जस्टिन ट्रूडो भारत के किसान प्रदर्शनों से जुड़े सवाल पर फिर बोले
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कनाडा के उच्चायुक्त को तलब करके बयानबाज़ियों को आंतरिक मामलों में दख़ल बताया था.
लाइव कवरेज
ब्रेकिंग न्यूज़, महाराष्ट्रः विधान परिषद चुनाव में बीजेपी को झटका
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडनवीस ने विधान परिषद चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर निराशा जताई है.
महाराष्ट्र में विधान परिषद की छह सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी को सिर्फ़ एक सीट पर जीत मिली.
उनकी प्रतिद्वंद्वी शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन को एक सीट पर जीत मिली है.
देवेंद्र फडनवीस ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा - "महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजे हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं. हम ज़्यादा सीटों की उम्मीद कर रहे थे लेकिन हमें 1 सीट मिली. तीन पार्टियों के साथ आने के बाद उनकी शक्तियों का हमने जो आकलन किया वो कहीं न कहीं गलत हुआ है."
महाराष्ट्र विधान परिषद की छह सीटों के लिए मंगलवार को मतदान हुआ था. चुनाव में सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी गठबंधन और विपक्षी बीजेपी में सीधी टक्कर थी.
एक सीट एक सदस्य की मृत्यु से खाली हुई थी कि जबकि पाँच अन्य सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने की वजह से चुनाव करवाया गया.
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दिल्ली सरकार के पास कुछ ही हफ़्तों में पूरी आबादी को टीका लगाने की क्षमता है: सत्येंद्र जैन
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है
कि कोविड-19 का टीका मिलने के बाद, दिल्ली सरकार के पास दिल्ली की पूरी आबादी को
कुछ ही हफ़्तों में वैक्सीन लगा देने की क्षमता है.
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार
मोहल्ला क्लीनिकों, पॉलीक्लीनिकों, डिस्पेंसरियों और अस्पतालों की मदद से ऐसा कर
सकती है.
कांग्रेस का तंज, तेज़ी से आ रहे हैं ’अच्छे दिन’
कांग्रेस ने जनसत्ता की वेबसाइट पर प्रकाशित एक ख़बर को ट्वीट किया है और बीजेपी सरकार पर तंज कसा है कि "भारत में 'अच्छे दिन' बड़ी तेज़ी से आ रहे हैं."
कांग्रेस ने ट्विटर पर लिखा है, "मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने भारत को न्यूनतम मजदूरी के मामले में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका से भी आगे ले जाकर देश को खड़ा कर दिया है."
जिस रिपोर्ट को कांग्रेस के हैंडल से ट्वीट किया गया है उसके अनुसार संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन (ILO) की रिपोर्ट में यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन का सबसे बुरा असर दिहाड़ी मज़दूरों पर पड़ा था.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में न्यूनतम मजदूरी पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल से भी कम रही है.
40 दिन तक चले इस शुरुआती फेज के लॉकडाउन से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के वेतन में औसतन 22.6 फीसदी की कमी आई जबकि संगठित क्षेत्र के कामगारों के वेतन में 3.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
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किसान आंदोलन के चलते हरियाणा की खट्टर सरकार पर मंडराता संकट
ब्रेकिंग न्यूज़, रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार - रिज़र्व बैंक
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि फिलहाल के लिए रेपो रेड और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाएंगे.
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई ने रेपो रेट को 4 फीसदी पर और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 फीसदी पर बरकरार रखने का फ़ैसला किया है.
यह लगातार तीसरी बार है, जब आरबीआई ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो में कोई बदलाव नहीं किया है.
शक्तिकांत दास ने कहा कि समिति का मानना है कि सर्दियों के महीनों में खरीफ फसल की बंपर पैदावार से महंगाई थोड़ी-सी कम हो सकती है.
रेपो रेट वो दर है जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को ज़रूरत पड़ने पर ऋण देती है. इस दर का इस्तेमाल देश में महंगाई को काबू करने के लिए किया जाता है. वहीं रिवर्स रेपो रेट वो दर है जिस पर आरबीआई बैंकों से ऋण लेती है.
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'अर्थव्यवस्था में दिख रहे हैं रिकवरी के संकेत'
शक्तिकांत दास ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.5 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई है. लेकिन आने वाले वक्त में अर्थव्यवस्था की रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं और चौथी तिमाही के लिए जीडीपी 0.7 फीसदी रह सकता है.
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है लेकिन अब ग्रामीण बाज़ारों में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं और ग्रामीण बाज़ारों में रिकवरी का असर शहरी बाज़ारों में भी होगा और मांग बढ़ेगी.
हो सकता है कि देश के कुछ हिस्सों में कोरोना के मामले बढ़ने का असर आने वाले वक्त में मांग पर पड़े, लेकिन इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता की कोरोना की रिकवरी दर अब 94 फीसदी से अधिक है और वैक्सीन के ट्रायल से भी उम्मीद जगी है.
ऐसे में उपभोक्ता उत्साहित हैं और व्यापार पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि निजी निवेश अभी भी पहले की तरह पटरी पर नहीं लौटा है और निर्यात भी अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है.
कोरोना वैक्सीन के क्षेत्र में हुई तरक्की से उम्मीद तो बढ़ी है लेकिन अभी भी सोशल मीडिया के नियमों का पालन करना ज़रूरी है और ऐसे व्यवसाय जिनमें कर्मचारी एक दूसरे के नज़दीक रह कर काम करते हैं वो अभी पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं किए जा सकते.
उन्होंने कहा कि इन सभी कारकों के मद्देनज़र अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2020-21 की तीसरी तिमाही के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) ग्रोथ 0.1 फीसदी रहेगा जबकि चौथी तिमाही के लिए जीडीपी 0.7 फीसदी रह सकता है. वहीं साल 2020-21 के लिए जीडीपी ग्रोथ 7.5 फीसदी रहेगा.
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में मोदी-शाह ने क्यों झोंकी बीजेपी की पूरी ताक़त?
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तेलंगाना राज्य जहाँ भारतीय जनता पार्टी के पास 119 में से केवल दो विधायक हैं और जहाँ 17 लोकसभा सीट में केवल 4 सांसद हैं, वहाँ एक नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है.
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ग्रेटर हैदराबाद चुनाव के शुरुआती रुझानों पर बीजेपी नेता
डी अरविंद ने टिप्पणी की है कि ‘तेलंगाना की जनता
बदलाव चाहती है और पार्टी यह जानती थी.’
डी अरविंद तेलंगाना राज्य से बीजेपी के सांसद हैं. प्रेस से
बात करते हुए उन्होंने कहा है कि “बीजेपी
इस चुनाव में लीड कर रही है. हमें विश्वास था और आप शाम तक प्रदर्शन भी देखेंगे.
टीआरएस पार्टी डर चुकी है, इसकी वजह दुब्बका उप-चुनाव में टीआरएस हारी थी. टीआरएस और
केसीआर पार्टी डरी हुई है. ये डर जो बीजेपी ने टीआरएस और केसीआर पार्टी में पैदा
किया है ये हमें चाहिए और यही हमारी जीत है.”
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव की मतगणना
शुक्रवार सुबह आठ बजे शुरू हो गई थी.
बीबीसी संवाददाता दीप्ति बथीनी ने बताया है कि पहले पोस्टल बैलेट गिने जा रहे हैं जिनमें बीजेपी की बढ़त बताई गई है.
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15 साल बाद, पहली बार इस चुनाव में मत-पत्रों को प्रयोग हुआ. चुनाव में क़रीब 74.1 लाख मतदाताओं में से लगभग साढ़े 34 लाख मतदाताओं ने मतदान किया. मतगणना में सुरक्षा का ख़ास ध्यान रखने के लिए सारी कार्यवाही सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड की जा रही है.
तेलंगाना राज्य चुनाव आयोग ने शहर में 30 स्थानों पर मतगणना केन्द्र बनाये हैं.
जीएचएमसी के 150 वार्डों में से 149 के लिए एक दिसंबर को मतदान हुआ था और एक वार्ड में बृहस्पतिवार को दोबारा मतदान कराया गया.
एक दिसंबर को मतदान के दौरान मत पत्र में त्रुटि पाये जाने के बाद ओल्ड मालकपेट वार्ड में दोबारा मतदान कराया गया. यहाँ एक दिसंबर को हुए चुनाव में 74.67 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 34.50 लाख (46.55 प्रतिशत) मतदाताओं ने अपने मताधिकारों का इस्तेमाल किया था.
एसईसी ने कोविड-19 के मद्देनज़र प्रमुख राजनीतिक दलों और स्वास्थ्य विभाग के साथ परामर्श करने के बाद मत-पत्र से चुनाव कराने का निर्णय किया था.
इस बार भी रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं: आरबीआई गवर्नर दास
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आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने इस बार रेपो रेट में
कोई बदलाव नहीं किया है.
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में यह फ़ैसला हुआ. रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट
3.35% पर बरक़रार है.
यह लगातार तीसरी बार है, जब भारतीय रिजर्व
बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को जस का तस छोड़ा है.
पिछली मौद्रिक समीक्षा के दौरान आरबीआई ने रेपो रेट में कोई
कटौती नहीं की थी.
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 2 दिसंबर से शुरू हुई
थी और कमेटी ने आज अपना फ़ैसला सुनाया.
इस साल की बात करें तो रिज़र्व बैंक ने कोरोना वायरस को
देखते हुए दो बार ब्याज़ दरों में कटौती की है.
शक्तिकांत दास ने कहा है कि पैसा ट्रांसफ़र करने की आरटीजीएस नामक सुविधा आने वाले कुछ दिनों में 24 घंटे उपलब्ध रहा करेगी.
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भारतीय स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि बीते 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 36,595 नये मामले दर्ज किये गए हैं, जबकि कोविड-19 से 540 लोगों की मौत हुई है.
इसके साथ ही देश में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 95.71 लाख हो गई है, जबकि मरने वालों का आंकड़ा 1,39,188 हो गया है.
किसानों के साथ बैठक के बाद सरकार एमएसपी पर क्या बोली?
वीडियो कैप्शन, किसानों के साथ बैठक के बाद सरकार एमएसपी पर क्या बोली?
किसान नेता और केंद्र सरकार के बीच बैठक ख़त्म हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका.
सरकार और किसान नेताओं के बीच गुरुवार को चौथे दौर की बातचीत हुई.
अब दोनों पक्ष फिर से शुक्रवार 5 दिसंबर को फिर मुलाकात करेंगे.
बीते कई दिनों से किसान कृषि क़ानूनों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
कृषि मंत्री ने बताया कि बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई.
उन्होंने किसानों से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील भी की.
किसान नेताओं ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत आगे बढ़ी है.
एमएसपी के बारे में क्या कहते हैं अर्थशास्त्री गुरचरण दास?
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अर्थशास्त्री और लेखक गुरचरण दास कृषि क्षेत्र में सुधार के एक बड़े पैरोकार हैं और मोदी सरकार द्वारा लागू किये गए तीन नए कृषि क़ानूनों को काफ़ी हद तक सही मानते हैं.
लेकिन 'इंडिया अनबाउंड' नाम की प्रसिद्ध किताब के लेखक केअनुसार प्रधानमंत्री किसानों तक सही पैग़ाम देने में नाकाम रहे हैं. वो कहते हैं कि नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिकेटर होने के बावजूद किसानों तक अपनी बात पहुंचाने में सफल नहीं रहे.
बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा, "मोदी जी की ग़लती ये थी कि उन्होंने रिफ़ॉर्म (सुधार) को ठीक से नहीं बेचा है. अब आपको इसे ना बेचने का ख़ामियाज़ा तो भुगतना पड़ेगा. लोगों ने पोज़ीशन ले ली है. अब ज़्यादा मुश्किल है."
किसानों की माँगों के बारे में गुरचरण दास क्या सोचते हैं?
वो कहते हैं, "हाँ उनकी मांग कुछ हद तक ठीक है लेकिन ये (एमएसपी) एक आदर्श प्रणाली नहीं है. एक अर्थशास्त्री के रूप में मैं कहूँगा कि ये एक घटिया सिस्टम है क्योंकि इसमें बहुत कमियाँ हैं. मुझसे अगर कहा जाता कि क्या सिस्टम होना चाहिए तो मेरा जवाब होगा कि इसमें कोई रियायतें और सब्सिडी नहीं होनी चाहिए. खाद पर नहीं, बिजली पर नहीं, पानी पर नहीं और मूल्य पर भी नहीं. आप हर महीने छोटे और ग़रीब किसानों को सिर्फ़ कैश ट्रांसफ़र कर दो. इसे आप छोटे किसानों के लिए कैश सिक्योरिटी कह सकते हैं."
"खाद्य सुरक्षा या फ़ूड सिक्योरिटी देश का क़ानून है. सरकार को ग़रीबों को अनाज देना पड़ेगा और इसीलिए ये एक आदर्श प्रणाली न होते हुए भी चलेगी. मुझे लगता है कि इनको डर पैदा हो गया है. अगर इन्हें शुरू से समझाया जाता कि क्या हो रहा है और ये कि एमएसपी नहीं जा रही है और मंडियाँ नहीं जा रही हैं तो तस्वीर कुछ और होती."
किसान आंदोलन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के गांववाले किसके साथ?
वीडियो कैप्शन, किसान आंदोलन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के गांववाले किसके साथ?
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से करीब 4 दिन पहले बयान दिया गया था कि हरियाणा के किसान पंजाब के किसानों के साथ नहीं हैं और किसानों का आंदोलन सिर्फ पंजाब के किसानों की तरफ से हो रहा है.
लेकिन लगता है कि किसान उनकी इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखते.
मनोहर लाल खट्टर के गांव बनियाणी में जब किसानों से इस मुद्दे पर बात की गई तो उन्होंने साफ किया कि वह इस मुद्दे पर पंजाब के किसानों के साथ है.
मनोहर लाल खट्टर के गांव के किसानों ने अपनी मुशकिलों के बारे में भी बताया.
रिपोर्टः सत सिंह, बीबीसी हिंदी के लिए
गाज़ीपुर, टिकरी, सिंघु समेत नौ जगहों पर दिल्ली के बॉर्डर बंद
कृषि क़ानूनों को वापिस लेने की मांग कर रहे किसानों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को नौवें दिन भी जारी है.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार विरोध प्रदर्शनों के चलते दिल्ली को दूसरे राज्यों से जोड़ने वाली कई सड़कों को बंद करना पड़ा है.
उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर गाज़ीपुर बॉर्डर को बंद कर दिया गया है. सिंघु, लामपुर, ओचंदी, साफियाबाद, प्याऊ मनियारी और सबोली बॉर्डर को बंद किया गया है. राष्ट्रीय राजमार्ग 44 को भी दोनों तरफ से बंद किया गया है.
टिकरी और झरोदा बॉर्डर को भी बंद किया गया है. जहां बाडुसराय बॉर्डर से हल्के और दुपहिया वाहनों का आवाजाही जारी है वहीं झटिकारा बॉर्डर पर केवल दुपहिया वाहनों को ही इजाज़त दी जा रही है.
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किसानों और सरकार के बीच बातचीत रही बेनतीजा, आज होगी किसानों की बैठक
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विरोध प्रदर्शन का आज नौवां दिन
गुरुवार को किसानों के विरोध प्रदर्शन का आठवां दिन था. दिन ख़त्म होते-होते हज़ारों की संख्या में उत्तर प्रदेश के किसानों ने दिल्ली में यूपी गेट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 9 को ब्लॉक कर दिया. वहीं दूसरी तरफ राजधानी के कई रास्तों के पास हज़ारों की संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा.
इससे पहले बुधवार को किसानों ने कहा था कि कृषि क़ानून न वापिस लिए गए तो वो राजधानी के सभी रास्ते ब्लॉक कर देंगे.
दिल्ली-उत्तर प्रदेश की गाज़ीपुर सीमा के पास भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत ने एक 'महा पंचायत' की और कहा कि एमएसपी के मुद्दे पर समझौते की गुंजाइश नहीं है, सरकार को किसानों को लिखित में इसका आश्वासन देना होगा.
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बेनतीजा ख़त्म हुई बातचीत
कृषि क़ानूनों को हटाने की मांग कर रहे किसानों और सरकार के बीच गुरुवार को हुई अहम बैठक बेनतीजा ख़त्म हुई. इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच अगली बैठक पाँच दिसंबर को होगी.
किसान हाल में लाए गए नए कृषि क़ानूनों को हटाने की मांग कर रहे हैं और एमएसपी (न्यूनतन समर्थन मूल्य पर) सरकारी खरीद जारी रखे जाने की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि वो अपनी मांगों को लेकर समझौता नहीं करेंगे.
दिल्ली के विज्ञान भवन में गुरुवार को हुई बैठक आठ घंटे चली. बैठक में सरकार की तरफ़ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश शामिल थे, जबकि किसानों के प्रतिनिधिमंडल में कुल 40 किसान नेता शामिल थे.
इससे पहले मंगलवार को भी किसान प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत हुई थी जो बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई थी.
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कृषि मंत्री ने क्या कहा?
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बैठक बहुत ही अच्छे माहौल में हुई और किसानों ने बहुत सारे मुद्दे उठाए थे जिन पर खुलकर चर्चा हुई.
उन्होंने कहा कि शनिवार को बैठक में शामिल होने से पहले सरकार शुक्रवार को किसानों के उठाए सभी मुद्दों पर विचार करेगी.
विवादित क़ानून में बदलाव करने के लिए क्या सरकार तैयार है, इस सवाल के उत्तर में कृषि मंत्री ने कहा, "मैं भविष्य नहीं बता सकता. मुझे उम्मीद है कि एक दिन बाद जब फिर बैठक होगी तो हम लोग किसी समाधान की तरफ बढ़ सकेंगे."
हालांकि एक दफ़ा फिर किसानों को उन्होंने विश्वास दिलाया कि एमएसपी और एपीएमसी में कोई बदलाव नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "किसी के मन में इसे लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए. लेकिन फिर भी अगर किसानों को इन बातों की चिंता है तो मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि नए क़ानून से एमएसपी की व्यवस्था को ख़तरा नहीं है."
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क्या कहना है किसानों का?
किसान नेताओं का कहना है कि शुक्रवार को 11 बजे किसान इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए इकट्ठा होंगे और इस बैठक में सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत के बारे में चर्चा होगी.
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष ऋषिपाल ने कहा, "सरकार ने हमारी सभी बातों को नोट किया है और कहा है कि वो इस मुद्दे पर विचार करेंगे. उन्हें इसके लिए एक दिन का वक्त चाहिए."
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार बैठक के दौरान सरकार ने किसानों से लंच करने की पेशकश की जिसके किसानों ने ठुकरा दिया. किसानों ने कहा कि संघु बॉर्डर पर बैठे उनके साथी उन तक लंच पहुंचा देंगे.
इससे पहले किसानों ने सरकार की तरफ दी गई चाय और पानी लेने से भी इनकार कर दिया था.
'पंजाब की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर'
गुरुवार को किसानों और सरकार की बातचीत शुरू होने से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की. उन्होंने बताया कि गृह मंत्री से उन्होंने किसानों की समस्या का कोई हल जल्द निकालने के बारे में बात की है.
अमरिंदर सिंह ने किसानों से अपील की कि वो इस मुश्किल का हल जल्द निकालें क्योंकि इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
हालांकि उन्होंने इस मामले में किसानों और सरकार के बीच बीतचीत में मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया और कहा कि फिलहाल सरकार और किसानों के बीच बातचीत चल रही है और वो इस समस्या का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.
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पूर्व मुख्यमंत्री ने लौटाया पद्म विभूषण
इस बीच शिरोमणी अकाली दल नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किसानों का समर्थन करते हुए उन्हें मिला पद्म विभूषण सम्मान लौटा दिया है.
पूर्व अकाली दल नेता और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढिंढसा ने कहा है कि वो भी उन्हें दिया गया पद्म भूषण सम्मान सरकार को लौटा देंगे. उन्हें बीते साल ही पद्म भूषण सम्मान से नवाज़ा गया था.
इससे पहले खेल जगत से जुड़ी पंजाब की कई हस्तियों ने भी उन्हें दिए अवॉर्ड लौटाने की बात की थी.
पंजाब में बीजेपी की सहयोगी रही शिरोमणी अकाली दल ने दो महीने पहले ने कृषि क़ानून पारित किए जाने का विरोध करते हुए खुद को एनडीए से बाहर कर लिया था.
शीतकालीन सत्र बुलाने की मांग
किसानों के मुद्दों पर चर्चा के लिए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने स्पीकर ओम बिरला से संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने की माँग की है.
इससे एक दिन पहले ही प्रदर्शनकारी किसानों के नेताओं ने ‘किसान विरोधी बिलों को ख़त्म करने के लिए’ संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की थी.
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