिंसा नहीं हुई और शांति बनी रही.

    मेरठ में एक किसान नेता चौधरी दिवाकर सिंह ने कहा कि उन्हें शनिवार को अमरोहा के फरीदपुर गांव में घर में नज़रबंद किया गया था. इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उनके ज़िले में यात्रा के दौरान उनसे मिलने का समय लेने के लिए मुरादाबाद में ज़िला न्यायाधीश को फोन किया था.

  12. किसान ट्रैक्टर से गणतंत्र दिवस की परेड में पहुँच जाएंगे: राकेश टिकैत

  13. किसानों ने दर्जनों टोल प्लाज़ा को किया शुल्क फ़्री, टकराव की आशंका

    कृषि क़ानूनों के विरोध में किसानों के समूहों ने शनिवार को देशभर में 165 जगहों पर टोल प्लाज़ा शुल्क फ्री करवाए. इसमें देश के बड़े हाइवे भी शामिल हैं, जहां गाड़ियां बिना टोल दिए गुजरती रहीं.

    किसानों ने अलग-अलग जगहों पर टोल प्लाज़ा पर धरना दिया, बैरियर तोड़ा और उन्हें दिन भर मुफ़्त करवाया.

    किसानों ने सरकार का संशोधनों का प्रस्ताव ख़ारिज करने के बाद विरोध प्रदर्शन तेज़ करते हुए टोल प्लाज़ा फ्री करवाने की चेतावनी दी थी.

    वहीं, शनिवार शाम को राजस्थान से किसानों का एक छोटा समूह हरियाणा के रेवाड़ी में दिल्ली-जयपुर हाइवे जाम करने के लिए निकल पड़ा और रविवार सुबह दिल्ली में मार्च के लिए हज़ारों लोग राजस्थान सीमा पर पहुंच गए हैं.

    आज से किसान संगठन दिल्ली-जयपुर हाइवे जाम करने वाले हैं.

    दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शनों का ये 17वां दिन है. संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हज़ारों किसान हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगने वाली सीमाओं पर मौजूद हैं.

    सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई सहमति ना बनने पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन को और बढ़ाने की चेतावनी दी थी.

    मंगलवार को सरकार की तरफ से कृषि क़ानूनों में संशोधनों के साथ एक प्रस्ताव दिया गया था लेकिन किसान संगठनों ने इसे खारिज कर दिया था.

    किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने सिंघु बॉर्डर पर एक प्रेस कांफ्रेंस मे कहा, ‘‘अगर सरकार हमें बुलाती है तो हम बातचीत के लिए जाएंगे लेकिन बातचीत का केंद्र तीनों कृषि क़ानूनों को होना चाहिए. जब तक ये तीनों क़ानून रद्द नहीं किए जाएंगे, हम अन्य मुद्दों पर बातचीत नहीं करेंगे.’’

    उन्होंने ये भी बताया कि उनकी मांगे ना मानी जाने पर किसान यूनियनों के नेता सोमवार को एक दिन की भूख हड़ताल पर जाएंगे.

    अखिल भारतीय किसान सभा के मुताबिक राज्यों में 450 टोल बूथ में से 165 पर टोल प्लाज़ा फ्री किए गए.

    अक्टूबर में तीनों कृषि क़ानून पास होने के बाद से पंजाब में सभी टोल प्लाज़ा फ्री कर दिए गए हैं.

    हरियाणा में किसानों ने 20 जगहों पर टोल प्लाज़ा पर धरना दिया और बीजेपी विरोध नारे लगाए. साथ ही उन्होंने रिलायंस समूह के पेट्रोल पंप और मॉल पर भी धरना दिया.

    हरियाणा भारतीय किसान यूनियन (टिकैट) के अध्यक्ष रतन मान ने द हिंदू अख़बार से कहा, ‘‘हरियाणा में लगभग सभी टोल प्लाज़ा पर किसानों ने धरना दिया. अंबाला-हिसार हाइवे पर किसानों के समूह सुबह से इकट्ठा होना शुरू हो गए. इसके अलावा हमने हिसार ज़िले में दिल्ली, राजगढ़, सिरसा और चंडीगढ़ जाने वाली सड़कों पर सभी टोल प्लाज़ा पर धरना दिया.’’

  14. नमस्कार!

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