कोरोना अपडेटः कोरोना ने दिखाया है कि उसके लिए कोई सरहद नहीं- ट्रंप
दुनिया भर में कोरोना के 64 लाख से अधिक मामले हो गए हैं. अब तक तीन लाख 82 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
लाइव कवरेज
रूस: कोविड-19 के मामलों में 8,800 से अधिक का उछाल, मामले 4 लाख 41 हज़ार पार
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रूस में बीत 24 घंटे में कोविड-19 के 8,831 नये मामले सामने आने के बाद वहाँ
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 4 लाख 41 हज़ार 108 हो गई है.
रूस के कोरोना रिस्पॉन्स सेंटर ने कहा है कि बीते 24 घंटे में 169 लोगों की
कोविड-19 से मौत हुई है और मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,384 हो गई है.
अमरीका की जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार अमरीका (18 लाख 51 हज़ार से
ज़्यादा) और ब्राज़ील (5 लाख 84 हज़ार से ज़्यादा) के बाद रूस में कोरोना वायरस संक्रमण
के सबसे अधिक मामलों की पुष्टि हुई है.
रूस के बाद ब्रिटेन (2 लाख 81 हज़ार से अधिक), स्पेन (2 लाख 40 हज़ार से अधिक),
इटली (2 लाख 33 हज़ार से अधिक) और भारत (2 लाख 17 हज़ार से अधिक) में कोविड-19 के
सबसे अधिक मामले हैं.
हरियाणा में महामारी के दौरान कैसे हो रही है स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी
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गुरुवार को हुई प्रेस वार्ता में हरियाणा के शिक्षा मंत्री कुंवर पाल ने बताया
कि हरियाणा सरकार स्कूल-कॉलेजों को फिर से खोलने के लिए क्या रणनीति बना रही है.
प्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा:
स्कूलों को चरणबद्ध तरीक़े से खोला जाएगा. पहले दसवीं से बारहवीं तक कक्षाएं
शुरू होंगी. उनके बाद छठी से नौवीं और अंत में पहली से पाँचवी तक कक्षाएं शुरू की
जाएंगी.
स्कूलों में सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन हो सके, इसके लिए स्कूलों को निर्देश
जायेंगे कि वो 50 प्रतिशत की क्षमता से चलें, यानी 30 बच्चों की अगर कक्षा है तो
सिर्फ़ 15 बच्चों को सुबह बुलाया जाए, बाकी बच्चों को शाम की शिफ़्ट में बुलाया
जाए.
4-5 से स्कूलों में इस फ़ॉर्मूले को आज़माकर देखा जाएगा ताकि प्लान को बेहतर
ढंग से तैयार किया जा सके.
कॉलेज अगस्त में खोले जाएंगे और पहले वर्ष के बच्चों की कक्षाएं सितंबर से
शुरू होंगी.
अन्य निर्णय
विश्वविद्यालयों पर छोड़ दिये गए हैं. वो इस संबंध में नीति तैयार करेंगे.
ब्रेकिंग न्यूज़, जॉर्ज फ़्लॉयड को कोरोना संक्रमण भी हुआ था
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अफ़्रीकी मूल के अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड, जिनकी हत्या के बाद अमरीका में
प्रदर्शनों का एक सिलसिला शुरू हुआ है, उनके बारे में पता चला है कि मौत से कुछ सप्ताह
पहले उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था.
जॉर्ज फ़्लॉयड की 20 पन्ने की ऑटोप्सी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
इसके अनुसार 3 अप्रैल को इस बात की पुष्टि हुई थी कि जॉर्ज कोरोना वायरस से
संक्रमित हैं.
इस रिपोर्ट में परीक्षकों द्वारा यह भी कहा गया है, “चूंकि
कोरोना वायरस या किसी भी अन्य वायरस का जेनेटिक कोड मानव शरीर में हफ़्तों तक रह
सकता है, इसलिए इस बात की भी संभावना है कि जिस वक़्त जॉर्ज की मौत हुई, उनमें कोविड-19
के सभी लक्षण दिखने बंद हो गये हों, लेकिन इस दौरान भी वे संक्रमित रहे हों.”
डॉक्टर माइकल बाइडेन, जो न्यूयॉर्क सिटी के पूर्व मेडिकल परीक्षक हैं, उन्होंने
ही जॉर्ज फ़्लॉयड के परिवार के अनुरोध पर यह ग़ैर-सरकारी ऑटोप्सी की है.
उन्होंने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ अख़बार को बताया है
कि ‘काउंटी के अधिकारियों ने उन्हें यह सूचना नहीं दी थी कि
फ़्लॉयड कोविड-19 से संक्रमित पाये गए थे.’
उन्होंने कहा, “अगर आप किसी ऐसे शव की परीक्षा करते हैं
जिसे कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था, तो उस शव के संपर्क में
आने वाले सभी लोगों को इस बारे में बताया जाना ज़रूरी समझा जाता है. इस संबंध में
बेशक और सावधानी बरती जा सकती थी.”
कोविड-19 वैक्सीन के लिए अमरीका ने चुनीं पाँच कंपनियाँ
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अमरीकी अख़बार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’
ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ट्रंप प्रशासन ने पाँच कंपनियों को चुना है
जिन्हें कोविड-19 की वैक्सीन बनाने का काम मिल सकता है.
अख़बार ने ट्रंप सरकार के
कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि ये कंपनियाँ हो सकती हैं- मॉडर्ना,
एस्ट्राज़ेनेका, फ़ाइज़र, मर्क एंड कंपनी और जॉनसन एंड जॉनसन.
ट्रंप सरकार इन्हें वैक्सीन के उत्पादन के लिए अतिरिक्त सहायता राशि, क्लीनिकल ट्रायल करने के लिए मदद
समेत कुछ अन्य समर्थन दे सकती है.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए समान नीति बनाने पर चर्चा हो'
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सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से उत्तर प्रदेश,
दिल्ली और हरियाणा सरकार के प्रतिनिधियों और अधिकारियों की एक बैठक बुलाने को कहा
है जिसमें दिल्ली-एनसीआर के लोगों की आवाजाही को लेकर एक समान नीति बनाने पर चर्चा
हो सके.
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश और फिर दिल्ली सरकार, दोनों ने एक-एक कर ये कह दिया है कि वो कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए अपनी सीमा सील कर रहे हैं.
हरियाणा सरकार भी ऐसी घोषणा कर चुकी है. हालांकि बुधवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि वे इस बारे में दिल्ली सरकार से बातचीत को तैयार हैं.
दुनिया भर में कोविड-19 के 65 लाख से अधिक मामले, देखिए किस रफ़्तार से बढ़ा है संक्रमण
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दुनिया भर में जिस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए शुरू हुए लॉकडाउन
और प्रतिबंधों में ढील दी जा रही है, उसे देखकर ऐसा लग सकता है कि ये महामारी शायद ख़त्म हो रही है.
लेकिन अब भी लैटिन अमरीका में कई हॉटस्पॉट हैं, भारत जैसे घनी आबादी वाले देश
में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और ईरान में एक बार फिर नया स्पाइक (मामलों
में उछाल) देखने को मिला है.
अमरीका की जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार
दुनिया में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 65 लाख 51 हज़ार 600
से अधिक हो गई है. वहीं कोविड-19 से मरने वालों की संख्या भी 3 लाख 86 हज़ार के
पार चली गई है.
वास्तविकता ये है कि दुनिया के अधिकांश देश, जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण का
प्रभाव रह चुका है, उन्हें भी डर है कि संक्रमण का दूसरा दौर कहीं उन्हें अपनी
चपेट में ना ले ले.
बीबीसी की डेटा और विज़ुअल जर्नलिज़्म टीम ने यह ग्राफ़ तैयार किया है जिसकी
मदद से आपको यह समझने में आसानी होगी कि 2 अप्रैल तक जहाँ दुनिया में कोरोना
संक्रमण के दस लाख मामले थे, वो कैसे सिर्फ़ सात सप्ताह में पाँच गुने से ज़्यादा होकर,
पचास लाख के पार पहुँच गए.
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पाकिस्तान में कोविड-19 के मामले 85 हज़ार पार
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पाकिस्तान के स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि बीते 24 घंटे में उनके यहाँ
कोरोना वायरस संक्रमण के 4,688 नये मामले सामने आये हैं जिनके बाद पाकिस्तान में
वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 85 हज़ार 264 हो गई है.
पाकिस्तान सरकार के अनुसार संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले सिंध (32,910) और
पंजाब (31,104) प्रांत में हैं.
बीते 24 घंटे में पाकिस्तान में कोविड-19 से 82 लोगों की मौत हुई है, जिसके
बाद वहाँ महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,770 हो गई है.
पाकिस्तान में अब तक संक्रमित हुए कुल लोगों में से 30 हज़ार से अधिक लोग इलाज
के बाद ठीक हुए हैं.
पाकिस्तान सरकार का दावा है कि वो कोविड-19 टेस्ट की संख्या बढ़ा रहे हैं.
बताया गया है कि बीते 24 घंटे में 20 हज़ार से ज़्यादा लोगों के सैंपल लिये गए
हैं.
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राहुल गांधी से बोले उद्योगपति राजीव बजाज- 'भारत का लॉकडाउन एक ड्रैकोनियन लॉकडाउन है'
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राहुल गांधी: कोविड संकट में आपके यहां क्या परिस्थिति है?
उद्योगपति राजीव बजाज: मुझे लगता है कि हम सभी इस अनिश्चितता में कुछ निश्चितता खोजने की कोशिश कर रहे हैं. ये सभी के लिए नया अनुभव है. ये एक कड़वा मीठा अनुभव है. हमारे जैसे कुछ लोग, जो इसे सहन कर सकते हैं. वे घर पर रहने से बहुत दुखी नहीं है. लेकिन जब आपने आसपास व्यवसायों और जनता की स्थिति देखते हैं तो ये निश्चित रूप से मीठे की तुलना में अधिक कड़वा है. इसलिए हर दिन एक नई सीख लेकर आता है कि उसे कैसे झेलना चाहिए. इसलिए हर दिन एक नई सीख लेकर आता है कि उसे कैसे झेलना चाहिए. चाहे वो चिकित्सा की दृष्टि से हो, व्यापार की दृष्टि से हो या व्यक्तिगत दृष्टि से हो.
राहुल गांधी: यह काफी गंभीर है. मुझे नहीं लगता है कि किसी ने सोचा होगा कि दुनिया में इस तरह से लॉकडाउन कर दिया जाएगा. मैं नहीं समझता कि विश्व युद्ध के दौरान भी दुनिया बंद कर दी गई थी. तब भी चीज़ें खुली थीं. ये अकल्पनीय और विनाशकारी परिस्थिति है.
राजीव बजाज: मेरे परिवारजन और कुछ दोस्त जापान में हैं. क्योंकि कावासकी के साथ हमारा जुड़ाव है. कुछ लोग सिंगापुर में हैं. यूरोप में बहुत सारी जगहों पर दोस्त हैं. अमरीका, न्यूयॉर्क, मिशिगन, डीसी में क़रीबी दोस्त और परिवार के लोग हैं. जब आप ये कहते हैं कि दुनिया में इस तरह से कभी लॉकडाउन नहीं लगाया गया, लेकिन जिस तरह से भारत में लॉकडाउन कर दिया गया है, वह एक ड्रैकोनियन लॉकडाउन है. क्योंकि इस तरह के लॉकडाउन के बारे में कहीं से नहीं सुन रहा हूं. दुनिया भर से मेरे सभी दोस्त और परिवार के लोग हमेशा बाहर निकलने, टहलने, घूमने और अपनी ज़रूरत की चीज़ें खरीदने और किसी से भी मिलने और नमस्ते कहने के लिए स्वतंत्र हैं. इसलिए इस लॉकडाउन के सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं के संदर्भ में कहें तो वे लोग बेहतर परिस्थिति में हैं.
राहुल गांधी:और ये अचानक हुआ. आपने जो कड़वी-मीठी वाली बात कही, वो मेरे लिए चौंकाने वाली है. देखिए समृद्ध लोग इससे निपट सकते हैं. उनके पास घर है, आरामदेह माहौल है. लेकिन ग़रीब लोगों और प्रवासी मजदूरों के लिए ये पूरी तरह से विनाशकारी है. उन्होंने वास्तव में आत्मविश्वास खो दिया है. काफी लोगों ने बोला है कि भरोसा खो दिया है, भरोसा ही नहीं बचा है और मुझे लगता है कि ये बहुत दुखद और देश के लिए ख़तरनाक़ है.
राजीव बजाज:मुझे शुरू से ही लगता है, ये मेरा विचार है. इस समस्या के दृष्टिकोण के बारे में मैं ये नहीं समझ पाया कि एशियाई देश होने के बावजूद हमने पूरब के देशों की तरफ़ ध्यान नहीं दिया. हमने इटली, फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और अमरीका को देखा. जो वास्तव में किसी भी मायने में सही मापदंड नहीं हैं. चाहे ये जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता हो या तापमान, जनसांख्यिकी, भौगोलिक परिस्थिति हो. वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने जो कुछ कहा है, वो यही है कि हमें उनकी तरफ़ कभी नहीं देखना चाहिए था. अगर मेडिकल नज़रिये से देखा जाए तो एक बेहतरीन स्वास्थ्य ढांचा स्थापित करने से शुरू करना होगा. हम सभी जानते हैं कि इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए, ऐसा कोई भी मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं हो सकता है, जो पर्याप्त हो. लेकिन कोई भी हमें ये बताने के लिए तैयार नहीं था कि किनते प्रतिशत लोग ख़तरे में हैं. ये ऐसे दिखता है कि या तो हम खुद को तैयार कर रहे हैं या शायद हम खुद को तैयार नहीं कर सकते हैं. शायद ये कहना राजनीतिक रूप से उचित नहीं है. लेकिन जैसा कि नारायणमूर्ति जी हमेशा कहते हैं, जब संदेह हो तो हमेशा उसे खुल कर कहना चाहिए. मुझे लगता है कि हमारे यहां खुल कर बात रखने, तर्क करने और सच्चाई के मामले में कमी रह गई है. और फिर ये बढ़ता गया और लोगों में इतना बड़ा भय पैदा कर दिया है कि लोगों को लगता है कि ये बीमारी एक संक्रामक कैंसर या कुछ उसके जैसी है. और अब लोगों के दिमाग को बदलने और जीवन पटरी पर लाने और उन्हें वायरस के साथ सहज बनाने की नई नसीहत सरकार की तरफ़ से आने वाली है. इसमें लंबा समय लगने वाला है. आपको क्या लगता है? मुझे तो ऐसा ही लगता है.
उत्तर प्रदेश: सीएम का विमान इस्तेमाल कर सकेगा स्वास्थ्य विभाग
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने
प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को अनुमति दी है कि महामारी के दौरान अन्य राज्यों से ज़रूरी
उपकरण लाने के लिए वो उनके सरकारी विमान का उपयोग कर सकते हैं.
भारत: कोविड-19 के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि, 24 घंटे में 9304 नए मामले
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में कोविड-19 के मामलों में
रिकॉर्ड दैनिक वृद्धि हुई है.
बीते 24 घंटे में कोविड-19 के 9,304 नये मामले सामने आये हैं जिनके बाद भारत
में संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर दो लाख 16 हज़ार 919 हो गई है.
बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण से 260 लोगों की मौत भी हुई है. भारत में
कोविड-19 से मरने वालों की संख्या अब 6075 हो गई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में 1 लाख 6 हज़ार 737 लोगों में यह
संक्रमण सक्रिय है.
वहीं एक लाख 4 हज़ार 107 लोग इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.
इस बीच आईसीएमआर ने दावा किया है कि उन्होंने कोविड-19 टेस्टिंग की संख्या और
बढ़ाई है.
आईसीएमआर के अधिकारियों ने गुरुवार सुबह बताया कि बीते 24 घंटे में कोविड-19
टेस्ट के लिए 1 लाख 39 हज़ार 485 सैंपल लिये गए हैं और अब तक देश में 42 लाख 42
हज़ार 718 सैंपल लिये जा चुके हैं.
चीन ने किया विदेशी रिपोर्ट का खंडन, कहा- 'WHO को जानकारियाँ देने में देर नहीं की'
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चीन के विदेश मंत्रालय ने ‘उनकी सरकार द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन को
कोरोना वायरस से संबंधित डेटा देर से उपलब्ध कराने के दावे’
का खंडन किया है.
चीन की सरकार ने कहा है कि इस तरह के दावे तथ्यों से परे हैं और इन्हें पेश करना ‘गंभीर
रूप से असंगत’ है.
चीनी सरकार की यह प्रतिक्रिया समाचार एजेंसी एपी में छपी एक रिपोर्ट के बाद
आई है, जिसमें दावा किया गया था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों में इस
बात को लेकर ‘काफ़ी निराशा’ रही है कि चीन से उन्हें महामारी
से जुड़ी आवश्यक जानकारियाँ समय पर नहीं मिलीं.
इस रिपोर्ट में कुछ रिकॉर्डिंग्स के आधार पर यह दावा किया गया है कि विश्व
स्वास्थ्य संगठन सार्वजनिक रूप से चीन की सराहना इसलिए करता रहा है, ताकि वो चीन की सरकार
से अधिक से अधिक जानकारियाँ निकालने में सफल हो सके.
लेकिन चीन की सरकार ने इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताया है. उनका कहना है कि “चीन
ने कोरोना वायरस पर जो काम किया है, वो पूरे विश्व के लिए उपलब्ध है, डेटा एकदम
स्पष्ट है और हमें विश्वास है कि यह हर जाँच में सही साबित हो सकता है.”
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इसी बीच चीन के नागरिक उड्डयन नियामक ने कहा है कि वो विदेशी एयरलाइनों को चीन में आने की अनुमति देंगे, पर फ़िलहाल नहीं.
दरअसल, शंघाई से प्रकाशित होने वाले अख़बार ‘द पेपर’ ने चीन के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक आदेश का हवाला देते हुए यह रिपोर्ट दी थी कि चीन सरकार कुछ चुनिंदा विदेशी विमान कंपनियों को चीन में अपनी उड़ानें लेकर आने की अनुमति देना चाहती है.
यह रिपोर्ट अमरीका के उस आदेश के बाद प्रकाशित हुई थी जिसमें सभी चीनी विमान कंपनियों की उड़ानों के अमरीकी में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था क्योंकि चीन अमरीकी विमान कंपनियों के चीन में दाखिल होने पर रोक लगा चुका है.
कोरोना संकट: गुजरात के धमन-1 वेंटिलेटर के कथित स्कैम का क्या है सच
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गुजरात के राजकोट शहर की एक कंपनी है 'ज्योति सीएनसी' जिसका दावा है कि "कोविड-19 से लड़ने के लिए उसने एक पहल की है."
'ज्योति सीएनसी' की धमन वेबसाइट का उन 'वेंटिलेटर्स' के नाम पर रखा गया है जिनका निर्माण कंपनी के सीएमडी पराक्रम जाडेजा के 'साहस और दूरदर्शिता के चलते किया गया जिससे कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जारी जंग में गुजरात प्रदेश और दूसरों की मदद हो सके.'
इसी वेबसाइट पर कंपनी के कुछ और भी दावे हैं:
धमन-1 वेंटिलेटर्स का निर्माण 'मेक इन इंडिया' मिशन को ध्यान में रखते हुए किया गया है और कोविड-19 से निपटने के लिए गुजरात सरकार को 1,000 'वेंटिलेटर्स' दान दिए जा सकें.
'ज्योति सीएनसी' और 26 दूसरी कंपनियों के 150 प्रोफ़ेशनल्स ने दिन-रात मेहनत कर निर्धारित समयसीमा में इसका निर्माण किया.
धमन-1 एक गुजराती शब्द है जिसका पर्याय एक ब्लोअर से है जो हवा पम्प करने का काम करती है.
धमन-1 'वेंटिलेटर' की क़ीमत एक लाख रुपये है जो बाज़ार में उपलब्ध दूसरे वेंटिलेटर्स की क़ीमत से 20% से भी ज़्यादा कम है.
इन दावों के बीच कंपनी ने एक लाइन और लिखी है और वो ये है कि "हम वेंटिलेटर्स बनाने के एक्सपर्ट नहीं हैं लेकिन देश में इसकी मौजूदा मांग को देखते हुए हमने इस मशीन का प्लान और निर्माण किया."
कोरोना अपडटेः दुनिया भर में संक्रमण के मामले 64 लाख के क़रीब
वीडियो कैप्शन, पीपीई सूट बनाने में कितना आत्मनिर्भर है भारत
दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले 64 लाख के क़रीब पहुंच गए हैं.
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 63,99,230 हो गई है.
कोविड-19 की महामारी की वजह से दुनिया भर में अब तक 384,463 लोगों की मौत भी हुई है.
अमरीका कोरोना संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों की सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है.
वहां संक्रमण के मामलों की संख्या 18,49,852 है जबकि 107,099 लोगों की मौत हुई है.
भारत में कोरोना संक्रमण के 216,824 मामले अब तक दर्ज किए जा चुके हैं. वो इस सूची में ब्राज़ील, रूस, ब्रिटेन, स्पेन और इटली के बाद सातवें नंबर पर है.
वीडियो कैप्शन, कम ही वक़्त में लाखों जानें ले चुका ये वायरस चीन से फैला था.
चीन में कोरोना संक्रमण के नए मामले
गुरुवार को चीन में कोरोना वायरस से संक्रमण का एक नया मामला दर्ज किया गया.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चीन के स्वास्थ्य विभाग के हवाले से रिपोर्ट दी है कि चार ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं थे. ये मामले तीन जून के हैं.
नेशनल हेल्थ कमीशन ने बताया है कि ये सभी मामले बाहर से आए लोगों के हैं. इन लोगों ने हाल में विदेश यात्राएं की थी.
दो जून को भी चीन में कोरोना संक्रमण के पांच मामलों की पुष्टि हुई थी जिनमें चार लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे.
चीन संक्रमण के मामलों का रिकॉर्ड दर्ज करते समय उन लोगों की गिनती नहीं रखता, जिनमें संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई देते.
चीन में अब तक कोरोना संक्रमण के 84,159 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. वहां 4,638 लोगों की कोविड-19 से मौत भी हुई है.
वीडियो कैप्शन, हाल के बरसों में दुनिया का शक्ति संतुलन बदलता दिखा है.
चीन पर जानकारी छुपाने का एक और आरोप
कम से कम दो अमरीकी सीनेटरों ने कहा है कि चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़े छुपाये थे.
उनका कहना है कि अगर ये जानकारी समय रहते सामने आ जाती तो महामारी की ये स्थिति न होती.
हालांकि चीन ने इन आरोपों को ये कहते हुए खारिज किया है कि उसने जानकारी साझा करने में कोई देरी नहीं की.
चीन ने कहा है कि उसकी सरकार ने पारदर्शी तरीके से इस मसले पर कार्रवाई की थी.
अमरीकी सीनेटर आरोप लगाने के लिए उन रिपोर्टों का हवाला दे रहे थे जिनमें ये कहा था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को अहम जानकारी देने से रोक दिया गया था.
बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ये रिपोर्ट तथ्यों से मेल नहीं खाती है.
वीडियो कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप का नया धमाका, बोला वो खु़द ले रहे हैं हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन
कोविड-19 को रोकने से नाकाम रही मलेरिया की दवा
कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से इसे रोकने में मदद नहीं मिलती है. बुधवार को वैज्ञानिकों ने क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे आने के बाद ये बात कही.
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की पैरवी करते रहे हैं. उन्होंने कहा था कि कि कोरोना वायरस को रोकने के लिए वे इस दवा का इस्तेमाल करते रहे हैं.
लेकिन अमरीका और कनाडा के 821 लोगों पर परीक्षण के बाद ये बात सामने आई कि ये प्लैकिबो से बेहतर नहीं है.
जब कुछ लोगों को दवा दी जाती है और कुछ को दवा का भ्रम दिया जाता है, तो प्लैकिबो दवा के उसी भ्रम को कहते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस रिसर्च पर काम किया था, और ये रिसर्च पेपर न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसीन में प्रकाशित हुआ है.
वीडियो कैप्शन, कोरोना लॉकडाउन में मकड़ियों के साथ रह रही है यह महिला
कोरोना वायरस से जूझ रहे ऑस्ट्रेलिया में अर्थव्यवस्था को उबारने की कोशिश
कोविड-19 की महामारी से जूझ रहे ऑस्ट्रेलिया में सरकार ने कहा है कि कंस्ट्रक्शन उद्योग को उबारने के लिए ज़रूरतमंद नागरिकों को 25 हज़ार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मदद करेगी.
भारतीय मुद्रा में रकम 13 लाख रुपये से ज़्यादा की बनती है.
ऑस्ट्रेलिया पिछले तीन दशकों में पहली बार मंदी का सामना कर रहा है.
होमबिल्डर नाम से दिए इस राहत पैकेज के लिए 680 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का प्रावधान किया गया है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन ने गुरुवार को कहा कि ये आर्थिक पैकेज नौकरियां दिलाने में मदद करेगा, इससे लोग अपने परिवार के लिए घर बना पाएंगे जो कई ऑस्ट्रेलियाई लोगों का सपना है.
उन्होंने कैनबेरा में कहा, "हम उस सपने को ज़िंदा रखना चाहते हैं, उनके लिए... जो लोग इस सेक्टर पर निर्भर हैं, उनके लिए नौकरियों के मौके बनेंगे."
सरकारी आंकडों के अनुसार, साल 2019 में ऑस्ट्रेलिया में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 11 लाख लोग काम करते थे. ये देश की कुल श्रमशक्ति का 9 फ़ीसदी हिस्सा है.
आज से अपनी सीमाएं खोल देगा ऑस्ट्रिया
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ऑस्ट्रिया आज से इटली को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों से लगी अपनी सीमाएं खोल रहा है.
ऑस्ट्रिया ने ये घोषणा जर्मनी के यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ अपनी सीमाओं को 15 जून से खोलने का ऐलान करने के बाद की है.
ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री का कहना है कि इटली में फिलहाल कोरोना संक्रमण मामलों की तादाद ज़्यादा है और वहां से यात्रा की अनुमति अभी नहीं दी जा सकती है.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ऑस्ट्रिया इटली से लगी अपनी सीमा को जल्द से जल्द खोलना चाहता है.
इटली वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों की सूची में छठें नंबर पर है.
फिर से शुरू होगा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का ट्रायल
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के क्लिनिकल ट्रायल को एक सप्ताह के अंतराल के बाद फिर से अनुमति दे दी है.
कोरोना वायरस के मरीज़ों के इलाज में इस मलेरिया की इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है.
एक शोध रिपोर्ट में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर सवाल उठाए गए थे जिसके बाद डब्ल्यूएचओ ने इसका क्लीनिकल ट्रायल रोक दिया था.
समीक्षा के बाद फिर से क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया जा रहा है. ये ट्रायल पैंतीस देशों के कोरोना मरीज़ों पर हो रहा है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा था कि ये दवा कोरोनावायरस के इलाज में इस्तेमाल हो सकती है.
वहीं तुर्की का कहना है कि उसने अपने मरीज़ों पर इस दवा का इस्तेमाल किया है और नतीजे उत्साहजनक रहे हैं.
ब्राज़ील में होगा ऑक्सफ़र्ड की वैक्सीन का ट्रायल
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यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफ़र्ड में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए विकसित की गई एक नई वैक्सीन का मध्य जून से ब्राज़ील में ट्रायल किया जाएगा.
इस सप्ताह भर्ती किए जाने वाले दो हज़ार स्वयंसेवकों पर इस वैक्सीन का ट्रायल होगा.
इस शोध में मदद कर रही यूनिवर्सिटी ऑफ़ साओ पाउलो के अधिकारियों के मुताबिक शोध में 18 से 55 साल के बीच के स्वयंसेवक स्वास्थ्यकर्मियों को ही शामिल किया जाएगा.
कोविड-19 अस्पतालों में सफ़ाई का काम करने वाले स्वयंसेवक भी ट्रायल में हिस्सा ले सकेंगे.
यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट सोराया स्माइली का कहना है कि अध्ययन के लिए ब्राज़ील को इसलिए चुना गया है क्योंकि इस समय कोरोना संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले ब्राज़ील में ही सामने आ रहे हैं.
कोरोना संक्रमण के मामलों में ब्राज़ील इस समय अमरीका के बाद दूसरे नंबर पर है.
कोरोना को रोकने के लिए स्पेन ने बढ़ाया आपातकाल
स्पेन की सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से देश में लागू आपातकाल को 21 जून तक के लिए बढ़ा दिया है.
इसे आपातकाल में अंतिम विस्तार माना जा रहा है.
स्पेन की मध्यपंथी मुख्य विपक्षी पार्टी और दक्षिणपंथी वोक्स पार्टी ने आपातकाल लगाए जाने का विरोध किया है.
विपक्षी पार्टियों ने महामारी के दौरान समाजवादी प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ की नीतियों की भी आलोचना की है.
वहीं प्रधानमंत्री का कहना है कि विपक्षी पार्टियां नफ़रत की राजनीति का शिकार न हों.
स्पेन कोरोना संक्रमण से दुनिया में सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में से एक है.
हालांकि हाल के दिनों में यहां कोरोना संक्रमण कुछ हद तक नियंत्रित हुआ है.
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उत्तर कोरिया में बच्चों के लिए खुले स्कूल
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उत्तर कोरिया में प्राइमरी स्कूल के बच्चों कक्षाओं में लौट रहे हैं. उत्तर कोरिया में शिक्षा सत्र अप्रैल में शुरू होता है. लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से इसे टाल दिया गया था.
पड़ोसी देश चीन में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद उत्तर कोरिया ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया था और बाहर से लोगों के आने पर रोक लगा दी थी.
उत्तर कोरिया ने दुनिया में सबसे पहले लॉकडाउन लागू किया था.
उत्तर कोरिया ने कोरोना संक्रमण के एक भी मामले की पुष्टि नहीं की है. हालांकि विशेषज्ञ उत्तर कोरिया के इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उत्तर कोरिया में वायरस फैला तो देश की कमज़ोर स्वास्थ्य सेवाएं इसे संभाल नहीं पाएंगी.