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कोरोना वायरस: अमरीका की तुलना में हमने महामारी को बेहतर ढंग से संभाला- पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दावा कि उन्होंने अमरीका से बेहतर किया है और क्या क्या कहा उन्होंने.

लाइव कवरेज

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, पश्चिम एशिया के देशों से केरल में एक लाख से ज़्यादा लोग आएंगे

    आने वाले हफ़्तों में केरल में पश्चिमी एशिया के देशों से एक लाख से ज़्यादा प्रवासियों के आने की उम्मीद है. केरल सरकार ने इस बात को अनिवार्य कर दिया है कि आने वालों को कोविड-19 की जाँच का निगेटिव सर्टिफिकेट दिखाना होगा.

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार केरल की सरकार ने अलग-अलग एजेंसियों के 750 चार्टर्ड विमानों को अनुमति दी है. नॉन रेजिडेंट केरलाइट वेलफेयर अफेयर्स डिपार्टमेंट यानी नोरका रूट्स ने संबंधित एजेंसियों और संस्थाओं को एक पत्र लिखा है और कहा है कि 20 जून से पश्चिम एशिया से केरल आने वाली फ्लाइट में केवल वही यात्री होंगे जो कोरोना संक्रमित नहीं होंगे.

    संबंधित विभाग के प्रधान सचिव डॉ ई एलनगोवान ने ये निर्देश जारी किया है और कहा है कि यह शर्त सभी फ्लाइट पर लागू होगी. नोरका रूट्स के उपाध्यक्ष के वरदराजन ने कहा है, ''जब हज़ारों लोग केरल आ रहे हैं तो हमें सतर्क रहना होगा. हमने पहले ही 750 फ्लाइट्स को मंज़ूरी दे दी है. यात्रियों को एंटी बॉडी टेस्ट कराने होंगे. अगर बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित केरल पहुंचते हैं तो इससे राज्य की मुश्किलें बढ़ेंगी. घर लौटने वाले लोगों के परिजनों को भी कोरोना संक्रमण का ख़तरा हो सकता है.''

  2. कोरोना वायरस: गुजरात में ज़्यादा लोग क्यों मर रहे हैं?

    बीती 20 मई को परवीन बानो को सांस लेने में दिक्कत होना शुरू हुई.

    जब ये बात उन्होंने अपने बेटे अमीर पठान को बताई तो वह अपनी माँ को लेकर अस्पताल भागे.

    अमीर काफ़ी चिंतित थे क्योंकि उनकी 54 वर्षीय माँ डायबिटीज़ और दिल से जुड़ीं बीमारियां की भी शिकार थीं.

    यही नहीं, अहमदाबाद के गोमती नगर इलाके में कोविड 19 से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. इसके बाद अगले 30 घंटे पूरे परिवार के लिए काफ़ी डराने वाले थे.

    पठान कहते हैं कि वह तीन अस्पतालों में गए. दो सरकारी और एक निजी अस्पताल. लेकिन उन्हें कहीं भी एक बेड नहीं मिला. ऐसे में पठान अपनी माँ को घर लेकर आए गए.

    पठान बताते हैं कि उस दिन और रात उनकी माँ को दिक्कत बढ़ गई. इस वजह से उनका परिवार अगले दिन उन्हें लेकर अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लेकर गया.

  3. दिल्ली में कम टेस्ट के लिए कौन ज़िम्मेदार, केजरीवाल बार-बार क्यों बदल रहे हैं बयान

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले कहा था कि बिना लक्षण वाले कोरोना संदिग्धों को कोविड-19 का टेस्ट नहीं कराना चाहिए लेकिन अब यूटर्न लेते हुए शनिवार को दिल्ली सरकार ने कहा कि आईसीएमआर की गाइडलाइन के तहत जाँच हो रही है और अगर जाँच की संख्या बढ़ानी है तो गाइडलाइन बदलनी होगी.

    शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अगर आईसीएमआर की गाइडलाइन से अनुमति मिलती है तो दिल्ली में हर कोई जाँच करा सकता है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि कोविड-19 की जाँच भी बाक़ी पैथॉलजी जाँच की तरह ही आसान और सुलभ बनाई जानी चाहिए. सिंह ने कहा कि कोरोना को नियंत्रित करने के लिए यही एकमात्र तरीक़ा हो सकता है.

    संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने आईसीएमआर की सख़्त गाइडलाइन को बदलने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को भी एक पत्र लिखा है. सिंह ने कहा, ''मैंने उनसे और पैथॉलजी लैब को लाइसेंस देने और राज्य सरकारों को ज़्यादा टेस्टिंग किट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है. अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसमें कोरोना के लक्षण हैं तो उसे तुरंत जाकर नज़दीक की लैब में परीक्षण करा लेना चाहिए.''

    दिल्ली सरकार 10 लाख लोगों पर 13,000 जाँच कर रही है जो देश भर में सबसे ज़्यादा है. हालांकि, हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली सरकार अब भी अपनी पूरी क्षमता के हिसाब से जांच नहीं कर रही है. 17 सरकारी लैब और 23 प्राइवेट लैब के साथ दिल्ली रोज़ाना 8600 सैंपल की जांच कर सकती है लेकिन 12 जून को सिर्फ़ 5947 ही जांच हुई.

    दिल्ली समेत पाँच राज्य सरकारों की आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोरोना की जांच तेज़ी से बढ़ाने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भी कहा था ताकि ज़्यादा से ज़्यादा जांच से कोरोना मरीज़ों को मदद मिले.

    आप सरकार ने जून के पहले हफ़्ते में आईसीएमआर की गाइडलाइन का उल्लंघन कर बिना लक्षण वाले कोरोना संदिग्धों की जांच करने को लेकर कई लैब को नोटिस जारी किया था. दो जून को केजरीवाल सरकार ने ख़ुद ही गाइडलाइन की उपेक्षा करते हुए कोविड-19 पॉजिटिव के ज़्यादा जोखिम और सीधे संपर्क में आए, बिना लक्षण वाले संदिग्धों को भी जाँच के दायरे से बाहर कर दिया था.

    केजरीवाल सरकार ने इसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कैंसर मरीज़ों और बुज़ुर्गों तक सीमित कर दिया था. इसके बाद छह जून को दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर बिना लक्षण वाले संदिग्धों की जांच होने लगी तो दिल्ली में जाँच कराने वालों की तादाद अनियंत्रित हो जाएगी. केजरीवाल ने कहा था कि बिना लक्षण वालों को जांच के लिए आग्रह नहीं करना चाहिए. अगर ऐसे लोग जाँच कराने लगेंगे तो कोरोना के गंभीर मरीज़ों को प्राथमिकता नहीं मिल पाएगी.

    हालांकि बाद में दिल्ली के एलजी अनिल बैजल ने इसे ख़ारिज कर दिया. शनिवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी कहा कि गाइडलाइन बदलने का मतलब होगा कि लोगों में लक्षण हों या ना हों उनकी जांच होगी. जैन ने लेकिन आईसीएमआर की गाइडलाइन को बदलने पर ज़ोर दिया ताकि टेस्ट का दायरा बढ़ाया जा सके. उन्होंने कहा कि अगर गाइडलाइन बदलती है तो टेस्ट हर कोई करा पाएगा.

    आप सांसद संजय सिंह ने कहा, ''हम टाइम बम के ऊपर हैं जो किसी भी वक़्त फट सकता है क्योंकि हमें कोरोना संक्रमितों की असली संख्या पता ही नहीं है. अगर ज़्यादा लोगों की जाँच होगी और पॉजिटिव पाए जाएंगे तो उन्हें घर पर आइसोलेशन या अन्य जगह इलाज के लिए भेजा जा सकेगा. इससे कोरोना के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी. दिल्ली को लेकर लोग ग़लत बातें कर रहे हैं बल्कि सच यह है कि यहां ज़्यादा टेस्ट हो रहा है इसलिए ज़्यादा संक्रमितों की पहचान हो पा रही है. हमें ब्लेम गेम से बाज आना चाहिए. अगर आईसीएमआर की गाइडलाइन बदलती है तो किसी का भी टेस्ट हो सकता है लेकिन जब तक यही पता नहीं होगा कि वो पॉजिटिव हैं या नहीं वायरस को फैलने से नहीं रोका जा सकता है.''

  4. लॉकडाउन, प्रवासी मज़दूर, अर्थव्यवस्था पर क्या बोले नितिन गडकरी?

    क्या मोदी सरकार से प्रवासी मज़दूरों का मामला संभालने में चूक हुई, क्या भारतीय अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की उसकी कोशिशें कामया‌ब रहेंगी.

    इन सभी विषयों पर मोदी सरकार के अहम मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत की बीबीसी हिंदी के संपादक मुकेश शर्मा ने.

    वीडियो एडिटिंग: देबलिन रॉय.

  5. चीन में कोरोना संक्रमण के 57 नए मामले

    चीन में शनिवार को कोरोना संक्रमण के 57 नए मामले दर्ज किए गए हैं. 13 अप्रैल के बाद चीन में रोज़ दर्ज होने वाले मामलों की संख्या के लिहाज से ये एक रिकॉर्ड ही है.

    रविवार को चीन की नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने ये आंकड़े जारी किए हैं. नेशनल हेल्थ कमीशन का कहना है कि नए पुष्ट मामलों में 38 ऐसे हैं जो स्थानीय स्तर पर फैले हैं. इनमें से 36 मामले केवल बीजिंग के हैं.

    चीन की सरकार ने राजधानी बीजिंग के कोरोना संक्रमण से जुड़े आंकड़े जब से जारी करना शुरू किया है, तब से ये सबसे बड़ी संख्या है.

    एक दिन पहले तक बीजिंग में केवल छह मामले रिकॉर्ड किए गए थे, लेकिन शनिवार को शहर के दक्षिण पश्चिमी फेंगताई ज़िले के एक बाज़ार में व्यापक स्तर पर टेस्टिंग किए जाने के बाद सूरतेहाल बदल गई.

    बीजिंग में युद्धस्तर पर रोकथाम के लिए काम किया जा रहा है. संक्रमण की नई लहर के डर से शनिवार को खेल और पर्यटन से जुड़े कई इवेंट्स कैंसल कर दिए गए.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मपु नए पुष्ट मामलों में 19 ऐसे हैं जिनकी विदेश यात्रा का इतिहास रहा है.

  6. बिहार में पीडीएस का हाल, मांगा अनाज, मिली जेल

    बीती 7 जून को बिहार के अरवल के अनुमंडल कार्यालय में राशन कार्ड बनाने और उसका सत्यापन करवाने के लिए भीड़ उमड़ी थी.

    हज़ारों की इस भीड़ के लिए सरकारी 'सोशल डिस्टैंसिंग' की बात बेमानी थी. राशन कार्ड के लिए लाइन में सबा परवीन भी खड़ी थी.

    इस कोरोना कॉल में उनके लिए सरकारी खाद्यान्न सहायता अब जीने-मरने का सवाल बन चुकी है.

    जीने-मरने का ये सवाल सिर्फ़ अरवल जिले के लोगों के लिए ही नहीं है. बल्कि बिहार की एक बड़ी आबादी के लिए ये सवाल अहम है.

    इतना अहम कि अब लोग इसके लिए जेल भी जा रहे है.

  7. कोरोना संकट: क्या स्कूलों का सिलेबस छोटा किया जाना चाहिए?

    मानव संसाधन विकास मंत्रालय कोरोना वायरस के बढ़ते ख़तरे को देखते हुए इस शैक्षणिक सत्र (2020-21) के पाठ्यक्रम और स्कूल के घंटे घटाने पर विचार कर रहा है.

    मंत्रालय ने इस विषय पर शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों सेसुझावभी मांगे हैं.

    गर्मियों की छुट्टियों से पहले ज़्यादातर स्कूलों ने बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस लेनी शुरू कर दी थी ऐसे में कई अभिभावक पाठ्यक्रम घटाए जाने के मुद्दे पक्ष में हैं.

    दिल्ली में रहने वाली दिपा बिष्ट का एक बेटा छठीं और दूसरा पहली कक्षा में पढ़ता है.

    वो कहती हैं, "पाठ्यक्रम कम होना ही चाहिए. क्योंकि अभी जिस तरह से ऑनलाइन क्लासेस हो रही हैं, उस तरह से पूरा सिलेबस कर पाना मुश्किल है. जिस चैप्टर को कराने में दो दिन लगते थे, ऑनलाइन क्लास में वही चैप्टर चार-पांच दिन में हो रहा है. टाइम दोगुना हो गया, इससे तो पाठ्यक्रम पूरा होने में बहुत ज़्यादा टाइम लगेगा."

    दिल्ली की ही रहने वाली सीमा की एक बेटी नौवीं और एक छठीं में है. वो भी मानती हैं कि पाठ्यक्रम कम होने से बच्चों पर बोझ कम होगा.

    लेकिन पंजाब में मोहाली ज़िले के एक ग्रामीण इलाक़े में रहने वाली ममता कहती हैं कि उनके बच्चों की तो ऑनलाइन क्लास भी नहीं हुई. ऐसे में उनपर पाठ्यक्रम का ज़्यादा दबाव होगा, इसलिए पाठ्यक्रम घटाना ही चाहिए.

  8. भारत में कोरोना संक्रमण के मामले एक दिन में 12,000 के क़रीब पहुंचे

    केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया है कि बीते 24 घंटों में कोविड-19 के 11,929 संक्रमण के मामलों का पता चला है.

    इसके अलावा इतने ही समय में इस बीमारी के कारण 311 लोगों की मौत हुई है.

    इन नए आंकड़ों के साथ ही भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले 3,20,922 हो गई हैं जिनमें 1,49,348 सक्रिय मामले भी शामिल हैं.

    इसमें एक राहत देने वाली ख़बर यह भी है कि भारत में अब तक 1.62 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से ठीक है चुके हैं.

    कोविड-19 बीमारी अब तक भारत में 9195 लोगों की जान ले चुकी है.

  9. कोरोना महामारी के बीच चिली के स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफ़ा

    कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने की कोशिश कर रहे चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टियन पिनयेरा ने इस बीच स्वास्थ्य मंत्री ख़ाएमे मान्यालिच के इस्तीफ़े की घोषणा की है.

    विपक्ष ने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री को पहले ही इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था. विपक्ष ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तुरंत बदलाव लाने की बात भी की है.

    देश के नए स्वास्थ्य मंत्री एनरिक पेरी ने कहा कि महामारी से निपटने में वो उन लोगों की भी राय सुनेंगे जो सरकार की आलोचना करते हैं.

    चिली में अब तक कोरोना से तीन हज़ार से धिक मौतें हुई हैं और संक्रमितों की संख्या 1.67 लाख से अधिक हो चुकी है.

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, यूरोप को 'मिलेंगे कोरोना वैक्सीन के 40 करोड़ डोज़'

    कोरोना वायरस वैक्सीन के बनते ही इसे पाने के लिए यूरोप के इन्क्लूसिव वैक्सीम अलायंस ने दवा बनाने वाली कंपनी अस्त्राज़ेनेका से एक करार किया है. इस अलायंस का नेतृत्व जर्मनी, फ्रांस, इटली और नीदरलैंड्स कर रहे हैं.

    शनिवार को जर्मन सरकार ने कहा कि इस करार के तहत कंपनी वैक्सीन बनते ही इसके 40 करोड़ डोज़ यूरोप के लिए देगी. ये वैक्सीन यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को दी जाएगी.

    कंपनी का कहना है कि वो वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है और कोरोना महामारी से निपटने के लिए वो ये वैक्सीन बिना प्रोफिट के सप्लाई करेगी.

    कंपनी का कहना है कि उम्मीद है कि इस साल के आख़िर से पहले इसकी डिलीवरी शुरू होगी.

    कंपनी के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव पास्कल सोरियो ने कहा है कि, “इससे ये सुनिश्चित हो गया है कि अगर सब कुछ सही रहा तो यूरोप के करोड़ों नागरिकों को ये वैक्सीन मिल सकेगी. गर्मियों के खत्म होने तक हमें इसका भी पता चल जाएगा.”

    पास्कल सोरियो ने कहा कि वैक्सीन बनाने से जुड़े शुरूआती डेटा के आधार पर वो कह सकते हैं कि इसकी उम्मीद है कि वैक्सीन कारगर साबित होगी.

    पास्कल सोरियो का कहना है कि ये अलांयस, यूरोपीय कमिशन के साथ काम करेगी ताकि यूरोप के सभी सदस्य देशों तक वैक्सीन पहुंचे.

    ये समझौता कितने में हुआ है इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है. हालांकि इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा है कि फिलहाल इस करार के लिए जर्मनी, फ्रांस, इटली और नीदरलैंड्स पैसे देने वाले हैं, लेकिन दूसरे देश भी इस अलायंस में शामिल हो सकते हैं.

    कोरोना वायरस के लिए अब तक कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है. ऐसे में ये वैक्सीन कितनी कारगर साबित होने वाली है इस विषय में फिलहाल कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है.

    यूरोपीय वैक्सीन अलांयस से पहले अमरीका ने अस्त्राज़ेनेका के साथ समझौता किया था. अमरीका कंपनी में 1.2 अरब डॉलर निवेश करेगा और वैक्सीन बनने पर उसे इसके 30 करोड़ डोज़ मिलेंगे.

    ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी एक कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रही है, इसका लाइसेंस ब्रितानी कंपनी अस्त्राज़ेनेका के पास है. पहले इस वैक्सीन का नाम था - ChAdOx1 nCoV-19, अब इसका नाम AZD1222 रखा गया है.

    ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी ने इसी साल अप्रैल में सैंकड़ों वॉलंटियर्स पर इस वैक्सीन का ट्रायल करना शुरु किया है. अब करीब दस हज़ार वॉलंटियर्स पर इसका ट्रायल जारी है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पास्कल सोरियो का कहना है कि वैक्सीन के प्रभाव और इसकी सुरक्षा से जुड़े स्टडी के बाद अब ब्रिटिश मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी ने वैक्सीन के तृतीय चरण के ट्रायल को मंज़ूरी दे दी है.

  11. लोगों को ब्लीच जैसी चीज़ खाने के लिए कहने पर डॉक्टर बर्खास्त

    पेरू में एक डॉक्टर को लोगों को कोरोना वायरस से बचने के लिए क्लोरीन डायऑक्साइड खाने की सलाह देने के बाद उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है.

    डॉक्टर अमीलकार वांकावारी कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए बने दक्षिणी प्रांत आयाइचो के रिस्पांस टीम के प्रमुख थे.

    क्लोरीन डायऑक्साइड ब्लीच की तरह का एक कीटाणुनाशक है जिसका इस्तेमाल उद्योग में किया जाता है. ये केमिकल इंसान के लिए घातक साबित हो सकता है.

    डॉक्टर वांकावारी ने कहा था कि जिन लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण हैं उन्हें ये केमिकल दिया जाना चाहिए.

    एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने दावा किया कि “कोविड-19 के मरीज़ों में क्लोरीन डायऑक्साइड का परीक्षण किया जा रहा है और इससे उनकी सेहत में सुधार देखा गया है.”

    आयाइचो के गवर्नर कार्लोस रूआ ने इसके बाद एक और संवाददाता सम्मेलन कर स्पष्ट किया कि वांकावारी ने जो कहा वो अपनी निजी हैसियत में कहा क्योंकि उन्होंने सरकारी प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में क्लोरीन डायऑक्साइड के बारे में कोई चर्चा नहीं की थी.

    इसके कुछ घंटों बाद कार्लोस रुआ ने घोषणा की कि वांकावारी को उनके पद से बर्ख़ास्त कर दिया गया है.

  12. ईरान: मामले और बढ़े तो फिर लगाया जा सकता है लॉकडाउन

    ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि अगर देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते रहे और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का उचित पालन नहीं किया गया तो एक बार फिर लॉकडाउन लगाया जा सकता है.

    अप्रैल महीने के तीसरे सप्ताह से ईरान ने कोरोना के कारण लगाए लॉकडाउन में ढील देना शुरु किया था, जिसके बाद से यहां कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज़ी देखी जा रही है.

    शनिवार को यहां संक्रमण के 2,400 से भी अधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही ईरान में संक्रमितों की कुल संख्या 184,955 हो गई है जबकि वायरस के कारण यहां अब तक 8,730 मौतें हुई हैं.

    संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र अधिकारियों को चिंता है कि ईरान में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ सकती है. मध्यपूर्व में ईरान कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में शामिल है.

    राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि बीते महीने देश में लॉकडाउन के नियमों का 80 फीसदी पालन हुआ था लेकिन अब नियमों का केवल 20 फीसदी ही पालन हो रहा है.

    हाल में इमाम रेज़ा मस्जिद के खोले जाने के बाद वहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए जिसे लेकर राष्ट्रपति ने चिंता जताई है. ये देश में शिया मुसलमान समुदाय के सबसे बड़ी मस्जिद है.

    ईरान का अर्थव्यवस्था पहले ही अमरीका के लगाए आर्थिक प्रतिबंधों की मार झेल रही है. ऐसे में सरकार की कोशिश थी कि व्यापार, स्कूल और धार्मिक स्थल को फिर से खोला जाए.

  13. इस लाइव पेज में बीबीसी हिन्दी के सभी पाठकों और दर्शकों का स्वागत है. हम यहां दिन भर कोरोना वायरस की महामारी से जुड़े देश-दुनिया के हर ज़रूरी और बड़े अपडेट्स देंगे. पिछले 24 घंटों के अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें.