एनडीए को बहुमत पर नीतीश कुमार के लिए तगड़ा झटका

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बिहार में राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को 125 सीटों पर जीत के साथ स्पष्ट बहुमत मिल गया है. इसके साथ ही एग्ज़िट पोल के सारे अनुमान एक बार फिर से बिहार में ध्वस्त हो गए. 2015 में भी बिहार विधानसभा चुनाव के एग्ज़िट पोल का यही हाल हुआ था.
243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में बीजेपी को 74, जेडीयू को 43, हम यानी जीतन राम मांझी के हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी को चार सीटें मिली हैं. इस तरह से एनएडी के खाते में कुल 125 सीटें आईं जो बहुमत के आँकड़ा 122 से तीन ज़्यादा है.
दूसरी तरफ़ महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल को 75, कांग्रेस को 19, सीपीआईएमएल को 12, सीपीएम को दो और सीपीआई को दो सीटें मिली हैं. यानी तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को कुल 110 सीटें मिलीं जो बहुमत के आँकड़ा से 12 कम हैं.
बिहार एनडीए में अब तक नीतीश कुमार 'बिग ब्रदर' की भूमिका में होते थे लेकिन इस बार वो पिछड़ गए हैं. बीजेपी कह रही है कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन बीजेपी की तुलना में इतनी कम सीटें होने के बाद भी अगर वो सीएम बनते हैं तो नीतीश कुमार के लिए बहुत सहज स्थिति नहीं होगी.
हालांकि तीन टर्म के बाद फिर से सीएम चुना जाना ऐसे भी मुश्किल रहा है लेकिन नीतीश कुमार चौथी बार भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं. शिवराज सिंह चौहान और रमण सिंह तीसरे कार्यकाल के बाद हार गए थे. जेडीयू में इस बात की चर्चा गर्म है कि एलजेपी के कारण उसका प्रदर्शन बहुत ख़राब रहा और बीजेपी ने एलजेपी को अकेले चुनाव में जाने से रोका नहीं.
एलजेपी ने केवल नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतारे थे जबकि बीजेपी के ख़िलाफ महज़ तीन उम्मीदवार ही उतारे थे. एलजेपी के 70 उम्मीदवार सवर्ण थे और नीतीश कुमार को मिलने वाले वोट में अच्छी ख़ासी सेंध लगाने की बात कही जा रही है.

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