प्रवासी श्रमिकों के परिवहन, पंजीकरण और रोजगार के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला 9 जून को
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प्रवासी मज़दूरों की दुदर्शा पर स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने कहा कि अब तक एक करोड़ से ज्यादा प्रवासियों को उनके पैतृक स्थान तक पहुँचाया गया है.
केन्द्र सरकार ने न्यायालय से कहा कि इन कामगारों को उनके पैतृक स्थान तक पहुँचाने के लिये तीन जून तक 4,200 से अधिक श्रमिक ट्रेनें चलाई गयीं.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि सभी प्रवासी कामगारों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुँचाने के लिये केन्द्र और राज्यों को 15 दिन का समय देने की उनकी मंशा है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि सभी राज्य बताएं कि वो अपने राज्य में लौटे प्रवासी मज़दूरों को क्या राहत मुहैया कर सकते हैं और किस तरह उनके रोज़गार को सुनिश्चित करने वाले हैं.
कोर्ट ने राज्यों से मज़दूरों की एक तैयार करने को कहा है ताकि यह पता चल सके कि मज़दूर कहाँ से और कैसे लौटे हैं.
प्रवासी श्रमिकों के परिवहन, पंजीकरण और रोजगार के मामले पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार, 9 जून को फ़ैसला सुनाएगा.
















