कोरोना अपडेट: 15 अगस्त तक वैक्सीन बनाने पर ICMR की सफ़ाई, कहा स्वीकृत नियमों के तहत बनेगा टीका
आईसीएमआर ने कहा फ़ास्ट ट्रैक वैक्सीन विकसित करने की प्रक्रिया वैश्विक रूप से स्वीकृत नियमों के तहत हो रही है.
लाइव कवरेज
कोरोना हमारे कामकाज का पूरा तरीका बदल देगा?
वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस हमारे कामकाज का पूरा तरीका बदल देगा?
वर्क फ़्रॉम होम, ज़ूम मीटिंग, वॉट्ऐप कॉल और न जाने क्या-क्या.
जब से कोरोना वायरस आया है, हम रोज़ ये सब सुनते हैं और इन्हीं के ज़रिए काम करते हैं.
अब क्या हमारे काम करने का तरीका भी पूरी तरह बदल जाएगा?
ऑफ़िस जाने वालों का तो फिर भी ठीक है लेकिन खेती-बाड़ी करने वालों और बाहर जाकर मज़दूरी करने वालों का क्या होगा?
इस वीडियो में हमने इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढते हुए भविष्य में झांकने की कोशिश की है.
कोरोना काल में भी जारी नफ़रत फैलाने वाली फ़ेक न्यूज़
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फ़ेक या भ्रामक ख़बरें उन पर असली प्रभाव डालती हैं जो ख़ुद को इसका शिकार समझते हैं. कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत में यह एक ख़ास समस्या है जहां समाचार के विश्वसनीय स्रोत अक्सर असत्यापित ऑनलाइन सूचनाओं के ज़रिए पीछे छूट जाते हैं.
ग़लत सूचनाएं अल्पसंख्यक समुदायों के लिए गंभीर परिणाम लेकर आई हैं. इसके साथ ही मांस उद्योग जैसे कुछ बिज़नेस सेक्टर्स के लिए भी यह गंभीर है.
रिएलिटी चेक टीम ने ग़लत सूचनाओं के इस क्षेत्र पर नज़र डाली है और इससे सीधे तौर पर प्रभावित लोगों के बारे में जाना.
धार्मिक तनाव को हवा
भारत में ऑनलाइन फैल रही ग़लत जानकारियों में धर्म एक ख़ास विषय है और कोरोना वायरस महामारी के दौर में यह और अधिक उजागर हुआ है.
इस साल जनवरी से जून के बीच भारत की पांच फ़ैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ने जिन झूठे दावों की पोल खोली उस पर हमने नज़र दौड़ाई.
इनमें चार विषय शीर्ष पर रहे हैं:
कोरोना वायरस महामारी
फ़रवरी के दिल्ली दंगे
नागरिकता संशोधन क़ानून
मुस्लिम अल्पसंख्यकों को लेकर दावे
पांच भारतीय वेबसाइटों के 1,447 फ़ैक्ट-चेक्स की ख़बरों में कोरोना वायरस छाया हुआ है. इनमें 58 फ़ीसदी ख़बरें इस विषय से जुड़ी हैं.
इनमें अधिकतर दावे वायरस की उत्पत्ति की साज़िश, लॉकडाउन को लेकर अफ़वाहें और झूठे इलाज को लेकर थीं.
कोरोना वायरस: कुछ इस तरह बदल जाएगी हमारे काम-धाम की दुनिया
पूर्वी शाह इस साल मार्च से ही वर्क फ़्रॉम होम कर रही हैं. तब से, जब से लॉकडाउन के पहले चरण का ऐलान हुआ. पूर्वी पब्लिक रिलेशन्स के पेशे में काम करती हैं. वो दो छोटे बच्चों की मां भी हैं.
वर्क फ़्रॉम होम के दौरान पूर्वी अपनी निजी और पेशेवर ज़िंदगी के बीच तालमेल बिठाने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं.
वो कहती हैं, "बेशक़ घर से काम करना मुश्किल है लेकिन मुझे लगता है कि अब धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ रही है. मेरा ऑफ़िस काफ़ी दूर है इसलिए मैं वहां जाकर काम नहीं करना चाहती लेकिन मैं घर से भी काम नहीं करना चाहती. मुझे ठीक से काम करने के लिए जगह बदलने की ज़रूरत है."
पूर्वी ने अब अपने घर के एक कोने को छोटे से ऑफ़िस में तब्दील कर दिया है.
उन्होंने घर में अपना एक डेस्क, प्रिंटर और इंटरनेट कनेक्शन लगवा लिया है. उनका कहना है कि ज़िंदगी थोड़ी सामान्य होते ही वो एक को-वर्किंग स्पेस में काम करना शुरू कर देंगी.
वर्क फ़्रॉम होम
ब्रैंड कंसल्टेंट हरीश बिजूर कहते हैं, "बड़े ऑफ़िस अब छोटी-छोटी यूनिट्स में तब्दील हो रहे हैं. लोग अब बिना चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के काम कर रहे हैं और कइयों के लिए ये अहम का मसला बन रहा है."
लॉकडाउन ने लोगों को उनके घरों में बंद कर दिया है.
हरीश कहते हैं, "आजकल लोगों को दो मोबाइल फ़ोन रखना पड़ता है-एक ऑफ़िस के लिए और एक निजी ज़िंदगी के लिए. लोगों को अब ऑफ़िस का कोना बनाने के लिए बड़े घरों की ज़रूरत पड़ रही है. चूंकि अब यही न्यू नॉर्मल है इसलिए प्रिंटर और ऑफ़िस के लिए बाकी ज़रूरी चीज़ों की मांग भी बढ़ गई है."
ब्रेकिंग न्यूज़, इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की आख़िरी तारीख़ 30 नवंबर तक के लिए बढ़ी
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भारत सरकार के आयकर विभाग ने साल 2019-20 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की आख़िरी तारीख़ 30 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी है.
इस सिलसिले में विभाग की ओर जारी एक बयान में कहा गया है कि समय की मांग को देखते हुए हम डेडलाइन बढ़ा रहे हैं.
इससे पहले केंद्र सरकार ने साल 2018-19 के लिए 'संशोधित इनकम टैक्स रिटर्न' फ़ाइल करने की आख़िरी तारीख़ 31 जुलाई, 2020 तक के लिए बढ़ा दी थी.
आधार संख्या को पैन खाते से जोड़ने की अंतिम तारीख भी 31 मार्च, 2021 तक के लिए बढ़ा दी गई है.
कोरोना महामारी से रूस में अब तक दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत
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रूस ने शनिवार को बताया कि वहां कोरोना महामारी के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ कर दस हज़ार पार कर गई है.
हालांकि ये संख्या अभी भी महामारी से बुरी तरह से जूझ रहे देशों से आए मौत के आंकड़ों से काफी कम है.
वैसे रूस में मौत के सरकारी आंकड़ों पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं और ये आरोप लग रहे हैं कि मरने वाले लोगों की वास्तविक संख्या कम करके बताई जा रही है.
रूस की सरकार ने बताया कि पिछले 24 घंटों में वहां 168 लोगों की कोरोना महामारी के कारण मौत हुई है और मरने वालों की संख्या 10,027 हो गई है.
इस महामारी से प्रभावित देशों की सूची में रूस तीसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है. वहां अभी तक संक्रमण के 674,515 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.
हालांकि रोज़ दर्ज किए जाने वाले संक्रमण के मामलों को देखें तो पिछले महीने की तुलना में इस महीने इन आंकड़ों में कमी देखी जा सकती है.
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रूस ने ये बात स्वीकार की है कि सरकारी वेबसाइट पर मरने वालों की संख्या के बारे में जो जानकारी दी जा रही है, उसमें केवल उन्हीं मामलों के आंकड़ें है जहां मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का प्रमुख कारण कोरोना वायरस को बताया गया है.
सरकारी सांख्यिकी कार्यालय ने देश भर में अप्रैल में हुई मौतों का आंकड़ा जारी किया था जिसके मुताबिक़ उस महीने रूस में 2712 लोगों की मृत्यु हुई थी.
इसी महीने के लिए रूस की सरकार ने 1152 लोगों के मरने का आंकड़ा जारी किया है.
यानी सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ें सरकारी आंकड़ों से दोगुने से भी ज़्यादा हैं.
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समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ रूस की सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफ़ारिशों के आधार पर मृत्यु के कारण की व्यापक परिभाषा का इस्तेमाल कर रही है.
इसमें दो तरह की स्थितियां हैं. पहली ये कि मरने वाला कोरोना संक्रमित था लेकिन मृत्यु प्रमाणपत्र में कोरोना वायरस को मौत का प्रमुख कारण नहीं बताया गया. दूसरी स्थिति ये है कि मरने वाला कोरोना संक्रमित नहीं था लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का प्रमुख कारण कोरोना वायरस को बताया गया.
मॉस्को शहर के स्वास्थ्य विभाग ने मई महीने के मौत के आंकड़ें इसी वर्गीकरण के आधार पर जारी किए जिसके अनुसार उस महीने 5620 लोगों की मौत कोरोना वायरस के कारण हुई. लेकिन इसके ठीक उलट रूस की सरकारी वेबसाइट अभी भी यही कह रही है कि मॉस्को में अभी तक कोरोना वायरस के कारण 3929 लोगों की मौत हुई है.
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वायरस कहां से शुरू हुआ, जांच के लिए अगले हफ़्ते चीन जाएगी विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम
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चीन पर ये इलज़ाम लगते रहे हैं कि उसने कोरोना महामारी की जानकारी दुनिया को बताने में देर की. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम अगले हफ़्ते चीन जा रही है, ये जांच करने के लिए कोरोना वायरस सबसे पहले कहां से फैला और इंसानों तक कैसे पहुंचा.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के चीन कार्यालय को वुहान म्यूनिसिपल हेल्थ कमिश्नर से वायरल न्यूमोनिया के बारे में मिली जानकारी के छह महीने बाद डब्ल्यूएचओ की टीम वहां जा रही है.
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस ने जनवरी में कहा था कि चीन से इस बात को लेकर सहमति बनी है कि जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक टीम वहां जाकर महामारी की शुरुआत और इसके संक्रमण को समझने की कोशिश करेगी.
कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में पांच लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और मौतों का ये सिलसिला रुकता हुआ नहीं दिख रहा है.
डब्ल्यूएचओ की चीफ़ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि इस वायरस की शुरुआत को समझने के लिए गहराई से जांच की ज़रूरत है.
उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन से इस यात्रा के बारे में बात कर रहा है. महामारी की शुरुआत और इसके संक्रमण को समझने के लिए एक टीम अगले हफ़्ते चीन जाने वाली है.
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उन्होंने कहा, "फिलहाल जिस बात की ज़रूरत है, वो ये है कि एक अच्छी जांच होनी चाहिए. ये पता लगाया जाए कि दिसंबर से पहले क्या हुआ. कहां और कैसे ये वायरस जानवरों से इंसानों तक पहुंचा. क्या कोई ऐसा जानवर तो नहीं था जो इसानों तक इसे पहुंचाने का माध्यम बना या फिर ये सीधे चमगादड़ों से इंसानों तक पहुंच गया. ये भी मुमकिन है? चमगादड़ों को दूसरी बीमारियां फैलाने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. उदाहरण के लिए निपाह. ये भी मुमकिन है कि ये वायरस सीधे आया हो. इसलिए एक संपूर्ण जांच की अभी भी ज़रूरत है."
डॉक्टर स्वामीनाथन का कहना है कि चीन की सरकार ने 31 दिसंबर को ये रिपोर्ट किया कि वुहान से न्यूमोनिया जैसी महामारी फैल रही है.
उन्होंने बताया, "चीन स्थित हमारे कार्यालय को ये जानकारी एक जनवरी को मिली. डब्ल्यूएचओ ने अपनी अंतरराष्ट्रीय मशीनरी को अलर्ट कर दिया. जब भी कहीं से कोई नई जानकारी मिलती है, ये हम अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य क़ानूनों के पालन के लिए करते हैं. ये हर किसी को बता दिया गया ताकि पूरी दुनिया को इसका पता लग सके."
ब्राज़ील में मास्क ज़रूरी करने वाले क़ानून पर बोलसोनारो का वीटो
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो
ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने एक ऐसे क़ानून को मंज़ूरी दी है जिसके तहत कोरोना महामारी के दौरान सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने को अनिवार्य कर दिया गया है.
हालांकि उन्होंने दुकानों, चर्च और स्कूलों में मास्क पहनने की अनिवार्यता ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.
सोशल मीडिया पर एक संदेश में राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने कहा कि घरों में मास्क नहीं पहनने पर लोगों पर जुर्माना लगाया जा सकता है.
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों और इस महामारी के कारण मरने वालों, दोनों ही मामलों में आंकड़ों के लिहाज से ब्राज़ील अमरीका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश बना हुआ है.
इसके बावजूद राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ब्राज़ील में कोरोना महामारी की गंभीरता को स्वीकार करने से इनकार करते रहे हैं.
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार फरवरी के आख़िर से लेकर अब तक ब्राज़ील में कोरोना वायरस से तकरीबन 15 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और इस वायरस के चलते 61,884 लोगों की मौत हो चुकी है.
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बीबीसी की दक्षिण अमरीका संवाददाता कैटी वॉटसन कहती हैं कि जायर बोलसोनारो ने कभी भी मास्क की ज़्यादा परवाह नहीं की है. ब्राज़ील में स्वास्थ्य से जुड़े इस सलाह और महमारी से निपटने के उनके तरीके पर काफी राजनीति हुई है.
कैटी वॉटसन का कहना है कि यहां तक कि जहां कहीं भी मास्क के इस्तेमाल को अनिवार्य किया गया, सभी लोगों ने इस नियम का पालन नहीं किया. और इसे लागू करने की प्रक्रिया भी काफी ढीली ढाली रही है.
चैंबर ऑफ़ डिप्यूटीज़ में पारित किए गए क़ानून में एक प्रावधान जोड़ा गया जिसके तहत व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक जगहों, शैक्षणिक स्थलों और बंद स्थानों पर जहां लोग इकट्ठा हो रहे हों, मास्क पहनना होगा.
लेकिन शुक्रवार को राष्ट्रपति बोलसोनारो ने इस प्रावधान पर वीटो कर दिया. उनकी दलील है कि इस प्रावधान से लोगों के संपत्ति के अधिकार का हनन होता है. प्रस्तावित क़ानून में एक और प्रावधान रखा गया था कि ग़रीब लोगों को मास्क वितरित किया जाए.
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बोलसोनारो ने इस प्रावधान पर भी वीटो कर दिया. राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के वीटो को खारिज करने के लिए कांग्रेस के पास 30 दिनों का समय है. उसे पूर्ण बहुमत से राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के वीटो के ख़िलाफ़ वोटिंग करनी होगी.
पिछले महीने एक जज ने राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने का आदेश दिया था, ये ऐसी बात थी जिससे राष्ट्रपति अक्सर इनकार करते रहे हैं. हालांकि बाद में एक दूसरी अदालत ने इस फ़ैसले पर रोक लगा दी.
बोलसोनारो इस बात पर जोर देते रहे हैं कि क्वारंटीन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम कोरोना संकट से निपटने के लिए ग़ैरज़रूरी हैं और इससे पहले से कमज़ोर ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था को और नुक़सान पहुंचेगा.
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गुरुवार रात को रियो डे जेनेरियो में बार खोले जाने की इजाजत दे गई थी. इसी शहर में कोरोना महामारी के चलते 6600 लोगों की मौत हो चुकी है.
ब्राज़ील के कांग्रेस के सदस्य डेविड मिरांडा ने एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें लेबलन शहर में दर्जनों लोग सड़कों पर शराब पीते हुए दिख रहे थे और उन्होंने न तो मास्क ही पहन रखी थी और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन ही किया जा रहा था.
फ्रांस में कोरोना संकट: प्रधानमंत्री का इस्तीफा, कोर्ट करेगा जांच
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इमेज कैप्शन, जांच के दायरे में एड्वार्डो फिलिप (तस्वीर में बीच में) के अलावा, फरवरी में इस्तीफा देने वाली हेल्थ मिनिस्टर एग्नेस बुज़ीन और उनके बाद स्वास्थ्य मंत्री बनने वाले ओलिवर बुरान शामिल हैं
फ्रांस की सरकार ने कोरोना संकट का सामना किस तरह से किया, इस पर देश की एक अदालत ने जांच बिठा दी है. कर्मचारी संघों और डॉक्टरों की शिकायत के बाद शुरू की गई इस जांच में सरकार के तीन अहम व्यक्तियों की भूमिका पर विचार किया जाएगा जिनमें निवर्तमान प्रधानमंत्री एड्वार्डो फिलिप भी शामिल हैं.
इससे पहले प्रधानमंत्री एड्वार्डो फिलिप ने शुक्रवार को कैबिनेट में फेरबदल की प्रक्रिया के बीच इस्तीफा दे दिया.
महामारी के दौरान मेडिकल इक्विपमेंट्स की कमी को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
एड्वार्डो फिलिप के इस्तीफे के कुछ ही घंटे बाद फ्रांस में मंत्रियों के कदाचार से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार एक अदालत ने ये फै़सला दिया कि कोरोना संकट को उनकी सरकार ने किस तरह से हैंडल किया, इस पर जांच शुरू की जाएगी.
सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर फ्रैंक्वोएस मोलिन ने बताया कि जांच के दायरे में एड्वार्डो फिलिप के अलावा, फरवरी में इस्तीफा देने वाली हेल्थ मिनिस्टर एग्नेस बुज़ीन और उनके बाद स्वास्थ्य मंत्री बनने वाले ओलिवर बुरान शामिल हैं.
फ्रांस में कोरोना वायरस से संक्रमण के 202,673 मामले दर्ज किए जा चुके हैं जबकि वहां 29,875 लोगों की मौत हो गई है.
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इमेज कैप्शन, 55 वर्षीय जीन कास्टेक्स एड्वार्डो फिलिप की जगह ले रहे हैं
राष्ट्रपति मैक्रों अपनी टीम क्यों बदल रहे हैं?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन साल पहले सत्ता में आए थे लेकिन कोरोना महामारी की वजह से अब वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. हालांकि उनकी सरकार में फेरबदल की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही थी और इसकी उम्मीद भी की जा रही थी.
फ्रांस में ये राजनीतिक परंपरा रही है कि राष्ट्रपति अपने पांच साल के कार्यकाल में एक प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं. एड्वार्डो फिलिप प्रधानमंत्री पद पर बने रह पाएंगे या नहीं, इसे लेकर पिछले कुछ हफ़्तों से संदेह जाहिर किया जा रहा था.
रविवार को होने वाली वोटिंग के बाद वे अब ले हावरे शहर के मेयर पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं. राष्ट्रपति मैकों ने एड्वार्डो फिलिप के बारे में कहा, "तीन सालों तक वे हमारे साथ रहे. हमने महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सुधारों को मुश्किल समय में अंजाम दिया. हमारे एक दूसरे से भरोसे का रिश्ता रहा है."
फ्रांस के नए प्रधानमंत्री कौन हैं?
55 वर्षीय जीन कास्टेक्स को फ्रांस में कम ही लोग जानते हैं. वे वरिष्ठ नौकरशाह है और सरकार के कोविड रिस्पॉन्स टीम में उन्होंने अहम भूमिका का निर्वाह किया था.
जीन कास्टेक्स मैक्रों और एड्वार्डो फिलिप की तरह उसी यूनिवर्सिटी से पढ़कर निकले हैं. वे दक्षिण पंथी रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य रहे हैं.
शुक्रवार को जीन कास्टेक्स ने अपने भाषण में चेतावनी दी कि कोरोना संकट दुर्भाग्य से अभी खत्म नहीं हुआ है, आर्थिक और सामाजिक संकट पहले से मौजूद है.
कोरोना वायरसः दुनिया के वे शहर जो फिर से लॉकडाउन का सामना कर रहे हैं
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दुनिया भर के कई शहरों में लोग लंबे लॉकडाउन के बाद ज़िंदगी वापस पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन कई जगहों पर कोरोना संक्रमण के मामले इस कदर बढ़े हैं कि वहां सरकारों और प्रशासन को एक बार फिर से लॉकडाउन लागू करना पड़ रहा है.
बीजिंग से लेकर लेस्टर तक कई शहरों में कोरोना महामारी की 'दूसरी लहर' पर लगाम लगाने के इरादे से दोबारा प्रतिबंध लगाए गए हैं. दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर एक करोड़ 10 लाख 31 हज़ार से अधिक हो गए हैं और मरने वालों की संख्या भी बढ़कर पांच लाख 23 हज़ार से अधिक हो गई है.
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन की ये चेतावनी भी लोगों को परेशान कर रही है कि इस महामारी का सबसे ख़राब दौर अभी नहीं आया है.
लॉकडाउन के शुरुआती चरण में लोगों का एक दूसरे से संपर्क काटने में मदद मिली थी और महामारी को फैलने से रोकने में ये कुछ हद तक कारगर रहा.
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व्यापक स्तर पर टेस्टिंग और ट्रेसिंग से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को लागू कराने में भी प्रशासन को मदद मिली लेकिन जैसे ही पाबंदियों में ढील देने की शुरुआत हुई, संक्रमण के नए मामले, नए हॉटस्पॉट इलाके सामने आने लगे और कुछ जगहों पर तो हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि दोबारा से लॉकडाउन लगाने का फ़ैसला करना पड़ा.
ज़्यादातर मामलों में नया लॉकडाउन छोटे इलाकों में, हॉटस्पॉट वाली जगहों पर और ऐसे स्थानों पर जहां बहुत भीड़भाड़ रहती है और सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करना मुश्किल है, लगाया गया. इनमें चीन की राजधानी बीजिंग है, जहां नए यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए हैं.
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बीजिंग के अलावा चीन के ही हेबेई प्रांत के एन्क्सिन शहर में कोरोना संक्रमण के मामले फिर से मिलने पर नए सिर से पाबंदियां लगाई गई हैं. ठीक इसी तरह जब मेलबर्न में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ने लगे तो ऑस्ट्रेलिया ने तीन लाख से ज़्यादा आबादी की रिहाइश वाले इलाके में लॉकडाउन फिर से लागू कर दिया.
ब्रिटेन में लेस्टर देश का पहला ऐसा शहर बना जिसने दोबारा लॉकडाउन देखा. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ अगर अमरीका के ह्यूस्टन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में संक्रमण के हालात इसी तरह से ख़राब होते रहे तो वहां भी लॉकडाउन लगाने के बारे में विचार किया जा सकता है.
हालांकि दूसरे लॉकडाउन में हॉटस्पॉट वाले इलाकों पर ही ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है और कुछ मामलों में तो पहले से कम सख्ती बरती जा रही है.
ब्राज़ील में चीन के वैक्सीन प्रोजेक्ट को ट्रायल के लिए मंजूरी
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ब्राज़ील की हेल्थ रेगुलेटरी एजेंसी ने शुक्रवार को चीन के एक वैक्सीन प्रोजेक्ट को अपने यहां क्लीनिकल ट्रायल के लिए मंजूरी दे दी है.
इस क्लीनिकल ट्रायल में चीनी कंपनी सिनोवैक और ब्राज़ील की एक एजेंसी शामिल है.
समझौते के तहत सिनोवाक को न केवल वैक्सीन के ट्रायल की मंजूरी दी गई है बल्कि स्थानीय स्तर पर इसके उत्पादन के लिए तकनीक का हस्तांतरण भी किया जाएगा.
29 जून को साओ पाउलो के गवर्नर जोआओ डोरिया ने बताया था कि इस क्लीनिकल ट्रायल के लिए 9000 वॉलंटियर्स ने पहले ही रजिस्ट्रेशन करा लिया है.
ब्राज़ील के छह राज्यों में चीन के इस वैक्सीन प्रोजेक्ट का ट्रायल किया जाएगा.
ब्राज़ील में कोरोना संक्रमण के 15 लाख पुष्ट मामलों के बाद चीनी वैक्सीन प्रोजेक्ट को ट्रायल की ये मंजूरी दी गई है.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारतः हर दिन कोरोना संक्रमण का टूटता रिकॉर्ड, पिछले 24 घंटे में 442 मरे
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भारत में कोरोना महामारी के कारण पिछले 24 घंटे में 441 लोगों की मौत हो गई है.
साथ ही संक्रमण के 22,771 नए मामले भी दर्ज किए गए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 648,315 हो गई है.
संक्रमण के कुल मामलों में 235,433 मामले फिलहाल सक्रिय हैं और 394,227 लोग ऐसे हैं जो ठीक हो गए हैं.
देश में अब तक कोरोना के कारण 18,655 लोगों की मौत हो चुकी है.
ब्राज़ील में अब तक 15 लाख से ज़्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए
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शुक्रवार को दुनिया भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक करोड़ दस लाख से ज़्यादा पहुंच गई. पिछले सात महीनों में कोरोना से पाँच लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
अमरीका में शु्क्रवार को कुल 53 हज़ार नए मामले सामने आए तो ब्राज़ील में 42,223 नए संक्रमितों की पहचान की गई. ब्राज़ील में अब तक 15 लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं.
कोरोना से संक्रमित और मौत के मामले में अमरीका पहले और ब्राज़ील दूसरे नंबर पर है. पिछले 24 घंटों में ब्राज़ील में कोरोना से 1,290 लोगों की मौत हुई है और इसके साथ ही मृतकों की कुल संख्या 63,174 पहुंच गई है.
ब्रेकिंग न्यूज़, अमरीका में शुक्रवार को कोरोना संक्रमण के 53 हज़ार नए मामले
अमरीका में शुक्रवार को कोरोना संक्रमण के 53 हज़ार नए मामले सामने आए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमरीका के कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ नए मामले सामने आए हैं.
अलबामा, अलास्का, इडाहो, मिसीसिपी, नॉर्थ कैरोलाइना, साउथ कैरोलाइना और टेनेसी में शुक्रवार को रिकॉर्ड तोड़ मामले सामने आए. हालांकि गुरुवार को इससे भी ज़्यादा नए मामले सामने आए थे. गुरुवार को कुल 55,405 लोग संक्रमित हुए थे.
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच चार जुलाई को समारोह का आयोजन करेंगे ट्रंप
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस महामारी के लगातार बढ़ते ख़तरे के बावजूद चार जुलाई को समारोह में शामिल होने के लिए माउंट रशमोर जाएंगे.
इस दौरान साउथ डाकोटा में आतिशबाज़ी का भी आयोजन किया जाएगा.
अमरीका के स्वतंत्रता दिवस (चार जुलाई) के पूर्व आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में क़रीब साढ़े सात हज़ार लोगों के जुटने की संभावना है. इससे पूर्व तीन जुलाई को ट्रंप ने कहा था कि वो संबोधन के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
इस मौक़े पर मास्क उपलब्ध होंगे लेकिन मास्क पहनना अनिवार्य नहीं होगा. सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर भी कोई सख़्ती नहीं की जाएगी.
फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री पर कोविड19 को लेकर जांच
कोरोना वायरस से निपटने के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए तरीक़ों की जांच के लिए फ्रांस में एक अदालत का गठन किया गया है.
यूनियन के सदस्यों और डॉक्टरों की शिकायत के बाद निवर्तमान प्रधानमंत्री एडर्ड फिलिप सहित तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र में रखकर यह जांच की जाएगी.
इससे पहले शुक्रवार को ही कैबिनेट के फेरबदल के बीच फिलिप ने इस्तीफ़ा दे दिया था.
महामारी के दौरान चिकित्सा उपकरणों की कमी को लेकर सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा है.
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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी कोरोना संक्रमित
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया है.
कुरैशी ने ट्विटर पर इसकी सूचना दी.
लिखा,“दोपहर में मुझे हल्का बुखार महसूस हुआ और मैंने तुरंत ही खुद को होम क्वारंटीन कर लिया. मैं कोविड19 पॉजिटिव पाया गया हूं. अल्लाह की कृपा से मैं ख़ुद को मजबूत और ऊर्जावान महसूस कर रहा हूं. मैं घर से ही अपनी ज़िम्मेदारी निभाना जारी रखूंगा. कृपया मेरे लिए प्रार्थना करें.'
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ग़रीब बस्तियों में 'जंगल की आग' की तरह फैल रहा है वायरस
दक्षिण अफ़्रीका अपने यहां लॉकडाउन में ढील दे रहा है मगर देश की ग़रीब बस्तियों में अभी भी कोरोना वायरस कहर बरपा रहा है.
केपटाउन में एक ऐसे ही बस्ती में रहने वाले लोगों और डॉक्टरों ने बीबीसी संवाददाता एंड्रू हार्डिंग को बताया कि उन्हें बहुत मुश्किलें पेश आ रही हैं.
एरिक ग्रोमेरे नाम के एक डॉक्टर ने कहा, “यहां वायरस जंगल की आग की तरह फैल रहा है. इस इलाक़े के अस्पताल हालात को संभाल नहीं पाएंगे.”
डॉक्टर का कहना है कि 'गंभीर मरीज़ों को अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र के एक भाग में रखा गया है जहां उनका मरना लगभग तय है.'
संक्रमण के मामले एक करोड़ दस लाख के पार
जॉन्स हॉपकिन्स वेबसाइट के डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक़, दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर एक करोड़ 10 लाख 31 हज़ार से अधिक हो गए हैं.
मरने वालों की संख्या भी बढ़कर पांच लाख 23 हज़ार से अधिक हो गई है.
अमरीका दुनिया का सबसे अधिक प्रभावित देश है. अमरीका में संक्रमण के 27 लाख 88 हज़ार से अधिक मामले हैं. अमरीका में अब तक संक्रमण के कारण लगभग एक लाख 30 हज़ार लोगों की जान जा चुकी है.
संक्रमण के लिहाज़ से ब्राज़ील दूसरा और रूस तीसरा देश है.
वहीं भारत संक्रमण के आधार पर चौथा सबसे अधिक प्रभावित देश है. पांचवे स्थान पर पेरू है. जहां संक्रमण के कुल दो लाख 95 हज़ार मामले हैं. वहीं पेरू में संक्रमण से मरने वालों की संख्या 10 हज़ार से अधिक है.
संक्रमण के मामले में पेरू ब्रिटेन से भी आगे निकल गया है.
इमेज स्रोत, Getty Images
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