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भारत के विमानन सुरक्षा नियामक - डीजीसीए
ने गुरुवार को अनुसूचित अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक यात्री उड़ानों के निलंबन को 31 दिसंबर
तक बढ़ा दिया है.
एक आधिकारिक परिपत्र के मुताबिक़, यह
प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय मालवहन संचालन और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा
मंज़ूरी प्राप्त विशेष उड़ानों पर लागू नहीं होगा.
इससे पहले, कोरोना वायरस महामारी के
मद्देनज़र भारत सरकार ने 23 मार्च से 30 नवंबर तक अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक यात्री उड़ानों
को रद्द करने का आदेश दिया था.
किसानों के मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री ट्विटर पर भिड़े
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल
खट्टर के आरोपों पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हैरानी जताई है. उन्होंने कहा है कि ‘वे खट्टर के नज़रिये से स्तब्ध हैं.’
प्रेस से बात करते हुए कैप्टन
अमरिंदर सिंह ने कहा, “एमएसपी पर मुझे संतुष्ट मत कीजिये. किसानों को इस मुद्दे पर
आश्वस्त कीजिये. उन्हें भरोसा दिलाइये. मनोहर लाल को ‘दिल्ली चलो’ प्रदर्शन से पहले किसानों से
बात करनी चाहिए थी. और अगर उन्हें लगता है कि किसान मेरे कहने पर चल रहे हैं, तो
हरियाणा के किसान क्यों इस प्रदर्शन में शामिल होकर दिल्ली जाना चाहते हैं.
हरियाणा के किसान किसके कहने पर मार्च में शामिल हुए?”
इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पंजाब के
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम ट्विटर पर एक संदेश जारी किया था.
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मनोहर लाल खट्टर के आरोप
उन्होंने लिखा, “कैप्टन अमरिंदर जी, मैंने पहले भी कहा था और मैं फिर कह रहा हूँ कि मैं राजनीति छोड़ दूँगा अगर एमएसपी को लेकर किसानों को कोई परेशानी हुई. इसलिए भोले भाले किसानों को भड़काना बंद करिये. मैं पिछले तीन दिन से आपसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा हूँ, पर आप बात करने के लिए उपलब्ध नहीं हैं. क्या किसानों के मुद्दे पर आप इतने ही गंभीर हैं? आप सिर्फ़ ट्वीट कर रहे हैं और बातचीत से भाग रहे हैं, क्यों?”
एक अन्य ट्वीट में मनोहर लाल ने लिखा, “झूठ और दुष्प्रचार का वक़्त ख़त्म हुआ. अब लोगों को अपना असल चेहरा देखने दीजिये. कोरोना महामारी के इस दौर में लोगों की जान मुसीबत में मत डालिये. महामारी के इस दौर में गिरी हुई राजनीति से बचिये.”
सोशल मीडिया पर लोग मनोहर लाल की इस दलील को यह कहते हुए घेर रहे हैं कि ‘मोदी सरकार ने आख़िर इन कृषि बिलों को कोरोना महामारी के समय में लाने की जल्दबाज़ी क्यों की थी?’
इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अपने ट्वीट
में यह लिखा कि ‘बीजेपी सरकार कोरोना महामारी की बात ना करे, केंद्र की वो बीजेपी सरकार ही थी
जो महामारी के दौर में वो कृषि बिल लेकर आयी, बिना इस बात की परवाह किये कि इसका किसानों
पर क्या असर होगा? तब तो आप कुछ नहीं बोले खट्टर जी.’
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'किसानों को दिल्ली जाने दो'
इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्विटर पर मनोहर लाल खट्टर का नाम लेते हुए लिखा था, “क़रीब दो महीने से किसान पंजाब में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, बिना किसी परेशानी के. फिर हरियाणा सरकार क्यों किसानों पर बल प्रयोग कर उन्हें भड़का रही है. क्यों उनके साथ ज़बरदस्ती की जा रही है. क्या किसानों को एक सार्वजनिक हाइवे पर जाने का आधिकार नहीं है? मनोहर लाल जी, उन्हें जाने दीजिये. उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली तक अपनी बात पहुँचाने दीजिये.”
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श्रीनगर के पास एचएमटी इलाक़े में
गुरुवार दोपहर चरमपंथियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों पर हमला किया.
कश्मीर के आईजी विजय कुमार के
अनुसार, आर्मी के जवान रुटीन ड्यूटी पर थे. तीन चरमपंथियों ने जवानों पर अंधाधुंध
फ़ायरिंग की जिसमें दो जवान गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में दोनों की मौत हो गई.
विजय कुमार ने बताया, “यहाँ पर लश्करे-तैयबा और जैशे-मोहम्मद की मूवमेंट है. यह हमला किसने किया, हम
जल्द ही इसकी पहचान कर लेंगे.”
बताया गया है कि इस इलाक़े को सील
कर, वहाँ छानबीन की जा रही है.
पीएम मोदी ने कहा- 'एक देश, एक चुनाव' भारत की ज़रूरत
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संविधान दिवस के मौक़े पर भारत के
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी
सम्मेलन’ को संबोधित किया.
गुरुवार को हुए इस सम्मेलन में
पीएम मोदी ने ‘एक देश, एक चुनाव’ को भारत की ज़रूरत बताया.
उन्होंने कहा, “एक देश, एक चुनाव - अब सिर्फ़ विचार-विमर्श का मुद्दा
नहीं है, बल्कि देश की ज़रूरत भी है. हर कुछ महीने में भारत में
कहीं ना कहीं चुनाव हो रहे होते हैं. ये विकास कार्यों में भी बाधा डालते हैं और आप
सभी लोग यह बात जानते हैं. हमें गंभीरता से इस पर सोचने की आवश्यकता है और कार्यालय-धारक
इस पर विचार विमर्श कर सकते हैं.”
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि ‘लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों में सिर्फ़ एक वोटर
लिस्ट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. हरेक के लिए अलग-अलग वोटर लिस्ट है, आख़िर इन सूचियों
पर हम क्यों पैसा और समय बर्बाद कर रहे हैं. इस पर विचार होना चाहिए.’
वर्ष 2020 को पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के शताब्दी वर्ष के
रूप में मनाया जा रहा है.
अगले आदेश तक कुछ मेट्रो सेवाओं पर रोक-दिल्ली मेट्रो
किसानों के विरोध
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉपरेशन ने अगले नोटिस तक दिल्ली से नोएडा, फ़रीदाबाद, गाजियाबाद और गुरुग्राम तक की मेट्रो सेवाओं पर लगी रोक बढ़ा दी है.
इससे पहले गुरुवार
दोपहर 2 बजे तक यह रोक लगाई गई थी, लेकिन अब स्थिति को देखते हुए इसे अगले आदेश तक
बढ़ा दिया गया है.
किसानों पर वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए
इमेज स्रोत, ANI
दिल्ली की ओर बढ़ते किसानों पर पंजाब-हरियाणा के बीच पड़ने
वाले शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने गुरुवार को पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और उन पर
आंसू गैस के गोले दागे.
हरियाणा को दिल्ली से जोड़ने वाली हर सड़क पर भारी
बैरिकेडिंग की गई है.
पंजाब-हरियाणा के हज़ारों किसान ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य
वाहनों से दिल्ली आ रहे हैं जिन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से कड़े
इंतज़ाम किये गए हैं.
26-27 नवंबर को किसानों ने 'दिल्ली चलो' का आह्वान किया है.
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UAE के इस क़दम से पाकिस्तान को तगड़ा झटका
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यूएई ने पाकिस्तान समेत 13 मुस्लिम बहुल देशों के लिए हर तरह के नए (वर्क या एंप्लायमेंट वीज़ा) रद्द कर दिया है. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार वीज़ा रद्द किए जाने के फ़ैसले को लेकर पाकिस्तान को आधिकारिक रूप से पहले सूचना नहीं दी गई थी.
पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार पाकिस्तान के अधिकारी इस क़दम के पीछे की स्पष्ट वजह जानने के लिए यूएई प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.
पाकिस्तान में एक रिक्रूटमेंट एजेंसी चलाने वाले सांसद अनवर बेग ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा, ‘’अगर इस प्रतिबंध के पीछे कोरोना वजह होती तो भारत को भी इस सूची में शामिल किया जाता क्योंकि वहां दुनिया में सबसे ज़्यादा नए केस आ रहे हैं. बेग ने कहा कि वर्क वीज़ा का रद्द होना चिंताजनक है और ये बैन पाकिस्तान को टारगेट करते हुए लगाया गया है.’’
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बेग ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बताया कि साल 2015 में पाकिस्तान से 3,26,000 लोग यूएई गए, 2016 में 2,90,000, साल 2017 में 275,000, साल 2018 में 208,000, साल 2019 में 2,11000 और साल 2020 में कोविड के बावजूद अक्टूबर तक 50,000 पाकिस्तानी रोज़गार के लिए यूएई जा चुके हैं.
बेग के मुताबिक, ये पाकिस्तानी कामगार सालाना देश में चार अरब डॉलर के क़रीब रेमिटेंस भेजते हैं.उन्होंने डर ज़ाहिर किया कि अगर पाकिस्तान ने शीर्ष स्तर पर यूएई के सामने ये मुद्दा नहीं उठाया तो यूएई के बाज़ार में पाकिस्तानियों की जगह भारतीय ले लेंगे.
एक रिक्रूटमेंट एजेंसी ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बताया कि उनकी कंपनी इस साल क्रिसमस को देखते हुए हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 3000 पाकिस्तानी वर्करों को भेजने की तैयारी कर रही थी. हालांकि, यूएई के एम्प्लायमेंट वीज़ा पर बैन लगाने की वजह से उनके क्लाइंट अब 3000 नौकरियों को भरने के लिए भारत का रुख़ कर रहे हैं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के सलाहकार सैय्यद जुल्फ़ी बुखारी ने भी पुष्टि की कि पिछले तीन दिन से यूएई ने पाकिस्तान के लिए वर्क वीजा रद्द किए हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि ये जानकारी नहीं है कि ये बैन अब भी जारी है या नहीं.
दिल्ली मार्च करते किसान हरियाणा के करनाल में जमा हुए
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केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध में दिल्ली की ओर निकले किसान करनाल में जमा हो गए हैं.
दिल्ली में पुलिस ने उनके प्रदर्शन पर रोक लगा दी है और हरियाणा से लगी सीमा पर पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया है.
दिल्ली की ओर बढ़ते किसानों को रोकने के लिए हरियाणा-दिल्ली सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात
इमेज स्रोत, BBC/ArvindChabra
इमेज कैप्शन, पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर पड़ने वाले खनोरी में बैठा किसानों का समूह
दिल्ली की ओर बढ़ते किसानों को रोकने के लिए हरियाणा-दिल्ली
की सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर
नज़र रखने के लिए हरियाणा पुलिस ड्रोन का इस्तेमाल भी कर रही है.
बीबीसी पंजाबी सेवा के संवाददाता प्रभु दयाल के मुताबिक़ जो
किसान 25 नवंबर को दिल्ली पहुंच गए थे और गुरूद्वारों में ठहरे हुए थे उन्हें
पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. हालांकि कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया.
सोनीपत के एसपी जशनदीप रंधावा ने बीबीसी पंजाबी सेवा के
संवाददाता सत सिंह से कहा है कि ‘’किसान संगठनों ने
प्रशासन से इस तरह के किसी मार्च की इजाज़त नहीं ली है. हम हर परिस्थिति से निपटने
के लिए पूरी तरह तैयार हैं.’’
वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह ने कहा है कि
वह दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं और करनाल, हरियाणा तक पहुंच चुके हैं.
पाकिस्तानियों पर UAE ने नया वीज़ा देने और नई नौकरी पर क्यों रोक लगाई
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संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और अन्य कई मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के लिए नया वीज़ा जारी करने पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ यूएई ने ऐसा सुरक्षा कारणों से किया है. हालांकि ये नहीं बताया गया है कि किस तरह की सुरक्षा चिंता है. पिछले हफ़्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की थी कि यूएई ने पाकिस्तानियों के लिए वीज़ा पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसे कोरोना वायरस से जोड़ा था लेकिन बाद में पाकिस्तान में सवाल उठने लगा कि पाकिस्तान की तुलना में भारत कोरोना की चपेट में ज़्यादा है लेकिन भारत के नागरिकों के लिए इस तरह की रोक यूएई ने नहीं लगाई है. पाकिस्तान ने कहा था कि यूएई की तरफ़ से इसे लेकर कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है.
यूएई की तरफ़ से जारी दस्तावेज़ों के अनुसार 13 देशों के नागरिकों को नया वीज़ा देने पर यूएई ने अस्थायी रूप से रोक लगाई है. इनमें पाकिस्तान के अलावा तुर्की, ईरान, सीरिया और सोमालिया भी हैं. इससे जुड़े दस्तावेज़ को यूएई की सरकारी बिज़नेस पार्क ने जारी किया था, जो 18 नवंबर से लागू हो गया है.
दस्तावेज़ में कहा गया है कि नई नौकरी के लिए आवेदन और वीज़ा 13 देशों के नागरिकों के लिए निलंबित कर दिया गया है. जिन देशों के नागरिकों यूएई का नया वीज़ा अभी नहीं मिलेगा, वे देश हैं- लीबिया, यमन, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, तुर्की, ईरान, इराक़, कीनिया, सोमालिया, इराक़, लेबनान और ट्यूनीशिया.
हाल के दिनों में पाकिस्तान और यूएई के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से ख़राब हुए हैं और भारत के साथ अच्छे हुए हैं. पाकिस्तान चाहता था कि यूएई कश्मीर के मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ उसका समर्थन करे. लेकिन सऊदी और यूएई दोनों ने ऐसा नहीं किया था.
इसकी प्रतिक्रिया में पाकिस्तान तुर्की और मलेशिया के क़रीब गया. लेकिन तुर्की और मलेशिया से यूएई और सऊदी दोनों के रिश्ते ठीक नहीं हैं. यूएई में पाकिस्तान के लाखों के लोग काम करते हैं और इस फ़ैसले से लोग बुरी तरह से प्रभावित होंगे.
हाल ही में यूएई ने इसराइल को मान्यता दे दी थी और सामान्य राजनयिक रिश्ते बहाल कर लिए थे. इसे लेकर पाकिस्तान में यूएई के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हुआ था. इससे पहले कश्मीर के मसले पर भी यूएई के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हुआ था.
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साफ़ निर्देश हैं कि किसानों को दिल्ली नहीं जाने देना है- फ़रीदाबाद पुलिस
केंद्र सरकार के कृषि क़ानून के
खिलाफ़ किसानों के ‘दिल्ली चलो’ विरोध प्रदर्शन को ध्यान में
रखते हुए दिल्ली-फ़रीदाबाद सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
फ़रीदाबाद पुलिस ने कहा है कि‘’हमें साफ़ निर्देश दिए गए हैं कि
भारतीय किसान संगठन के एक भी सदस्य को दिल्ली में घुसने नहीं देना है.दिल्ली से सटी हर सीमा पर हमने पुलिस बल तैनात
किया है ‘’
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किसानों के प्रदर्शन के कारण मेट्रो की सेवाओं में बदलाव, प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की रोक
इमेज स्रोत, SAT SINGH/BBC/
कृषि से जुड़े केंद्र सरकार के तीन क़ानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा के किसान
'दिल्ली चलो' के आह्वान के साथ
गुरुवार को राजधानी दिल्ली पहुंचेंगे.
इस बीच हरियाणा ने पंजाब से लगने वाली सीमा दो दिन यानी
गुरुवार और शुक्रवार के लिए सील कर दिया है.
बुधवार को अंबाला में किसानों को
रोकने के लिए प्रशासन की ओर से उनपर पानी की बौछारें की गई. हालांकि इसके बावजूद
किसाने आगे बढ़ते रहे.
हरियाणा ने दो दिन के लिए पंजाब से चलने वाली सभी बस सेवाएं
रोक दी हैं. राज्य में कही भी भारी संख्या पर भीड़ जुटने पर रोक लगा दी गई है.
दिल्ली पुलिस ने भी किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है.
समाचार एजेंसी एनएनआई के मुताबिक़ बुधवार को दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 'किसी भी प्रदर्शनकारी
को दिल्ली में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं है, अगर कोई भी प्रदर्शनकारी दिल्ली आते
हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा. दिल्ली पुलिस ने विरोध
प्रदर्शन करने वाली संस्थाओं को ये जानकारी लिखित और सोशल मीडिया के हवाले से दे
दी है.'
वहीं इन संगठनों का कहना है कि जहां भी किसानों को दिल्ली में जाने से रोका जाएगा, वे वहीं पर बैठकर
विरोध-प्रदर्शन करेंगे.
मेट्रो के टाइम में तब्दीली
किसानों के इस प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने अपनी
टाइमिंग में कुछ तब्दीलियां की है.
दिल्ली मेट्रो ने ट्वीट कर बताया है कि गुरूवार दोपहर 2 बजे
तक दिल्ली से नोएडा, फ़रीदाबाद, गाजियाबाद और गुरुग्राम
तक मेट्रो सेवाओं पर रोक रहेगी.
सितंबर महीने में संसद में पास हुए केंद्र सरकार के तीन कृषि
क़ानूनों का देशभर के किसान संगठनों विरोध कर रहे है. इसके अलावा, विपक्षी पार्टियों
ने भी इन कानूनों को लेकर कड़ा एतराज जताया है.
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क्यों हो रहा है विरोध?
किसान संगठनों का आरोप है कि नए क़ानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूँजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुक़सान किसानों को होगा.
उनका कहना है कि जिन उत्पादों पर किसानों को एमएसपी नही मिलती, उन्हें वो कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं.
पंजाब में होने वाले गेहूँ और चावल का सबसे बड़ा हिस्सा या तो पैदा ही एफ़सीआई द्वारा किया जाता है, या फिर एफ़सीआई उसे ख़रीदता है.
साल 2019-2020 के दौरान रबी के मार्केटिंग सीज़न में, केंद्र द्वारा ख़रीदे गए क़रीब 341 लाख मीट्रिक टन गेहूँ में से 130 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की आपूर्ति पंजाब ने की थी.
प्रदर्शनकारियों को यह डर है कि एफ़सीआई अब राज्य की मंडियों से ख़रीद नहीं कर पाएगा, जिससे एजेंटों और आढ़तियों को क़रीब 2.5% के कमीशन का घाटा होगा.
साथ ही राज्य भी अपना छह प्रतिशत कमीशन खो देगा, जो वो एजेंसी की ख़रीद पर लगाता आया है.
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