कोरोना वायरस वैक्सीन के बनते ही इसे पाने के लिए यूरोप के इन्क्लूसिव वैक्सीम
अलायंस ने दवा बनाने वाली कंपनी अस्त्राज़ेनेका से एक करार किया है. इस अलायंस का
नेतृत्व जर्मनी, फ्रांस, इटली और नीदरलैंड्स कर रहे हैं.
शनिवार को जर्मन सरकार ने कहा कि इस करार के तहत कंपनी वैक्सीन बनते ही इसके
40 करोड़ डोज़ यूरोप के लिए देगी. ये वैक्सीन यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को दी जाएगी.
कंपनी का कहना है कि वो वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है और कोरोना
महामारी से निपटने के लिए वो ये वैक्सीन बिना प्रोफिट के सप्लाई करेगी.
कंपनी का कहना है कि उम्मीद है कि इस साल के आख़िर से पहले इसकी डिलीवरी शुरू
होगी.
कंपनी के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव पास्कल सोरियो ने कहा है कि, “इससे ये सुनिश्चित हो गया है कि अगर सब कुछ सही रहा तो यूरोप के करोड़ों नागरिकों को ये वैक्सीन मिल सकेगी. गर्मियों के खत्म होने तक हमें इसका भी पता चल जाएगा.”
पास्कल सोरियो ने कहा कि वैक्सीन बनाने से जुड़े शुरूआती डेटा के आधार पर वो कह सकते हैं कि इसकी उम्मीद है कि वैक्सीन कारगर साबित होगी.
पास्कल सोरियो का कहना है कि ये अलांयस, यूरोपीय कमिशन के साथ काम करेगी ताकि
यूरोप के सभी सदस्य देशों तक वैक्सीन पहुंचे.
ये समझौता कितने में हुआ है इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है.
हालांकि इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से समाचार एजेंसी
रॉयटर्स ने कहा है कि फिलहाल इस करार के लिए जर्मनी, फ्रांस,
इटली और नीदरलैंड्स पैसे देने वाले हैं, लेकिन दूसरे देश भी इस
अलायंस में शामिल हो सकते हैं.
कोरोना वायरस के लिए अब तक कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है. ऐसे में ये वैक्सीन कितनी
कारगर साबित होने वाली है इस विषय में फिलहाल कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है.
यूरोपीय वैक्सीन अलांयस से पहले अमरीका ने अस्त्राज़ेनेका के साथ समझौता किया
था. अमरीका कंपनी में 1.2 अरब डॉलर निवेश करेगा और वैक्सीन बनने पर उसे इसके 30 करोड़ डोज़ मिलेंगे.
ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी एक कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रही है,
इसका लाइसेंस ब्रितानी कंपनी अस्त्राज़ेनेका के पास है. पहले इस वैक्सीन का नाम था
- ChAdOx1 nCoV-19, अब इसका नाम AZD1222 रखा
गया है.
ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी ने इसी साल अप्रैल में सैंकड़ों वॉलंटियर्स पर इस वैक्सीन का ट्रायल करना शुरु किया है. अब करीब दस हज़ार वॉलंटियर्स पर इसका
ट्रायल जारी है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पास्कल सोरियो का कहना है कि वैक्सीन के प्रभाव और इसकी सुरक्षा से जुड़े
स्टडी के बाद अब ब्रिटिश मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी ने
वैक्सीन के तृतीय चरण के ट्रायल को मंज़ूरी दे दी है.