अल-क़ायदा चरमपंथी ओसामा बिन लादेन का तीन
बार इंटरव्यू करने और मध्य पूर्व में अपनी बहादुर पत्रकारिता के लिए जाने जाने
वाले रॉबर्ट फ़िस्क का निधन हो गया है.
वो 74 साल के थे. माना जा
रहा है कि स्ट्रोक यानी पक्षाघात की वजह से उनकी जान गई.
आयरिश टाइम्स के
मुताबिक़, घर में बीमार पड़ने के बाद उन्हें शुक्रवार को डबलिन के सेंट विंसेंट
अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां कुछ ही वक़्त बाद उनकी मृत्यु हो गई.
फ़िस्क को मध्य पूर्व की
कवरेज के लिए कई अवॉर्ड मिले. वो 1970 के दशक से मध्य पूर्व की रिपोर्टिंग कर रहे
थे.
लेकिन अमरीका और इसराइल के
अलावा पश्चिम की विदेश नीति की तीखी आलोचना करने के चलते वो विवादों में भी रहे.
ब्रितानी अख़बारों के लिए
पांच दशकों तक उन्होंने बाल्कन, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के युद्धों को कवर
किया. 2005 में न्यू यॉर्क टाइम्स ने उन्हें “ब्रिटेन का संभवत: सबसे प्रसिद्ध विदेश मामलों का संवाददाता” बताया.
फ़िस्क का जन्म 1946 में
केंट के माइडस्टोन में हुआ था. बाद में उन्होंने आयरलैंड की नागरिकता ले ली.
राजधानी डबलिन के बाहर डल्की में उनका एक घर था.
आयरलैंड के राष्ट्रपति ने
रविवार को फिस्क के निधन पर “गहरा दुख” जताया. साथ ही उन्होंने फ़िस्क के निधन को पत्रकारिता की
दुनिया के लिए एक क्षति बताया.
संडे एक्सप्रेस में करियर की शुरुआत के बाद फिस्क 1972 में द टाइम्स के उत्तरी आयरलैंड मामलों के संवाददाता के तौर पर संघर्षों को कवर करने के लिए बेलफ़ास्ट चले गए.
वो 1976 में अख़बार के मध्य पूर्व मामलों के संवाददाता बन गए.
लेबनान की राजधानी बेरूत से उन्होंने देश के गृह युद्ध के साथ-साथ 1979 के ईरान रिवॉल्यूशन, अफ़ग़ानिस्तान के सोवियत युद्ध और ईरान-इराक़ युद्ध को रिपोर्ट किया.
मालिक के साथ विवाद के बाद उन्होंने 1989 में द टाइम्स से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वो द इंडिपेंडेंट में चले गए.
1990 के दशक में उन्होंने अख़बार के लिए तीन बार ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू लिया. उन्होंने 1993 में पहले इंटरव्यू के दौरान ओसामा को “शर्मीला आदमी” बताया और कहा कि वो “हर तरह से पहाड़ों में लड़ने वाला एक मुजाहिदीन” लग रहे थे.
सऊदी चरमपंथी के 11 सितंबर को किए हमलों के बाद फ़िस्क ने अगले दो दशक तक अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और सीरिया समेत मध्य पूर्व में संघर्षों को कवर किया.
वो अरबी भाषा बोल लेते थे. इस क्षेत्र की उनकी समझ और अनुभव के लिए उन्हें बहुत माना जाता था.
लेकिन उन्हें अमरीका और इसराइल की तीखी आलोचना करने के लिए भी जाना जाता था.
सोशल मीडिया के ज़रिए कई पत्रकारों ने फ़िस्क को श्रद्धांजलि दी है.