अमित शाह और किसान नेताओं की बातचीत बेनतीजा, कृषि क़ानून वापस लेने से इनकार

बुधवार को किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच होने वाली बैठक स्थगित. सरकार ने कहा, पहले भेजेगी लिखित प्रस्ताव.

लाइव कवरेज

  1. किसान प्रदर्शन: गीतों के ज़रिए विरोध करती महिलाएं

  2. ब्रिटिश सांसदों ने भारत में किसान आंदोलन का किया समर्थन

    वीडियो कैप्शन, ब्रिटेन के 36 सांसदों ने भारत में हो रहे किसानों के प्रदर्शनों को लेकर ब्रितानी विदेश मंत्री को एक चिट्ठी लिखी है.
  3. किसान संगठनों की अपील- समर्थन में आए राजनीतिक दल अपने झंडे-बैनर घर रखकर भारत बंद में आएं

    अरविंद केजरीवाल

    इमेज स्रोत, @ArvindKejriwal

    किसान संगठनों के अनुसार, अब तक कुल 24 राजनीतिक पार्टियाँ मंगलवार, 8 दिसंबर को बुलाये गये ‘भारत बंद’ के समर्थन की घोषणा कर चुकी हैं. लेकिन किसान नेताओं ने समर्थन में आये सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वो इस आंदोलन का राजनीतिक इस्तेमाल ना करें.

    किसानों की माँगों को सही ठहराते हुए कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों समेत क्षेत्रीय स्तर पर मज़बूत – डीएमके, टीआरएस, सपा, बसपा, आरजेडी, शिवसेना, एनसीपी, अकाली दल, आप, जेएमएम और गुपकर गठबंधन ने ‘भारत बंद’ का समर्थन किया है.

    सोमवार शाम को, प्रेस से बात करते हुए किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के अध्यक्ष दर्शन पाल सिंह ने कहा, “हम सभी राजनीतिक दलों का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने हमारी माँगों का समर्थन किया, उन्हें सही माना. पर हम उनसे अपील करेंगे कि मंगलवार को जब वो ‘भारत बंद’ के समर्थन में आयें, तो अपने झंडे-बैनर घर छोड़कर आयें, और सिर्फ़ किसानों का साथ दें.”

    इस बीच, गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिये हैं कि वो मंगलवार होने वाले भारत बंद के दौरान शांति और संयम बनाये रखें. साथ ही प्रयास करें कि लोग कोविड-19 की गाइडलाइंस का पालन करें.

    किसान नेताओं ने कहा है कि भारत बंद सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक प्रभावी रहेगा, लेकिन इमरजेंसी सेवाओं में किसी तरह की बाधा नहीं डाली जायेगी.

    किसान संगठनों ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी राजनीतिक पार्टी का इस आंदोलन पर कोई प्रभाव नहीं है. सोमवार को दर्शन पाल ने कहा कि “किसी राजनीतिक पार्टी ने किसान आंदोलन को हाइजैक नहीं किया है. ऐसा दावा करने वालों की बातों में कोई दम नहीं है.”

    वीडियो कैप्शन, किसान आंदोलन: सिंघु बॉर्डर पर कैसा माहौल है और किसान क्या सोच रहे हैं?

    उन्होंने कहा, “दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी सिंघु बॉर्डर का मुआयना करने आये थे, लेकिन हमने उन्हें अपना मंच नहीं दिया. हम 27 नवंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनस्थल पर एक आदमी नहीं मिलेगा जिसके बारे में आप बता सकें कि वो फलाँ पार्टी से फंड लेकर इस आंदोलन में शामिल हुआ है और हमारे मंच का इस्तेमाल कर रहा है.”

    बलबीर सिंह राजेवाल, जो भारतीय किसान यूनियन की एक इकाई को संभालते हैं, उन्होंने कहा कि “किसानों को सिर्फ़ राजनीतिक दलों से नहीं, बल्कि अन्य वर्गों से भी समर्थन मिल रहा है, जैसे- वर्कर और ट्रेडरों की यूनियन, वकीलों की यूनियन, रेलवे कर्मचारियों की यूनियन और रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों की यूनियन ने भी किसानों की माँगों का समर्थन किया है.”

    राजेवाल ने कहा, “दुनिया हमारा संघर्ष देख रही है. कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया – इन देशों में मौजूद भारतीयों ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किये हैं. हम सभी चाहते हैं कि तीनों नये कृषि क़ानून वापस लिये जायें.”

    किसान संगठनों ने सभी से अपील की है कि भारत बंद के समर्थन में हर जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शन होना चाहिए. उन्होंने कहा है कि सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे के बीच चक्का जाम किया जायेगा, सड़कें बंद की जायेंगी और दूध-सब्जियों की आपूर्ति को रोका जायेगा.

    किसान नेता जगजीत सिंह डालेवाल ने कहा है, “हम किसी तरह का टकराव नहीं चाहते. किसी पर भारत बंद के लिए दबाव बनाने की ज़रूरत नहीं है. हमें जानते हैं कि लोग स्वेच्छा से हमारे समर्थन में आ रहे हैं और वो समझ रहे हैं कि किसानों की माँगें क्या हैं.”

    किसानों और केंद्र सरकार के बीच अब तक पाँच चरण की वार्ता हो चुकी है. छठे चरण की बातचीत 9 दिसंबर यानी बुधवार को होनी है.

    किसान आंदोलन

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  4. बंद का कहां कितना असर

    बंद का कहां-कितना असर

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    उत्तर प्रदेशबीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश में कृषि क़ानूनों के विरोध में किसान संगठनों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है, जिसे समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है. इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने ज़िलों के अधिकारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. सोमवार को गृह विभाग ने डीजीपी को पत्र लिखकर दुकानें जबरन बंद कराने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के निर्देश दिए. डीजीपी ने राज्य के सभी ज़िलों के पुलिस कप्तानों को पत्र लिखकर आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने वालों से सख़्ती से निपटने के भी निर्देश दिए हैं.

    बिहार – बीबीसी की सहयोगी पत्रकार सीटू तिवारी के मुताबिक़,बिहार में 77 फ़ीसदी कार्यबल खेती किसानी से जुड़ा है, ऐसे में इस बंद को ऐतिहासिक और सफल बनाने की कोशिश तमाम किसान संगठन और महागठबंध के दल कर रहे हैं. महागठबंध के वामपंथी दलों के साथ राजद और कांग्रेस भी इस बंद को समर्थन दे रहे हैं. बंद के समर्थन में वो सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी करेंगे. इसके अलावा बिहार राज्य किसान सभा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले भी तमाम किसान संगठन प्रदर्शन करेंगे. बिहार में तीनों कृषि क़ानूनों के प्रति किसानों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और 2006 में नीतीश कुमार ने जो मंडी सिस्टम ख़त्म कर दिया था, उसे तमाम किसान संगठन और महागठबंधन के दल बहस में लाने की कोशिश कर रहे हैं.

    पश्चिम बंगाल – बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अमिताभ भट्टासाली के मुताबिक़, पश्चिम बंगाल में वामदल और कांग्रेस भारत बंद के समर्थन में सड़कों पर तो उतरेंगे ही, साथ ही रेल और रास्ता भी रोका जाएगा. तृणमूल कांग्रेस ने इस बंद को सिर्फ नैतिक समर्थन दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि किसानों के आंदोलन के साथ वो पूरी तरह से हैं, लेकिन उनकी पार्टी बंद जैसे कार्यक्रम का समर्थन नहीं करती, इसलिए पश्चिम बंगाल में बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि ग्रामीण इलाकों में बंद का असर हो सकता है. क्योंकि ये भारत बंद सिर्फ चार घंटे के लिए है, इसलिए शहरी इलाकों में ज़्यादातर दफ्तर खुले रहेंगे और लोग बंद शुरू होने से पहले ही पहुंच जाएंगे.

    राजस्थान बीबीसी के सहयोगी पत्रकार मोहर सिंह मीना के मुताबिक़, भारत बंद को राजस्थान के किसान संगठन, ट्रेड यूनियन, कांग्रेस और एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने समर्थन दिया है. बंद के दौरान राजस्थान में अनाज और फल मंडियां और बाज़ार बंद रखने का आह्वान किया गया है. वहीं क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं. राजस्थान में भारत बंद का बड़ा असर देखने को मिल सकता है.

    दक्षिण भारत – बीबीसी के सहयोगी पत्रकार इमरान कुरैशी बताते हैं कि दक्षिण भारत में बंद का असर हो सकता है सिर्फ कर्नाटका में ही दिखे. क्योंकि केरल में आज ग्राम पंचायत चुनाव का पहला चरण होने वाला है. हालांकि ये चुनाव आज सिर्फ पांच ज़ीलों में होने वाला है. फिर भी अन्य ज़िलों में लोग दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव के काम में मशगूल हैं. आंध्रप्रदेश की सरकार कृषि क़ानूनों का समर्थन करती है तो वहां बंद का असर शायद नहीं दिखेगा. तमिलनाडु की सरकार भी इन क़ानूनों का समर्थन करती है, मगर वहां डीएमके और वाम दलों का प्रदर्शन बहुत ज़िलों में होने वाला है. तेलंगाना में दिलचस्प बात ये है कि आज तेलंगाना में बंद होगा और शायद वहां मुख्यमंत्री और टीआरएस पार्टी के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के बेटे और मंत्री के टी रामा राव और उनकी बेटी कविता भी इसमें शामिल हों. कर्नाटक और तमिलनाडु से कई किसान दिल्ली के प्रदर्शन में भी शामिल होने पहुंचे हैं.

  5. आंदोलनकारी किसानों का आज भारत बंद

    आज भारत बंद का एलान

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    किसानों ने आज यानी 8 दिसंबर को 'भारत बंद' का आह्वान किया है. कई राजनीतिक पार्टियों ने इस बंद को समर्थन दिया है.

    भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैट ने बताया कि बंद सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर तीन बजे तक जारी रहेगा.

    किसान संगठनों का कहना है कि ये बंद देश के हर हिस्से में सफल रहेगा. किसान नेता बलवीर सिंह राजोवाल ने बताया ये बंद सुबह से लेकर शाम तक होगा. हालांकि चक्काजाम दोपहर तीन बजे ख़त्म हो जाएगा. उन्होंने बताया कि बंद में दूध-सब्ज़ी की सप्लाई बंद रखने का आह्वान किया गया है. हालांकि अस्पताल, एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं और यहां तक कि शादी-ब्याह को भी नहीं रोका जाएगा.

    इस बंद के लिए किसानों को 24 विपक्षी पार्टियों का सहयोग हासिल है. सोमवार को सिंघु बॉर्डर और किसानों के दूसरे प्रदर्शन स्थल पर नेताओं का आना-जाना जारी रहा.

    सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच अब तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है. लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है. हालांकि सरकार ने कहा है कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर आशंका ग़लत है. सरकार ने ये भी संकेत दिया है कि वो क़ानूनों में तो कुछ फेरबदल करने को तो तैयार है, लेकिन क़ानून को निरस्त करने पर अब तक किसी तरह की बात सरकार की ओर से सामने नहीं आई है.

    किसानों का कहना है कि तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द किए बिना वो आंदोलन वापस नहीं लेंगे. सरकार के साथ उनकी अगली बातचीत 9 दिसंबर यानी बुधवार को होनी है. सरकार ने किसान नेताओं से शनिवार को हुई बैठक के बाद कहा था कि अगली बातचीत से पहले वो एक मसौदा किसानों को 7 दिसंबर तक भेज देंगे. लेकिन किसानों ने कहा कि वो अभी तक उनके पास नहीं पहुंचा है.

  6. नमस्कार!

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