कोरोना अनलॉक 2 पर क्या बोल रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनलॉक 2 और कोरोना संक्रमण को लेकर देश को संबोधित कर रहे हैं.
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यूरोपीय संघ ने कोरोना महामारी के बीच सुरक्षित देशों की एक लिस्ट जारी की है.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनलॉक 2 और कोरोना संक्रमण को लेकर देश को संबोधित कर रहे हैं.
इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कहा है कि उसके द्वारा किया जा रहा प्लाज़्मा थेरेपी (PLACID ट्रायल) का अध्ययन जारी है. 300 मरीज़ों पर किया गया अंतरिम विश्लेषण नहीं किया गया है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन पूरा होने पर नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे.
-ANI
उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग के लाइसेंस ऑफ़िसर वाई.एस. रावत ने कहा, "हमारे नोटिस के जवाब में पतंजलि ने कहा है कि उनके द्वारा कोई 'कोरोना किट' पैक नहीं की गई है. पतंजलि ने 'कोरोनिल' की पैकेजिंग में कोरोना वायरस की प्रतीकात्मक तस्वीर प्रकाशित की है. टेस्टिंग के लिए कोरोनिल और 2 अन्य दवाओं के सैंपल लिए गए हैं."
कोरोना वायरस फैलते ही अफ़ग़ानिस्तान में दशकों से जारी युद्ध से चरमराई स्वास्थ्य प्रणाली की ख़ामियां दिखने लगी हैं.
सरकारी अस्पतालों में ऑक्सिजन और अन्य चीज़ों की आपूर्ति को लेकर चिंता गहराने लगी है. काबुल के एक डॉक्टर ने बताया कि ऑक्सिजन के सिलेंडर आने पर मरीज़ों के परिजन लड़ रहे हैं.
अभी तक अफ़ग़ानिस्तान में संक्रमण के 31 हज़ार मामले दर्ज किए गए हैं. टेस्ट किए गए लोगों में से लगभग आधे पॉज़िटिव पाए गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य में कोविड-19 की वैक्सीन खोज लिए जाने की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों की तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पीएम ने अधिकारियों से कहा कि 'आने वाले समय में वैक्सीन मिल जाने पर व्यापक टीकाकरण कैसे होगा, इसके लिए विस्तृत योजना तैयार करें.'
जनवरी और मार्च के बीच ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पहले लगाए गए अंदाज़े से भी अधिक नुक़सान हुआ है. यह 2.2 फ़ीसदी सिकुड़ गई है जो कि 1979 से लेकर अब तक का सबसे बड़ा नुक़सान है.
ऑफ़िस ऑफ़ नेशनल स्टैटिस्टिक्स ने पहले 2 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया था. मार्च महीने में ज़्यादा आर्थिक झटका लगा है जब कोरोना महामारी का प्रभाव पड़ना शुरू हुआ था.
अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के भाषण से ठीक पहले ये आँकड़े सामने आए हैं.
जुलाई महीने में भारत के कुछ वॉलेंटियर्स को भारत में ही विकसित एक कोरोना वायरस वैक्सीन लगाई जायेगी. इस वैक्सीन को हैदराबाद की एक फ़ार्मा कंपनी – भारत बायोटेक ने तैयार किया है.
कंपनी ने यह दावा किया है कि वो इंसानों पर जल्द ही इस वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने वाली है. हालांकि कंपनी ने ये नहीं बताया है कि कितने वॉलेंटियर्स को यह वैक्सीन दी जाएगी.
कंपनी के अनुसार, जानवरों पर इस वैक्सीन के नतीजे उत्साहवर्धक रहे और इसे सुरक्षित पाया गया. दुनिया के कई देश फ़िलहाल कोरोना वायरस वैक्सीन के ट्रायल कर रहे हैं.
जानकारों के अनुसार, मौजूदा समय में 120 से ज़्यादा वैक्सीन प्रोग्राम चल रहे हैं. क़रीब आधा दर्जन भारतीय फ़ार्मा कंपनियाँ कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करने में लगी हैं.
हालांकि, ह्यूमन ट्रायल के स्तर तक पहुँची, भारत में बनी यह पहली कोरोना वैक्सीन है. भारत में दवाओं की नियामक संस्था ने भी भारत बायोटेक को इंसानों पर पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल करने की अनुमति दे दी है.
भारत बायोटेक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति अनुसार, ‘कंपनी के प्री-क्लीनिकल अध्ययन और वैक्सीन के सुरक्षित होने से संबंधी दस्तावेज़ जमा करवाने के बाद ही उन्हें क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मिली है.’
कंपनी के अनुसार, अब इंसानों के लिए दो चरण में इस वैक्सीन का परीक्षण किया जाना है. एक टेस्ट में देखा जाएगा कि क्या वैक्सीन वाक़ई सुरक्षित है और दूसरे टेस्ट में देखा जाएगा कि ये वैक्सीन संक्रमण का असर रोकने में कितना कारगर है.
कंपनी के प्रवक्ता ने बीबीसी से बातचीत में कहा है, “भारत में संक्रमित हो चुके लोगों से जो वायरस के सैंपल लिये गए, उनकी मदद से वैक्सीन विकसित करने में काफ़ी सहायता हुई. पर यह रिसर्च का विषय होगा कि वैश्विक स्तर पर मौजूद कोरोना वायरस के सामने इसमें क्या अंतर आयेगा.”
कंपनी के चेयरमैन, डॉक्टर कृष्णा इल्ला के अनुसार, इस वैक्सीन को 'कोवाक्सिन' नाम दिया गया है जिसे भारत में ही इंडियाज़ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी और इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के सहयोग से तैयार किया गया है.
भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवाएं और वैक्सीन निर्माता देशों में से एक है.
भारत में ही कई महत्वपूर्ण टीकों के विकास और उनके निर्माण का काम हुआ है, जैसे- पोलियो, मेनिनजाइटिस, निमोनिया, रोटावायरस, बीसीजी, खसरा और रुबेला.
सामान्य रूप से एक वैक्सीन को विकसित होने में एक दशक नहीं भी, तो कुछ वर्ष का समय तो लगता ही है.
लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में विशेषज्ञों की राय है कि 2021 के मध्य तक कोरोना की कोई ना कोई वैक्सीन ज़रूर विकसित हो जाएगी. यानी महामारी फ़ैलने के 12 से 18 महीनों के भीतर इसका टीका तैयार होगा.
संसार भर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब बढ़कर 10.3 मिलियन यानी एक करोड़ तीन लाख से अधिक हो गये हैं.
मंगलवार को संक्रमण के मामलों में एक बड़ा उछाल देखा गया, जब महज़ आठ घंटे में लगभग एक लाख नये मामले दर्ज किये गए.
जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, अब तक पूरे विश्व में संक्रमण के एक करोड़ तीन लाख दो हज़ार से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है, साथ ही पाँच लाख पाँच हज़ार पाँच सौ पाँच लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि बीते 24 घंटे में भारत के भीतर कोरोना संक्रमण के 18,522 नये मामलों की पुष्टि हुई और 418 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई.
मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक संक्रमण के कुल पाँच लाख 66 हज़ार 840 मामले दर्ज हो चुके हैं.
इनमें से दो लाख 15 हज़ार 125 केस फ़िलहाल सक्रिय हैं. जबकि तीन लाख 34 हज़ार 822 मरीज़ पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है.
सरकारी डेटा के मुताबिक़, अब तक भारत में 16,893 लोगों की कोविड-19 से मौत हो चुकी है.
मंगलवार को आईसीएमआर ने बताया कि 29 जून तक भारत में कोविड-19 के 86 लाख से ज़्यादा सैंपलों की जाँच की जा चुकी है. सोमवार को एक दिन में दो लाख से ज़्यादा सैंपलों की जाँच की गई.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को कहा कि वो कोरोना वायरस के स्त्रोत का पता लगाने के लिए एक टीम को चीन भेज रहा है. डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 के राजनीतिकरण और इस पर बँटी हुई दुनिया के बीच डर है कि अभी सबसे बुरा दौर आना बाक़ी है.
डब्ल्यूएचओ एक टीम को अगले हफ़्ते चीन भेज रहा है, जो ये पता लगाएगी कि वैश्विक महामारी फैलाने वाला वायरस आख़िर कहां से आया.
WHO मई की शुरुआत से ही चीन को बार-बार कह रहा है कि वो उसके विशेषज्ञों को बुलाए, जो कोरोना वायरस के एनिमल सोर्स का पता लगाने में मदद करेंगे.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसॉस ने एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "जब हमें वायरस के बारे में सब कुछ पता होगा तो हम उससे बेहतर तरीक़े से लड़ सकेंगे. इसमें ये पता लगाना भी शामिल है कि वो आया कहां से. हम अगले हफ़्ते एक टीम को इसके लिए चीन भेज रहे हैं और हमें उम्मीद है कि इससे वायरस की उत्पत्ति के बारे में समझने में मदद मिलेगी."
हालांकि उन्होंने ये साफ़ नहीं किया कि टीम में कौन-कौन होगा, ना ही उन्होंने ये बताया कि विशेष रूप से उनका मक़सद क्या होगा.
वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस जानवरों से इंसान में आया, संभवत: वुहान के एक बाज़ार से जहां असाधारण जानवरों के मांस की बिक्री होती है.
ब्रिटेन के लेस्टर नामक शहर में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी होने के बाद ब्रितानी सरकार ने इस शहर में लोकल लॉकडाउन के नियमों को सख़्त करने का ऐलान किया था.
लेकिन संक्रमण फैलने की रफ़्तार को देखते हुए सरकार ने इस शहर में नए प्रतिबंध लगाए हैं.
इसका मतलब ये है कि अब फ़िलहाल इस शहर में पब, रेस्तराँ, और नाई की दुकानें आदि के खुलने में समय लग सकता है.
संयुक्त अरब अमीरात में सरकार ने धर्मस्थलों को खोलने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है.
ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक़, सरकार ने आगामी 1 जुलाई से सभी मस्जिदों और अन्य धर्मस्थलों को खोलने का ऐलान किया है.
संयुक्त अरब अमीरात में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 48 हज़ार के पार पहुँच गई है.
इसके साथ ही तीन सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या 1 करोड़ के पार चली गई हैं.
सिर्फ़ छह महीने पहले फैले इस संक्रमण से अब तक पाँच लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
कई देशों में स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह चरमरा चुके हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था इस महामारी की वजह से बेहद बुरे दौर से गुजर रही है.
लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि अभी भी इस महामारी का सबसे बुरा स्वरूप सामने नहीं आया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसॉस ने कहा है कि अगर दुनिया भर की सरकारों ने सही नीतियों का पालन नहीं किया तो ये वायरस और लोगों को संक्रमित कर सकता है.
सोमवार को एक वर्चुअल ब्रीफ़िंग में टेड्रोस कहते हैं, “हम सभी चाहते हैं कि ये सब ख़त्म हो जाए. हम सभी अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगियों में वापस लौटना चाहते हैं. लेकिन कड़वा सच ये है कि हम अभी भी इस महामारी के ख़त्म होने से बेहद दूर हैं.”
“हालाँकि, कुछ देशों ने प्रगति की है लेकिन वैश्विक स्तर पर महामारी फैलने की रफ़्तार तेज़ हो रही है. दुनिया भर में दस करोड़ संक्रमण के मामले और पाँच लाख लोगों की मौत के बाद भी अगर हम उन समस्याओं को नहीं सुलझाएंगे, जिनकी पहचान हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन में की है, जैसे राष्ट्रीय एकता में कमी, वैश्विक एकजुटता में कमी, और बंटी हुई दुनिया, जो कि वायरस को फैलने में मदद कर रही है, तो बुरा समय अभी आना बाक़ी है."
टेड्रोस ने सरकारों से जर्मनी, दक्षिण कोरिया, और जापान के रास्ते पर चलने का आग्रह किया. इसमें इन देशों की ओर से की जा रही लगातार टेस्टिंग और ट्रेसिंग शामिल है.