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पश्चिम बंगालः मुख्यमंत्री कार्यालय के दो ड्राइवर संक्रमित
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया है कि राज्य सरकार के सचिवालय नबान्नो के दो ड्राइवर संक्रमित पाए गए हैं.
इसके बाद वहाँ कार्यरत सभी ड्राइवरों का टेस्ट किया जा रहा है.
गुरूवार को पूरे दफ़्तर में सैनिटाइज़ेशन का काम किया जाएगा.
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महाराष्ट्र में 24 घंटे में 47 पुलिसकर्मी संक्रमित
महाराष्ट्र पुलिस ने कहा है कि पिछले 24 घंटों
में प्रदेश में 47 पुलिसकर्मी पॉज़िटिव पाए गए हैं.
इसके साथ ही राज्य में
संक्रमित होने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़कर 2,556 हो गई है.
प्रदेश में अब तक 29 पुलिसकर्मियों की कोरोना
संक्रमण से मौत हो चुकी है.
लंबे समय तक रह सकता है बच्चों और युवाओं पर लॉकडाउन का मानसिक असर
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ब्रिटेन में हुए एक शोध में
कहा गया है कि लॉकडाउन से बच्चों की मानसिक सेहत पर दूरगामी असर पड़ सकता है.
बाथ यूनिवर्सिटी में बच्चों
और नौजवानों की मानसिक सेहत पर अकेलेपन के असर के बारे में एक अध्ययन किया गया
जिसका निष्कर्ष था कि आने वाले वर्षों में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की
ज़्यादा ज़रूरत पड़ सकती है.
रिपोर्ट तैयार करने वाले
शोधकर्ताओं ने कहा,”बच्चों
और किशोरों को लॉकडाउन ख़त्म होने के काफ़ी समय बाद तक डिप्रेशन और चिंता जैसी
समस्याएँ झेलनी पड़ सकती हैं.
स्वास्थ्य सेवाओं को इसके लिए तैयार रहना चाहिए.”
रिपोर्ट के अनुसार युवाओं में
डिप्रेशन का ख़तरा पहले की तुलना में तीन गुना बढ़ गया है और अकेलेकपन का प्रभाव
और डिप्रेशन का असर कम-से-कम नौ साल तक रह सकता है.
रूस में थम नहीं रही संक्रमण की गति, दुनिया का तीसरा सर्वाधिक संक्रमित देश
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इमेज कैप्शन, मॉस्को में 1 जून स लोगों को बाहर निकलने की छूट दी गई है
रूस में बुधवार को कोरोना
संक्रमण के 8,536 मामले सामने आए जिसके बाद
संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 432,277 हो गई है.
अमरीका और ब्राज़ील के बाद
सबसे ज़्यादा संक्रमित लोग रूस में हैं.
बुधवार को रूस में 17 लोगों
की मौत भी दर्ज की गई. वहाँ अब तक 5,215 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है.
रूस सरकार के कोरोना
मुख्यालय ने बताया है कि सबसे ज़्यादा लोग मॉस्को में संक्रमित हुए हैं.
हालाँकि, 1 जून के बाद से
मॉस्को में कुछ शर्तों के साथ लोगों को बाहर निकलने की छूट दे दी गई.
कोरोना: लॉकडाउन से कैसे पस्त हुआ चाय उद्योग
ममता बनर्जी: 'पीएम-केयर फंड से मज़दूरों को हर महीने दिये जायें 10 हज़ार रुपये'
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोविड-19 महामारी से पैदा हुए
संकट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से सभी प्रवासी मज़दूरों को दस हज़ार रुपये प्रति
माह की सहायता राशि देने की माँग की है.
उन्होंने कहा है, "लोग महामारी की वजह से बड़ी आर्थिक
परेशानियों का सामना कर रहे हैं. उन्हें आर्थिक सहायता की ज़रूरत है. क्यों नहीं
पीएम-केयर फंड का इस्तेमाल ग़रीबों की मदद के लिए किया जाये."
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कोविड-19 के इलाज के लिए इबुप्रोफ़ेन का हुआ परीक्षण, पढ़िए क्या कहते हैं नतीजे
मिशेल रॉबर्ट्स
हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़
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वैज्ञानिक इस बात का परीक्षण कर रहे हैं कि क्या कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज में इबुप्रोफ़ेन से मदद मिल सकती है.
लंदन के दो अस्पतालों में डॉक्टरों की टीम का मानना है कि बुख़ार और दर्द में राहत देने वाली ये दवा साँस की तकलीफ़ का भी इलाज कर सकती है.
लंदन के गायज़ एंड सेंट थॉमस हॉस्पिटल और किंग्स कॉलेज के डॉक्टरों को उम्मीद है कि कम ख़र्च वाली ये दवा मरीज़ों को वेंटिलेटर से दूर रखने में मदद कर सकती है.
परीक्षण के दौरान आधे मरीज़ों को सामान्य तीमारदारी के अलावा इबुप्रोफ़ेन की खुराक दी जाएगी.
ट्रायल में वे इबुप्रोफ़ेन के सामान्य टैबलेट्स के बजाय उसकी ख़ास फ़ॉर्मुलेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
कुछ मरीज़ों को अर्थराइटिस के मामलों में भी ये दवा दी जाती रही है.
जानवरों पर परीक्षण के दौरान ये बात सामने आई कि साँस की तकलीफ़ों में यह कारगर साबित हो सकती है.
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों को साँस की तकलीफ़ से जूझते देखा गया है.
किंग्स कॉलेज के डॉक्टरों की जो टीम इस रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, उसमें प्रोफ़ेसर मितुल मेहता भी शामिल हैं.
वो कहती हैं, "हम जो उम्मीद कर रहे हैं और जो नतीजे सामने आते हैं, उसे मिलाने के लिए हमें ट्रायल करने की ज़रूरत है."
महामारी की शुरुआत के समय इबुप्रोफ़ेन के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं जताई गई थीं. तब ये कहा गया था कि इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं.
ये चिंताएं उस वक्त और बढ़ गई थीं जब फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री ओलिवर वेरान ने कहा कि इबुप्रोफ़ेन जैसी दवाएं संक्रमण की समस्या को और बढ़ा सकती हैं.
उन्होंने मरीज़ों को पैरासिटामोल जैसी दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी थी.
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फिलीपींस: झाड़-फूंक के ज़रिए कोरोना से लड़ते पादरी
'वंदे भारत मिशन' का तीसरा चरण - विदेशों में भेजी जाएंगी 70 फ़्लाइट्स
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केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, 11 जून से 30 जून के बीच ‘वंदे
भारत मिशन’ के तीसरे चरण में भारत सरकार ने एयर इंडिया की 70
फ़्लाइट्स को अनुमति दी है जिनके ज़रिए विदेशों में फंसे भारतीयों का वापस लाया
जाना है.
इस दौरान अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन के लिए एयर इंडिया की कई फ़्लाइट्स भेजी
जाएंगी.
यूके स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार 18 जून से 23 जून के बीच एयर इंडिया की
पाँच फ़्लाइट्स ब्रिटेन में फंसे भारतीयों को वापस लायेंगी. हर फ़्लाइट में 243
यात्रियों को टिकट दिये जाएंगे.
एयर इंडिया अब तक दुबई, कुवैत, रियाद, दमाम, मस्कट, बहरीन, मॉस्को, मैड्रिड,
टोक्यो, ढाका समेत कई अन्य बड़े शहरों से विदेश में फंसे भारतीयों को ला चुकी है.
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार वंदे भारत मिशन के तहत अब तक पचास हज़ार से
ज़्यादा भारतीयों को वापस लाया गया है.
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि 13 जून तक एक लाख भारतीयों का वापस लाना भारत सरकार
का लक्ष्य है.
वंदे भारत मिशन की शुरुआत 7 मई को हुई थी. इसके तहत एयर इंडिया की उड़ानों को
विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने की अनुमति दी गई है जिसके लिए यात्रियों से
पैसा वसूला जा रहा है.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में कोरोना संक्रमण के मामले दो लाख पार
वीडियो कैप्शन, भारत में मौत के सही आंकड़े पता लगाना मुश्किल क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले दो लाख के पार चले गए हैं.
जानकारों का कहना है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में संक्रमण के सबसे ख़राब हालात से गुजरना बाक़ी है.
पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 8909 मामले दर्ज किए गए हैं.
किसी एक दिन में दर्ज किए जाने वाले संक्रमण के मामलों की संख्या के लिहाज से ये एक रिकॉर्ड की तरह ही है.
इसके साथ ही भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,07,615 हो गई है.
अमरीका, ब्राज़ील और ब्रिटेन समेत दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित छह देशों के बाद भारत का नंबर आता है.
इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च की डॉक्टर निवेदिता गुप्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि संक्रमण के मामलों की सबसे ख़राब स्थिति से हम अभी काफी दूर हैं.
इससे पहले सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि इस महीने के आख़िर से या फिर जुलाई से संक्रमण के मामलों में गिरावट दर्ज की जाने की उम्मीद है.
भारत में कोरोना वायरस से अब तक 5815 लोगों की मौत हो चुकी है.
हरियाणा सरकार दिल्ली की एंट्री खोलने को तैयार, पर पहले केजरीवाल से बातचीत की दरकार
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि दिल्ली से लगने वाले
बॉर्डर को वो खोलेंगे या नहीं, इसका निर्णय वे दिल्ली सरकार से चर्चा करने के बाद
ही ले पायेंगे.
हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने मनोहर लाल के हवाले से कहा है कि “गृह
मंत्रालय के निर्देशों का पालन किया जाएगा लेकिन दिल्ली सरकार ने सामान्य आवाजाही
बंद रखने का निर्णय लिया है. इसलिए दोनों सरकारों की चर्चा के बाद ही इस पर कोई
निर्णय हो पाएगा.”
सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में संक्रमण के
बढ़ते मामलों का हवाला देते हुए दिल्ली की सीमाएं एक सप्ताह के लिए बंद रखने की
घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि ‘इस दौरान सिर्फ़ ज़रूरी सामान लाने-ले जाने
की ही अनुमति होगी.’
अमरीका में नहीं थम रहा कोविड-19 से हो रहीं मौतों का सिलसिला
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अमरीका में मंगलवार को कोविड-19 की वजह से 1081 लोगों की मौत हुई.
अमरीका की जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार वहाँ महामारी से मरने वालों
की आधिकारिक संख्या अब 1 लाख 6 हज़ार 180 हो गई है, जबकि संक्रमित लोगों की संख्या
बढ़कर 18 लाख 31 हज़ार 435 हो गई है.
अमरीका में कोविड-19 से मरने वाले लोगों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे
ज़्यादा है.
अमरीका के अनुसार कोरोना महामारी से मरने वालों की यह संख्या बीते 44 सालों में कोरिया, वियतनाम, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में हुए अलग-अलग युद्धों में जान गंवाने वाले अमरीकी सैनिकों की संख्या से ज़्यादा हो गई है.
यह संख्या दूसरे विश्व युद्ध, इराक़ युद्ध, अफ़गानिस्तान युद्ध समेत
कुछ अन्य आपदाओं में मारे गए अमरीकी नागरिकों की संख्या से भी ज़्यादा है.
विश्व स्तर पर बात करें, तो पिछले वर्ष चीन से इस महामारी की शुरुआत के बाद से
अब तक 3 लाख 79 हज़ार 585 लोग कोविड-19 से मर चुके हैं.
अमरीका में संक्रमण की इस स्थिति के बावजूद लॉकडाउन में काफ़ी रियायतें दी गई
हैं.
हालांकि काले अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या के बाद शुरू हुए
प्रदर्शनों को देखते हुए कई बड़े शहरों ने पिछले दिनों रात में लगने वाला कर्फ़्यू
को जारी रखने का निर्णय लिया है.
कोरोना लॉकडाउन में मकड़ियों के साथ रह रही है यह महिला
कोविड-19 महामारी: दुनिया भर से अब तक के बड़े अपडेट्स
इमेज स्रोत, EPA/Sebastiao Moreira
दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमितों की
संख्या अब 63.78 लाख हो चुकी है. वहीं कोरोना से मरने वालों की संख्या क़रीब 380,251 तक पहुँच गई है.
जॉन्स हॉपकिंस यूनवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार कोरोना के
कारण सबसे प्रभावित अमरीका में 18 लाख 31 हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना संक्रमित हैं जबकि 106,180 लोगों
की इस कारण मौत हो चुकी है.
ब्रिटेन में मरने वालों की संख्या 49 हज़ार के क़रीब
डैशबोर्ड के अनुसार ब्रिटेन में कोरोना से
मरने वालों की संख्या 40 हज़ार के क़रीब हो चुकी है, जबकि 2.79 लोग इससे संक्रमित
हैं.
ब्रिटेन में गरीबी के मुद्दे पर का कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि
लॉकडाउन के पहले महीने, मार्च में देश के फूड बैंकों पर भारी दवाब पड़ा है. वहीं
अप्रैल में मांग रिकॉर्ड स्तर पर रही है.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोरोना
महामारी के कारण गरीब परिवार और अधिक गरीब हुए हैं और सरकार का सोशल सिक्योरिटी
नेटवर्क इन स्थिति को रोकने के लिए नाकाफी रही है.
इमेज स्रोत, cctv
इमेज कैप्शन, डॉक्टर हू वीफेन्ग
चीन में एक डॉक्टर की मौत पर बरपा हंगामा
चीन के वुहान सेंट्रल अस्पताल में बतौर यूरोलॉजिस्ट काम कर रहे डॉक्टर हू वीफेन्ग की मौत के बार वहां लोग प्रशासन की आलोचना कर रह हैं. कोरोना से चार महीने लंबी जंग के बाद 2 जून को हू वीफेन्ग की मौत हो गई. वो जनवरी में कोरोना संक्रमित पाए गए थे और कोरोना के कारण मरने वाले अस्पताल के छठे डॉक्टर हैं.
जिस अस्पताल में हू वीफेन्ग काम करते थे वहां बीते साल दिसंबर में कोरोना के बारे में सबसे पहले चेतावनी देने वाले डॉक्टर ली वेनलियान्ग भी काम करते थे. कोरोना के बारे में चेतावनी देने पर प्रशासन ने ली वेनलियान्ग को अपना मुँह बंद रखने के लिए कहा था. बाद में ली वेनलियान्ग ने अस्पताल से एक वीडियो के ज़रिए अपनी कहानी पोस्ट की थी.
हू वीफेन्ग क मौत के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की गई है उनकी मौत के बाद लेकिन सोशल मीडिया पर लोग कोरोना महामारी से निपटने की चीनी सरकारी की कोशिशों की आलोचना कर रहे हैं. बीमारी के दौरान लीवर के काम करने में गड़बड़ी के कारण उनकी त्वचा का रंग काला पड़ गया था. चीन में वो और उनके साथी कर्डियोलॉजिस्ट यी फैन को 'काले चेहरों वाले वुहान के डॉक्टर' कहा जाने लगा था. कई लोग कोरोना के ख़िलाफ़ उनकी जंग के लिए उन्हें हीरो की तरह देखने लगे थे.
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भारत में रिकवरी रेट अधिक- सवास्थ्य मंत्रालय
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रायल के जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2 लाख के क़रीब हो गई है जबकि अब तक इस वायरस के कारण कुल 5598 मौतें हुई हैं. मंत्रालय के अनुसार अब तक 95,527 लोग कोरोना संक्रमण के बाद ठीक हुई हैं और इस कारण देश में कोरोना के कुल 97,581 एक्टिव मामले हैं.
सरकार का कहना है कि मरने वालों में 70 फीसदी मामले ऐसे हैं जहां मरीज़ को दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता लव अग्रवाल ने कहा है जहां विश्व में कोरोना की मृत्यु दर 6.1 रही है वहीं भारत में ये 2.82 फीसदी हो गई है.
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भारत के दवा नियामक निकाय – केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कोविड-19 के इलाज के लिए एंटी-वायरल दवा रेमडेसिवीर के उपयोग को मंज़ूरी दे दी है. अब अस्पताल में भर्ती लोगों को आपातस्थिति में ये दवा दी जा सकेगी.
सीडीएससीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि देश के कोविड-19 के तेज़ी से बढ़ते मामलों को देखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है. ये दवा इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध होगी और रिटेल में इसकी बिक्री डॉक्टर के पर्चे पर, अस्पताल में इस्तेमाल के लिए ही हो सकेगी.
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ब्राज़ील में एक दिन में 1,262 मौतें
अमरीका के बाद कोरोना से सबसे बुरी प्रभावित ब्राज़ील में बीते 24 घंटों में 1,262 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही देश में अब तक कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा अब 31,199 हो चुका है.
ये आंकड़ा ऐसे समय आया है जब ब्राज़ील में कई शहर लॉकडाउन से बाहर निकल रहे हैं. यहां रियो डी जेनिरो में समुद्रतट पर भारी संख्या में लोग नज़र आए और साओ पाउलो में भी आर्थिक गतिविधियां शुरु की गईं हैं.
पैन अमरीकन हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के निदेशक मार्कोस एस्पीनाल ने कहा है कि ये कहना लॉकडाउन के नियमों लागू न होने की सूतर में ये जानना मुश्किल है कि ये वायरस अब कैसे पैर पसारेगा.
इससे पहले ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो कह चुके हैं कि लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा. उनका कहना है कि कोरोना वायरस मामूली फ्लू है और इससे होने वाले मौतों को टाला नहीं जा सकता.
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फ्रांस
बीते 13 दिनों में पहली बार बीते चौबीस घंटों में फ्रांस में कोराना वायरस के कारण सौ से अधिक मौतें हुई हैं. देश में हाल में लॉकडाउन के नियमों में ढील देना शुरू किया है.
फ्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ले मेयर ने पहले कहा था कि लॉकडाउन के कारण देश की अर्थव्यवस्था में 11 फीसदी की गिरावट आ सकती है, हालांकि उनका कहना था कि उन्हें यकीन है कि स्थिति सामान्य होने के बाद देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर तेज़ गति से आगे बढ़ेगी.
ईरान
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि बीते चौबीस घंटों में दैश में कोरोना संक्रमण के 3,117 नए मामले दर्ज किए गए हैं.
मार्च के आख़िर में ईरान में कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़े थे लेकिन हाल में इसमें कमी आई थी, लेकिन अब एक बार फिर बड़ी संख्या में लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.
जर्मनी
जर्मनी के विदेश मंत्री हीको मास ने कहा है कि यूरोप के देशों से यात्रा के बारे में दी गई चेतावनी बुधवार को हटा ली जाएगी, हालांकि दुनिया के दूसरे देशों से यात्रा से जी चेतावनी लागू रहेगा.
विदेश मंत्री का कहना है कि यूरोपीय संघ और इसमें शामिल देशों के लिए जो चेतावनी जारी की गई थी उसे अब यात्रा सलाह में बदल दिया जाएगा जिसमें यात्रियों को हर देश की स्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी.
ब्राज़ील में रिकॉर्ड मौतें, ख़तरे में आदिवासी
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ब्राज़ील में एक बार फिर, 24 घंटे में कोरोना संक्रमण से रिकॉर्ड मौतें दर्ज हुई हैं और अब यहाँ मरने वालों की तादाद तीस हज़ार को पार कर गई है.
पैन अमेरिकन हेल्थ आर्गेनाइज़ेशन का कहना है कि सरकार अभी भी वायरस को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है. पीएचओ ने सरकार को चेताया है कि वायरस को रोकने के लिए लागू प्रतिबंधों में ढील न दी जाए.
पीएएचओ ने कहा है कि वह ब्राज़ील के मूलनिवासियों के सामने पैदा हुए ख़तरे को लेकर चिंतित है.
संस्था ने कहा है कि आदिवासियी समुदायों की बेहतर निगरानी की जाए.
संस्था ने ये भी कहा है कि अमेज़न क्षेत्र में अवैध खनन भी आदिवासियों के लिए वायरस का ख़तरा बढ़ा सकता है.
ब्राज़ील के सबसे बड़े आदिवासी समुदायों में से एक यानोमामी के कई सदस्यों की मौत के बाद खनिकों को हटाने की मांग की गई है.
यानोमामी समुदाय के लोग चाहते हैं कि उनके प्रवास के इलाक़े से बाहरी लोग दूर रहें.
बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के सामने मुश्किल हालात
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बांग्लादेश में दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी कैंप में लोग जानते थे कि ये ख़बर आएगी लेकिन वो उसे लेकर डरे हुए थे.
एक 71 वर्षीय व्यक्ति रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में कोविड-19 से जान गंवाने वाला पहला व्यक्ति बन गया है.
इस कैंप में अब तक कम से कम 29 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.
महीनों से ये शरणार्थी कैंप लॉकडाउन में है. सिर्फ़ आपात सेवाओं में लगे लोगों को ही यहां से बाहर जाने या यहां आने की अनुमति है.
लेकिन तमाम सावधानियों के बावजूद क़रीब दस लाख की आबादी वाले इस शरणार्थी कैंप में सोशल डिस्टेंस बनाए रखना मुश्किल है.
म्यांमार से जान बचाकर भागे रोहिंग्या लोग यहां बेहद घनी आबादी में रहते हैं.
बांग्लादेश ने इस कैंप में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा रखा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की अपील के बावजूद यहां इंटरनेट नहीं चालू किया गया है.
महामारी के वक़्त इंटरनेट बीमारी के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचाने का अहम जरिया है.
यहां साबुन और साफ़ पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं.
महामारी से निबटने के लिए यहां सरकार ने सैकड़ों आइसोलेशन बेड तैयार किए हैं. लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं बेहद साधारण ही हैं.
गंभीर मरीज़ों के लिए कैंप में कोई वेंटीलेटर उपलब्ध नहीं है. हालत बिगड़ने पर लोगों को नज़दीक के कॉक्स बाज़ार क़स्बे ले जाया जाता है, लेकिन वहां भी बहुत सुविधाएं नहीं है.
शुरुआत में चीन से WHO को नहीं मिली जानकारी
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एसोसिएटेड प्रेस की एक जाँच में दावा किया गया है कि कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बीमारी के बारे में चीन से अहम जानकारियां हासिल करने में संघर्ष कर रहा था.
आंतरिक बैठकों की रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि अधिकारी चीन की ओर से धीमी गति से मिल रही जानकारियों के बारे में शिक़ायत कर रहे थे.
हालांकि इसके उलट, उस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन की बीमारी से निबटने की तैयारी की तारीफ़ कर रहा था.
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