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अमित शाह और किसान नेताओं की बातचीत बेनतीजा, कृषि क़ानून वापस लेने से इनकार

बुधवार को किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच होने वाली बैठक स्थगित. सरकार ने कहा, पहले भेजेगी लिखित प्रस्ताव.

लाइव कवरेज

  1. असम में दिखा बंद का व्यापक असर

    दिलीप कुमार शर्मा

    गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए

    मोदी सरकार के नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलनकारी किसानों द्वारा मंगलवार को बुलाए गए भारत बंद का असम के गुवाहाटी, जोरहाट जैसे बड़े शहरों समेत समूचे राज्य में व्यापक असर देखने को मिल रहा है.

    ऐसी चर्चा थी कि बीजेपी शासित राज्यों में बंद का प्रभाव कम होगा लेकिन सुबह से ही दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं.

    किसानों के समर्थन में कृषक मुक्ति संग्राम समिति, सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन समेत स्थानीय किसानों के संगठनों ने विरोध रैली निकाली और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.

    किसान नेता तपन फुकन ने बीबीसी से कहा, "आंदोलनकारी किसान इतनी मुसीबतें झेल कर सरकार को समझाने की कोशिश कर रहें है लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद भी सरकार ने कोई सुनवाई नही की. असम के धान की क़ीमत यहां की सरकार ने 1835 रुपए प्रति क्विंटल तय की थी लेकिन किसानों को 1200 से 1300 रुपए ही मिल रहें है. बीजेपी सरकार लगातार किसान विरोधी काम कर रहीं है. सरकार जब तक तीनों क़ानून ख़ारिज नहीं करती हम विरोध करते रहेंगे."

    असम में कांग्रेस, एआईयूडीएफ़ और वामपंथी दलों सहित 13 विपक्षी दलों ने देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया है.

  2. कानपुर में दिखा बंद का मिलाजुला असर

    अंकित शुक्ल

    कानपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

    किसान संगठनों के बुलाए गए भारत बंद का असर यूपी के प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर में ख़ास नज़र नहीं आया.

    शहर के प्रमुख थोक और फुटकर बाज़ारों से जुड़े व्यापारी संगठनों ने बंदी को समर्थन नहीं दिया था.

    हालांकि, किराना बाज़ार से जुड़े व्यापार मंडल ने दो घंटे के लिए बंद का एलान किया था.

    शहर की नौबस्ता गल्लामंडी में बंद का असर दिखा है जहां आढ़तियों ने कारोबार पूरी तरह से बंद रखा है.

    शहर के प्रमुख बाज़ार मेस्टनरोड, नौघड़ा, पीपीएन मार्केट, कलक्टरगंज, नवीन मार्केट आम दिनों की तरह की खुले रहे.

    हालांकि, मंगलवार होने की वजह से कुछ बाज़ारों में पहले ही साप्ताहिक बंदी होती है.

    वहीं, भारत बंद के समर्थन में राजनीतिक पार्टियोंं के प्रतिनिधियों के घर पर पुलिस ने सुबह से ही पहरा बैठा दिया है.

    सपा और कांग्रेस के नेताओं को उनके घरों में नज़रबंद करने के लिए पुलिस तैनात की गई है.

    इसके बाद भी कुछ सपा कार्यकर्ताओं ने हाईवे को जाम करने का प्रयास किया जिसे पुलिस ने बलपूर्वक रोका और सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया.

    कंफ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय सचिव पंकज अरोड़ा बताते हैं कि कानपुर के प्रमुख बाज़ारों को हमने खुला रखने का आह्वान किया है.

  3. मध्य प्रदेश में बंद का नहीं दिखा असर

    शुरैह नियाज़ी

    भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए

    मध्य प्रदेश में किसान संगठन द्वारा बुलाए गए बंद का असर कम देखने को मिला है.

    शहर के कुछ इलाक़ों में सिख समाज ने दुकानों को बंद कराने की कोशिश की लेकिन सरकार और प्रशासन की कोशिश रही कि शहर में किसी भी तरह का बंद न रहे.

    कुछ शहरों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता ज़रूर निकले और बंद को कामयाब बनाने का प्रयास किया.

    वहीं, भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कहा कि भारत बंद के दौरान राजधानी में स्थिति सामान्य है.

    सभी एसडीएम और अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण करने के आदेश दिए गए हैं.

    वहीं, शहर में किसी भी संगठन या व्यक्ति को धरना प्रदर्शन करने की इजाज़त नहीं दी गई है.

    उन्होंने यह भी कहा कि दुकान और बाज़ार बंद करवाने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर सख़्त कार्रवाई होगी.

    भीड़ एकत्रित करने और हंगामा करने वालों के ख़िलाफ़ कोरोना गाइडलाइन उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जाएगी.

  4. अमित शाह के साथ शाम सात बजे हमलोगों की बैठक है: राकेश टिकैत

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ किसान नेताओं को मुलाक़ात करने के लिए बुलाया है.

    भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अमित शाह के साथ शाम सात बजे उन लोगों की बैठक है.

    टिकैत ने कहा कि पहले वह सिंघु बॉर्डर जा रहे हैं और फिर वहां से कुछ किसान नेताओं के साथ अमित शाह से मिलने जाएंगे.

    राकेश टिकैत और यूपी के किसान पिछले कुछ दिनों से ग़ाज़ीपुर के पास यूपी-दिल्ली सीमा पर बैठे हुए हैं. उनका कहना है कि वह सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर बैठे पंजाब-हरियाणा के किसानों के समर्थन में हैं.

  5. वाराणसी में सैकड़ों प्रदर्शनकारी या तो हिरासत में हैं या नज़रबंद

    नीलांबुज तिवारी

    वाराणसी से, बीबीसी हिंदी के लिए

    किसानों के भारत बंद के समर्थन में वाराणसी में दर्जनों स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं.

    किसानों के समर्थन में रैली निकालने की योजना बनाने के आरोप में सैकड़ों लोगों को उनके घरों में नज़रबंद किया गया है और क़रीब चार दर्जन से ज़्यादा लोगों को विभिन्न थानों में हिरासत में रखा गया है.

    नए कृषि बिल के विरोध में मंगलवार दोपहर टाउनहॉल गांधी प्रतिमा से मलदहिया पटेल प्रतिमा तक पैदल मार्च की तैयारी कर रहे दर्जनों नेताओं को कोतवाली पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

    कोतवाली थाने में हिरासत में रखे गए कुंवर सुरेश सिंह ने बताया कि गांधी की चंपारण और सरदार पटेल की बारदोली किसान यात्रा की तर्ज़ पर वे भी मार्च निकालने की तैयारी कर रहे थे लेकिन पुलिस ने जुलूस में शामिल सभी लोगों को हिरासत में ले लिया.

    कोतवाली थानाध्यक्ष के मुताबिक़ 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है जबकि एक व्यक्ति को नज़रबंद किया गया है.

    आंदोलनकारियों के मुताबिक़ 'इस किसान आंदोलन से पूरा देश जुड़ा है. अन्नदाता संकट में हैं. ऐसे में जब तक काला कानून वापस नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा.'

    लंका थानाध्यक्ष के मुताबिक़ आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया है जबकि पाँच लोग हाउस अरेस्ट हैं.

    इस प्रकार बनारस के सभी थानों में किसान आंदोलनकारियों को हाउस अरेस्ट और नज़रबंद किया गया है.

    इसके बावजूद दर्जनों स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं. मंडियों में स्थानीय छोटे किसानों ने ख़रीद-फ़रोख़्त किया लेकिन बाहर से फल-सब्जियां नहीं आ पाई.

  6. बिहार में देशव्यापी बंद का व्यापक असर, 9 और 10 दिसंबर को भी होंगे प्रदर्शन

    सीटू तिवारी

    पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

    अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ भारत बंद का असर सुबह से ही बिहार के अलग-अलग हिस्सों में दिखने लगा.

    इस बंद को महागठबंधन के सभी घटक दलों (वामपंथी पार्टियां, राजद और काँग्रेस) के अलावा जन अधिकार पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का भी समर्थन है.

    इसका असर राज्य के लगभग सभी ज़िलों में देखने को मिला. सुबह नौ बजे से पहले ही भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने दरभंगा के लहेरियासराय स्टेशन पर गंगा सागर एक्सप्रेस के परिचालन को बाधित किया. सहरसा, सुपौल ज़िले में भी रेल परिचालन बाधित किया गया.

    अररिया में प्रदर्शन के दौरान काँग्रेसी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई.

    इधर आरा, अरवल में भी बंद समर्थकों ने प्रदर्शन किए तो नालंदा के हिलसा में भी राजद कार्यकर्ताओं ने फतुहा–इस्लामपुर रोड, जहानाबाद में काको मोड़ पर ट्रकों को रोककर प्रदर्शन किया.

    इसके अलावा एनएच-83 और एनएच-110 को भी जाम कर दिया गया. बांका में भागलपुर–दुमका मुख्य मार्ग, बांका–देवघर मार्ग, बांका–अमरपुर रोड प्रभावित रहे.

    ज़िले में मुख्य बाज़ार और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान सुबह तो खुले लेकिन दिन चढ़ने पर बंद समर्थकों की मौजूदगी की वजह से बंद कर दिए गए.

    पटना की बात करें तो यहाँ सुबह साढ़े 10 बजे के बाद से ही राजधानी के मुख्य चौराहों पर बंद समर्थकों के क़ाफ़िले दिखे.

    मुख्य प्रदर्शन पटना के डाक बंगला चौराहे पर हुआ जहां वामपंथी दलों के छात्र संगठनों ने गीत गाकर केन्द्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों का विरोध किया.

    जाप के पप्पू यादव ने अपने समर्थकों के साथ हल और अन्न की बालियां लेकर प्रदर्शन किया.

    वहीं डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे बंद समर्थकों ने सड़क पर लगे बीजेपी और जेडीयू के पोस्टरों को फाड़ दिया.

    भाकपा माले नेता सरोज चौबे ने डाक बंग्ला चौराहे पर प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए कहा, “ये बिल किसान को ग़ुलाम बनाने वाला और कॉरपोरेट पक्षी है. जन, जंगल, ज़मीन सब कुछ अडानी-अंबानी को दिया जा रहा है. और ये सिर्फ़ किसानों का नहीं बल्कि सभी नागरिकों का सवाल है.”

    बिहार राज्य किसान सभा के बैनर तले कई छोटे किसान संगठनों ने इस बंद में हिस्सा लिया.

    किसान सभा 8 दिसंबर के बंद के अलावा 9 और 10 दिसंबर को भी प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन करेगा.

    सभा के महासचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा, “अगर हमारी माँगे पूरी नहीं हुई तो ये आंदोलन तेज़ होगा. सरकार जब तक क़ानून वापस नहीं लेती हमारा आंदोलन जारी रहेगा.

  7. किसान आंदोलन में शामिल महिला किसानों की मुश्किलें

  8. किसानों के आंदोलन के समर्थन में कनाडा में भी सड़कों पर उतरे लोग

  9. नए कृषि क़ानूनों से जुड़ा पूरा विवाद क्या है?

  10. किसान आंदोलन से कैसे निपटेगी मोदी सरकार?

    नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का विरोध मंगलवार को पूरे भारत में फैल गया जब किसान संगठनों ने मोदी सरकार के साथ बेनतीजा बातचीत के बाद देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया.

    पूर्वी और पश्चिमी राज्यों में, किसानों ने सड़कों और रेलवे पटरियों पर जाम लगा दिया जिससे लोगों को काम पर पहुंचने में देरी हुई और जल्द ख़राब हो जाने वाले उत्पादों को बाज़ारों तक पहुँचने से रोका गया.

    दिल्ली के पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा के किसानों ने पिछले महीने से आंदोलन का मोर्चा संभाला हुआ है और राजधानी की सीमाओं पर कैंप लगा कर डटे हुए हैं.

    पंजाब के 66 वर्षीय किसान गुरविंदर सिंह ने कहा, “हम सरकार को नियमों में बदलाव नहीं करने देंगे क्योंकि वे बड़ी कंपनियों की जेब भरकर किसानों की आय को चोट पहुंचाना चाहते हैं.''

    सितंबर में लागू किए गए कृषि सुधार क़ानूनों ने फसल की बिक्री, मूल्य निर्धारण और भंडारण के नियमों में ढील दी जिनकी वजह से दशकों तक किसान मुक्त बाज़ार से वंचित रहे.

    फ़िलहाल किसान अपनी उपज सरकार द्वारा नियंत्रित थोक बाजारों में बेचते हैं, जिन्हें मंडी कहा जाता है.

    सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि इन सुधारों से किसानों की आय को नुक़सान नहीं होगा. सरकार और किसान संगठनों के बीच बुधवार को भी बातचीत होने वाली है.

    इस बीच, सोशल मीडिया की वजह से विदेशों में बसे भारतीय प्रवासियों के बीच किसानों के लिए सहानुभूति बढ़ी है. हाल ही में हज़ारों लोगों ने लंदन में भारतीय दूतावास के बाहर किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया.

    कोरोनोवायरस महामारी के बीच, नई दिल्ली के आसपास के विरोध स्थल शिविरों में बदल गए हैं जहां परिवार खाना पका रहे हैं, खुले में सो रहे हैं और सिख संगठन उन्हें फेस मास्क, पानी और भोजन मुहैया करा रहे हैं.

    कम से कम 20 क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विपक्षी दलों ने भारत बंद के आह्वान का समर्थन किया.

    गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को नाम न बताने की शर्त पर कहा, "अगर महामारी के दौरान कोई गंभीर अशांति होगी, तो और बुरा होने वाला है. उन्होंने बताया कि पुलिस को भीड़ हटाने के लिए वॉटर कैनन या आंसू गैस का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया गया है.

  11. विपक्षी पार्टियों का विरोध उनके दोहरे मानदंड को दिखाता है- प्रकाश जावडेकर

    केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मंगलवार को कहा कि जो विपक्षी पार्टियां कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग कर रही हैं, वे दोहरा मानदंड अपना रही हैं.

    पर्यावरण मंत्री जावडेकर ने कहा कि 'विपक्ष इन क़ानूनों को वापस लेने की मांग कर रहा है, ये उनका दोहरापन है क्योंकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने ही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को मंजूरी दी थी.कांग्रेस ने इन क़ानूनों का ज़िक्र अपने 2019 के घोषणापत्र में भी किया था.

    जावडेकर ने कहा कि 'किसानों ने लागत के लिए अतिरिक्त मूल्य पारिश्रमिक की मांग की थी और हम उन्हें लागत से 50 फ़ीसद ज़्यादा दे रहे हैं. कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में किसानों को कुछ भी नहीं दिया था.मोदी जी दे रहे हैं.'

    कई राजनीतिक पार्टियों जैसे कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति(टीआरएस), नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी(एनसीपी), शिवसेना, लेफ्ट और कई अन्य दलों ने किसानों के बुलाए भारत बंद को समर्थन दिया है. ये ‘भारत बंद ’मंगलवार को 11बजे से तीन बजे तक होगा.

    हज़ारों किसान 26 नवंबर से दिल्ली की अलग-अलग राज्य सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

    किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं लेकिन सभी बेनतीजा रहीं. पांचवे दौर की बातचीत के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने नौ दिसंबर को अगली बैठक बुलाई है.

  12. किसानों के भारत बंद में अब तक क्या हुआ?

    • किसानों ने नेशनल हाइवे नंबर 24 ब्लॉक कर दिया है. उनका कहना है कि वो 3 बजे तक हाइवे बंद रखेंगे.
    • मुंबई का सबसे बड़ा वाशी एग्रीकल्चरल मार्केट भारत बंद के समर्थन में आज बंद है. मुंबई में खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए यह सबसे बड़ा बाज़ार है.
    • लखनऊ का सबसे बड़ा फल और सब्ज़ी बाज़ार भी आज बंद है. बताया जाता है कि क़रीब पंद्रह हज़ार किसान यहाँ रोज़ अपनी फसल बेचने आते हैं.
    • बैकों की यूनियनों ने भी कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करती हैं.
    • दिल्ली पुलिस ने कहा है कि दिल्ली आने वाले यात्री नेशनल हाइवे नंबर 9, 19, 44 और 48 पर सफ़र करने से बचें. भारत बंद की वजह से इन रास्तों पर ट्रैफ़िक बाधित होने की संभावना है.
    • पंजाब में कांग्रेस पार्टी के विधायकों के साथ-साथ अकाली दल और आम आदमी पार्टी के विधायक भी किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करने की घोषणा कर चुके हैं. इन सभी दलों का कहना है कि किसानों की माँगें मानी जानी चाहिए.
    • तमिलनाडु भारत बंद का समर्थन नहीं कर रहा है. विपक्ष की अपील के बावजूद ट्रेडर यूनियनों ने बाज़ार खुले रखे हैं. बताया गया है कि वामपंथी दल मंगलवार को तमिलनाडु में प्रदर्शन कर सकते हैं जिसका बहुत अधिक प्रभाव ना होनी की उम्मीद है.
    • इसी तरह हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी मंडियाँ खुली हैं. इन राज्यों में भी कांग्रेस ने प्रदर्शन करने की घोषणा की है.
    • मुंबई में डब्बवालों की एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष तालेकर ने कहा है कि ‘वो भी किसानों के समर्थन में हैं. केंद्र सरकार देश में खेती-किसानी को बर्बाद करना चाह रही है.’
    • बिहार, पंजाब, असम और कर्नाटक से भी किसानों के समर्थन में प्रदर्शन होने की तस्वीरें सामने आ रही हैं.
  13. ब्रितानी सांसदों ने भारत में किसान आंदोलन का किया समर्थन

  14. मुख्यमंत्री केजरीवाल को हाउस अरेस्ट नहीं किया: दिल्ली पुलिस

    दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ) एंटो अल्फ़ोंस ने स्पष्ट किया है कि ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाउस अरेस्ट नहीं किया गया.’

    इससे पहले आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के ज़रिये यह दावा किया था कि बीजेपी की सरकार ने अपनी दिल्ली पुलिस के ज़रिये मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाउस अरेस्ट कर लिया है. यह केजरीवाल के सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिलकर लौटने के बाद किया गया. पार्टी ने यह भी दावा किया कि किसी को केजरीवाल के घर नहीं जाने दिया जा रहा और ना ही किसी को बाहर आने दिया जा रहा है.

    डीसीपी अल्फ़ोंस ने कहा है कि ‘पुलिस की तैनाती सामान्य कारणों से की गई है. आम आदमी पार्टी और अन्य किसी पार्टी के बीच टकराव की स्थिति ना पैदा हो जाये, इसलिए सावधानीपूर्वक पुलिस बल बढ़ाया गया है. मुख्यमंत्री को हाउस अरेस्ट नहीं किया गया.’

  15. ब्रेकिंग न्यूज़, केजरीवाल को हाउस अरेस्ट किया गया: AAP

    आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ़्रेस कर आरोप लगाया है, ''गृह मंत्रालय के आदेश पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हाउस अरेस्ट किया गया है. किसान आंदोलन का समर्थन करने की वजह से भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को हाउस अरेस्ट किया है. केंद्र का पूरा दबाव था कि किसानों को दिल्ली स्टेडियम में जेल बनाकर क़ैद कर दिया जाए, किसान आंदोलन कुचल दिया जाए. जबसे मुख्यमंत्री ने किसानों का साथ दिया, केंद्र सरकार बौखला गई है. हम किसानों का साथ नहीं छोड़ेंगे, वो हमारे अन्नदाता हैं.''

    आप नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा, ''कल जैसे ही सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिलकर अरविंद केजरीवाल जी वापस घर आए उन्हें गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर घर में नज़रबंद कर लिया गया. केजरीवाल भारत बंद के समर्थन में घर से बाहर ना निकलने पाएं इसलिए उन्हें गिरफ़्तार किया गया.''

  16. किसानों का भारत बंद Live: सिंघु बॉर्डर पर कैसे हैं हालात, बता रही हैं बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्या

  17. ब्रेकिंग न्यूज़, AAP का दावा- दिल्ली पुलिस केजरीवाल को घर से बाहर नहीं निकलने दे रही

    आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस घर से बाहर नहीं निकलने दे रही. आप नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, ''केंद्र सरकार डर रही है कि मुख्यमंत्री किसानों के समर्थन में आज ज़रूर निकलेंगे. किसानों को समर्थन ना मिले, इसी प्रयास में सोमवार से भाजपा के नेता मुख्यमंत्री के दरवाज़े को रोके बैठे हैं और दिल्ली पुलिस ने बैररिकैड लगा दिए हैं.''

    सौरभ ने कहा, ''केंद्र सरकार देश के किसानों से डरी हुई है, मगर घमंड इतना है कि उनकी जायज़ मांग भी नहीं मानेंगे. किसानों को कुचलने की सारी कोशिश जारी है, जब से मुख्यमंत्री किसानों से मिलकर आए है, दिल्ली पुलिस ने घर को घेर लिया है. मुख्यमंत्री अपने घर में लगभग बंदी बनाए गए हैं.''

  18. बिहार में कैसा है भारत बंद?

    भारत बंद के समर्थन में बिहार के अलग-अलग शहरों में सीपीआईएमल का विरोध-प्रदर्शन

  19. कैसा रहेगा किसानों का भारत बंद?

    मोदी सरकार के कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ आंदोलनकारी किसानों ने आज 11 बजे से शाम तीन बजे तक भारत बंद बुलाया है. इस दौरान परिवहन सेवा, दफ़्तर और दुकान की सेवा प्रभावित हो सकती है.

    पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इसका असर ज़्यादा देखने को मिल सकता है. दिल्ली और हरियाणा में सुरक्षाबलों ने भारी तैयारी की है. दोनों जगहों पर पुलिस ने ट्रैफिक को लेकर कई परामर्श जारी किए हैं.

    किसानों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन की अपील की है और ज़रूरी सेवाओं को जारी रखने की भी बात कही है. बैंक यूनियनों का कहना है कि वो किसानों के साथ खड़े हैं लेकिन वे इस बंद शामिल नहीं होंगे. हालांकि वो ड्यूटी के दौरान ब्लैक बैज़ लगाएंगे. व्यावसायिक परिवहन और ट्रक यूनियन भी इस प्रदर्शन में शामिल हैं.

  20. मोदी अच्छे वक्ता, पर किसानों तक बात पहुँचाने में नाकाम रहेः गुरचरण दास