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विस्फोट के जख़्मों से जूझते लेबनान में कोरोना वायरस का कहर

विस्फोट के बाद बेरूत में 6,000 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. इस धमाके में बेरूत के अस्पतालों को भी भारी क्षति पहुंची है.

लाइव कवरेज

  1. कोरोना संकट: इतिहास के सबसे बुरे दौर में जापानी अर्थव्यवस्था

    जापान की अर्थव्यवस्था आधुनिक इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है. कोरोना वायरस की महामारी ने कारोबार को ठप कर दिया है और लोगों ने खर्च करना भी लगभग बंद कर दिया है.

    अप्रैल-जून की तिमाही में जापान की जीडीपी में रिकॉर्ड 7.8 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई. ये देश के आधुनिक इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.

    इस स्थिति ने दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के नीतिनिर्माताओं पर ये दबाव बना दिया है कि देश को और ज़्यादा डूबने और लंबे वक़्त की मंदी से बचाया जाए.

    अप्रैल-जून तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था में आधे से ज़्यादा योगदान देने वाली निजी खपत में 8.2 फ़ीसदी की गिरावट देखी गई. ये गिरावट विश्लेषकों के अनुमान (7.1फ़ीसदी) से कहीं ज़्यादा थी. इसके अलावा,सालाना निजी खपत में 56 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

    जापान ने मई के आख़िर में आपातकाल हटा दिया था और इसके बाद ज़्यादातर कारोबार खुल गए थे. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल के आख़िर में हालात कितने सुधरेंगे, ये कोरोना महामारी की स्थिति पर निर्भर करेगा.

    मिज़ुहो रिसर्च इंस्टिट्यूट में वरिष्ठ अर्थशास्त्री सैसुके सकाई ने कहा, “हमें उम्मीद है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में हमें दो अंकों में वृद्धि देखने को मिलेगी लेकिन अप्रैल-जून में जो नुक़सान हुआ है, उसकी ये मुश्किल से ही भरपाई कर पाएगा.”

    उन्होंने कहा, “आशंका है कोरोना संकट के कारण जापान में आर्थिक गतिविधियां फिर से बाधित होंगी. हो सकता है कि कई बड़े देश फिर से लॉकडाउन लगाएं और जापान में भी एक बार फिर आपातकाल लग जाए.”

    जापान के वित्त मंत्री यासुतोशी निशिमुरा ने एक बयान में कहा कि सरकार अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए ‘लचीले और समय के अनुकूल’ कदम उठाएगी.

    जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमें उम्मीद है कि जापान की अर्थव्यवस्था को ज़्यादा से ज़्यादा गति दे सकेंगे. अप्रैल-मई में जो नुक़सान हुआ अब वो घरेलू मांग बढ़ने के साथ रिकवरी की राह पर है.”

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में पिछले 24 घंटों में 57,981 लोग हुए कोरोना से संक्रमित

    भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 57,981 नए मामले सामने आए और 941 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही भारत में अब तक 26 लाख 47 हज़ार 663 लोग संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों की तादाद 50,921 पहुंच गई है.

  3. ग्रामीण भारत में तबाही मचाएगा कोरोना?

    भारत के ग्रामीण इलाक़ों में साठ करोड़ से अधिक लोग रहते हैं और अब ये डर बढ़ रहा है कि बहुत से लोग बिना टेस्ट और इलाज के ही इस वायरस का शिकार न बन जाएं.

    नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के डेटा के मुताबिक़ देश की ग्रामीण आबादी के 25 प्रतिशत लोगों की पहुंच ही सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक है.

    भारत के बुज़ुर्गों की 70 फ़ीसदी आबादी गाँवों में रहती है और इन्हें लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं.

    स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच न होने की वजह से गाँवों में बहुत से लोग गंभीर बीमारियों का भी इलाज नहीं करा पाते हैं. ऐसे में जानलेवा बीमारियों का इलाज समय पर नहीं हो पाता है.

    भारत के शीर्ष महामारी विशेषज्ञ जयप्रकाश मुलीयिल मानते हैं कि भारत की कम से कम आधी आबादी तक कोरोना संक्रमण पहुंचेगा.

    उन्होंने द गार्डियन से कहा है कि भारत के ग्रामीण इलाक़ों में पहले से जानलेवा बीमारियों का शिकार बहुत से लोग कोविड-19 का इलाज नहीं करा पाएंगे

    वो कहते हैं, '’इस समूह और बुज़ुर्गों पर वायरस की चपेट में आने का ख़तरा ज़्यादा है. सीमित संसाधनों की वजह से परिवार बुज़ुर्गों को तुरंत अस्पताल नहीं लेकर जाएंगे. उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा. ये ग्रामीण भारत की एक सच्चाई है जहां औसत आयु 65 वर्ष ही है.’'

    मुलियल कहते हैं कि भारत के कई ज़िले दस हज़ार वर्ग किलोमीटर से भी बड़े हैं. मौत अलग-अलग इलाक़ों में हो रही होंगी. ऐसे में इस मानवीय त्रासदी की पूरी तस्वीर कभी सामने आ ही नहीं पाएगी या सामने आएगी भी तो इसमें बहुत वक़्त लगेगा.

    ग्रामीण इलाक़ों के डर

    सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण भारत में जिस तरह महामारी फैलेगी वो शहरों के मुक़ाबले बिल्कुल अलग होगा.

    शहरों में भले ही ये बीमारी तेज़ी से फैल रही है लेकिन यहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के ख़िलाफ़ इससे लड़ने के लिए कुछ संसाधन तो है हीं. भारत में 80 प्रतिशत डॉक्टर और 60 प्रतिशत अस्पताल शहरी इलाक़ों में ही हैं.

    बीस करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश और 10 करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य बिहार में हालात मुश्किल हो सकते हैं. दोनों ही राज्यों की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं.

    भारत के सबसे ग़रीब प्रांतों में से एक बिहार में तीस प्रतिशत से अधिक लोग ग़रीबी रेखा से नीचे हैं. यहां 90 प्रतिशत के क़रीब आबादी गाँवों में ही रहती है.

    2019 के नेशनल हेल्थ प्रोफ़ाइल डेटा के मुताबिक़ बिहार में हर दस हज़ार की आबादी पर सिर्फ़ एक बिस्तर और चार डॉक्टर ही उपलब्ध हैं. राज्य में जब वायरल बुख़ार या डेंगू फैलता है तब भी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत ख़राब हो जाती है.

    उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक़ इस समय प्रदेश में कोविड संक्रमण के लिए 135 अस्पताल हैं. सरकार ने बड़े पैमाने पर टेस्ट कराने का लक्ष्य भी रखा है लेकिन अभी भी संक्रमण की पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है.

  4. ब्रेकिंग न्यूज़, मंदी की तरफ़ जा रहा जापान

    जापान की अर्थव्यवस्था को इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अब तक की सबसे बड़ी चोट पहुंची है. कोरोना वायरस महामारी की वजह से ग्राहक ख़र्च नहीं कर रहे हैं.

    ऐसे में नीतिनिर्माताओं पर आर्थिक मंदी को और गहराने से रोकने के लिए सख़्त क़दम उठाने का दबाव है.

    मई के अंत से लॉकडाउन हटाने की शुरुआत हो गई थी और इसी के साथ अर्थव्यवस्था दोबारा पटरी पर आनी शुरू हुई थी लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जो भी बेहतरी होगी वो सीमित ही रहेगी क्योंकि संक्रमण के नए मामले सामने आने की वजह से लोग बहुत सोच समझकर ख़र्च कर रहे हैं.

    अप्रैल-जून तिमाही में जापान का जीडीपी वार्षिक दर के मुक़ाबले 27.8 प्रतिशत कम हुआ है. जापान में 1980 में डेटा मुहैया होने के बाद से ये जीडीपी में सबसे बड़ी गिरावट है.

    ये लगातार तीसरी तिमाही थी जब अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई. अनुमान लगाया गया था कि जीडीपी 27.2 प्रतिशत तक सिकुड़ सकता है. सोमवार को सरकार की ओर से जारी डेटा इससे कुछ ही ज़्यादा है.

    नोरिनचूकिन रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुख्य अर्थशास्त्री ताकेशी मीनामी कहते हैं, '’इस बड़ी गिरावट की वजह खपत और निर्यात में आई कमी है. मैं उम्मीद करता हूं कि जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़त सकारात्मक हो जाएगी. लेकिन वैश्विक तौर पर, चीन को छोड़कर दुनिया के हर हिस्से में अर्थव्यवस्था सुस्त रफ़्तार से पटरी पर लौट रही है.'

    निजी खपत जापान की कुल अर्थव्यवस्था का आधे से भी ज़्यादा है. इस तिमाही में इसमें 8.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. लॉकडाउन की वजह से लोग घरों में ही थे और उन्होंने ख़र्च कम किए.

    विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि निजी खपत में 7.1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है. लेकिन ये गिरावट इससे अधिक रही और अब तक के रिकॉर्ड में सबसे ज़्यादा है.

    वहीं पूंजीगत व्यय में 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट आई है जबकि अनुमान 4.2 प्रतिशत की गिरावट का लगाया गया था.

    बाहरी मांग यानी निर्यात और आयात के बीच अंतर भी कम हुआ है और इसकी वजह से जापान के जीडीपी में 3 प्रतिशत की गिरावट आई है. महामारी की वजह से दुनियाभर में चीज़ों की मांग कम हुई है.

    महामारी के असर को कम करने के लिए जापान ने बड़े पैमाने पर राजकोषीय और मौद्रिक पैकेज जारी किया है. जापान की अर्थव्यवस्था पहले से ही सेल्स टैक्स में वृद्धि और अमरीका-चीन के बीच व्यापार युद्ध के असर को झेल रही थी.

    जापान सरकार ने मई के अंत में लॉकडाउन हटाना शुरू कर दिया था जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही थी, लेकिन संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह से एक बार फिर अर्थव्यवस्था पर काले बादल मंडरा रहे हैं. घरेलू ख़र्चे भी कम हो रहे है जिसका असर व्यापार पर पड़ रहा है.

  5. न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री ने चार सप्ताह के लिए टाला चुनाव

    न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा एर्डर्न कोरोना वायरस को रोकने के अपने 'जल्दी और तेज़ी से कार्रवाई' करने के मंत्र पर चल रही हैं. ऑकलैंड के एक इलाक़े में संक्रणण के 49 नए मामले सामने आए हैं.

    बीते सप्ताह ऑकलैंड में नए मामले सामने आए थे. अब प्रधानमंत्री ने अगले महीने 19 सितंबर को होने वाले आम चुनावों को चार सप्ताह के लिए टाल दिया है. अब चुनाव 17 अक्टूबर को होंगे.

    प्रधानमंत्री ने कहा है कि सबसे बड़ी चुनौती 25 हज़ार चुनाव कर्मियों को सुरक्षित रखने की होगी.

    एर्डर्न ने ये भी कहा है कि चुनाव टालने का फैसला लेते वक़्त उन्होंने मतदान में वोटरों की भागीदारी और पारदर्शिता का ध्यान रखा है. उनका कहना है कि चुनावों को और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘'कोविड अब कुछ और समय के लिए हमारे साथ रहेगा. चुनावों को आगे बढ़ाते रहने से कोविड के दखल का ख़तरा कम नहीं होगा और इसी वजह से चुनाव आयोग ने ऐसी तैयारियां की हैं कि यदि देश में कोरोना महामारी लेवल दो या कुछ हद तक लेवल तीन तक भी पहुंचती है तब भी मतदान करा लिया जाएगा.'

    एर्डर्न ने कहा कि इसमें कोई और बदलाव करने का उनका कोई इरादा नहीं है.सोमवार को जारी किए गए एक स्थानीय शोध के आँकड़ों के मुताबिक़ न्यूज़ीलैंड के 60 प्रतिशत लोगों को लगता था कि चुनाव 19 सितंबर को तय तारीख़ पर नहीं हो सकेंगे.

    संसद अब छह सितंबर को भंग हो जाएगी.रविवार तक न्यूज़ीलैंड में कोरोना संक्रमण के 69 एक्टिव मामले थे, इनमें से 49मामले ऑकलैंड में सामने आए हैं.

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