अमरीका में कोरोना वैक्सीनेशन सोमवार से शुरू होगा - आज की बड़ी ख़बरें

अधिकारियों का कहना है कि वैक्सीन के पहले तीस लाख डोज़ जल्द ही सारे राज्यों में पहुंचा दिए जाएंगे.

लाइव कवरेज

  1. अमरीका में कोरोना वैक्सीनेशन सोमवार से शुरू होगा

    वैक्सीन

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    अमरीकी जनता को सोमवार से फ़ाइज़र/बायोएनटेक कोरोना वैक्सीन मिलने लगेगी.

    अधिकारियों का कहना है कि वैक्सीन के पहले तीस लाख डोज़ जल्द ही सारे राज्यों में पहुंचा दिए जाएंगे.

    फ़ाइज़र/बायोएनटेक वैक्सीन, कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ 95 प्रतिशत तक असरदार है और फू़ड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इसे सुरक्षित बताया है.

    एफडीए के मुताबिक ये बेहद महत्वपूर्ण है कि कोरोना संकट के बीच इसे इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिल गई है.

    एफडीए पर काफी दबाव था जिसकी वजह से शुक्रवार को फ़ाइज़र/बायोएनटेक कोरोना वैक्सीन को इस्तेमाल के लिए आपात मंज़ूरी देना पड़ी.

    अधिकारियों को उम्मीद है कि कोरोना वायरस को मात देने वाली इस वैक्सीन को सुरक्षित तरीके से तमाम राज्यों में पहुंचा दिया जाएगा.

  2. किसानों के साथ अगले दौर की बातचीत की कोशिश जारी : केंद्रीय मंत्री

    प्रदर्शनकारी किसान

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    नए कृषि क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारी किसानों के नेताओं के साथ बातचीत में शामिल रहे केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने कहा है कि अगले दौर की बातचीत की कोशिश जारी है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सोम प्रकाश ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ प्रदर्शनकारी किसानों के बारे में विचार-विमर्श करके कहा है कि हम जल्द ही मीटिंग करने की कोशिश कर रहे हैं, तारीख़ अभी तय नहीं हुई है.

    उन्होंने कहा, ''आख़िरकार इस मुद्दे को हमें संवाद से ही हल करना है, दूसरा कोई रास्ता नहीं है. किसान इस बात को जानते हैं, हम भी इस बात को जानते हैं.''

    उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार किसानों के साथ किसी भी वक्त विचार-विमर्श के लिए तैयार है.

    समाचार एजेंसी एनआई के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के नेताओं से मुलाक़ात की है.

    दिल्ली की सीमाओं पर बीते 16 दिन से हज़ारों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें अधिकतर किसान पंजाब के हैं जो नए कृषि क़ानूनों को 'कार्पोरेट्स के हित में' बताकर उन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

    अभी तक प्रदर्शनकारी नेताओं और सरकार के बीच अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है जिसका कोई नतीजा नहीं निकला है.

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर

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    इमेज कैप्शन, भारतीय किसान यूनियन के नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर
  3. भारत पेरिस समझौते के लक्ष्य को हासिल करने के ट्रैक पर - नरेंद्र मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु महत्वकांक्षा शिखर सम्मेलन, 2020 में कहा है कि भारत न सिर्फ पेरिस समझौते के लक्ष्य को हासिल करने के ट्रैक पर है बल्कि उम्मीदों से बढ़कर उन पर काम कर रहा है.

    उन्होंने कहा कि आज जब हम और ऊंचाई की तरफ देख रहे है तब हमें अपने अतीत को नहीं भूलना चाहिए. हमें सिर्फ़ एक बार फिर अपनी महत्वकांक्षा की समीक्षा नहीं करनी चाहिए बल्कि अपनी उपलब्धियों की भी समीक्षा करनी चाहिए.

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  4. ब्रेकिंग न्यूज़, केरल के सीएम बोले, नागरिकों के फ्री में देंगे कोरोना वैक्सीन

    केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि राज्य के नागरिकों के मुफ्त में कोरोना की वैक्सीन दी जाएगी.

    भारत कोरोना वैक्सीन स्टोर करने के लिए कोल्ड स्टोरेज तैयार करने की प्रक्रिया में जुटा है.

    कोविड-19 के वैक्सीन कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री को सलाह देने वाली समिति के प्रमुख वीके पॉल का कहना है कि लगभग चार कोरोना वैक्सीन तैयार होने की कगार पर हैं.

    हालांकि अभी भी सरकार की ओर से औपचारिक तौर पर वैक्सीन की क़ीमत को लेकर विचार-विमर्श किया जाना है.

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  5. बीबीसी इंडिया बोल- सरकार और किसानों के बीच कैसे बनेगी बात?

    किसान आंदोलन का मुद्दा आख़िर सुलझ क्यों नहीं पा रहा है? सरकार और किसानों के बीच कैसे बनेगी बात?

    आज इंडिया बोल में इसी मुद्दे पर चर्चा सुनिए, मोहनलाल शर्मा के साथ.

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, माओवादी, नक्सल ताकतें किसान आंदोलन को चला रही हैं - पीयूष गोयल

    रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अगर किसान आंदोलन माओवादी और नक्सल ताकतों से मुक्त हो जाएं तो किसान सरकार की बात ज़रूर समझेंगे.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को ये पता चलेगा कि ये क़ानून उनके और देश के हित में हैं.

    उन्होंने कहा कि इसके बाद भी अगर उन्हें कोई संदेह हो तो भारत सरकार के द्वार चौबीसों घंटे किसानों के लिए खुले हैं, हर मुद्दे पर और हर प्रावधान पर बातचीत होनी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि कभी भी कोई समाधान इस प्रकार नहीं निकलता है कि बस एक बात करो और उठ जाओ. इसलिए हमको अब ध्यान में आ रहा है कि शायद ये आंदोलन अब किसानों के हाथ से निकल चुका है. उनके कंधे से माओवादी और नक्सल ताकतें आंदोलन को चला रही हैं.

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    उन्होंने कहा सबका विश्वास होता है कि लीडर उनका ध्यान रखेंगे पर शायद यहां ऐसे लीडर हैं ही नहीं. ऐसा डर का माहौल इन नक्सल लोगों ने बना दिया है कि जो किसान नेता असल मुद्दों की बात करना भी चाहते हैं तो किसी में हिम्मत ही नहीं बन पा रही है क्योंकि ये डरा देते हैं.

    उन्होंने कहा हमें किसानों पर भरोसा है, वो शांतिप्रिय हैं और हमारे अन्नदाता हैं. हम उनकी इज़्ज़त करते हैं और हमें भरोसा है कि वो माओवादियों और नक्सलियों को देश के लोगों प्रभावित नहीं करते देंगे.

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  7. एपीएमसी क्या है और किसान इसकी बात क्यों कर रहे हैं?

    किसानों का विरोध प्रदर्शन

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    किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था लागू हुई थी. अगर बाज़ार में क़ीमतें गिरने लगती हैं तो भी सरकार को कृषि उत्पाद एमएसपी पर ख़रीदनी होती है. इससे किसानों को वित्तीय नुकसान नहीं होता है. एक कृषि उत्पाद का एमएसपी देश भर में एक समान होता है.

    कृषि मंत्रालय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की आंकड़ों के हिसाब से एमएसपी निर्धारित करता है. मौजूदा समय में सरकार 23 फसलों की ख़रीद एमएसपी के हिसाब से करती है. हालांकि किसानों को कहना है कि सरकार गेहूं और धान के भंडारण के लिए बड़े पैमाने पर ख़रीद करती है और इन दोनों फ़सलों के अलावा शायद ही कोई फसल वे एमएसपी पर बेच पाते हैं. खुले बाज़ार में तो और भी नहीं.

    केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों के चलते अब किसान एपीएमसी मंडी के बाहर खुले बाज़ार में अपना उत्पाद किसी भी क़ीमत पर बेच पाएंगे. लेकिन किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी चाहते हैं.

    किसानों को आशंका है कि अगर एमएसपी की गारंटी नहीं होगी तो निजी कंपनियां किसानों को क़ीमतें कम करने पर मज़बूर कर सकती हैं. किसानों का आरोप है कि ये क़ानून एमएसपी को ख़त्म करने की दिशा में पहला क़दम है हालांकि सरकार इससे इनकार कर रही है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि एमएसपी को समाप्त नहीं किया जाएगा और सरकारी ख़रीद भी जारी रहेगी. लेकिन सरकार यह भरोसा लिखित में देने को तैयार नहीं है.

    सरकार का कहना है कि पहले के क़ानूनों में भी एमएसपी की बात शामिल नहीं थी, इसलिए अब इसे क्यों शामिल किया जाए.

    लेकिन अब यह दोनों पक्षों की बातचीत में बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है.

    बीबीसी संवाददाता मयूरेश कोन्नूर की रिपोर्ट 'किसान आंदोलन से जुड़ी आठ बातें' पढ़िए यहां

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, 14 तारीख को अनशन पर बैठेंगे किसान नेता

    संयुक्त किसान आंदोलन के नेता कमल प्रीत सिंह पन्नू ने कहा है कि सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधि और अध्यक्ष 14 तारीख को एक दिन के अनशन पर बैठेंगे.

    साथ ही उन्होंने कहा कि 13 तारीख को शाहजहांपुर पर जयपुर-दिल्ली रोड को रोकने के लिए हज़ारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर मार्च करेंगे

    उन्होंने महिलाओं से भी आंदोलन में शरीक होने का आग्रह किया और कहा कि “उनके रहने, ठहरने और टॉयलेट का प्रबंध करने के बाद हम उन्हें इस आंदोलन में शामिल किया जाएगा.“

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    किसान नेता गुरनामं सिंह चढूनी ने कहा कि पंजाब से दिल्ली आ रहे ट्रैक्टर ट्रॉलियों को रोका जा रहा है. उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों को रोका न जाए.

    उन्होंने कहा, “अगर 19 दिसंबर तक सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो गुरु तेग बहादुर के शहादत दिवस से हम भूख हड़ताल शुरू करेंगे.”

    किसान नेताओं ने कहा है कि सरकार से बातचीत के लिए वो तैयार हैं लेकिन सरकार को पहले तीनों कृषि क़ानून हटाने होंगे.

  9. किसान आंदोलन कब तक चलने वाला है?

    नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान हटने को तैयार नहीं हैं.

    भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि यह आंदोलन 26 जनवरी तक चल सकता है.

    बीबीसी के सहयोगी समीरात्मज मिश्र से बातचीत में उन्होंने किसान आंदोलन को लेकर विस्तार से बात की.

    वीडियो कैप्शन, किसान आंदोलन कब तक चलने वाला है?
  10. ममता सरकार क़ानून के राज से दूर - राज्यपाल जगदीप धनकड़

    जगदीप धनखड़

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    पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने कहा है कि राज्य में ममता बनर्जी की सरकार लगातार क़ानून के राज और संविधान से दूर होती जा रही है. उन्होंने इसके लिए सरकार को चेताया भी है.

    उन्होंने यह भी कहा कि वो अगले साल राज्य में होने वाले चुनाव को निष्पक्ष और हिंसा मुक्त रखने के लिए काम करेंगे.

    उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “संविधानिक मापदंडों का पालन होना चाहिए. ममता बनर्जी की सरकार लगातार क़ानून के राज और भारत के संविधान से दूर होती जा रही है. मैं उन्हें चेतावनी देता रहा हूँ.”

    उन्होंने आगे कहा, “पुलिस प्रशासन राजनीति के हिसाब से काम कर रही है. वे राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरह राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होते हैं. यह गलत चलन है.”

    पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारियों ने उनकी सलाह पर ध्यान दिया है.

    लेकिन राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने कहा है कि, “मैंने कुछ को इन गतिविधियों में गहरे रूप से शामिल पाया है. वे सत्तारूढ़ व्यवस्था के वर्चुअल तौर पर सहभागी है.”

    गुरुवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए पत्थरबाजी के बाद राज्यपाल ने केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी है.

    उन्होंने इस घटना की ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कलंक’ कहते हुएनिंदा की है.

  11. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के बारे में क्या कहा?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों पर एक बार फिर बयान दिया है. FICCI की वार्षिक आम बैठक में उन्होंने कहा कि नए सुधारों से कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश आएगा.

    पीएम मोदी ने कहा कि कृषि कानूनों में सुधार से किसानों को फ़ायदा होगा.

    वीडियो कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के बारे में क्या कहा?
  12. किसानों के समर्थन में आई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, की दिल्ली कूच की अपील

    राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि जिस वक्त तीनों कृषि बिल लोकसभा में पास किए गए उस वक्त मैं वहीं नहीं था, वहां होता तो विरोध करता.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार नागौर से सांसद बेनीवाल ने कहा कि कृषि बिल पास होने वाले दिन लोकसभा में होता तो जिस तरह शिरोमणी अकाली दल ने इसका विरोध किया, एनडीए का सहयोगी होने के बाद भी मैं बिल का विरोध करता और उसे फाड़ देता.

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    जयपुर के कोटपूतली में हनुमान बेनीवाल ने किसानों को सम्बोधित किया और कहा कि पार्टी किसानों के साथ खड़ी है.

    उन्होंने किसानों से दिल्ली बॉर्डर की तरफ कूच करने की अपील की और कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी.

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  13. सरकार और किसानों के बीच क्या अब सुलह हो सकती है?

    किसानों का विरोध प्रदर्शन

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    भारत सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष अपने रुख़ में बदलाव करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं.

    किसान तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और सरकार ने अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वह तीनों क़ानूनों को रद्द करने की मांग को स्वीकार करेगी.

    ऐसे में प्रश्न उठता है कि आख़िर ये संघर्ष कब तक चलता रहेगा. क्योंकि गिरते तापमान और कोरोना के ख़तरे को देखते हुए प्रदर्शनकारियों के लिए आगे के दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं.

    किरती किसान संघ के नेता राजिंदर सिंह ने इन क़ानूनों को कोरोनो से ख़तरनाक़ करार देते हुए प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है.

    बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “किसान संगठनों के बीच किसी तरह से बीच का रास्ता निकालने की बात नहीं हो रही है और हमें मौसम की परवाह नहीं है. जहां तक रही कोरोना की बात तो ये क़ानून कोरोना से ज़्यादा ख़तरनाक हैं. हम कोरोना को झेल लेंगे लेकिन इन क़ानूनों को नहीं झेल सकते हैं और इन्हें निरस्त कराने के लिए लड़ाई निरंतर जारी रहेगी. सभी एकमत हैं, सभी एकजुट हैं.”

    बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश की रिपोर्ट पढ़िए यहां.

  14. जयपुर-दिल्ली हाइवे पर बड़ी संख्या में किसान शाहजहांपुर टोल पर धरने पर बैठे

    मोहर सिंह मीणा

    राजस्थान के जयपुर से

    किसानों का विरोध

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    जयपुर-दिल्ली हाइवे पर बड़ी संख्या में किसान शाहजहांपुर टोल पर धरने पर बैठ गए हैं.

    प्रशासन ने धरने पर बैठे किसानों को पकड़कर जबरन उठाने का भी प्रयास किया. किसान ज़िद पर अड़े रहे जिसके बाद प्रशासन ने सख़्ती कर धरने से उठाया गया.

    वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल अपने समर्थकों के साथ कोटपूतली में क़रीब एक हज़ार किसानों के साथ सभा में दिल्ली कूच पर चर्चा करेंगे.

    जयपुर-दिल्ली हाइवे पर राजस्थान हरियाणा सीमा रेवाड़ी में सील कर दी गई. हरियाणा पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस तैनात है. इससे हाइवे पर वाहनों की क़तारें लग गईं.

    यहां हरियाणा और राजस्थान के किसान एकजुट हुए हैं और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी कर रहे हैं. इससे हाइवे पर यातायात भी प्रभावित हुआ है किसानों को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है. राज्य के कई ज़िलों में किसान संगठन टोल फ्री कर हाइवे जाम कर सकते हैं.

    इस सम्बंध राजस्थान इंटेलिजेंस ने भी सरकार को रिपोर्ट दी है. राजस्थान इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में राजस्थान के किसान संगठन टोल फ्री और हाइवे जाम करेंगे.

    श्रीगंगानगर में सूरतगढ़ रोड़ नेतेवाला टोल प्लाज़ा, श्रीगंगानगर-पदमपुर सड़क मार्ग 18 बीबी टोल प्लाज़ा, बीकानेर-सूरत हाइवे पर राजियासर टोल, हनुमान गढ़ में रतनपुर टोल प्लाज़ा संगरिया, बूंदी में रघुवीरपुरा टोल, गणेशपुरा टोल फ्री किए जाने प्रस्तावित हैं.

    हालांकि, राजस्थान के अन्य ज़िलों से बड़ा प्रदर्शन होने की सूचना नहीं है.

    राजस्थान में 14 दिसंबर को ज़िला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन दिए जाएंगे.

    किसानों का विरोध

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  15. उम्मीद है कि अंतिम दौर की बातचीत होगी और समाधान निकाल लिया जाएगा- दुष्यंत चौटाला

    हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि जिस तरह से केंद्र सरकार बातचीत कर रही है, उससे सरकार भी समाधान चाहती है. मुझे उम्मीद है कि 24 से 48 घंटे के भीतर केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच अंतिम दौर की बातचीत होगी और आखिरी नतीजे निकल आएंगे.

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    उन्होंने आगे कहा कि किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर उनके अधिकारों की रक्षा करना मेरी जिम्मेवारी है. मैंने केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलकर बातचीत की है. मुझे उम्मीद है कि आपसी सहमति से रास्ता निकाल लिया जाएगा और गतिरोध का समाधान निकाल लिया जाएगा.

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    इससे पहले दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि अगर वो किसानों के लिए MSP सुनिश्चित नहीं कर पाते हैं, तो पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

  16. ब्रेकिंग न्यूज़, विरोध भड़काने के आरोप में ईरान ने पत्रकार को दी फांसी

    रूहोल्लाह ज़ाम

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    ईरान ने एक पत्रकार को फांसी दे दी जिन पर एक मैसेजिंग एप के ज़रिए विरोध भड़काने का आरोप था.

    सरकारी मीडिया के मुताबिक़ रूहोल्लाह ज़ाम को शनिवार को फांसी दे दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा था.

    ये अभी तक स्पष्ट नहीं है कि फ्रांस में शरण लेकर रह रहे ज़ाम कैसे गिरफ़्तार हुए. बताया जा रहा है कि पिछले साल इराक़ जाने के बाद उन्हें गिरफ़्तार किया गया.

    ज़ाम अमादन्यूज़ नाम का एक सरकार विरोधी लोकप्रिय फोरम चलाते थे. ईरान ने अमादन्यूज़ पर 2017-18 के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया है.

    10 लाख से ज़्यादा फॉलोअर वाले अमादन्यूज़ ने मेसेजिंग एप टेलीग्राम पर विरोध प्रदर्शनों के वीडियो और ईरानी अधिकारियों के बारे में कई जानकारियां साझा की थी.

    ईरान सरकार ने इस नेटवर्क को बंद करवा दिया था लेकिन बाद में इसे किसी और नाम से शुरू किया गया.

    सुधारवादी इस्लामिक जानकार मोहम्मद अली ज़ाम के बेटे रूहोल्लाह को ईरान में सबसे गंभीर अपराध 'भ्रष्टाचार' का दोषी पाया गया था.

    हालांकि मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि ज़ाम अनुचित ट्रायल के शिकार हुए हैं जहां उनसे ज़बरदस्ती जुर्म कबूल करवाया गया.

    रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक़ कुछ दिन पहले फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने ज़ाम की मौत की सज़ा के फ़ैसले को ईरान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी पर गंभीर हमला बताया था.

    2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनावों के बाद ज़ाम को ईरान में कैद कर लिया गया था जिसके बाद वे फ्रांस में शरण पाने में कामयाब हुए थे.

    ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने पहले कहा था कि उन्होंने आधुनिक तकनीक और रचनात्मक तरीकों से विदेशी सीक्रेट सर्विस को झांसा देने में कामयाब हुए और उन्होंने ज़ाम को गिरफ्तार कर लिया.

    रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का आरोप था कि ज़ाम फ्रांस, इसराइल और अमेरिकी इंटेलिजेंस सर्विस की सुरक्षा में थे.

  17. राजस्थान, हरियाणा बॉर्डर पर किसानों का क्या है कहना

    अब राजस्थान और हरियाणा बॉर्डर पर भी किसान इकट्ठे होने लगे हैं और कल तक ये दिल्ली पहुँचेंगे.

    इन किसानों से बात कर रही हैं बीबीसी संवाददाता देवीना गुप्ता.

    कैमरे के पीछे हैं गुलशन कुमार.

  18. किसान आंदोलन: बीच सड़क पर पुश अप!

    बीबीसी हिंदी के समीरात्मज मिश्र और पीयूष नागपाल इस वक़्त गाज़ीपुर बॉर्डर पर मौजूद हैं और ये तस्वीरें भी वहीं की हैं.

    सर्दी के मौसम में शरीर में थोड़ी गर्मी लाने के लिए कुछ युवा पुश अप्स लगा रहे हैं तो कुछ नारे लगा रहे हैं.

    किसानों का विरोध प्रदर्शन
    किसानों का विरोध प्रदर्शन
    किसानों का विरोध प्रदर्शन
    किसानों का विरोध प्रदर्शन
  19. क्या है अंबाला, करनाल और आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस के टोल प्लाज़ा का हाल

    दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच किसानों ने कल देर रात हरियाणा के अंबाला और करनाल के टोल प्लाज़ा को बंद करवा दिया. इसके बाद सभी वाहन बिना टोल टैक्स दिए जाते रहे.

    अंबाला के शंभू टोल प्लाज़ा के इंचार्ज रवि तिवारी ने एएनआई न्यूज़ एजेंसी को बताया, “कल रात से वाहन बिना टैक्स दिए जा रहे हैं. कुछ किसान हमारे पास आए और हमें टोल प्लाज़ा बंद करने के लिए मजबूर किया. हमें अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है कि ऐसा कब तक चलेगा लेकिन किसानों का कहना है कि पूरा दिन टोल फ्री रहेगा.“

    वहीं, एएनआई के मुताबिक़ आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर सभी टोल प्लाज़ा पहले की तरह ही चल रहे हैं.

    एएसपी सत्यजीत गुप्ता ने एएनआई से कहा,“इस रास्ते पर पांच मुख्य टोल प्लाज़ा हैं और हमें अब तक किसी टोल प्लाज़ा को किसानों द्वारा ब्लॉक किए जाने की जानकारी नहीं मिली है. हम टोल प्लाज़ा पर नज़र रखे हुए हैं.”

  20. 60 करोड़ कोरोना वैक्सीन देने की भारत की क्या है तैयारी?

    वैक्सीन

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    भारत अपनी चुनाव मशिनरी का इस्तेमाल कोरोना वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए करेगा. छह से आठ महीने तक चलने वाले इस वैक्सीन प्रोग्राम के लिए देश भर में फैले कोल्ड स्टोरेज को इस्तेमाल में लाया जाएगा. कोरोना के सबसे ज्यादा जोखिम वाले साठ करोड़ लोगों को सबसे पहले कोरोना वैक्सीन दिए जाने की सरकार की योजना है.

    इस योजना की अगुवाई करने वाले अधिकारी ने शुक्रवार को इस बारे में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को जानकारी दी. वीके पॉल विशेषज्ञों के उस दल के मुखिया है जो कोविड-19 के वैक्सीन कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री को सलाह देती है.

    उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि सरकार ने 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर वैक्सीन स्टोर करने के लिए कोल्ड स्टोरेज तैयार कर लिए हैं.

    वीके पॉल ने बताया कि सरकार की मौजूदा तैयारी उन चार वैक्सीनों की जरूरतों को पूरा करती है जो लगभग बनकर तैयार हो चुके हैं.

    इंटरव्यू में उन्होंने बताया,“सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक, ज़ायडस और स्पुतनिक-वी जैसी चार वैक्सीनों के लिए सामान्य कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है. मैं इन वैक्सीनों के मामले में कोई समस्या नहीं पाता हूँ.”

    दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया एस्ट्राज़ेनेका की ओर से विकसित किए गई वैक्सीन कोविशिल्ड का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में लगी हुई है.

    जबकि भारत बायोटेक और ज़ायडस कैडिला अपनी वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है.

    पिछले महीने भारत की दवा कंपनी हेटेरो ने रूस की आरडीआईएफ़ से समझौता किया है. इस समझौते के तहत भारत में एक करोड़ रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी तैयारी की जाएगी.

    वीके पॉल ने बताया कि उम्मीद है कि वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए बहुत जल्द ही स्वतंत्र दवा नियामक अनुमति के लिए आवेदन करेंगे.

    हालांकि अभी भी सरकार की ओर से औपचारिक तौर पर वैक्सीन की क़ीमत को लेकर विचार-विमर्श किया जाना है.

    वीके पॉल कहते हैं,“भारतीय कंपनियों पता है कि सरकार उचित क़ीमत ही रखने के पक्ष में ही होगी.”