बाबरी मस्जिद विध्वंस केसः अयोध्या फ़ैसले के बाद अप्रासंगिक हो चुका था बाबरी मामला - शिव सेना
शिव सेना सांसद संजय राऊत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आए फ़ैसले पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि अब हमें इस एपीसोड को भूल जाना चाहिए.
लाइव कवरेज
आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनेंगे फ़ैसला
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फ़ैसला सुनाने के लिए सामान्यतः अभियुक्तों को अदालत में उपस्थित रहना होता है.
मगर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अदालत ने छह अभियुक्तों लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, महंत नृत्यगोपाल दास, कल्याण सिंह, सतीश प्रधान छको अदालत में पेश रहने से छूट दी है.
ये सभी लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से फ़ैसला सुनेंगे.
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6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में क्या-क्या हुआ था?
बाबरी विध्वंस केस में 30 सितंबर 2020 को अहम फ़ैसला आने वाला है.
लेकिन उस रोज़ क्या-क्या हुआ था जब बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी? अचानक भीड़ वहां तक कैसे पहुंची? वो पूरा दिन और उसके बाद वाले दिनों में क्या-क्या हुआ था?
अयोध्या में उस समय मौजूद रहे पत्रकारों ने दिया ब्योरा.
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बाबरी मस्जिद विध्वंस में निर्णायक भूमिका निभाने वाले चेहरे
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लखनऊ में विशेष अदालत के बाहर भारी सुरक्षा
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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लखनऊ में स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले से पहले अदालत के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है.
नमस्कार! बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज पर आपका स्वागत है. 30 सितंबर बुधवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में महत्वपूर्ण फ़ैसला आना है. इस मामले से जुड़ी ताज़ातरीन जानकारियों, पृष्ठभूमि और विश्लेषण के लिए इस पन्ने पर जुड़े रहें.
बाबरी मस्जिद विध्वंस पर आज दोपहर 11 बजे सुनाया जाएगा फ़ैसला
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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत आज फ़ैसला सुनाने वाली है.
यह फ़ैसला दोपहर क़रीब 11 बजे सुनाया जाएगा. अदालती फ़ैसले को लेकर अयोध्या को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
सीबीआई की विशेष अदालत ने बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत कुल 32 अभियुक्तों को जज सुरेंद्र कुमार यादव की अदालत में फ़ैसला सुनाए जाने के वक्त हाज़िर रहने के लिए कहा है.
सोलहवीं सदी में मुग़ल बादशाह बाबर के दौर में बनी बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर, 1992 को कारसेवकों की एक भीड़ ने गिरा दिया था. इसके बाद पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया, हिंसा हुई और सैकड़ों की संख्या में लोगों की जानें गईं.
उसके बाद बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में दो एफ़आईआर दर्ज किए गए. पहली, इसे गिराने वाले कारसेवकों के ख़िलाफ़, तो दूसरी बीजेपी, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और आरएसएस से जुड़े उन 8 लोगों के ख़िलाफ़ थी जिन्होंने रामकथा पार्क में मंच से कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था.
दूसरे एफ़आईआर में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, वीएचपी के तत्कालीन महासचिव अशोक सिंघल, बजरंग दल के नेता विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर और विष्णु हरि डालमिया नामज़द किए गए थे.
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पहला मामला सीबीआई को तो दूसरा मामला सीबीसीआईडी को सौंपा गया जिसे बाद में एक साथ जोड़ते हुए सीबीआई ने संयुक्त आरोप पत्र दाखिल किया क्योंकि दोनों मामले एक दूसरे से जुड़े हुए थे.
साथ ही आरोप पत्र में बाला साहेब ठाकरे, कल्याण सिंह, चंपत राय, धरमदास, महंत नृत्य गोपाल दास और कुछ अन्य लोगों के नाम जोड़े गए.
इसी महीने की दो तारीख़ को इस मुक़दमे में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी जीवित अभियुक्तों के बयान दर्ज करके मामले में सभी अदालती कार्यवाही पूरी कर ली थी. तब अदालत ने 30 सितंबर को फ़ैसला सुनाने का निर्णय लिया था.
सुनवाई पूरी होने तक कुल मिलाकर इस मामले में सीबीआई ने अपने पक्ष में 351 गवाह और क़रीब 600 दस्तावेज़ पेश किए.
बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में कब और क्या-क्या हुआ
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छह दिसंबर 1992 को सोलहवीं सदी की बनी बाबरी मस्जिद को कारसेवकों की एक भीड़ ने गिरा दिया था. 28 साल पुराने मामले में शुरू से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ, विस्तार से पढ़ने के लिए क्लिक करिए.