ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने एक ऐसे क़ानून को मंज़ूरी दी है जिसके तहत कोरोना महामारी के दौरान सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने को अनिवार्य कर दिया गया है.
हालांकि उन्होंने दुकानों, चर्च और स्कूलों में मास्क पहनने की अनिवार्यता ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.
सोशल मीडिया पर एक संदेश में राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने कहा कि घरों में मास्क नहीं पहनने पर लोगों पर जुर्माना लगाया जा सकता है.
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों और इस महामारी के कारण मरने वालों, दोनों ही मामलों में आंकड़ों के लिहाज से ब्राज़ील अमरीका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश बना हुआ है.
इसके बावजूद राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ब्राज़ील में कोरोना महामारी की गंभीरता को स्वीकार करने से इनकार करते रहे हैं.
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार फरवरी के आख़िर से लेकर अब तक ब्राज़ील में कोरोना वायरस से तकरीबन 15 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और इस वायरस के चलते 61,884 लोगों की मौत हो चुकी है.
बीबीसी की दक्षिण अमरीका संवाददाता कैटी वॉटसन कहती हैं कि जायर बोलसोनारो ने कभी भी मास्क की ज़्यादा परवाह नहीं की है. ब्राज़ील में स्वास्थ्य से जुड़े इस सलाह और महमारी से निपटने के उनके तरीके पर काफी राजनीति हुई है.
कैटी वॉटसन का कहना है कि यहां तक कि जहां कहीं भी मास्क के इस्तेमाल को अनिवार्य किया गया, सभी लोगों ने इस नियम का पालन नहीं किया. और इसे लागू करने की प्रक्रिया भी काफी ढीली ढाली रही है.
चैंबर ऑफ़ डिप्यूटीज़ में पारित किए गए क़ानून में एक प्रावधान जोड़ा गया जिसके तहत व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों, धार्मिक जगहों, शैक्षणिक स्थलों और बंद स्थानों पर जहां लोग इकट्ठा हो रहे हों, मास्क पहनना होगा.
लेकिन शुक्रवार को राष्ट्रपति बोलसोनारो ने इस प्रावधान पर वीटो कर दिया. उनकी दलील है कि इस प्रावधान से लोगों के संपत्ति के अधिकार का हनन होता है. प्रस्तावित क़ानून में एक और प्रावधान रखा गया था कि ग़रीब लोगों को मास्क वितरित किया जाए.
बोलसोनारो ने इस प्रावधान पर भी वीटो कर दिया. राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के वीटो को खारिज करने के लिए कांग्रेस के पास 30 दिनों का समय है. उसे पूर्ण बहुमत से राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के वीटो के ख़िलाफ़ वोटिंग करनी होगी.
पिछले महीने एक जज ने राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो को सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने का आदेश दिया था, ये ऐसी बात थी जिससे राष्ट्रपति अक्सर इनकार करते रहे हैं. हालांकि बाद में एक दूसरी अदालत ने इस फ़ैसले पर रोक लगा दी.
बोलसोनारो इस बात पर जोर देते रहे हैं कि क्वारंटीन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम कोरोना संकट से निपटने के लिए ग़ैरज़रूरी हैं और इससे पहले से कमज़ोर ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था को और नुक़सान पहुंचेगा.
गुरुवार रात को रियो डे जेनेरियो में बार खोले जाने की इजाजत दे गई थी. इसी शहर में कोरोना महामारी के चलते 6600 लोगों की मौत हो चुकी है.
ब्राज़ील के कांग्रेस के सदस्य डेविड मिरांडा ने एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें लेबलन शहर में दर्जनों लोग सड़कों पर शराब पीते हुए दिख रहे थे और उन्होंने न तो मास्क ही पहन रखी थी और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन ही किया जा रहा था.