यूपी से राज्यसभा के सभी 10 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए

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लाइव कवरेज

  1. यूपी से राज्यसभा के सभी 10 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए

    उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सभी 10 प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सहायक रिटर्निंग ऑफ़िसर मोहम्मद मुशाहिद ने इसकी घोषणा की.

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    सोमवार को नाम वापस लेने की तारीख़ समाप्त होते ही चुनाव अधिकारी ने सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा कर दी.

    सत्तारूढ़ बीजेपी आठ सीटों पर विजयी हुई है जबकि समाजवादी पार्टी से पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम राज्यसभा पहुँचे हैं.

    बीजेपी के आठ विजयी उम्मीदवारों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं.

    विधान सभा में अपनी संख्या बल के आधार पर बीजेपी राज्यसभा की नौ सीट जीत सकती थी लेकिन उसने केवल आठ उम्मीदवार उतारे थे.

    उसने अपने बचे हुए वोट बसपा के रामजी गौतम को दिया जिसके कारण मायावती के विधायकों की संख्या अपर्याप्त होने के बावजूद उनके उम्मीदवार राज्यसभा पहुँचने में सफल रहे.

    इस जीत के बाद बीजेपी के पास राज्यसभा में कुल 92 सीटें हो जाएंगी, वहीं कांग्रेस के पास अब सिर्फ़ 38 सीटें ही बचेंगी.

  2. पाँच दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे सतीश प्रसाद सिंह का निधन

    सबसे कम समय के लिये बिहार के मुख्यमंत्री रहे (सिर्फ 5 दिन) सतीश प्रसाद सिंह की दिल्ली में आज निधन हो गया.

    सतीश प्रसाद सिंह सबसे कम वक़्त के मुख्यमंत्री रहे. उनका कार्यकाल महज़ पाँच दिनों का था. वो बिहार में पिछड़े वर्ग से आने वाले पहले मुख्यमंत्री थे.

    बिहार में पहली ग़ैर-कांग्रेसी सरकार 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा के नेतृतव में बनी थी जो एक साल से भी कम समय तक चली. उसके बाद सतीश प्रसाद सिंह को राज्य का दूसरा कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाया गया ताकि शोषित दल के बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल को मुख्यमंत्री बनाया जा सके.

    सतीश प्रसाद सिंह की बेटी सुचित्रा सिन्हा नीतीश सरकार मे मंत्री रहीं. वही दामाद नागमणि केंद्रीय मंत्री रहे.

    नागमणि 'बिहार के लेनिन' के तौर पर मशहूर जगदेव प्रसाद के बेटे हैं.

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    बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है.

  3. प्रियंका राधाकृष्णन बनीं न्यूज़ीलैंड की पहली भारतीय मूल की मंत्री

    प्रियंका राधाकृष्णन न्यूज़ीलैंड की पहली भारतीय मूल की मंत्री बन गई हैं.

    प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने अपने दूसरे कार्यकाल में मंत्रीमंडल का विस्तार करते हुए पाँच नए मंत्रियों को नियुक्त किया है. प्रियंका इन नव-निर्वाचित मंत्रियों में से एक हैं.

    प्रियंका राधाकृष्णन 41 साल की हैं. उनकी स्कूली पढ़ाई सिंगापुर में हुई है. स्कूल के आगे की पढ़ाई न्यूज़ीलैंड में हुई है. वो बतौर वकील उन लोगों के लिए काम करती रही हैं जिनकी आवाज़ कोई नहीं सुनता या जिनकी आवाज़ अनसुनी रह जाती है.

    उन्होंने घरेलू हिंसा की शिकार हुई महिलाओं और प्रवासी मज़दूरों के हित और अधिकारों के लिए काफ़ी काम किया है.

    सितंबर साल 2017 में लेबर पार्टी के तहत वो पहली बार सांसद चुनी गईं. इसके बाद साल 2019 में उनका चयन मिनिस्टर फ़ॉर एथिनिक कम्यूनिटीज़ की पार्लिामेंट प्राइवेट सेक्रेटरी के तौर पर हुआ.

    उनके इन्हीं कामों और अनुभव ने उनके लिए राजनीतिक ज़मीन तैयार की. उन्हें मिनिस्टर फ़ॉर डायवर्सिटी, इंक्लुज़न एंड एथिनिक कम्यूनिटीज़ का पदभार दिया गया है. वह ऑकलैंड में अपने पति के साथ रहती हैं.

  4. मुनव्वर राणा के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में एफ़आईआर दर्ज

    मुनव्वर राणा

    इमेज स्रोत, Munawwar Rana/facebook

    इमेज कैप्शन, मुनव्वर राणा

    फ्रांस में हुए चरमपंथी हमले पर शायर मुनव्वर राणा ने बयान दिया था जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में एफ़आईआर दर्ज की गई है.

    फ्रांस में पैग़ंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने के बाद एक शिक्षक की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद विवादित बयान देते हुए मुनव्वर राणा ने कहा था कि अगर कोई शख़्स मेरे पिता या मां का ऐसा गंदा कार्टून बना दे तो हम उसे मार देंगे.

    उन्होंने कहा था, "हमारे हिंदुस्तान में अगर कोई किसी देवता का भगवान राम या देवी सीता का कोई ऐसा विवादित कार्टून बना दे तो हम उसे मार देंगे. जब हिंदुस्तान में हज़ारों साल से ऑनर कीलिंग को जायज़ मान लिया जाता है और कोई सज़ा नहीं होती है तो आप उसे नाजायज़ कैसे कह सकते हैं.अगर कोई शख़्स मेरे पिता या मां का ऐसा गंदा कार्टून बना दे तो हम उसे मार देंगे."

    मुनव्वर राणा के विवादित बयान पर कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एफ़आईआर दर्ज की है.

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  5. सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ के स्टार प्रचारक होने पर लगी रोक हटाई

    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के राज्य में उपचुनाव के दौरान स्टार प्रचारक होने पर लगाई गई रोक पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है.

    पूर्व मुख्यमंत्री की अपील पर आदेश जारी करते हुए मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने कहा कि "हम चुनाव आयोग के आदेश पर स्टे लगा रहे हैं और चुनाव आयोग को इसका कोई अधिकार नहीं है."

    चुनाव आयोग ने पिछले शनिवार को कमलथा के स्टार प्रचारक के दर्जे पर ये कहते हुए रोक लगा दी कि उन्होंने "आदर्श आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन किया" और उनकी चेतावनियों की "सरासर अवहेलना" की.

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  6. IPL 2020: आज का मैच- डेल्ही कैपिटल्स बनाम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर

    इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीज़न में सोमवार को डेल्ही कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर आमने-सामने होंगे.

    ये मैच भारतीय समय के मुताबिक़, शाम 7.30 बजे से अबू धाबी में खेला जाएगा. ये टूर्नामेंट का 55वां मैच है.

    रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स ने राजस्थान रॉयल्स को 60 रन से हरा दिया था.

    IPL 2020: आज का मैच
  7. एडवर्ड स्नोडेन लेंगे रूस की नागरिकता

    एडवर्ड स्नोडेन लेंगे रूस की नागरिकता

    इमेज स्रोत, The Guardian via Getty Images

    अमरीकी व्हिसल-ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन का कहना है कि उन्होंने और उनकी पत्नी लिंडसी ने रूसी नागरिकता के लिए आवेदन किया है.

    इससे कुछ हफ़्तों पहले ही रूस ने स्नोडेन को रूस में रहने के लिए स्थायी रेसिडेंसी दे दी गई थी.

    स्नोडेन तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने ये जानकारी लीक की थी कि अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी लाखों अमरीकियों की जासूसी कर रही है.

    इसके बाद वो ख़ुद ही अमरीका छोड़कर 2013 में रूस चले गए थे.

    स्नोडेन ने कहा कि वो और लिंडसी अपनी अमरीकी नागरिकता को भी बरक़रार रखेंगे.

    उन्होंने कहा कि वो उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब वो घर वापस लौट सकेंगे.

    रूस ने हाल ही में दोहरी नागरिकता देना शुरू किया है.

    एडवर्ड स्नोडेन ने ट्वीट किया, “सालों से अपने माता-पिता से अलग रहने के बाद मेरी पत्नी और मेरी अपने बेटे से अलग होने की कोई मंशा नहीं है. इसलिए महामारियों और बंद सीमाओं के इस दौर में हम अमरीका-रूस की दोहरी नागरिकता का आवेदन कर रहे हैं.”

    चार दिन पहले ही यानी 29 अक्टूबर को स्नोडेन की पत्नी लिंडसी ने एक तस्वीर के साथ अपने गर्भवती होने की जानकारी ट्विटर पर साझा की थी.

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  8. अमरीका में कोरोना पर सबसे बड़े वैज्ञानिक की चेतावनी से व्हाइट हाउस नाराज़

    डॉक्टर एंथनी फ़ाउची और डोनल्ड ट्रंप

    इमेज स्रोत, Reuters

    इमेज कैप्शन, डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अर्थव्यवस्था की फ़िक्र कर रहे हैं

    अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने देश में कोरोना की रोकथाम करने वाले सबसे बड़े अधिकारी एंथनी फ़ाउची पर कोरोना महामारी को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया है.

    डॉक्टर फ़ाउची ने वाशिंगटन पोस्ट अख़बार को एक इंटरव्यू में बताया कि अमरीका को बहुत नुक़सान हो चुका है.

    उन्होंने इंटरव्यू में ये पेशकश भी की कि वो ये बता सकते हैं कि महामारी को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप और उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन का रवैया कैसा है.

    उन्होंने कहा कि "बाइडेन इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के नज़रिए से बहुत गंभीरता से ले रहे हैं" जबकि ट्रंप का "नज़रिया अलग है, वो अर्थव्यवस्था और सबकुछ दोबारा शुरू करने पर ध्यान दे रहे हैं".

    अमरीका कोरोना महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ देश है जहाँ सबसे ज़्यादा मामले भी आए हैं और सबसे ज़्यादा लोगों की मौत भी हुई है.

    डॉक्टर फ़ाउची ने इंटरव्यू में चेतावनी देते हुए कहा कि अब जबकि ठंड का मौसम आ रहा है, तो सारे ग्रह ग़लत स्थानों पर दिखाई दे रहे हैं, और लोग अपने घरों और बंद जगहों पर रहने लगे हैं.

    व्हाइट हाउस ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया करते हुए उन पर जो बाइडेन की तरफ़दारी करने का आरोप लगाया.

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जड डीर ने कहा कि उनकी टिप्पणियाँ अस्वीकार्य हैं और सारे मानदंडों का उल्लंघन हैं.

    उन्होंने एक बयान में कहा, "टास्क फ़ोर्स का सदस्य होने के नाते डॉक्टर फ़ाउची नीतियों को लेकर चिंता या उन्हें बदलवाने की कोशिश करनी चाहिए, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया है, बल्कि वो मीडिया में राष्ट्रपति की आलोचना कर रहे हैं और राष्ट्रपति के प्रतिद्वंद्वी की प्रशंसा कर अपने राजनीतिक रूझान को प्रकट कर रहे हैं."

  9. नमस्कार! ये बीबीसी हिंदी का लाइव पन्ना है जहाँ हम आपको दिनभर की बड़ी ख़बरें और ज़रूरी लाइव अपडेट देंगे. रविवार की बड़ी ख़बरें और लाइव अपडेट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करिए.

  10. भारत में संक्रमण के मामले 82 लाख के पार

    भारत में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना संक्रमण के 45,231 नए मामले सामने आए हैं और 496 लोगों की मौत हुई है.

    इसी के साथ भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 82 लाख के पार पहुँच गए हैं और कोरोना से मरने वालों की संख्या 1 लाख 22 हज़ार 607 हो गई है.

    स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार रिकवरी रेट बढ़ा है और 75 लाख से अधिक मरीज़ ठीक हो गए हैं.

    भारत में संक्रमण के मामले 82 लाख के पार
  11. ओसामा बिन लादेन का तीन बार इंटरव्यू करने वाले पत्रकार रॉबर्ट फिस्क का निधन

    रॉबर्ट फिस्क

    इमेज स्रोत, Getty Images

    अल-क़ायदा चरमपंथी ओसामा बिन लादेन का तीन बार इंटरव्यू करने और मध्य पूर्व में अपनी बहादुर पत्रकारिता के लिए जाने जाने वाले रॉबर्ट फ़िस्क का निधन हो गया है.

    वो 74 साल के थे. माना जा रहा है कि स्ट्रोक यानी पक्षाघात की वजह से उनकी जान गई.

    आयरिश टाइम्स के मुताबिक़, घर में बीमार पड़ने के बाद उन्हें शुक्रवार को डबलिन के सेंट विंसेंट अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां कुछ ही वक़्त बाद उनकी मृत्यु हो गई.

    फ़िस्क को मध्य पूर्व की कवरेज के लिए कई अवॉर्ड मिले. वो 1970 के दशक से मध्य पूर्व की रिपोर्टिंग कर रहे थे.

    लेकिन अमरीका और इसराइल के अलावा पश्चिम की विदेश नीति की तीखी आलोचना करने के चलते वो विवादों में भी रहे.

    ब्रितानी अख़बारों के लिए पांच दशकों तक उन्होंने बाल्कन, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के युद्धों को कवर किया. 2005 में न्यू यॉर्क टाइम्स ने उन्हें “ब्रिटेन का संभवत: सबसे प्रसिद्ध विदेश मामलों का संवाददाता” बताया.

    फ़िस्क का जन्म 1946 में केंट के माइडस्टोन में हुआ था. बाद में उन्होंने आयरलैंड की नागरिकता ले ली. राजधानी डबलिन के बाहर डल्की में उनका एक घर था.

    आयरलैंड के राष्ट्रपति ने रविवार को फिस्क के निधन पर “गहरा दुख” जताया. साथ ही उन्होंने फ़िस्क के निधन को पत्रकारिता की दुनिया के लिए एक क्षति बताया.

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    संडे एक्सप्रेस में करियर की शुरुआत के बाद फिस्क 1972 में द टाइम्स के उत्तरी आयरलैंड मामलों के संवाददाता के तौर पर संघर्षों को कवर करने के लिए बेलफ़ास्ट चले गए.

    वो 1976 में अख़बार के मध्य पूर्व मामलों के संवाददाता बन गए.

    लेबनान की राजधानी बेरूत से उन्होंने देश के गृह युद्ध के साथ-साथ 1979 के ईरान रिवॉल्यूशन, अफ़ग़ानिस्तान के सोवियत युद्ध और ईरान-इराक़ युद्ध को रिपोर्ट किया.

    मालिक के साथ विवाद के बाद उन्होंने 1989 में द टाइम्स से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वो द इंडिपेंडेंट में चले गए.

    ओसामा का इंटरव्यू

    1990 के दशक में उन्होंने अख़बार के लिए तीन बार ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू लिया. उन्होंने 1993 में पहले इंटरव्यू के दौरान ओसामा को शर्मीला आदमीबताया और कहा कि वो हर तरह से पहाड़ों में लड़ने वाला एक मुजाहिदीनलग रहे थे.

    सऊदी चरमपंथी के 11 सितंबर को किए हमलों के बाद फ़िस्क ने अगले दो दशक तक अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और सीरिया समेत मध्य पूर्व में संघर्षों को कवर किया.

    वो अरबी भाषा बोल लेते थे. इस क्षेत्र की उनकी समझ और अनुभव के लिए उन्हें बहुत माना जाता था.

    लेकिन उन्हें अमरीका और इसराइल की तीखी आलोचना करने के लिए भी जाना जाता था.

    सोशल मीडिया के ज़रिए कई पत्रकारों ने फ़िस्क को श्रद्धांजलि दी है.