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किसान आंदोलन: अगर प्रधानमंत्री मोदी सिंघु बॉर्डर पर आ जाएं तो किसान उनसे क्या कहेंगे?- आज की बड़ी ख़बरें

जब बीबीसी ने एक बुज़ुर्ग प्रदर्शनकारी किसान से यह सवाल किया तो देखिए उन्होंने क्या जवाब दिया...

लाइव कवरेज

  1. किसानों के बीच दिल्ली-हरियाणा सीमा पर पहुंचे दिलजीत दोसांझ

  2. किसान आंदोलन में हिस्सा ले रही 11 साल की लड़की की कहानी

  3. मैं बादलों की तरह ना ही बिना रीढ़ वाला और ना ही गद्दार: कैप्टन अमरिंदर सिंह

    पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुखबीर सिंह बादल के बयान पर अपनी टिप्पणी देते हुए उसे पूरी तरह से बेकार और ढोंग करार दिया है. उन्होंने कहा, 'मैं उन लोगों (बादलों) की तरह ना ही बिना रीढ़ वाला हूं और ना गद्दार.'

    सुखबीर सिंह बादल ने उनके और उनके परिवार के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का भी ज़िक्र किया था. जिस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘किसानों के साथ धोखा करने के कारण वो पूरी तरह अलग-थलग हो गए हैं और और अपनी हताशा को छिपाने के लिए वो ऐसी हरकतें कर रहे हैं.’

    अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह सुखबीर सिंह बादल की निराशा का स्तर ही है जो कि वह पंजाब और देश के लिए पाकिस्तान के ख़तरे को भी नज़रअंदाज़ कर दे रहे हैं.

    उन्होंने सवाल किया कि क्या वो (सुखबीर सिंह) और उनकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल सत्ता के इतने लोभी हो चुके हैं कि पाकिस्तान के संदर्भ में सुरक्षा के मामले पर भी आंख मूंदे बैठे हैं?

    उन्होंने कहा ‘पंजाब सीमा पर सुरक्षा बलों ने हथियार पकड़ा है, गोला-बारूद पकड़ा है, ड्रोन को कब्ज़े में लिया है लेकिन वो आपको ख़तरा नहीं मालूम पड़ रहा.’

    ईडी की कार्रवाई पर उन्होंने कहा, ‘इसमें ऐसा नया क्या था जो मैं अचानक से इस बात के लिए डरने लगूं.’

  4. किसान बोले- '8 दिसंबर को होगा भारत बंद, दिल्ली आने वाली सड़कों को करेंगे सील'

    दिल्ली की सीमाओं पर डटे पंजाब-हरियाणा-उत्तर प्रदेश के किसानों का धरना 11वें दिन भी जारी है. ये किसान नये कृषि क़ानूनों से नाराज़ हैं और चाहते हैं कि सरकार इन क़ानूनों को वापस ले.

    शनिवार को किसान नेताओं और सरकार के बीच जारी बातचीत का पाँचवा दौर बेनतीजा रहने के बाद, अब किसान नेताओं ने कहा है कि ‘योजना के अनुसार 8 दिसंबर को भारत बंद किया जायेगा.’

    मोदी सरकार कह रही है कि किसानों को उनकी 'शंकाओं का समाधान' दिया जायेगा. लेकिन किसान सरकार की इस दलील को अब सुन नहीं रहे हैं. उनका कहना है कि वो भारत बंद की अपील मानेंगे और इसमें हिस्सा लेंगे.

    शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में क़रीब पाँच घंटे लंबी वार्ता हुई. इस बैठक में सरकार ने किसानों को यह आश्वासन दिया कि "कृषि क़ानूनों से एमएसपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, ये राज्य का विषय है और केंद्र सरकार राज्यों की मंडियों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेगी."

    उन्होंने किसानों से कहा था कि सर्दी और कोविड-19 के चलते वो आंदोलन ख़त्म करें और बुज़ुर्गों-बच्चों को घर भेजें.

    बताया गया है कि किसानों के प्रतिनिधि अब बुधवार को केंद्रीय नेतृत्व से अगले चरण की वार्ता करेंगे.

    भारत बंद के पक्ष में कौन-कौन?

    भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, "सरकार ने कहा है कि वो एक ड्राफ़्ट तैयार करेगी और हमें देगी. उन्होंने कहा है कि वो इस पर राज्यों से भी बात करेगी. बैठक में एमएसपी पर बातचीत हुई, लेकिन हमने कहा कि हमें कृषि क़ानूनों पर और उन्हें वापिस लिये जाने पर बात करनी चाहिए. साथ ही, जैसा ऐलान किया गया था, भारत बंद ज़रूर होगा."

    वामपंथी पार्टियों समेत बिहार के राष्ट्रीय जनता दल, पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वो भी भारत बंद का समर्थन करेंगे. देश के दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी इस बंद का समर्थन किया है.

    दिल्ली सरकार ने मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भारत बंद का समर्थन करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के नाम पर टालमटोल कर रही है जबकि किसान ठंड के दिनों में सड़कों पर बैठे हैं.

    भारत बंद के बारे में पाँच बातें:

    • किसानों ने कहा है कि भारत बंद के दौरान वो दिल्ली को जाने वाली सभी सड़कें ब्लॉक करेंगे. सभी टोल प्लाज़ा रोके जायेंगे और वहाँ प्रदर्शन किया जायेगा.
    • वामपंथी पार्टियों ने ना सिर्फ़ इस बंद का समर्थन किया है, बल्कि अन्य विपक्षी दलों से भी इसका समर्थन करने की अपील की है. सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीएम (एम-एल) और ऑल इंडिया फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ने एक संयुक्त बयान में किसान आंदोलन का समर्थन करने की बात कही है.
    • इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मज़दूर सभा, सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर और ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर ने भी किसान आंदोलन और किसानों द्वारा बुलाये गए भारत बंद का समर्थन किया है.
    • पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी भारत बंद के दिन प्रदर्शन होने की उम्मीद है. दिल्ली सीमा (सिंघु बॉर्डर और गाज़ीपुर) पर डटे किसानों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों से उनके समर्थन में आने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि सभी मिलकर दिल्ली को घेरें और दिल्ली की सीमाओं को सील करने में उनकी मदद करें.
    • बीते 11 दिनों से दिल्ली की सीमा पर किसानों का प्रदर्शन जारी है. हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. दिल्ली को आने वाले कई रास्ते बंद हैं. दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर पड़ने वाले सिंघु, टिकरी, झरौदा, औचंदी, लामपुर, मानीयारी और मंगेश बॉर्डर सील हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश से मिलने वाली दिल्ली की सीमा पर भी कुछ जगह बंद है.
  5. कमला हैरिस का नाम किसान आंदोलन में कैसे घसीटा गया?

  6. जस्टिन ट्रूडो के बाद किसानों के समर्थन में आए 36 ब्रिटिश सांसद

    कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बाद ब्रिटेन के दर्जनों सांसदों ने भी भारत में किसानों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है.

    ब्रिटेन में अलग-अलग पार्टियों के कुल 36 सांसदों ने वहां के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब से कहा है कि वो भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात करें और उन्हें बताएं कि भारत में कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन से ब्रिटिश पंजाबी प्रभावित हो रहे हैं.

    शु्क्रवार को इन सांसदों की तरफ़ से एक पत्र जारी किया गया है. इस पत्र को लेबर पार्टी के ब्रिटिश सिख सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने ट्विटर पर पोस्ट किया है.

    इस पत्र पर अन्य भारतीय मूल के सांसदों के भी हस्ताक्षर हैं. हस्ताक्षर करने वालों में वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा और पूर्व लेबर नेता जर्मी कोर्बिन भी शामिल हैं.

    हाल में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बार फिर किसान प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी सरकार हमेशा से "शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों" की समर्थक रही है.

    मीडिया के साथ बातचीत में ट्रूडो ने कहा कि, "कनाडा हमेशा से दुनिया में कहीं भी हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन करता है और दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए इस समस्या का हल तलाशें तो हमें ख़ुशी होगी."

    हालांकि इस बार उनके बयान को डैमेज कंट्रोल की तरह देखा गया. भारत और कनाडा के द्विपक्षीय रिश्तों पर नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि उनके बयान का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है.

    इससे पहले ट्रूडो ने किसान प्रदर्शनकारियों के साथ भारतीय सुरक्षाबलों के रवैए को लेकर चिंता जताई थी जिसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने देश में मौजूद कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल को तलब कर आपत्ति दर्ज कराई थी.

    कनाडा के कुछ समूहों ने मिल कर ओटावा में मौजूद भारतीय उच्चायुक्त के दफ्तर तक विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में 'पंजाब किसान कार रैली' निकाली थी.

    हालांकि इंडो-कैनडियन ऑर्गेनाइज़ेशन, कनाडा इंडिया फाउंडेशन जैसे संगठनों ने ट्रूडो के बयान की आलोचना की और कहा, "ज़िम्मेदार पदों पर मौजूद नेता अगर जल्दबाज़ी में कोई ट्वीट कर देते हैं या बयान दे देते हैं तो इसका असर आपसी रिश्तों पर पड़ सकता है."

    संगठनों ने कहा, "कनाडा मे वोटरों का एक बड़ा वर्ग है जिसकी जड़ें पंजाब के किसान समुदाय से जुड़ी हैं, ऐसे में ये बयान उनकी राजनीतिक मजबूरी हो सकता है."

    किसान आंदोलन पर कनाडा के पीएम की टिप्पणी को लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी. भारतीय विदेश मंत्रायल के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का कहना था कि ये भारत का अंदरूनी मसला है, जस्टिन ट्रूडो बिना सच्चाई जाने दूसरे देश के आंतरिक मामले में ग़ैर-ज़रूरी टिप्पणी कर रहे हैं.

    भारत ने दिल्ली स्थित कनाडाई दूतावास को भी तलब किया था और कहा था कि इस तरह की टिप्पणी से द्विपक्षीय रिश्ते पटरी से उतर सकते हैं.

    ब्रितानी सांसदों ने ख़त में क्या लिखा है?

    ब्रितानी सांसदों ने ख़त में विदेश मंत्री डोमिनिक राब से गुज़ारिश की है कि वो "पंजाब में बिगड़ते हालात" पर जल्द से जल्द भारतीय विदेश मंत्री से बात करें.

    खत में ये भी पूछा गया है कि क्या फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डिवेलपमेन्ट ऑफ़िस (एफ़सीडीओ) को इस मुद्दे पर भारत से कोई पत्र मिला है.

    पत्र में लिखा है, "ये एक साझा पत्र है जिसमें आपसे गुज़ारिश की जा रही है कि आप भारतीय विदेश मंत्री से मुलाक़ात करें और कृषि क़ानूनों के विरोध में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जो असर ब्रितानी पंजाबियों और सिखों पर पड़ रहा है उसे लेकर उनसे बात करें."

    "ब्रिटेन में बसे सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए ये बेहद अहम मुद्दा है. कई ब्रितानी सिख और पंजाबी इन मुद्दों को लेकर अपने सांसदों से बात कर रहे हैं और उनका कहना है कि पंजाब में उनके परिजन हैं, उनकी पुश्तैनी ज़मीनें हैं और विरोध का असर उन पर पड़ रहा है."

    एफ़सीडीओ ने अब तक इस पत्र का उत्तर नहीं दिया है और न ही इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है.

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  9. 9 दिसंबर को होगी छठे दौर की बातचीत

    कृषि मंत्री और किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि कृषि क़ानूनों को लेकर शनिवार को हुई सरकार और किसानों की बातचीत बेनतीजा ख़त्म हुई जिसके बाद अब दोनों पक्ष छठे दौर की बातचीत के लिए बुधवार 9 दिसंबर को मुलाक़ात करेंगे.

    नए कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर किसान बीते दस दिनों से राजधानी और इसके आसपास के इलाक़े में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि इस क़ानून का असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा. किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

    हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाली कई सड़कों पर डटे हुए हैं. किसानों ने कई सड़कों को बंद कर दिया है और कई जगहों पर राष्ट्रीय राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया है.

    मोदी सरकार का कहना है कि नए कृषि क़ानूनों से अनाज ख़रीदने के पुराने तरीकों में सुधार होगा और किसान अपनी उपज अच्छी कीमत पर अपनी इच्छानुसार बेच सकेगा.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में पांच घंटे चली बातचीत के बात वरिष्ठ किसान नेता जगजीत सिंह धालीवाल ने कहा, "किसानों ने सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि वो चाहते हैं कि तीनों कृषि क़ानून वापस लिए जाएं."

    बैठक के बाद विज्ञान भवन से बाहर निकले किसान नेताओं के मुताबिक, केंद्र सरकार का कहना है कि वो उन्हें 9 दिसंबर को एक प्रस्ताव भेजेगी. किसान नेता उस प्रस्ताव पर किसानों के बीच चर्चा के बाद उसी दिन बैठक में हिस्सा लेकर अपनी बात रखेंगे.

    वहीं बातचीत में शामिल रहे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की बातचीत बुधवार को होगी. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और वो किसानों के मुद्दों पर विचार कर रही है.

    किसानों से बातचीत से पहले हुई थी अहम बैठक

    पांचवे दौर की बातचीत से पहले शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल की एक अहम बैठक हुई थी.

    ये बैठक नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर एक अहम बैठक में शामिल हुए.

    जानकार मानते हैं कि पंजाब और हरियाणा के प्रभावशाली किसान संगठनों की अगुवाई में हो रहा किसान विरोध कृषि क्षेत्र में सुधार लाने की मोदी सरकार की काबिलियत की परीक्षा है.

    भारत की 29 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 15 फीसदी है और ये क्षेत्र देश की 130 करोड़ की आबादी में से आधी आबादी को रोज़गार देता है.

    किसानों का डर है कि नए कृषि क़ानून से नियंत्रित मंडी की व्यवस्था को पूरी तरह ख़त्म हो जाएगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से धान और गेहूं खरीदना सरकार बंद कर देगी, जिसका असर ये होगी कि किसानों को सीधे तौर पर निजी व्यापारियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

    किसानों की मांगों में से एक महत्वपूर्ण मांग ये है कि सरकार इन क़ानूनों को वापिस ले और एमएसपी पर सरकार खरीद जारी रखे.

    अन्य राज्यों में भी किसान विरोध का समर्थन

    किसानों के समर्थन में बिहार, तमिलनाडू और पश्चिम बंगाल में भी रैलियां निकाली गईं और विरोध प्रदर्शन हुए.

    किसान विरोध को लेकर बिहार विधानसभा के विपक्षी महागठबंधन ने भी मोर्चा खोल दिया है. शनिवार की सुबह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के शीर्ष नेताओं ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पटना के गांधी मैदान के बाहर अनशन किया.

    तेजस्वी ने कहा, "जब तक केंद्र सरकार काले कानून को वापस नहीं लेती, महागठबंधन किसानों के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ा रहेगा."

    तमिलनाडु के सालेम में डीएमके ने किसानों के समर्थन में एक रैली का आयोजन किया. पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि "हमारे मुख्यमंत्री का कहना है कि वो पहले किसान हैं, तो फिर उन्होंने अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया है."

    कोलकाता में भी किसानों के समर्थन में रैली निकाली गई. प्रदेश की मुखंयम्त्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो इस मुद्दे पर किसानों के साथ खड़ी है.

    शनिवार को ममता बनर्जी के ट्वीट कर कहा कि "सरकार से किसानों की राय लिए बग़ैर तीनों बिल पास कर दिए. ये बिल हमारे किसानों के लिए डेथ वारंट के समान हैं जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं."

    किसान विरोध को लेकर ब्रिटेन के 36 सांसदों ने लिखा पत्र

    संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता और ब्रिटेन के 36 सांसदों नें भारत में जारी किसान विरोध को लेकर कर कहा है कि किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का हक है और उन्हें ऐसा करने से रोका नहीं जाना चाहिए.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक सवाल के उत्तर में एंटोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा, "जहां तक भारत की बात है मैं" कहना चाहता हूं कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का अधिकार है और प्रशासन को उन्हें रोकना नहीं चाहिए.

    लंदन में अलग-अलग पार्टियों के 36 सांसदों ने विदेश मंत्री डोमिनिक राब को ख़त लिख कर कहा कि कृषि क़ानूनों के विरोध में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जो असर ब्रितानी पंजाबियों पर पड़ रहा है उसे लकर वो भारत के विदेश मंत्री से बात करें.

    खत में उन्होंने लिखा, "ब्रिटेन में बसे सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए ये बेहद अहम मुद्दा है. कई ब्रितानी सिख और पंजाबी इन मुद्दों को लेकर अपने सांसदों से बात कर रहे हैं और उनका कहना है कि पंजाब में उनके परिजन हैं और उनकी पुश्तैनी ज़मीनें हैं और विरोध का असर उन पर पड़ रहा है."

    लेबर पार्टी से सिख सांसद तनमनजीत ढेसी के ड्राफ्ट किए इस पत्र में वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा, वैलरी वाज़ जैसे भारतीय मूल के नेता समेत वरिष्ठ लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने हस्ताक्षर किए हैं.

    इन नेताओं ने विदेश मंत्री से गुज़ारिश की है कि पंजाब की स्थिति को देखते हुए वो जल्द से जल्द भारतीय विदेश मंत्री से मुलाक़ात करें.

    इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने किसान प्रदर्शनकारियों के साथ भारतीय सुरक्षाबलों के रवैए को लेकर चिंता जताई थी और कहा थी कि उनकी सरकार हमेशा से शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का समर्थक रही है.

    10 दिसंबर को संसद की नई इमारत की आधारशिला रखेंगे मोदी

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दस दिसंबर को संसद की नई इमारत की आधारशिला रखेंगे.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि संसद की नई इमारत भूकंप के झटकों से पूरी तरह सुरक्षित होगी और इसके निर्माण की अनुमानित लागत 971 करोड़ रूपये होगी.

    लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि 64,500 वर्ग मीटर में बनने वाली इस इमारत के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दिया गया है.

    लोकसभा अध्यक्ष का कहना है कि संसद की नई इमारत आत्मनिर्भर भारत का एक ऐसा मंदिर होगा जिसमें राष्ट्र की विविधता की झलक देखने को मिलेगी. उन्होंने कहा कि नई इमारत मौजूदा संसद भवन से 17 हज़ार वर्ग मीटर अधिक बड़ी होगी.

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