जितनी बड़ी भारत की अर्थव्यवस्था उससे ज़्यादा अमरीका राहत पैकेज दे चुका
अमरीका के वित्त मंत्रालय का कहना है कि तीसरी तिमाही में कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव को कम करने के लिए 947 अरब डॉलर क़र्ज़ लेने की योजना है. कांग्रेस पहले ही तीन ट्रिलियन डॉलर कोरोना वायरस महामारी को लेकर आर्थिक पैकेज आवंटित कर चुकी है.
रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स में इस बार कोरोना वायरस रिलीफ़ बिल को लेकर मतभेद है क्योंकि लाखों की तादाद में बेरोज़गार हुए अमरीकियों को मुआवजा देने की समय सीमा ख़त्म हो चुकी है. सोमवार को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अनुमान के मुताबिक़ एक ट्रिलियन डॉलर की और ज़रूरत है ताकि बिल पास होने के बाद उसे लागू किया जा सके.
भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2.73 ट्रिलियन डॉलर का है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तमन्ना है कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार पाँच ट्रिलियन डॉलर का हो जाए. अर्थव्यवस्था के आकार का मतलब जीडीपी से है.
2017 की रैंकिंग में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2.65 ट्रिलियन डॉलर था जो 2018 में बढ़कर 2.73 ट्रिलियन डॉलर तो हुआ लेकिन उसकी रैंकिंग गिर गई.
ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि 2018 में फ़्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में ज़्यादा मज़बूत रही. कहा जा रहा था कि भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर पाँचवें नंबर पर आ जाएगा लेकिन ब्रिटेन और फ़्रांस ने भारत को सातवें नबंर पर धकेल दिया.
2018 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2.64 ट्रिलियन डॉलर से 2.84 ट्रिलियन डॉलर की हो गई और फ़्रांस की 2.59 ट्रिलियन डॉलर से 2.78 ट्रिलियन डॉलर की. 20.49 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमरीकी अर्थव्यवस्था पहले नंबर है और 13.61 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन की अर्थव्यवस्था दूसरे नंबर पर है.
4.97 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान तीसरे नंबर पर और जर्मनी 3.99 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे नंबर पर है. अगर मोदी के पाँच ट्रिलियन डॉलर का सपना पूरा हो जाता है तो भारत तीसरे नंबर पर आ जाएगा लेकिन यह इतना आसान नहीं है.